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सुकून-ए-क़ल्ब

दिल का इतमीनान, दिल की शांति, आराम, सहायता, चैन और सुख

ख़िल्क़िय्या

प्राकृतिक, फ़ित्री

खिस्यानी बिल्ली खम्बा नोचे

जिसे क्रोध आ रहा हो वह अपनी खीझ या क्रोध दूसरों पर उतारता है, लाचारी में आदमी दूसरों पर क्रोध करता है, लज्जित व्यक्ति दूसरों पर अपनी लज्जा उतारता है, निर्बल की खीझ

सुरूर

मन-मस्तिष्क की शांति या सुकून प्रदान करने वाली अवस्था, ख़ुशी, आनंद, प्रसन्नता, मस्ती, तन्मयता

बे-हिजाबी

बेे-पर्दा होना, बेपर्दगी, घूँघट उठा देना, खुलेबंदों फिरना (स्त्री का)

शरीक-ए-हयात

ज़िंदगी का दोस्त या साथी, अर्थात: जीवनसंगिनी, पत्नी, भार्या, पति

मशवरत

आपस में सोच विचार एवं सलाह या राय का आदान-प्रदान करना, सलाह, मशवरा, परस्पर सुझाव

सितमगर

(प्रायः कविता में) प्रेमिका, माशूक़, महबूब

कोशिश

कोई काम करने के लिए विशेष रूप से किया जानेवाला प्रयत्न, मेहनत, दौड़ धूप, प्रयत्न, प्रयास, चेष्टा, उद्योग, श्रम, उद्यम, उपाय, परिश्रम

बे-नियाज़

जिसे किसी से कुछ लेने की इच्छा न हो निःस्पृह, स्वच्छंद, आज़ाद, बेपरवाह

दीद के क़ाबिल

देखने के लायक़, देखने योग्य

क़ाबिल-ए-दीद

देखने लायक़, अच्छा दिखने वाला

आठ बार नौ त्योहार

सुख-सुविधा और आराम का शौक़ या लगन ऐसा बढ़ा हुआ है कि युग और समय उसको अल्प व्यय नहीं करने देता

चमनिस्तान

ऐसा बाग़ जहाँ फूल ही फूल हों, ऐसी जगह जहाँ दूर तक फूल ही फूल और हरा भरा नज़र आए, वाटिका, चमन, बाग़

'औरत

जाया, भार्या, पत्नी, जोरू

ताग़ूत

शैतान, अत्यन्त निर्दय और अत्याचारी व्यक्ति

मन-भावन

मन को भाने या अच्छा लगने वाला

दादरा

संगीत में एक प्रकार का चलता गाना (पक्के या शास्त्रीय गानों से भिन्न), एक प्रकार का गान, एक ताल

मज़दूर

शारीरिक श्रम के द्वारा जीविका कमाने वाला कोई व्यक्ति, जैसे: इमारत बनाने, कल-कारख़ानों में काम करने वाला, श्रमिक, कर्मकार, भृतक, मजूर

ख़ैर-अंदेश

भलाई की बात सोचने वाला, वह शख़्स जो किसी की भलाई चाहे, शुभचिंतक

मुहावरे

यह भारतीय मुहावरों का एक शब्दकोश है, जो रेख्ता फ़ाउंडेशन की एक पहल है। इसमें सदियों से प्रचलित पारंपरिक कहावतों और मुहावरों का एक मूल्यवान संग्रह शामिल है, जो भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति, समाज और दैनिक जीवन को प्रतिबिंबित करता है। यह शब्दकोश आलोचकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा भाषा और साहित्य के प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और विश्वसनीय संदर्भ स्रोत के रूप में कार्य करता है।

प्रमुख मुहावरे

मुहावरों की सूची

संबंधित परिणाम

अड़े दड़े क़ाज़ी के सर पड़े

मुसीबत किस की किस को उठाना पड़ा

अढ़ाई बकायन मियाँ बाग़ में , कानी हरम महल ख़ाने में

तुच्छ है, ओछा है, ज़मीन पर पाँव नहीं रखता (झूठे अथवा घटिया आदमी के डींग मारने के अवसर पर प्रयोग किया जाता है)

अढ़ाई दिन सक़्क़े ने भी बादशाहत की है

अस्थायी अथवा परिवर्तनशील शासन गर्व करने योग्य नहीं, समय-परिवर्तन से कभी तुच्छ व्यक्ति भी उच्च पद पर पहुँच जाता है

अढ़ाई हाथ की ककड़ी नौ हाथ का बीज

बच्चा तेज़ी और दुष्टता में माँ बाप से भी बढ़ा हुआ है

अड़ी दड़ी सब क़ाज़ी के सर पड़ी

कठिनाई में किसकी किसको उठाना पड़ी

अड़ी दड़ी क़ाज़ी के सर पड़ी

मुसीबत किस की किस को उठाना पड़ा

अड़ी धड़ी सब क़ाज़ी के सर पड़ी

पराई बला अपने सर पड़ी, दूसरे की परेशानी उठानी पड़ी, किसी काम की भलाई एवं बुराई मुख्य आदमी के सर आ कर पड़ती है

अड़ते से अड़ जाइए और चलते से चल दूर

लड़ने वाले से लड़ो और उपेक्षा करने वाले की उपेक्षा करो

अंधेरे घर में ढींगर नाचै

अंधेरे में हमेशा इस बात का डर लगा रहता है कि न जाने क्या हो, मन की भयाक्राँत अवस्था

अँधियारी गई कि चोर

न कहीं अंधियारी गई है और न कहीं चोर ही गया है अर्थात अँधियारी रात आने पर चोर चोरी करने निकलेगा ही

अँगूठे के बा'द छँगुलिया ही आती है

आमतौर पर छोटे ही बड़ों की अनुसरण करते हैं (जिस तरह नापने में जहाँ पहला अँगूठा रखते हैं बाद में वहीं छँगुलिया रखते हैं)

अँतड़ी में रूप और बुक़ची में छब

भोजन सुंदरता देता है और पोशाक सजावट देता है

आ बड़े बाप की बेटी है तो पंजा कर ले

अगर हिम्मत है तो मुक़ाबले में आ, अगर दा'वा है तो प्रमाण दे

आ बैल मुझे मार

मुसीबत को आमंत्रित करना

आ बला गले लग

मुसीबत को आमंत्रित करना, मुफ़्त का झगड़ा या मुसीबत मोल लेने के अवसर पर प्रयुक्त

आ बला गले पड़

मुफ़्त का झगड़ा या मुसीबत मोल लेने के अवसर पर प्रयुक्त

आ बला मुझे मार

मुसीबत को आमंत्रित करना

आ बनी सर पर आपने छोड़ पराई आस

अपनी समस्याओं का सामना स्वयं करें, दूसरों से मदद की उम्मीद न करें

आ बे सोंटे तेरी बारी कान छोड़ कनपटी मारी

किसी काम के करने में जब बार-बार असफलता होती है तो उस की अंतिम योजना के समय कहते हैं

आ बे सोटे तेरी बारी कान छोड़ कनपटी मारी

(بازاری زبان) آخری تدبیر ہونے کے موقع پر بولتے ہیں

आ बुआ लड़ें

बिना कारण के झगड़ा उठाने और छेड़छाड़ के अवसर पर प्रयुक्त, लड़ाई के तत्पर

आ दलिद्दर काँधे चढ़ बैठ

आलसी अर्थात् काम चोर के लिए प्रयुक्त जो स्वंय दरिद्रता फैलाता हो

आ गए बराती न ख़ुश्का न चपाती

कुप्रबंधन के लिए प्रयोग किया जाता है

आ पड़ोसन घर का भी ले जा

लाभ के स्थान पर हानि होने के अवसर पर प्रयुक्त

आ पड़ोसन लड़

बिना कारण के झगड़ा उठाने और छेड़छाड़ के अवसर पर प्रयुक्त

आ पड़ोसन लड़ें

बिना कारण के झगड़ा उठाने और छेड़छाड़ के अवसर पर प्रयुक्त, लड़ाई के तत्पर

आ पड़ोसन मुझ सी हो

अपनी तरह अन्य लोगों के लिए भी मुसीबत या बुराई चाहने के अवसर पर प्रयुक्त

आए आम जाए लबेदा

किसी न किसी तरह मतलब प्रप्त होना चाहिए कुछ ही क्यों न ख़र्च हो जाए

आए बीर भागे बीर

अच्छे और भले लोगों के सामने बुरे और ख़राब लोगों की कुछ नहीं चलती हमेशा भाग खड़े होते हैं

