अँधियारी गई कि चोर
न कहीं अंधियारी गई है और न कहीं चोर ही गया है अर्थात अँधियारी रात आने पर चोर चोरी करने निकलेगा ही
आ बला गले लग
मुसीबत को आमंत्रित करना, मुफ़्त का झगड़ा या मुसीबत मोल लेने के अवसर पर प्रयुक्त
आ बला गले पड़
मुफ़्त का झगड़ा या मुसीबत मोल लेने के अवसर पर प्रयुक्त
आ बुआ लड़ें
बिना कारण के झगड़ा उठाने और छेड़छाड़ के अवसर पर प्रयुक्त, लड़ाई के तत्पर
आ पड़ोसन लड़
बिना कारण के झगड़ा उठाने और छेड़छाड़ के अवसर पर प्रयुक्त
आ पड़ोसन लड़ें
बिना कारण के झगड़ा उठाने और छेड़छाड़ के अवसर पर प्रयुक्त, लड़ाई के तत्पर
आ पड़ोसन मुझ सी हो
अपनी तरह अन्य लोगों के लिए भी मुसीबत या बुराई चाहने के अवसर पर प्रयुक्त
आए आम जाए लबेदा
किसी न किसी तरह मतलब प्रप्त होना चाहिए कुछ ही क्यों न ख़र्च हो जाए
आए बीर भागे बीर
अच्छे और भले लोगों के सामने बुरे और ख़राब लोगों की कुछ नहीं चलती हमेशा भाग खड़े होते हैं
आए तो जाए कहाँ
अत्यधिक क्रोध में भर गया, ऐसा उलझा कि जान छुड़ाने में कठिनाई हो गई
आई गई पार पड़ी
जो बात हो चुकी अब उस का चर्चा करना बेकार है, जो हो चुका सो हो चुका उसकी चिंता व्यर्थ है
आईना ले के मुँह तो देखो
तुम इसके योग्य नहीं कि यह काम पूरा कर सको, तुम्हारे पास इतनी योग्यता नहीं, तुम इसके पात्र नहीं
आँधर कुकर से बतासे भौंके
अंधा कुत्ता हवा की सनसनाहट सुन कर भौंकने लगता है, व्यर्थ काम करने वाले व्यक्ति के संबंध में प्रयुक्त
आँख बचे का चाँटा
लड़कों में एक किस्म की शर्त बदी जाती है जो जिसे बेख़बर देखे तड़ से चाँटा मारे
आँख की बुराई भवों से
किसी के दोष या बुराई की चर्चा या उसकी उलाहना उसके प्रिय या मित्र के सामने करने की क्रिया
आँख न नाक बन्नो चाँद सी
(व्यंग्यात्मक) उस बदसूरत के लिए प्रयुक्त जो स्वयं को सुंदर समझे, पर्यायवाची: चीज़ या बात अच्छी है मगर जो विशेष गुण होना चाहिए वह नहीं है
आँसुओं से प्यास नहीं बुझती
जब किसी को कोई वस्तु इतनी कम मिले कि उससे तृप्ति न हो तब कहते हैं, कंजूसी से काम लिया जाए तब भी कह सकते हैं
आँवल नाल गड़ी है
जन्म स्थान से चूँकि प्रेम होता है इसलिये ऐसे व्यक्ति को जिसे किसी जगह से प्रेम हो ये कहते हैं कि वहाँ क्या तुम्हारी आँवल नाल गड़ी है
आओ देखा न ताओ
उचित समय नहीं देखना, जा बेजा नहीं देखा, यह उस अवसर पर कहते हैं जब कोई जल्दी से अनुचित कोई कार्य कर ले या कोई बात कह दे
आदम आया दम आया
आदमी के आने से साहस बढ़ जाता है, आदमी के पैदा होते ही दम आना शुरू हो जाता है अर्थात साँस आने लगती है
आध पाव आटा चौबारे रसोई
उस व्यक्ति के संबंध में कहते है जिसका सामर्थ्य बहुत कम हो और बहुत शेख़ी बघारे या डींग मारे
आधे माघे कमली काँधे
हर चीज़ अपनी उचित समय के बाद बेकार हो जाती है, समय बीतने पर हर चीज़ का उद्देश्य कम होता रहता है
आधे में मुल्ला मौज आधे में सारी फ़ौज