आए चैत सहावन फूहड़ मैल छुड़ावन

गंदी स्त्री के संबंध में कहते हैं कि पसीना आए तो उसका बदन साफ़ हो

आए डल्लू के दस सेरे

घर घर फिरने वाले व्यक्ति के लिए उपयोग किया जाता है

आए कनागत फूला काँस बामन उछ्लें नौ नौ बाँस

लोलुप ब्राह्मणों के लिए कहा जाता है

आए की शादी न गए का ग़म

अनिच्छा और निश्चितता के समय बोलते हैं

आए मीर भागे बीर

उच्च के सामने निम्न खड़ा नहीं हो सकता या ठहर नहीं सकता

आए न जाए

आता जाता कुछ नहीं

आए पीर भागे पीर

बुरों से अच्छे हमेशा अलग रहते हैं

आए थे हर भजने को और औटन लगे कपास

जो करना चाहिए था उसके ख़िलाफ़ करने लगे, धर्म के नाम पर पैसा कमाने लगे

आए तो जाए कहाँ

अत्यधिक क्रोध में भर गया, ऐसा उलझा कि जान छुड़ाने में कठिनाई हो गई

आए तो कोढ़ी का स्वाँग लेकर आए

जहाँ जिस बात को अवसर हो कर गुज़रे

आएँ तो कहाँ जाएँ

غصہ کی شدت ظاہر کرنے کے لئے کہتے ہیں

आएगा कुत्ता तो पाएगा तिक्का

दौड़-धूप कोशिश और मेहनत से ही लाभ प्राप्त हो सकता है

आएगा कुत्ता तो पाएगा टुक्का

दौड़-धूप कोशिश और मेहनत से ही लाभ प्राप्त होसकता है

आई बात रुकती नहीं

मन में उठा विचार प्रकट होकर ही रहता है

आई बहू आया काम गई बहू गया काम

बीवी घर में आती है तो काम करती है, जब चली जाती है तो काम भी ख़त्म या कम हो जाता है

आई गई पार पड़ी

जो बात हो चुकी अब उस का चर्चा करना बेकार है, जो हो चुका सो हो चुका उसकी चिंता व्यर्थ है

आई है जान के साथ जाएगी जनाज़े के साथ

ऐसे व्यक्ति के लिए उपयोग किया जाता है जिस की आदत न बदले

आई हुई नहीं टलती

मौत नहीं रुकती, मौत अपने समय पर आ जाती है

आई जान के साथ जाएगी जनाज़े के साथ

اس کے متعلق کہتے ہیں جس کی عادت نہ بدلے

आई माई को काजल नहीं, बताई को भर माँगा

व्यभिचारी के संबंध में कहते हैं, परिवार वालों को कुछ नहीं देता, वेश्या का घर भर देता है

आई मौज फ़क़ीर की दिया झोंपड़ा फूँक

विरक्त या फक्कड़ साधु के लिए कहते हैं कि मन में आया तो झोंपड़ा जला कर चलता बनता है

आई न गई छू-छू घर ही में रही

संयोग से घर में आई अब निकलती ही नहीं, मेहमान जो घर में आकर बैठ रहे, उसके बारे में बातें करते हैं

आई न गई किस रिश्ते बहन

अजनबी हो कर जो संंबंध जताए या ग़लत दा'वा करे उसके प्रति कहते हैं

आई पर चूके नहीं

موقع نہیں گنوانا چاہئے

आई पर न चूके

جہاں جس ہات کا موقع ہو کر گزرے

आई पर नहीं चूकते हैं

हाज़िर जवाब हैं मन में जो बात आए कह देते हैं

आई रोज़ी नहीं तो रोज़ा

कुछ मिल गया तो खा पी लिया नहीं तो भूखा रह गया, भरोसे और संतोष पर गुज़र बसर है

आई थी आग को रह गई रात को

बद चलन है, अनैतिकता के लिए ज़रा सा बहाना काफ़ी है

आई थी आग लेने बन गई घर की मालिक

اس عورت کے متعلق کہتے ہیں جو بہانہ سے کسی کے گھر میں داخلہ کر کے مالک سے شادی کر لے

आई तो नोश नहीं तो फ़रामोश

कुछ मिला तो अच्छी बात नहीं तो सब्र के सिवा कोई चारा नहीं, आई तो रोज़ी नहीं तो रोज़ा

आई तो रमाई नहीं तो फ़क़त चारपाई

मिल गई तो मज़ा लिए अन्यथा चारपाई पर अकेले सोकर समय बिताया, काम बना तो बना नहीं तो कोई बात नहीं

आईं बीवी 'आक़िला सब कामों में दाख़िला

अनजान का अच्छे और बुरे काम में हस्तक्षेप के अवसर पर प्रयुक्त

आईना ले के मुँह तो देखो

तुम इसके योग्य नहीं कि यह काम पूरा कर सको, तुम्हारे पास इतनी योग्यता नहीं, तुम इसके पात्र नहीं

आईना में अपना हाल तो देखो

किसी का हाल देख कर उस के समझाने को कहते हैं

आईना में बाल आना

शीशे में टूटने के कारण लकीर पड़ जाना

आईना तो मुयस्सर न हुआ होगा चपनी में मूत के देख

अगर कोई कुरूप व्यक्ति किसी चंचल स्त्री से मज़ाक़ करे तो वो कहती है

आईने में सूरत तो देखो

व्यंग में कहते हैं अगर कोई अपनी योग्यता से बढ़ कर बात करे या औक़ात से बढ़ कर माँगे

आइंदा को कान हुए

आगे के लिये एहतियात होगी

आँख फेरे तोते की सी, बात करै मैना की सी

वेश्या की प्रशंसा है कि ये बातें तो बड़ी अच्छी करती है परंतु बड़ी बेमुरव्वत है

आँधर कुकर से बतासे भौंके

अंधा कुत्ता हवा की सनसनाहट सुन कर भौंकने लगता है, व्यर्थ काम करने वाले व्यक्ति के संबंध में प्रयुक्त

आँधर कूटे बहरा कूटे, चावल से काम

काम चाहे कोई करे मतलब तो इससे है कि काम हो जाए

आँधी आए बैठ जाए, मेंह आए भाग जाए

थोड़ा सा कष्ट जिसे सहन कर सको तो कर लो और अधिक हो तो परे हो जाओ

आँधी के आगे बेना की बतास

आँधी में पंखे की हवा, अलाभकारी काम करना

आँडू बैल जी का जुवाल

साँड जंजाल होता है

आँख बचे का चाँटा

लड़कों में एक किस्म की शर्त बदी जाती है जो जिसे बेख़बर देखे तड़ से चाँटा मारे

आँख बची माल दोस्तों का

जहाँ थोड़ी भी असावधानी से चोरी या क्षति का डर हो वहाँ कहा जाता है

आँख बची माल यारों का

थोड़ी सी भूल हुई और लोगों ने वस्तु उड़ाली, ज़रा सी चूक में माल नष्ट हो गया

आँख चौपट अंधेरे से नफ़रत

अपनी झूठी विशेषता दिखाकर शान अथवा शेख़ी बघारना

आँख एक नहीं कजलौटे दो दो

कुरूप को जब संवरने अधिक इच्छा हो ती है तो उसके संबंध में ये कहावत कही जाती है

आँख एक नहीं कजलौटियाँ नौ नौ

कुरूप को जब संवरने अधिक इच्छा हो ती है तो उसके संबंध में ये कहावत कही जाती है

आँख ही फूटी तो भौं कब भाती है

बेटी मर जाए तो दामाद के साथ कुछ संबंध नहीं होता

आँख हूई चार दिल में आया प्यार, आँख हूई ओट दिल में आई खोट

आमने-सामने होते ही मन में दूसरों के लिए दया एवं प्यार आ ही जाता है और दृष्टि से ओझल होने पर आदर-भाव शेष नहीं रहता

आँख का अंधा गाँठ का पूरा

धनवान मूर्ख जो अपव्ययी से काम लेता है

आँख का गिला भवों से

उसके प्रति कहते हैं जो किसी के सामने उसके प्रिय अथवा मित्र को बुरा कहे

आँख कद्दू, नाक मद्दू सोहनी नाम

ग़ैर-मौज़ूँ नाम, बरअक्स नहंद नाम ज़ंगी काफ़ूर

आँख के आगे नाक, सूझे क्या ख़ाक

आँख पर तो परदा पड़ा है, दिखाई क्या दे

आँख की बुराई भवों के आगे

उसके प्रति कहते हैं जो किसी के सामने उसके प्रिय अथवा मित्र को बुरा कहे

आँख की बुराई भवों से

किसी के दोष या बुराई की चर्चा या उसकी उलाहना उसके प्रिय या मित्र के सामने करने की क्रिया

आँख लजाई धी पराई

जवाब न देना और चुप रहना क़ुबूल कर लेने की निशानी है

आँख में आँसू नहीं और कलेजा टूक टूक

दुख एवं पछतावा मात्र दिखावे के लिये है वर्ना दिल ख़ुश है

आँख में मैल है और उस में मैल नहीं

सच्चरित्र के लिए प्रयुक्त है

आँख में नूर, दाँत नुपूर

दुख एवं पछतावा मात्र दिखावे के लिये है वर्ना दिल ख़ुश है

आँख में पानी नहीं है

लज्जा बिल्कुल नहीं है

आँख में थी शर्म दिल की थी नर्म

महिलाएँ व्यंगात्मक तौर पर उस जगह कहती हैं जहाँ न मानने वाली बात कोई मुरव्वत और पास एवं लिहाज़ के कारण मान ले

आँख मिची और माल दोस्तों का

इधर थोड़ा चूक हुई और लोगों ने हानि पहुँचाया, चोर उचक्के उठाई गीरे अवसर की प्रतीक्षा में रहते हैं

आँख मुंद गई अंधेरा पाक

मृत्यु के पश्चात कुछ नज़र नहीं आ सकता कि दुनिया में क्या है क्या नहीं

आँख मूची माल दोस्तों का

इधर थोड़ा भूल हुइ और लोगों ने हानि पहुँचाया, चोर उचक्के उठाइ गीरे अवसर ढूँढते रहते हैं

आँख न देखो बहू चाँद सी

आँख का ख़याल मत करो वैसे बीवी बहुत अच्छी है

आँख न दीदा काढ़े कशीदा

काम करने की समझ नहीं फिर भी करने की रुचि

आँख न नाक बन्नो चाँद सी

(व्यंग्यात्मक) उस बदसूरत के लिए प्रयुक्त जो स्वयं को सुंदर समझे, पर्यायवाची: चीज़ या बात अच्छी है मगर जो विशेष गुण होना चाहिए वह नहीं है

आँख नाक मुख मूँद के नाम निरंजन ले, भीतर के पट जब खुलें जब बाहर के पट दे

एकाग्रचित होकर जो निरंजन अर्थात कल्मष-शून्य भगवान है उसका ध्यान करना चाहिए

आँख ओझल पहाड़ ओझल

जो वस्तु आँख के सामने नहीं वह अगर पास में भी है तब भी दूर है

आँख ओट पहाड़ ओट

जो वस्तु आँख के सामने न हो यदि वह निकट हो तब भी दूर है

आँख फड़के दहनी माँ मिले या बहनी, आँख फड़के बाईं बीर मिले या साईं

बाएँ आँख फड़के तो पति या पत्नि से भेंट होती है और दाएँ आँख फड़कने पर माँ या बहन से

आँख फूटेगी तो क्या भौं से देखेंगे

ये वहाँ बोलते हैं जहाँ ये कहना होता है कि जो वस्तु जिस काम के लिए बनाई गयी है वह काम उसी से निकलता है

आँख फूटी पीड़ गई

अच्छी वस्तु कष्टदायक हो तो उसका दूर हो जाना ही अच्छा है

आँखें आसमान पर रहती हैं

ध्यान से काम नहीं करता

आँखें आसमान से लगी रहती हैं

नज़र हर समय ऊपर रहती है, नीचे देखते ही नहीं

आँखें बड़ी चीज़ हैं

आँखों की प्रशंसा में ये वाक्य कहे जाते हैं

आँखें बड़ी दौलत हैं

आँखों की प्रशंसा में ये वाक्य कहे जाते हैं

आँखें बंद होते क्या देर है

मरते देर नहीं लगती

आँखें बंद कर के कोई काम करना

बिना समझे-बूझे काम करना

आँखें बंद किये चला जा

बे-खटके चला जा, कोई डर नहीं

आँखें चार तरफ़ चकर-मकर चली जाती हैं

चंचलता से निगाह एक तरफ़ नहीं ठहरती, चंचल है

आँखें हूईं चार दिल में आया प्यार, आँखें हूईं ओट दिल में आई खोट

आमने-सामने होते ही मन में दूसरों के लिए दया एवं प्यार आ ही जाता है और दृष्टि से ओझल होने पर आदर-भाव शेष नहीं रहता

आँखें फेरे तोते की सी बातें करे मैना की सी

वास्तव में दुःशील एवं निष्ठुर है, दिखावे में प्रेम की बातें करता है

आँखें तो खुली रह गईं और मर गया बकरा

अप्रत्याशित रूप से किसी घटना का घटित हो जाना, अचानक मौत आ गई

आँखें ज़रा सी झपकीं और माल दोस्तों का

ज़रा सी लापरवाही हुई और माल गया

आँखों देखा फट पड़ा कि मैं कानों सुना

सच्चे को झूटा बनाते हो और दूसरे की आँखों से देखी हुई बात को अपनी सुनी सुनाई पर वरीयता देते हो

आँखों देखा फट पड़ा मुझे कानों सुनने दे

सच्चे को झूटा बनाते हो और दूसरे की आँखों से देखी हुई बात को अपनी सुनी सुनाई पर वरीयता देते हो

आँखों देखा सो जाना कानों सुना न माना

इंसान जो कुछ आँखों से देखे उस पर यक़ीन लाऐ सुनी सुनाई बात का क्या भरोसा

आँखों देखे मक्खी नहीं निगली जाती

देख कर नुक़्सान नहीं उठाया जा सकता

आँखों देखी जानूँ, कानों सुनी न मानूँ

आँखों देखी बात पर ही विश्वास किया जा सकता है, कानों से सुनी हुई पर नहीं

आँखों देखी न कानों सुनी

इस मुआमले को न कभी ख़ुद देखा न किसी से सुना, ये बहुत ही अजीब-ओ-ग़रीब बात है, अविश्वसनीय बात

आँखों देखते मक्खी नहीं निगली जाती

जान-बूझ कर कोई बुरी वस्तु का प्रयोग नहीं करता

आँखों के आगे भौओं की बुराई

किसी के सामने उसके किसी सगे-संबंधी की बुराई अथवा शिकायत करना

आँखों के आगे नाक सूझे क्या ख़ाक

उस व्यक्ति के प्रति कहते है जिसको सामने पड़ी वस्तु दिखाई न दे

आँखों के आगे पलकों की बुराई

किसी की उपस्थिति में उसके मित्र या प्रिय की निंदा या बुराई

आँखों के अंधे नाम नयन-सुख

ऐब या दुर्गुणता वाली वस्तु अच्छा नाम रखने से अच्छी नहीं हो सकती, अनुचित नाम

आँखों की सूइयाँ निकालनी रह गईं

थोड़ी सी कसर काम के पूर्ण होने में रह गई

आँखों में हया न हो तो ढेले अच्छे

निर्लज्जता की निंदा करने पर बोलते हैं

आँखों पर पलकों का बोझ नहीं होता

अपने घर का व्यक्ति किसी को भारी मा'लूम नहीं देता, बड़ों को छोटों का भरण-पोषण नहीं अखरता