उस व्यक्ति के संबंध में कहते हैं जो अपने को सब से बढ़ चढ़ कर समझे और बड़े भाग का अधिकारी जाने (कहा जाता है कि एक क़ाज़ी क़ुदवा नाम के सत्तर या चौरासी बेटे थे, इस लिए अतिश्योक्ति के तौर पर ये उदाहरण प्रसिद्ध हो गई कि आधे हैं कुल मानव की संतान और आधे में क़ाज़ी क़ुदवा की संतान)
आधे क़ाज़ी क़ुदवा और आधे बावा-आदम
उस व्यक्ति के संबंध में कहते हैं जो अपने को सब से बढ़ चढ़ कर समझे और बड़े भाग का अधिकारी जाने (कहा जाता है कि एक क़ाज़ी क़ुदवा नाम के सत्तर या चौरासी बेटे थे, इस लिए अतिश्योक्ति के तौर पर ये उदाहरण प्रसिद्ध हो गई कि आधे हैं कुल मानव की संतान और आधे में क़ाज़ी क़ुदवा की संतान)
आधी रात और घर का परोसने वाला
(शाब्दिक) आधी रात का वक़्त हो और बाँटने वाला अपना तो फिर क्यों न फ़ायदा हो, (अर्थात) ख़ूब फ़ायदा उठाओ, कोई पूछगछ करने वाला नहीं (लाभ उठाने की जगह प्रयुक्त)
आदमी की दवा आदमी है
मनुष्य का मन मनुष्य से बहलता है, कितना ही दुख और पीड़ा हो चार आदमियों में बैठकर मन बहल जाता है
आदमी की कसौटी मु'आमला है
आदमी की अच्छाई बुराई संपर्क में आने से मालूम होती है या मामला पड़ने से आदमी की पहचान या परख होती है, काम पड़ने पर ही मनुष्य की परीक्षा होती है
आदमी को ढाई गज़ ज़मीन काफ़ी है
बहुत बड़ा भवन बनाने या लम्बी-चौड़ी ज़मीन प्राप्त करने का प्रयास करना व्यर्थ है, महल या घर बनाना या भूमि खरीदना व्यर्थ है
आदमी ने कच्चा दूध पिया है
मनुष्य विस्मृति से मुक्त नहीं, मनुष्य का स्वभाव त्रुटिपूर्ण है (जब किसी व्यक्ति से उसकी गरिमा के विरूध्द कोई बात हो तो उसकी क्षमायाचना में प्रयुक्त)
आदमी पेट का कुत्ता है
भोजन की खोज में आदमी जगह जगह दौड़ता-फिरता है और हर योग्य और अयोग्य की बात को मान लेता है
आदमी सा पखेरू कोई नहीं
जब कोई व्यक्ति थोड़े ही दिनों में बार-बार यात्रा कर के विभिन्न स्थानें पर पहुँचे तब कहते हैं
आफ़ताब आमद दलील-ए-आफ़ताब
सूरज के अस्तित्व के लिए प्रमाण की आवश्यकता नहीं, उसकी रौशनी ख़ुद ही प्रमाण है, ऐसी बात जिसके लिए प्रमाण की ज़रूरत न हो, साफ़ और स्पष्ट बात है
आग और रूई का क्या साथ
एक दूसरे के विरुद्ध स्वभाव वालों की मित्रता विश्वास पात्र नहीं, शत्रुओं का क्या मेल-मिलाप
आग और रूई क्या दोस्ती
एक दूसरे विरुद्ध स्वभाव वालों की मित्रता विश्वास पात्र नहीं, शत्रुओं का क्या मेल-मिलाप
आग कहते मुँह नहीं जलता
बरी चीज़ का नाम लेने से बुराई का असर होता है, बगै़र गुनाह किए फ़क़त ज़बानी कहने से आदमी मुजरिम नहीं होता(फ़ारसी : फे़अल कुफ्र नबाशिद), उर्दू में मुस्तामल
आग खाए मुँह जले उधार खाए पेट
आग खाने से केवल मुँह जलता है, लेकिन आग से ज़्यादा ऋृण से डरना चाहिए, क्योंकि आग की जलन बाहरी शरीर तक ही सीमित होती है और ऋृण की पीड़ा से मन जल जाता है, ऋृण लेना आग से जलने से भी अधिक कष्टकारी होता है।