आँखों सुखी नाम हाफ़िज़ जी

अनुचित नाम, आँखें ठीक परंतु नाम अंधा, भगवान ने आँखें दीं फिर भी नाम हाफ़िज़

आँसुओं से प्यास नहीं बुझती

जब किसी को कोई वस्तु इतनी कम मिले कि उससे तृप्ति न हो तब कहते हैं, कंजूसी से काम लिया जाए तब भी कह सकते हैं

आँसू एक नहीं कलेजा टूक-टूक

दिखावे को रोना वास्तव में दुख या चिंता न होना

आँत भारी तो बात भारी

पेट ठीक न रहने से सिर भारी रहता है

आँत भारी तो मात भारी

पेट की ख़राबी से बीमारी पैदा होती है, मेदे की ख़राबी से सिर में दर्द होता है

आँवल नाल गड़ी है

जन्म स्थान से चूँकि प्रेम होता है इसलिये ऐसे व्यक्ति को जिसे किसी जगह से प्रेम हो ये कहते हैं कि वहाँ क्या तुम्हारी आँवल नाल गड़ी है

आँवल नाल यहीं गिराया

यहाँ का जन्म है

आँवले का खाया और बड़े का समझाया पीछे मज़ा देता है

आरंभ में तो यह दोनों वस्तुएँ ही स्वादहीन दिखाई पड़ती हैं परिणाम-स्वरूप अत्यधिक लाभकारी सिद्ध होती हैं

आँवले का खाया बा'द में मज़ा देता है

पूर्वजों का कहना पीछे याद आता है

आओ बुआ लड़ें लड़े हमारी बला

जो गले पड़ कर लड़े स्त्रियाँ उसी के संबंध में कहती हैं

आओ देखा न ताओ

उचित समय नहीं देखना, जा बेजा नहीं देखा, यह उस अवसर पर कहते हैं जब कोई जल्दी से अनुचित कोई कार्य कर ले या कोई बात कह दे

आओ मेहरबाँ बड़ी राह दिखाई

आइये आपने बड़ी प्रतीक्षा कराई

आओ पड़ोसन घर का भी ले जाओ

जब कहीं से कुछ मिलने की आशा हो और वह न मिले बल्कि गाँठ का भी चला जाए तब यह कहावत कहते हैं

आओ पड़ोसन घर से भी ले जाओ

किसी लाभ की आशा में हानि होने पर प्रयुक्त

आओ पड़ोसन लड़ें

चाहे न चाहे झगड़ना, झगड़ा मोल लेना

आओ पूत सिला चने घर का भी ले जाओ

शाबाश बेटा घर में कुछ न छोड़ना, सब कुछ उजाड़ देना

आओ तो जाओ कहाँ

क्रोध की तीव्रता स्पष्ट करने के लिए कहते हैं

आओ तुम्हारा घर, जाओ कुछ झगड़ा नही

हम हर तरह से प्रसन्न हैं, जैसे तुम्हारी इच्छा

आओ-जाओ घर तुम्हारा, खाना माँगे दुश्मन हमारा

झूठा सत्कार बहुत करना मगर ख़र्च से कतराना

आब आमद तयम्मुम बर्ख़ास्त

जब मूल उपलब्ध हो तो किसी विकल्प की आवश्यकता नहीं

आब चो अज़ सरगुज़श्त चे यक नेज़ा चे यक दस्त

(शाब्दिक) जब पानी सर से ऊँचा हो गया तो एक बित्ता या भला भर सब बराबर है

आब चो अज़ सरगुज़श्त चे यक नेज़ा चे यक वजब

(शाब्दिक) जब पानी सर से ऊँचा हो गया तो एक बित्ता या भला भर सब बराबर है

आब-आब करते मर गए सिरहाने धरा रहा पानी

यह कहावत वहाँ बोलते हैं जब कोई व्यक्ति अपना मूल आधार भूल जाए

आब-ए-सरगुज़िश्त

पानी सर से गुज़र गया

आब-नदीदा-मोज़ा-कशीदा

किसी आपदा या कठिनाई के घटित होने से पहले की आशंका के अवसर पर प्रयुक्त

आछे दिन पाछे गए पर से किया न हेत, अब पछताए क्या होत जब चिड़ियाँ चुग गईं खेत

जवानी में बुरे काम करता रहा अब पछताने से क्या लाभ

आद हिंदू बा'द मुसलमान

हिंदुओं का महत्व बताने के लिए कहा जाता है

आदम आया दम आया

आदमी के आने से साहस बढ़ जाता है, आदमी के पैदा होते ही दम आना शुरू हो जाता है अर्थात साँस आने लगती है

आदमी अपने मतलब के लिए पहाड़ के कंकर ढोता है

मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए हर प्रकार के कष्ट सहता है

आदर न भाव झूटे माल खाओ

कोई नीच व्यक्ति या कमीना अगर बेईमानी करे तो उसके सम्मान पर कोई असर नहीं पड़ेगा

आध जल गगरी छलकत जाए

अपूर्ण आदमी थोड़ी सी भवितव्यता पाते ही घमंडी हो जाता है

आध पा आटा चौबारे रसोई

सामर्थ्य कम और अधिक गप हाँकना

आध पाव आटा चौबारे रसोई

उस व्यक्ति के संबंध में कहते है जिसका सामर्थ्य बहुत कम हो और बहुत शेख़ी बघारे या डींग मारे

आध पाव के पात्र में कैसे सेर समाय

असंभव काम संभव कैसे हो सकता है

आध सेर चने की दाल

उद्देश्य प्राप्ति में असफल होकर एक निश्चित धमकी देना

आध सेर के बर्तन में सेर भर नहीं समाता

आध सेर के बर्तन में सेर भर की चीज़ नहीं समा सकती अर्थात असंभव कार्य करने का पर्यत्न नही करना चाहिये

आधा आप घर, आधा सब घर

किसी के लालच और लोभ की प्रचुरता को प्रकट करने के लिए कहा जाता है

आधा पानी, आधा तेल

धोखा, फ़रेब

आधा तजे पंडित, सारा तजे गँवार

बुद्धिमान विचार करके ख़र्च करता है, मूर्ख़ सारी दौलत उजाड़ देता है

आधा तीतर आधा बटेर

कुछ एक तरह का और कुछ दुसरी तरह का, क्रम-विहीन, खिचड़ी भाषा

आधे असाढ़ तो बैरी के भी बरसे

कृपा अधिक करनी चाहिए थोड़ी सी कृपा तो हर कोई कर सकता है परंतु दया सर्वव्यापक हो तो शत्रु को भी लाभ होता है

आधे गाँव दिवाली आधे गाँव होली

किसी स्थिति विशेषण या राय में विरोध के अवसर पर बोलते हैं

आधे गाँव दिवाली आधे गाँव फाग

किसी स्थिति विशेषण या राय में विरोध के अवसर पर बोलते हैं

आधे का साझी बराबर की चोट

साझी या हिस्सेदार का हक़ बराबर होता है

आधे माघे कमली काँधे

हर चीज़ अपनी उचित समय के बाद बेकार हो जाती है, समय बीतने पर हर चीज़ का उद्देश्य कम होता रहता है

आधे में मुल्ला मौज आधे में सारी फ़ौज

उस व्यक्ति के संबंध में कहते हैं जो अपने को सब से बढ़ चढ़ कर समझे और बड़े भाग का अधिकारी जाने (कहा जाता है कि एक क़ाज़ी क़ुदवा नाम के सत्तर या चौरासी बेटे थे, इस लिए अतिश्योक्ति के तौर पर ये उदाहरण प्रसिद्ध हो गई कि आधे हैं कुल मानव की संतान और आधे में क़ाज़ी क़ुदवा की संतान)

आधे मियाँ मौज आधे में सारी फ़ौज

जब किसी वस्तु का आधा भाग एक व्यक्ति को और शेष आधा भाग पुरे जत्थे को मिले तो उस समय कहते हैं

आधे क़ाज़ी क़ुदवा और आधे बावा-आदम

उस व्यक्ति के संबंध में कहते हैं जो अपने को सब से बढ़ चढ़ कर समझे और बड़े भाग का अधिकारी जाने (कहा जाता है कि एक क़ाज़ी क़ुदवा नाम के सत्तर या चौरासी बेटे थे, इस लिए अतिश्योक्ति के तौर पर ये उदाहरण प्रसिद्ध हो गई कि आधे हैं कुल मानव की संतान और आधे में क़ाज़ी क़ुदवा की संतान)

आधी बात सुन पाएँ तो एक-एक की चार-चार दिल से बनाएँ

बहुत चालाक और उपद्रवी व्यक्ति ही उपद्रव की बातें मन से घड़ लेते हैं

आधी छोड़ सारी को जाए आधी रहे न सारी पाए

वह व्यक्ति जो मौजूद चीज़ को छोड़ कर ज़्यादा की ओर भागता है वह मौजूद चीज़ को भी खो देता है, लालची हमेशा नुक़्सान उठाता है

आधी छोड़ सारी को जावे आधी रहे न सारी पावे

वह व्यक्ति जो मौजूद चीज़ को छोड़ कर ज़्यादा की ओर भागता है वह मौजूद चीज़ को भी खो देता है, लालची हमेशा नुक़्सान उठाता है

आधी के बबर भी कोई उस के हाथ से न खावे

किसी से अत्यधिक अरुचि एवं घृणा के अवसर पर उसे तिरस्कृत करने के लिए प्रयुक्त

आधी को छोड़ सारी को धावे आधी भी हाथ न आवे

वह व्यक्ति जो उपस्थित वस्तु को छोड़ कर अधिक की ओर भागता है वह उपस्थित वस्तु को भी खो देता है, लालची सदा हानि उठाता है

आधी को छोड़ सारी को धावे आधी रहे न सारी पावे

वह व्यक्ति जो उपस्थित वस्तु को छोड़ कर अधिक की ओर भागता है वह उपस्थित वस्तु को भी खो देता है, लालची सदा हानि उठाता है

आधी को छोड़ सारी को धावे ऐसा डूबे थाह न पावे

वह व्यक्ति जो उपस्थित वस्तु को छोड़ कर अधिक की ओर भागता है वह उपस्थित वस्तु को भी खो देता है, लालची सदा हानि उठा

आधी रात और घर का परोसने वाला

(शाब्दिक) आधी रात का वक़्त हो और बाँटने वाला अपना तो फिर क्यों न फ़ायदा हो, (अर्थात) ख़ूब फ़ायदा उठाओ, कोई पूछगछ करने वाला नहीं (लाभ उठाने की जगह प्रयुक्त)

आधी रात इधर रात उधर

ठीक आधी रात का वक़्त, अँधेरी रात, रात का सन्नाटा

आधी रात को जमाही आए, शाम से मुँह फैलाए

समय से पहले किसी काम की तैयारी करने के अवसर पर प्रयुक्त

आदमी आदमी अंतर कोई हीरा कोई कंकर

दो व्यक्ति एक प्रकार के नहीं होते इसलिए लोगों में कुछ लोग अचछे हैं तो कुछ बुरे

आदमी अनाज का कीड़ा है

मनुष्य के जीवन का आश्रय भोजन पर है, मनुष्य खाए बिना जीवित नहीं रह सकता

आदमी अन्न का कीड़ा है

मनुष्य बिना भोजन किए जीवित नहीं रह सकता, मानवीय जीवन की निर्भरता भोजन पर है

आदमी अपने मतलब में अंधा होता है

मनुष्य अपने मतलब को प्राप्त करने में अच्छाई और बुराई में अंतर नहीं करता है

आदमी अपने मतलब में बंधा है

हर आदमी अपने मतलब की ही बात करता है

आदमी चाहिए दिल का पक्का पेट का गहरा

आदमी का भेद नहीं खोलना चाहिये

आदमी चने का मारा मरता है

आदमी की जब मौत आती है तो अत्यंत साधारण कारण से भी मर जाता है

आदमी है कि बिजली

बहुत तेज़ काम करता है

आदमी हो या जानवर

بد تمیزی کرنے والے کو کہتے ہیں

आदमी जाने बसे सोना जाने कसे

आदमी की अच्छाई बुराई उस को परखने से मालूम होती है जिस तरह सोने का खरा-खोटा आग पर तपने से मालूम होता है

आदमी का आदमी शैतान है

मनुष्य के संगत से मनुष्य बिगड़ता

आदमी का शैतान आदमी है

मनुष्य दूसरे के बार-बार बहकाने और बहलाने से प्रभावित हुए बिना नहीं रहता

आदमी की दवा आदमी है

मनुष्य का मन मनुष्य से बहलता है, कितना ही दुख और पीड़ा हो चार आदमियों में बैठकर मन बहल जाता है

आदमी की दो आँखें एक शर्माए दूसरी फ़रमाए

पक्ष और सहमति व्यक्त करने के विभिन्न तरीक़े होते हैं

आदमी की कसौटी मु'आमला है

आदमी की अच्छाई बुराई संपर्क में आने से मालूम होती है या मामला पड़ने से आदमी की पहचान या परख होती है, काम पड़ने पर ही मनुष्य की परीक्षा होती है

आदमी की पेशानी दिल का आईना है

आदमी का हाल उसके मुख से पता चल जाता है

आदमी की क़द्र मरे पर होती है

मृत्यु के बाद ही आदमी की मूल्य होती है, आदमी की अच्छाइयाँ उस की मृत्यु के बाद याद आती हैं

आदमी को आदमियत लाज़िमी है

मनुष्य को दूसरों के साथ कुलीनता से पेश आना चाहिए, मनुष्य में मानवता का होना बहुत आवश्यक है

आदमी को आदमी से सौ दफ़'आ काम पड़ता है

जब कोई किसी का काम करने से बचे तो उसे मनाने के लिए कहते हैं कि मनुष्य ही मनुष्य के काम आता है

आदमी को ढाई गज़ ज़मीन काफ़ी है

बहुत बड़ा भवन बनाने या लम्बी-चौड़ी ज़मीन प्राप्त करने का प्रयास करना व्यर्थ है, महल या घर बनाना या भूमि खरीदना व्यर्थ है

आदमी क्या है, सरांचे का बाँस है

बहुत लंबा आदमी है, बहुत लंबे आदमी पर उपहास है

आदमी ने कच्चा दूध पिया है

मनुष्य विस्मृति से मुक्त नहीं, मनुष्य का स्वभाव त्रुटिपूर्ण है (जब किसी व्यक्ति से उसकी गरिमा के विरूध्द कोई बात हो तो उसकी क्षमायाचना में प्रयुक्त)

आदमी पानी का बुलबुला है

मानव का जीवन अस्थिर है

आदमी पेट का कुत्ता है

भोजन की खोज में आदमी जगह जगह दौड़ता-फिरता है और हर योग्य और अयोग्य की बात को मान लेता है

आदमी रा आदमिय्यत लाज़िम अस्त

आदमी वही है जिस में इंसानियत भी हो, मनुष्य में मनुष्यता आवश्यक है

आदमी सा पखेरू कोई नहीं

जब कोई व्यक्ति थोड़े ही दिनों में बार-बार यात्रा कर के विभिन्न स्थानें पर पहुँचे तब कहते हैं

आदमी सोहबत से पहचाना जाता है

आदमी की पहचान उसके पास बैठने वोलों और संगी साथियों से होती है

आफ़ताब आमद दलील-ए-आफ़ताब

सूरज के अस्तित्व के लिए प्रमाण की आवश्यकता नहीं, उसकी रौशनी ख़ुद ही प्रमाण है, ऐसी बात जिसके लिए प्रमाण की ज़रूरत न हो, साफ़ और स्पष्ट बात है

आफ़्ताब पर थूको अपने ही मुँह पर पड़े

उच्च स्तर पर किसी भी प्रकार का हमला करने से निम्न स्तर की अपमान होती है, पवित्र को बदनाम करने वाला ख़ुद ही बदनाम होता है

आग और बैरी को कम न समझे

आग और बाढ़ के पानी की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए

आग और ख़स एक-जा हो तो मुमकिन नहीं कि न जले

अगर पुरूष एवं स्त्री इकट्ठे हों तो अवश्य संभोग की बारी आती है

आग और रूई का क्या साथ

एक दूसरे के विरुद्ध स्वभाव वालों की मित्रता विश्वास पात्र नहीं, शत्रुओं का क्या मेल-मिलाप