आग लगाए तमाशा देखे
उस अवसर पर बोलते हैं जब किसी के बारे में यह दिखाना हो वह झगड़ा-लड़ाई करवा कर उस तमाशे को देखता है
आग लगे पर पानी कहाँ
क्रोध के समय दया और प्रेम एवं उद्देश्य या इच्छा के समय शर्म एवं लाज नहीं रहती
आग में मूतो या मुसलमान बनो
दो हानिकारक या धर्म के विरुद्ध बातों में से हठपूर्वक एक बात पर प्रसन्न करना, ऐसा काम लेना जिसमें ऐसे भी ख़राबी हो और वैसे भी ख़राबी
आग रुई की क्या दोस्ती
दो विपरीत स्वभावों के बीच मित्रता नहीं हो सकती, दो जानी दुश्मनों का मिलाप नहीं हो सकता
आगे आगे गुरू पीछे पीछे चेला
जहाँ कोई अच्छे बुरे काम में किसी के बुज़ुर्ग या प्रियजन या दोस्त का अनुसरण करता है, तो कहते हैं कि आगे-आगे गुरु पीछे-पीछे चेला, यानी अगर उनके बुज़ुर्ग ऐसा करते हैं तो वे क्यों नहीं ऐसा करें
आगे दौड़ पीछे
एक काम ख़त्म नहीं हुआ कि लालच में दूसरा शुरू कर दिया, व्यर्थ लालच के लिए प्रयुक्त
आगे दौड़ पीछे छोड़
पिछला याद नहीं आगे पढ़ता जाता है, एक काम को अधूरा छोड़ कर दूसरे को करना
आज आज का बिच्छू कल का साँप
जो अब थोड़ा हानि पहुँचा सकता है वह आने वाले कल में अधिक हानि भी पहुँचा सकता है, यह बच्चु मियाँ नहीं बिच्छू मियाँ है
आज गए कल आए
कुछ दिनों की बात है, ज़्यादा वक़्त नहीं लगा या नहीं लगता, चंद रोज़ की बात है, जल्द वापस आने के अवसर पर पर्युक्त
आज है सो कल नहीं
दिन प्रतिदिन बरबादी है, बुरा समय आता जाता है, संसार परिवर्तनशील है, जो स्थिति आज है वह कल नहीं होगी
आज क्या जाती दुनिया देखी
निकट होने या रहने के अतिरिक्त वर्षों में मिलने और चेहरा दिखाने वाले व्यक्ति के लिए निंदा के तौर पर प्रयुक्त
आज मैं, कल तू
जो हाल आज मेरा है वही कल तेरा होगा, समय एक जैसा नहीं रहता, एक न एक दिन सब पर विपत्ति आती है
आज से कल नज़दीक है
आगामी युग को दूर समझ कर अच्छे कामों में सुस्ती और आलस्य नहीं करना चाहिए
आज ज़बान खुली है कल बंद है
जीवन का भरोसा नहीं अभी भले चंगे थे और अभी चल बसे (सीख दिलाने, जीवन पर भरोसा न करने और सच्चाई का विश्वास दिलाने के अवसर पर प्रयुकत)
आला दे निवाला
उस मौक़े पर बोलते हैं जहाँ कोई ओछी प्रवृत्ति का व्यक्ति उच्च स्थिति को पहुँचे मगर स्वाभाविक बुद्धि उसकी न जाए
आम इमली भेंट हो गई
दो ऐसे व्यक्तियों में संयोगवश मुलाक़ात हो जाना जो एक दूसरों से मिलना न चाहते हों
आम मछली की भेंट हो ही जाती है
जब कोई किसी को नुक़्सान पहुँचा कर चल देता है तो नुक़्सान उठाने वाला कहता है कि 'आम मछली का क्या साथ न होगा ' मलतब फिर कभी मुलाक़ात तो होगी उस वक़्त समझ लूँगा, अगर आज हम को नुक़्सान पहुँचा दिया है तो कभी हम को भी अपना बदला लेने का मौक़ा मिल ही जाएगा (चूँकि मछली पकाने में आम की खटाई दी जाती है इस वजह से आम मछली का साथ कहा गया
आम मछली का साथ है