आग और रूई क्या दोस्ती

एक दूसरे विरुद्ध स्वभाव वालों की मित्रता विश्वास पात्र नहीं, शत्रुओं का क्या मेल-मिलाप

आग बिन धुआँ कहाँ

हर झगड़े का कारण अवश्य होता है, कारण बिना कोई कार्य नहीं होता

आग बिना धर राख तम्बाकू

जैसे बिना आग धरे तंबाकू बेकार है वैसे ही त्रुटिपूर्ण उपाय भी बेकार होता है

आग जाने लोहार जाने धोंकने वाले की बला जाने

आदेश देना वाला उत्तरदायी है, आज्ञा मानने वाले का कोई अपराध नहीं

आग जाने लुहार जाने धोंकने वाले की बला जाने

अधीन का उद्देश्य आज्ञा मानना होता है परिणाम से मतलब नहीं होता

आग जनवासा आगरी चौथा गाड़ी वान, ज्यूँ-ज्यूँ चमके बीजली दूँ-दूँ तुजे प्राण

जनवासा एक पौधा होता है जो बारिश से मर जाता है जब बिजली चमकती है तो यह चारों डर से घबराते हैं

आग का जला आग से अच्छा होता है

आग से जली हुई जगह को आग से सेंकें तो जलन कम हो जाती है, जिस ने दुख दिया वही आराम दे सकता है

आग का जला आग से ही अच्छा होता है

जिसने इज़ा दी है वही उसको मिटा सकता है

आग का पुतला आग को धाए

प्रत्येक वस्तु अपने मूल की ओर लौट आती है

आग कहने से मुँह नहीं जलता

केवल बातों से काम नहीं चलता, जब ति कार्य न हो, ख़र्च करने की जगह वचन से काम नहीं चलता

आग कहते मुँह नहीं जलता

बरी चीज़ का नाम लेने से बुराई का असर होता है, बगै़र गुनाह किए फ़क़त ज़बानी कहने से आदमी मुजरिम नहीं होता(फ़ारसी : फे़अल कुफ्र नबाशिद), उर्दू में मुस्तामल

आग के आगे सब भसम हैं

आग के उगे जो चीज़ आ जाएगी जल कर रहेगी

आग खाए मुँह जले उधार खाए पेट

आग खाने से केवल मुँह जलता है, लेकिन आग से ज़्यादा ऋृण से डरना चाहिए, क्योंकि आग की जलन बाहरी शरीर तक ही सीमित होती है और ऋृण की पीड़ा से मन जल जाता है, ऋृण लेना आग से जलने से भी अधिक कष्टकारी होता है।

आग खाएगा अंगारे हगेगा

बुरे काम का बुरा परिणाम होता है

आग लगा कर जमालो दूर खिड़ी

क्रोध में किसी का आदर नहीं होता

आग लगा के तमाशा देखा

उपद्रवी व्यक्ति के संबंध में कहते हैं

आग लगाए तमाशा देखे

उस अवसर पर बोलते हैं जब किसी के बारे में यह दिखाना हो वह झगड़ा-लड़ाई करवा कर उस तमाशे को देखता है

आग लगंता झोंपड़ा जो निकले सो लाभ

हानि सूनिश्चित हो जाने की स्थिति में जो भी बच जाये या जो भी लाभ हो जाए लाभ ही है

आग लगंता झोंपड़ा जो निकले सो लाव

हानि सूनिश्चित हो जाने की स्थिति में जो भी बच जाये या जो भी लाभ हो जाए लाभ ही है

आग लगंती झोंपड़ी जो निकले सो लाभ

हानि सूनिश्चित हो जाने की स्थिति में जो भी बच जाये या जो भी लाभ हो जाए लाभ ही है

आग लगंती झोंपड़ी जो निकले सो लाव

हानि सूनिश्चित हो जाने की स्थिति में जो भी बच जाये या जो भी लाभ हो जाए लाभ ही है

आग लगे कर बैरी , दर्शन मित्र देख भरे सब तन मन

परेशानी में पड़े पर शत्रु प्रसन्न होते हैं और दोस्तों को दुख एवं पछतावा होता है

आग लगे मंडे बज्जर पड़े बराती

मैं ऐसे लाभ से दर गुज़रा

आग लगे पर बिल्ली का मूत ढूँडना

किसी विपत्ति के सिर पर आने पर उससे बचने का ऐसा उपाय खोजना जिससे कोई लाभ ही न हो

आग लगे पर कुँआँ खोदता है

मुसीबत सर पर आ पड़ने पर उसके समाप्त करने के लिए व्यर्थ एवं बिना लाभ के परिश्रम करना

आग लगे पर पानी कहाँ

क्रोध के समय दया और प्रेम एवं उद्देश्य या इच्छा के समय शर्म एवं लाज नहीं रहती

आग लगे तो बुझे जल से जल में लगे तो बुझे कैसे

बच्चे को तो ठीक किया जा सकता है एक आदतन अपराधी को किसी भी तरह से वश में नहीं किया जा सकता

आग लगे तो बुझे जल से, जल में लगे तो बुझे कहो कैसे

उस अवसर पर बोलते हैं जहाँ वह व्यक्ति जिससे विनति सुनने की उम्मीद हो अत्याचार करे

आग लगे तो घूर बतावे

आग की वजह से धुआँ उठ रहा है पर कहते हैं कि नहीं वह धूल है

आग लगता झोंपड़ा जो निकले सो लाओ

सर्वस्व नष्ट होने में से जो कुछ बच सके, उसे ही लाभ समझना चाहिए, हानि से जो बच जाए अच्छा है

आग लेने आए थे क्या आए क्या चले

जब कोई आ कर तुरंत जाना चाहे तब कहते हैं

आग लेने आई घर की मालिक बन गई

ज़रा सा बहाना पाकर अधिग्रहण कर लिया

आग लेना भेजा है अभी लौट कर नहीं आए

अभी अनुभवहीन हैं, ऐसे कितने आये और चले गये

आग लेने को जाएँ पयम्बरी मिल जाए

ऐसे समय पर बोलते हैं जब किसी व्यक्ति को आशा के विपरीत कोई चीज़ प्राप्त हो जाये

आग में बाग़ न लगाओ

असंभव काम न करो

आग में धुवाँ कहाँ

प्रत्येक बात की बुनियाद अवश्य होती है, वह बात जिसका कारण अवश्य हो

आग में जो चीज़ पड़ी वो आग है

संगत का प्रभाव बहुत अधिक होता है

आग में मूतो या मुसलमान बनो

दो हानिकारक या धर्म के विरुद्ध बातों में से हठपूर्वक एक बात पर प्रसन्न करना, ऐसा काम लेना जिसमें ऐसे भी ख़राबी हो और वैसे भी ख़राबी

आग न उगल ला'ल उगल

बुरा वाक्य न बोल अच्छे शब्द मुँह से निकाल

आग पानी एक जगह नहीं रह सकते

आग पानी का संयोग है

आग पानी का बैर है

दो विपरीत गुण-धर्म वाली वस्तुएँ एक स्थान पर नहीं रह सकतीं

आग फूस एक जगह कैसे रह सकते हैं

दो परस्पर विरोधी एक स्थान पर नहीं रह सकते, विपरीत वस्तुओं का समूह

आग रुई की क्या दोस्ती

दो विपरीत स्वभावों के बीच मित्रता नहीं हो सकती, दो जानी दुश्मनों का मिलाप नहीं हो सकता

आग़ा मीर की दाई सब सीखी सिखाई

जो औरत सब गुणों में पूरी, निहायत चालाक और मक्कार हो उस के लिए कहते हैं

आग़ाज़ बद का अंजाम बद है

जिस काम का आरंभ बुरा हो उसका अंत भी बुरा होता है

आगे आगे गुरू पीछे पीछे चेला

जहाँ कोई अच्छे बुरे काम में किसी के बुज़ुर्ग या प्रियजन या दोस्त का अनुसरण करता है, तो कहते हैं कि आगे-आगे गुरु पीछे-पीछे चेला, यानी अगर उनके बुज़ुर्ग ऐसा करते हैं तो वे क्यों नहीं ऐसा करें