बहुत मित्रता है, एक दूजे के लिए बहुत आवश्यक हैं, अच्छा जोड़ मिला है
आमदनी के सर सेहरा है
आमदनी ही से सारा ठाठ ठीक होता है, सुख और आराम आय पर निर्भर होता है, आय न हो तो कुछ न हो, जिसके पास पैसा है वही बड़ा आदमी है
आना दाल उल्लू भी है
اچھائیوں کے ساتھ برائیاں بھی ہیں، ایک سپاہی نے قرضے میں ایک بنئے کو الو یہ کہہ کر لگا دیا کہ یہ باز ہے، اسے بعد میں معلوم ہوا، تو اسے دکان میں رکھ چھوڑا کہ شاید کوئی خرید لے، کوئی دریافت کرتا کہ دکان میں کیا کیا ہے، تو وہ یہ فقرہ کہہ دیتا
आप भले अपना घर भला
अपना घर स्वर्ग है, लोगों से मेल जोल रखने की निंदा और अलग थलग जीवन बसर करने की प्रशंसा के अवसर पर प्रयुक्त
आप जानें और आप का काम
मैम समझा चूका आप स्वयं अच्छे भले के लिए उत्तरदायी हैं, समझाने की हद हो गई अब जैसा आपके मन में आऐ कीजिए (कार्य से छुटकारा होने के अवसर पर प्रयुक्त)
आप जानें का काम
मैं सावधान कर चुका अब आप स्वंय भले-बुरे के उत्तरदायी हैं, समझाने की हद हो गई अब जैसा आप के मन में आए कीजिए (काम के उत्तदायित्व से मुक्त होने के अवसर पर प्रयुक्त)
आप काज महा काज
अपना कार्य जितना अच्छा अपने हाथ से होता है उतना दूसरे के हाथ से नहीं होता, अपना काम स्वयं ही करने से ठीक होता है
आप काज, महा काज
स्वयं का कार्य दूसरों के कार्य से पहले होता है, प्रत्येक व्यक्ति पहले अपना कार्य करता है, फिर दूसरों का
आप मूए तो जग मुवा
स्वयं मर गये तो कहिये कुल दुनिया मुर गई किसी बात से कुछ उद्देश्य नहीं
आप रूप महारूप
ईश्वर की अभिव्यक्ति सभी अभिव्यक्तियों में प्रमुख है, मनुष्य पर्दे के पीछे दैवीय अभिव्यक्ति का प्रकटीकरण है
आप से आए तो आने दो
जो वस्तु स्वयं से या बिना माँगे मिले ले लेनी चाहिए, इस अवसर पर प्रयोग जहाँ किसी का माल बिना प्रयत्न के हाथ लगे और लेने वाला लालच से लेने का निश्चय करे
आप से अच्छा ख़ुदा
स्वयं से अधिक प्रिय ईश्वर को छोड़कर कोई नहीं, स्वयं ही सबसे प्रिय होती है
आप से गया जग से गया
जो वस्तु अपने हाथ से गई वह मानो संसार में नहीं रही, उसकी परवाह या दुख नहीं होना चाहिए
आप से ख़ूब ख़ुदा
अपने अस्तित्व से अधिक प्रिय ईश्वर के अतिरिक्त कोई नहीं, अपना अस्तित्व सब से अधिक प्रिय होता है
आप ज़िंदम जहान ज़िंदम
(अवामी) लोग अपने फ़ायदे या आराम को दूसरों के फ़ायदे या आराम से ऊपर रखते हैं (स्वार्थी व्यक्ति के बारे में प्रयुक्त)
आसा मरे निरासा जिए
प्रतीक्षा करने वाले का जीवन प्रतीक्षा के सदमे से कड़वा हो जाता है इस से तो प्रतीक्षा ना करने वाला अच्छा कि उस को प्रतीक्षा का सदमा नहीं उठाना पड़ता
आश्नाई मुल्ला ता-सबक़
ग़रज़ निकल जाने के बाद बेताल्लुक़ी, उस शख़्स के लिए बोला जाता है जो मतलब पूरा होने के बाद अजनबी बन जाए
आसमान का थूका मुँह पर आता है
उच्च स्तर पर किसी भी प्रकार का हमला करने से निम्न स्तर की अपमान होती है, पवित्र को बदनाम करने वाला ख़ुद ही बदनाम होता है
आसमान पर चाँद निकला सब ने देखा
उस अवसर पर प्रयुक्त है जहां यह कहना हो कि यह कोई ढकी छिपी बात नहीं, इस बात से सब अवगत हैं, इस मुद्दे को छिपाया नहीं जा सकता
आसमान से गिरा बबूल में अटका
एस समस्या से निकलते ही दूसरे समस्या में फँस गया, एक मुसीबत से निकलते ही दूसरे मुसीबत में फँस गया, एक रुकावट दूर हुई थी कि दूसरी रुकावट घटित होगई
आता आओ जाता जाओ
(आने जाने वाले पर) कोई प्रतिबंध नहीं, कोई रोक-टोक नहीं, कोई परवाह नहीं आए या जाए
आटा दाल उल्लू भी है
अच्छाइयों के साथ बुराइयां भी हैं, अच्छी चीज़ों के साथ-साथ बुरी चीज़ें भी हैं
आटा कठौती में
मतलबी आदमी के मुताल्लिक़ कहते हैं जिसे हर वक़्त अपने मतलब की सूझती है
आठ बार नौ त्योहार
हिंदुओं में त्यौहार बहुत होते हैं, हर महीने दो-चार व्रत या त्यौहार पड़ जाते हैं, उस पर भी यह कहावत कही जाती है
आती बहू जनम्ता पूत
पत्नी के आने पर और पुत्र का जन्म होने पर उनकी शिक्षा और प्रशिक्षण प्रारंभ कर देनी चाहिए
आती भली कि जाती
थोड़ी चीज का न मिलने से मिलना और न लेने से लेना अधिक अच्छा है
आव देखा न ताव
بے محل، بے موقع، جلدی سے، بے سوچے سمجھے، بےسمجھے بوجھے
अब की बचे तो घर घर नचे
अगर नर्द एक घर बचे तो बाज़ी जीत ली, ख़ानदान में एक व्यक्ति के क़ाबिल होने से सब को फ़ायदा होता है
अच्छे-बुरे में चार अँगुल का फ़र्क़ है
आँख और कान में अर्थात देखने और सुनने में केवल चार अँगुल का अंतर है, कान की सुनी हुई बात सही भी हो सकती है और ग़लत भी इस लिए जब तक किसी बात को स्वयं अपनी आँख से देख न लें तब तक केवल सुनकर उस पर विश्वास न करें
अच्छी भई गुड़ सत्तरह सेर
जब कोई वस्तु बहुत सस्ती या आसानी से मिल रही हो तब कहा जाता है कि बहुत अच्छा है, लूटो खाओ, मौज उड़ाओ
अच्छे घर बै'आना दिया
जब कोई अपने से अधिक बलवान के साथ झगड़ बैठे और उलझन में पड़ जाए तब यह कहावत कहते हैं
अध-जल गगरी छलकत जाए
ख़ाली बर्तन बहुत आवाज़ करते हैं, ओछा आदमी थोड़ा सा सक्षम होने पर इतराने लगता है
अघन चूल्हे अधन
: अघिनि के महीने में दिन इतना छोटा होता है कि अधिन गर्म होते होते तमाम होजाता है
अगला लीपा दे बहा अब लीपा आगे ला
पिछला उपकार भुला कर नए उपकार की इच्छा, जब कोई व्यक्ति गुज़रे उपकारों पर मिट्टी डाल कर नए उपकार चाहता है तो इस स्थान पर स्त्रियाँ व्यंग के रूप में कहती हैं कि ये तो वही उदाहरण हुआ कि अगला लीपा दे बहा अब लीपा आगे ला
अगले पानी पिछले कीच
काम में शीघ्रता करने वाले लाभ में रहते हैं, पहले को पानी पिछले को कीचड़, जो समय पर पहुँच जाता है वही मज़े में रहता है
ऐसी बहू सयानी जो पैंचा माँगे पानी
बहू ऐसी होशियार है कि पानी भी माँगती है तो उधार (इसलिए कि दूसरे लोग उससे कभी कोई वस्तु मुफ़्त में न माँगे और यदि माँगें भी तो तुरंत लौटा दिया करें)