आगे आगे राजा पीछे पीछे पर्जा

प्रजा शासक के आचरण का अनुसरण करती है

आगे आगरा पीछे लाहौर

ग़लत पथ पर पड़े हैं

आगे चलते हैं पीछे की ख़बर नहीं

लाभ पर नज़र है और हानि के बारे में नहीं सोचते

आगे दौड़ पीछे

एक काम ख़त्म नहीं हुआ कि लालच में दूसरा शुरू कर दिया, व्यर्थ लालच के लिए प्रयुक्त

आगे दौड़ पीछे छोड़

पिछला याद नहीं आगे पढ़ता जाता है, एक काम को अधूरा छोड़ कर दूसरे को करना

आगे हाथ पीछे पात

जिसके तन ढकने के लिए कपड़ा भी उपलब्ध न हो, ग़रीब

आगे जाते घुटने टूटें पीछे देखते आँखें फूटें

उस अवसर पर प्रयुक्त जहाँ करने में भी नुक़्सान हो और न करने में भी

आगे खटिया पीछत लठिया

ज़बरदस्ती क़बज़ा

आगे कुँआँ पीछे खाई

काम करने में भी ख़राबी और न करने में भी, हर तरह ख़तरा या नुक़्सान

आगे ल'आ न पीछे पत्ता

लाचारी और अत्यधिक ग़रीबी एवं कंगाली को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त

आगे मार पीछे सँवार

लड़ाई या लड़ाई की क्रिया के आरंभ पश्चात प्रतिशोध या रोकथाम कठिन है

आगे नाथ न पीछे पगा

जिसके आगे-पीछे कोई न हो, जिसका अपना कोई न हो, असहाय, लावारिस, अकेला

आगे पग रखे पत बढ़े पाछे पग रखे पत जाए

प्रयत्नशील के संबंध में बोलते हैं

आगे पत्ता न पीछे लत्ता

जिसे तन ढकने के लिए कपड़ा भी न मिले, कंगाल

आगे पूत न पीछे पगा

जिसके आगे-पीछे कोई न हो, जिसका अपना कोई न हो, असहाय, लावारिस, अकेला

आगे रोक पीछे ठोक, ससुरा सरके न जाए तो क्या हो

आगे जा नहीं सकता पीछे से डंडा पड़ता है, करे तो क्या करे, जहाँ किसी ओर रास्ता न मिले तो बिना-साहस हो जाता है

आगिल खेती आगे-आगे पिछली भाग जावे

समय पर बोई फ़सल अच्छी होती है, पछेतरी ख़राब हो जाती है

आह-ओ-फ़ुग़ाँ से करोबियों के कान गुँग हो गए

बहुत रोए पीटे, बहुत शोर-ओ-ग़ुल किया

आज आज का बिच्छू कल का साँप

जो अब थोड़ा हानि पहुँचा सकता है वह आने वाले कल में अधिक हानि भी पहुँचा सकता है, यह बच्चु मियाँ नहीं बिच्छू मियाँ है

आज बरस के फिर न बरसूँ

बारिश की झड़ी लगी है, बराबर से जा रहा है

आज गए कल आए

कुछ दिनों की बात है, ज़्यादा वक़्त नहीं लगा या नहीं लगता, चंद रोज़ की बात है, जल्द वापस आने के अवसर पर पर्युक्त

आज है सो कल नहीं

दिन प्रतिदिन बरबादी है, बुरा समय आता जाता है, संसार परिवर्तनशील है, जो स्थिति आज है वह कल नहीं होगी

आज हमारी कल तुम्हारी देखो लोगो फेरा-फारी

देर-सबेर सबको इस दुनिया से जाना है, आज हमारी बारी है, तो कल तुम्हारी

आज का काम कल पर मत डालो

आज का काम आज ही निपटा दो

आज का लीपा देखो आ

बीती बातों को जाने दो

आज कल की कन्या अपने मुँह से बर माँगती है

कलयुग का समय है, लोग अनुचित बातें करते हैं, बारह साल की लड़की पति चाहती है

आज कल उन के पेशाब में चराग़ जलता है

बड़े भाग्यवान हैं, ये उनकी उन्नति का दौर है

आज के बनिये कल के सेठ

युग की क्रांति है कि जो कल धनवान था वह आज निर्धन हो गया

आज के थपे आज ही नहीं जलते

काम के परिणाम में समय लगता है, किसी काम का दण्ड हाथ के हाथ नहीं मिलता

आज की आज, आज की बरस दिन में

आज की बात आज भी निपटाई जा सकती है, और उसमें एक वर्ष भी लगाया जा सकता है

आज क्या जाती दुनिया देखी

निकट होने या रहने के अतिरिक्त वर्षों में मिलने और चेहरा दिखाने वाले व्यक्ति के लिए निंदा के तौर पर प्रयुक्त

आज मैं, कल तू

जो हाल आज मेरा है वही कल तेरा होगा, समय एक जैसा नहीं रहता, एक न एक दिन सब पर विपत्ति आती है

आज मरा कल दूसरा दिन

जीवन अविश्वसनीय और अस्थिर है, उम्र का क्या भरोसा

आज मुए कल दूसरा दिन

जीवन की अस्थिरता दिखाने के लिए कहा जाता है

आज नहीं कल

टाल मटोल करना

आज से कल नज़दीक है

आगामी युग को दूर समझ कर अच्छे कामों में सुस्ती और आलस्य नहीं करना चाहिए

आज तक पड़े हींग हग रहे हैं

अभी तक दशा बिगड़ी हुई है, अब तक दुर्दशा है

आज ज़बान खुली है कल बंद है

जीवन का भरोसा नहीं अभी भले चंगे थे और अभी चल बसे (सीख दिलाने, जीवन पर भरोसा न करने और सच्चाई का विश्वास दिलाने के अवसर पर प्रयुकत)

आक का कीड़ा आक में राज़ी, ढाक का ढाक में

प्रत्येक व्यक्ति अपने उचित स्थान पर ख़ुश रहता है

आकाश बाँधें पत्ताल बाँधें घर की टट्टी खुली

ऐसे व्यक्ति के संबंध में प्रयुक्त जो बड़े बड़े प्रबंध करने के दावे करे और घर की व्यवस्था न कर सके

आख़ थू खट्टे हैं

झेंप मिटाने के लिए भी कहते हैं

आख़िर को आग को लग गई घर के चराग़ से

अंत में अपने हाथ से अपनी हानि हुई

आख़िर मरोगे रूपया जोड-जोड़ कर क्या करोगे

कंजूस को कहा जाता है,जब वह आवश्यकता के अवसर पर भी ख़र्च नहीं करता

आख़िरी चहार शंबा कर देना

जब किसी के हाँ बर्तन टूटते हैं तो कहते है

आला दे निवाला

उस मौक़े पर बोलते हैं जहाँ कोई ओछी प्रवृत्ति का व्यक्ति उच्च स्थिति को पहुँचे मगर स्वाभाविक बुद्धि उसकी न जाए

आलसी-सदा-रोगी

आलसी व्यक्ति सदैव रोगी दिखाई पड़ता है

आम बोओ आम खाओ, इमली बोओ इमली खाओ

जैसा करोगे वैसा पाओगे

आम इमली भेंट हो गई

दो ऐसे व्यक्तियों में संयोगवश मुलाक़ात हो जाना जो एक दूसरों से मिलना न चाहते हों

आम के आम गुठली के दाम

हर प्रकार से लाभ ही लाभ, हर स्थिति में मुनाफ़ा ही मुनाफ़ा, दोहरा लाभ है

आम के आम गुठलियों के दाम

आम खाएँ और कुसली बेच लें, दो प्रकार के लाभ, ऐसा व्यापार जिस में सब प्रकार से लाभ हो

आम खाने से ग़रज़ या पेड़ गिनने से

मतलब से मतलब रखो व्यर्थ की बातों या वाद विवाद से क्या काम

आम की हवस इंब्ली ऊपर

अच्छी वस्तु न मिलने पर कमतर पर प्रसन्न हो जाते हैं

आम मछली की भेंट हो ही जाती है

जब कोई किसी को नुक़्सान पहुँचा कर चल देता है तो नुक़्सान उठाने वाला कहता है कि 'आम मछली का क्या साथ न होगा ' मलतब फिर कभी मुलाक़ात तो होगी उस वक़्त समझ लूँगा, अगर आज हम को नुक़्सान पहुँचा दिया है तो कभी हम को भी अपना बदला लेने का मौक़ा मिल ही जाएगा (चूँकि मछली पकाने में आम की खटाई दी जाती है इस वजह से आम मछली का साथ कहा गया