अजगर के दाता राम
ईश्वर सब को भोजन देता है, ईश्वर अजगर जैसे प्राणी को भी भोजन देता है जो एक स्थान पर अचल हो कर पड़ा रहता है
अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता
अकेला कोशिश करने वाला किसी मुश्किल काम को जो कई आदमियों के करने का हो नहीं कर सकता, बहुत से लोगों के करने का काम एक आदमी नहीं कर सकता
अकेला चना क्या भाड़ फोड़ेगा
अकेला कोशिश करने वाला किसी मुश्किल काम को जो कई आदमियों के करने का हो नहीं कर सकता, बहुत से लोगों के करने का काम एक आदमी नहीं कर सकता
अकेला हुस्नो रोए कि क़ब्र खोदे
अकेला व्यक्ति जिस पर मुसीबत के समय में कई कई ज़िम्मेदारियाँ हूँ वह किस किस काम को सँभाले (उस अवसर पर प्रयुक्त है जब कि मुसीबत और परेशानी की स्थिति में काम अत्यधिक आएँ और सँभालने वाला अकेला हो
अकेले चलिये न बाट झाड़ बैठिये खाट
(शाब्दिक) अकेले सफ़र नहीं करना चाहिए और पलंग को हमेशा झाड़कर उस पर बैठना चाहिए, (अर्थात) सफ़र हो चाहे हज़र दोनों स्थितियों में सावधानी से काम करना चाहिए
अल जाऊँ बल जाऊँ जल्वे के वक़्त टल जाऊँ
(लफ़ज़न) सदक़े हो जाऊं क़ुर्बान हो जाऊं लेकिन रूनुमाई के वक़्त (जब कि कुछ देना पड़ता है) मौक़ा से हिट जाऊं, (मुरादन) ज़बानी मुहब्बत जताते हैं मगर वक़्त पर काम नहीं आते
अलख पुरुष की माया कहीं धूप कहीं साया
ख़ुदा की शान है, कहीं धूप है कहीं छाँव, ख़ुदा की क़ुदरत स्पष्ट करने के लिए दो विपरीत वस्तुएँ ली गई हैं, कोई धनवान है तो कोई निर्धन, कोई दुखी है तो को सुखी आदि
अन मिली की कुसल है
दुश्मन से मुक़ाबला नहीं हुआ इस वास्ते बच गए, दुश्मन के सामने नहीं होना चाहिए इसी में बचाव है
अंधा चूहा थोथे धान
जो जिस वस्तु के योग्य होता है उसे वही वस्तु मिलती है, वह उसी से संतुष्ट हो जाता है
अंधा दोज़ख़ी बहरा बहिश्ती
अंधे को दूसरों की तरफ से बेईमानी का शंका रहता है और बहरा अपनी और दूसरों की बुराई सुनने के पाप से बचा रहता है
अंधा जिया बुरे हालों
अंधे की ज़िंदगी बुरे हाल में कटती है, (इसका प्रयोग तब किया जाता है जब किसी के साधन सीमित होते हैं और गुज़रा करना मुश्किल होता है)
अंधा क्या जाने बसंत की बहार
जो किसी चीज़ की वास्तिकता के बारे में न जानता हो वह उस की क्या क़द्र कर सकता है, जिसे किसी बात का अनुभव न हो वह उस के बारे में क्या कह सकता है
अंधा माँगे दो आँखें
मनुष्य वही चाहता है जो उसे चाहिए, जिसे जिस वस्तु की आवश्यकता हो वह उसी की चिंता करता है
अंधा न्योते दो जने आएँ
अंधे को बुलाऐं तो दूसरा इस के साथ पहुंचाने के लिए आता है, इस मौक़ा पर मुस्तामल जब एक को कुछ दें तो दूसरे को भी देना पड़े, एक का लिहाज़ करें तो दूसरे का भी लिहाज़ करना पड़ जाये
अंधा राजा चौपट राज
ऐसी जगह के प्रति कहते हैं जहाँ शासक की लापरवाही या मूर्खता से हर तरफ़ ज़ुल्म लूट मार और सार्वजनिक कुव्यवस्था का प्रचलन हो
अंधे के हाथ बटेर लगी
कोई वस्तु संयोग से या आशा के विपरीत हाथ आ गई, कम-हौसला को उसकी गुणवत्ता से अधिक मिल गया
अंधे के हिसाब दिन-रात बराबर
मूर्ख भले-बुरे में अंतर नहीं कर सकता, मंद-बुद्धि को अच्छे-बुरे के अंतर का ज्ञान नहीं होता क्यूँकि उसे कुछ दिखाई नहीं देता
अंधेर नगरी चौपट राजा
ऐसी जगह के प्रति कहते हैं जहाँ शासक की लापरवाही या मूर्खता से प्रत्येक ओर अत्याचार, लूट मार और सार्वजनिक कुव्यवस्था का प्रचलन हो
अंधी नगरी चौपट राज
ऐसी जगह के प्रति कहते हैं जहाँ शासक की लापरवाही या मूर्खता से प्रत्येक ओर अत्याचार, लूट मार और सार्वजनिक कुव्यवस्था का प्रचलन हो
अंधी पीसे कुत्ता खाए
इस कहावत का प्रयोग उस समय होता है जब कोई अपने परिश्रम से बनाई गई किसी वस्तु का स्वयं उपयोग न कर सके और दूसरे उसका मज़ा लूटें
अंधों में काना राजा
मूर्खों में कम बुद्धि वाला भी बुद्धिमान समझा जाता है, निर्गुणों में कम गुण वाले ही का बहुत सम्मान होता है
अंधाें ने बाज़ार लूटा
ऐसा काम किया जो संभव न था, ऐसी बात की जो अनहोनी थी (किसी से न हो सकने वाली बात के हो जाने पर आश्चर्यचकित होने की जगह)
अन-होत में औलाद
ग़रीबी में बहुत से बच्चे का होना, निर्धन बहुत संतान वाला होता है, ग़रीबी में बहुत संतान का होना अखरता है
अनी की टली हज़ार बरस
परेशानी कुछ समय के लिए टालना कभी कभी संतोष योग्य होता है, जान बच जाये तो समझो हज़ार वर्ष की ज़िंदगी मिली
अंत भला सो भला
सब बातों को सोच कर अंत में जिस निर्णय पर पहुँचा जाए उसे ही ठीक मानना चाहिए
अंत बुरे का बुरा
बुरे काम का परिणाम बुरा होता है, बुरे व्यक्ति को दंडित अवश्य किया जाता है
अपना भात पराए हाथ
अपना माल दूसरे के हवाले करना या अपनी दौलत दूसरे के लिए छोड़ जाने के मौक़ा पर प्रयुक्त
अपना भी ख़ुदा है
कोई साथ दे या न दे कोई हरज नहीं, ख़ुदा हमारा मालिक और मददगार है, (सब की तरफ़ से मायूस होने के मौक़ा पर प्रयुक्त)
अपना हाथ जगन नाथ
स्वायत्तता बहुत बड़ी बात है, अधिकार दूसरे की अतिरिक्त अपने पास होना अच्छा है
अपना लेना क्या, पराया देना क्या
बेईमान क़र्ज़ लेकर वापस न करने वाले के लिए उपहास के तौर पर प्रयुक्त है अर्थात जो आदमी लेन-देन के संबंध में लापरवाह हो उस के प्रति कहते हैं
अपना मकान कोट समाँ
अपने घर की हैसियत क़िले की सी होती है जिसमें इंसान ख़ुद को ज़्यादा सुरक्षित महसूस करता है
अपना पूत और पराया ढींगर
अपनी हर वस्तु प्यारी होती है और दूसरे की ख़राब, अपने बच्चे को कम-आयु और दूसरे के उसी आयु के बच्चे को जवान समझते हो
अपना रख पराया चख
अपना माल रखना दूसरे का माल ख़र्च करना, अपनी वस्तु सुरक्षित रखना एवं दूसरे की वस्तु का उपयोग करना
अपना तोशा अपना भरोसा
अपने परिश्रम और कमाई का सहारा है, अपने व्यक्तित्व और अपनी क्षमता पर विश्वास किया जा सकता है
अपने घर में कुत्ता शेर है
अपने क्षेत्र में हर व्यक्ति की बहादुरी और साहस बढ़ जाता है, समर्थन मिलने पर कायर भी बहादुर हो जाता है (ऐसे व्यक्ति के लिए बोलते हैं जो दूसरे की हिमायत के बल पर धमकाए या ऐंठे
अपने किये को भुगतना
अपने कर्माें की सज़ा पाना, जैसा करना वैसा भरना, जैसा किया वैसा भुगतो, कोई उसमें क्या करे
अपने मूए राम नहीं
जब ख़ुद मर गए तो फिर किसी ज़ंद, के अंजाम की क्या फ़िक्र, अपनी मौत के बाद ज़िन्दों का हश्र जो हो सौ हो, मुतरादिफ़: अज़ सरमन कुन फ़ैकूँ शुद शुद बा शुद
अपनी गली में कुत्ता भी शेर होता है
अपने क्षेत्र में हर व्यक्ति की बहादुरी और साहस बढ़ जाता है, समर्थन मिलने पर कायर भी बहादुर हो जाता है (ऐसे व्यक्ति के लिए बोलते हैं जो दूसरे की हिमायत के बल पर धमकाए या ऐंठे
अपनी ग़रज़ बावली
किसी उद्देश्य के पीछे आदमी पागल सा बन जाना है, स्वार्थ आदमी को विवश कर देता है
अपनी करनी अपनी भरनी
जो जैसा करेगा वैसा पाएगा, अच्छे कर्मों का फल मिलेगा और बुरे कर्मों की सज़ा मिलेगी
अपनी मूँछ मुँडा दूँ
पराजय स्वीकार लेना (अपनी बात पर ज़ोर देने के अवसर पर प्रयुक्त जब यह कहना हो कि अगर ऐसा न हो (या हो) तो मुझे मर्द न समझना)
अरंड की जड़ चाकरी
नौकरी का कोई भरोसा नहीं होता भगवान जाने कब छूट जुए (जैसे अरंड की जड़ जो इतनी कमज़ोर होती है कि ज़रा सी तेज़ हवा चली और पेड़ गिरा
अरहर की टट्टी गुजराती ताला
गुजराती ताला बहुत मज़बूत होता है और अरहर की टट्टी बहुत कमज़ोर होती है उसको ताला लगाना बेकार है क्यूँकि चोर उसे आसानी से हटा सकता है
अर्ज़ां-ब-'इल्लत
चीज़ अगर सस्ती है उसमें ज़रूर कुछ न कुछ ख़राबी होगी (कभी इसके साथ गिराँ बहिकमत भी कहा जाता है)
अशर्फ़ियाँ लुटीं और कोयलों पर मुहर
बड़े बड़े ख़र्च होते हैं और थोड़ी-थोड़ी सी बातों में कृपणता से काम लिया जाये (उस व्यक्ति के संबंध में बोलते हैं जो यूँ तो हज़ारों रुपए लुटा दे मगर कुछ अनीवार्य अवसरों में कंजूसी से काम ले)
असील घोड़े को चाबुक की ज़रूरत नहीं
जिस तरह अच्छे घोड़े को मारने की ज़रूरत नहीं पड़ती, इसी तरह अच्छे लड़के को पढ़ने के लिए अच्छे आदमी को काम के लिए डाँट-डपट करने की ज़रूरत नहीं पड़ती
अस्सी साई असे बधाई
एक व्यक्ति का उम्मीद दिला कर दूसरे से मामला कर लेने के अवसर पर प्रयुक्त
अस्सी-लुस्सी
बुढ़ापे में निर्बलता और कमज़ोरी अवश्यंभावी है, बूढ़े आदमी की आंतरिक गर्मी बहुत कम और नमी अधिक होती है
अटल है
अपनी बात से नहीं फिरता, अपनी जगह से नहीं हटता
अटका बनिया सौदा दे
अटका हुआ बनिया सौदा इसलिए देता है कि पिछला उधार वसूल करने का अन्य कोई उपाय उसके पास नहीं होता
औलाद की आँच बुरी होती है
औलाद की मोहब्बत आदमी को बेचैन कर देती है, औलाद के लिए इंसान हर क़िस्म की तकलीफ़ बर्दाश्त करता है