आम मछली का क्या साथ न होगा

अगर आज हम को हानि पहुँचा दिया है तो कभी हम को भी अपना बदला लेने का अवसर मिल ही जाएगा

आम मछली का साथ है

बहुत मित्रता है, एक दूजे के लिए बहुत आवश्यक हैं, अच्छा जोड़ मिला है

आम फले नियो चले अरंड फले इतराए

सज्जन धनवान हो कर और भी विनम्र हो जाता है और नीच मालदार हो कर सरकश और घमंडी बन जाता है

आमदनी के सर सेहरा है

आमदनी ही से सारा ठाठ ठीक होता है, सुख और आराम आय पर निर्भर होता है, आय न हो तो कुछ न हो, जिसके पास पैसा है वही बड़ा आदमी है

आमने-सामने घर करूँ और बीच करूँ मैदान

आमने-सामने घर बना कर झगड़ा करती रहूँ

आन से मारे तान से मारे, उस पर भी न मरे तो रान से मारे

महिलाएँ संकेतों या बातों से फँसा लेती हैं, अगर उस पर भी वश न चले तो अनुचित संबंध उत्पन्न करके फँसा लेती हैं

आन से मारूँ , तान से मारूँ , फिर न मरे तो रान से मारूँ

बाज़ारी औरतें किसी ना किसी प्रकार मर्दों को जाल में फंसा कर के लूट ही लेती हैं, किसी ना किसी ढब से अपना काम निकालने और स्वार्थ पूरा करने के अवसर पर प्रयुक्त

आना दाल उल्लू भी है

اچھائیوں کے ساتھ برائیاں بھی ہیں، ایک سپاہی نے قرضے میں ایک بنئے کو الو یہ کہہ کر لگا دیا کہ یہ باز ہے، اسے بعد میں معلوم ہوا، تو اسے دکان میں رکھ چھوڑا کہ شاید کوئی خرید لے، کوئی دریافت کرتا کہ دکان میں کیا کیا ہے، تو وہ یہ فقرہ کہہ دیتا

आना न पाई निरी पाँव घिसाई

व्यर्थ दौड़-धूप और लाभ-रहित मेहनत और कठिन परिश्रम के अवसर पर प्रयुक्त

आँधी आए न मेंह बुढ़िया पेंठ से न रहे

उस अवसर पर प्रयोग किया जाता है जब कोई व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में अपनी आदत या काम से नहीं रोकता है

आप आए भाग आए

आप के आने से भाग खुल गए, आप का आना मंगलकारी है

आप ऐसे आप वैसे आप ने चुराए छा टके पैसे

चापलूसी जिसमें उपहास अथवा मूर्ख बनाने का पहलू निकले

आप बाबू मँगते बाहर खड़े दरवेश

जिसके पास कुछ न हो दूसरे को क्या दे सकता है

आप भले अपना घर भला

अपना घर स्वर्ग है, लोगों से मेल जोल रखने की निंदा और अलग थलग जीवन बसर करने की प्रशंसा के अवसर पर प्रयुक्त

आप भले तो जग भला

जो ख़ुद अच्छा हो वह दूसरों को भी अच्छा समझता है

आप भूले उस्ताद को लगाए

अपनी भूल-चूक दूसरों के सर थोपने के अवसर पर प्रयुक्त

आप बीती कहूँ कि जग बीती

अपने पर जो गुज़री है वह सुनाऊँ या दूसरे की सुनी सुनाई बयान करूँ

आप बीती कहूँ या जग बीती

अपने ऊपर जो बीती है वह सुनाऊँ या दूसरों की सुनी-सुनाई का वर्णन करूँ

आप चले भुइँ शेख़ी गाड़ी पर

डींगें मारने वाले के लिए व्यंगात्मक तौर पर कहा जाता है

आप डाल डाल में तो मैं पात पात

मैं आप से ज़्यादा चालाक, चालिया, होशियार और अक़्लमंद हूँ

आप डाल डाल तो मैं पात पात

मैं आप से अधिक चालाक, चालबाज़, होशियार और बुद्धिमान हूँ

आप धाप अपना ही मुँह अपना ही हाथ

अपने ही फ़ायदे पर नज़र है दूसरे के नुक़्सान या फ़ायदे का ख़याल तक नहीं, हर एक को अपनी अपनी फ़िक्र है

आप दूबे बहमनाँ जजमान डुबूए

अपने साथ दूसरों का भी नुक़्सान किया

आप डूबे तो डूबे और को भी ले डूबे

स्वयं को हानि पहुँचाने के साथ दूसरों को भी हानि पहुँचाई

आप डूबे तो जग डूबा

अपना दुख बहुत बड़ा लगता है

आप हारे बहू को मारे

जुए में पैसा हार आए और आकर पत्नी को मारते हैं

आप ही बी बी, आप ही बाँदी

वह व्यक्ति जो स्वंय ही सब काम करे और कोई दूसरा हाथ बटाने वाला ना हो

आप ही नाक चोटी गिरफ़्तार है

बड़ी सम्मान वाले हैं, लज्जाशील हैं, अपनी सम्मान पर मिटे बैठे हैं, आत्म-सम्मान वाले हैं

आप ही थूका आप ही चाटा

बाद में वही काम करना, पहले जिस को बुरा समझना

आप जानें आप का ईमान

इस (मुआमले) का दार-ओ-मदार आप के ईमान और नीयत पर है

आप जानें और आप का ईमान

यह (मामला) आपके विश्वास और संकल्प के लिए उत्तरदायी है

आप जानें और आप का काम

मैम समझा चूका आप स्वयं अच्छे भले के लिए उत्तरदायी हैं, समझाने की हद हो गई अब जैसा आपके मन में आऐ कीजिए (कार्य से छुटकारा होने के अवसर पर प्रयुक्त)

आप जानें का काम

मैं सावधान कर चुका अब आप स्वंय भले-बुरे के उत्तरदायी हैं, समझाने की हद हो गई अब जैसा आप के मन में आए कीजिए (काम के उत्तदायित्व से मुक्त होने के अवसर पर प्रयुक्त)

आप का बायाँ क़दम लीजिए

किसी की चालाकी षड्यंत्र अथवा चतुराई के अवसर पर प्रयुक्त, पर्यायवाची: आप बड़े चालाक हैं

आप का नौकर हूँ बैगनों का नौकर नहीं

आप के कथन के समर्थनऔर प्रसन्नता से आशय है झूट-सच से कुछ काम नहीं

आप काज महा काज

अपना कार्य जितना अच्छा अपने हाथ से होता है उतना दूसरे के हाथ से नहीं होता, अपना काम स्वयं ही करने से ठीक होता है

आप काज, महा काज

स्वयं का कार्य दूसरों के कार्य से पहले होता है, प्रत्येक व्यक्ति पहले अपना कार्य करता है, फिर दूसरों का

आप खाए बिल्ली को बताए

चालाक आदमी या लड़का, स्वयं मिठाई-पूड़ी हड़प जाए और दूसरे का नाम ले कि उसने खाया

आप ख़ुरादे आप मुरादे

जो केवल अपनी ही चिंता या फ़िक्र करे और किसी से कोई वास्ता न रखे

आप को हप हप और को थू थू

यह किसी की आत्म-मुग्धता पर बोलते हैं

आप मरे संसार नास

अपना सुख एवं लाभ सर्वप्रथम है

आप मियाँ मँगते बाहर खड़े दर्वेश

जब ख़ुद ही निर्धन एवं कंगाल हैं तो औरों को क्या देंगे, अपनी सहायता कर नहीं पाते दूसरों की सहायता क्या करेंगे

आप मियाँ सूबेदार घर में बीवी झोंके भाड़

निर्धलता की स्थिति में अमीराना ठाठ बनाने या डींग हाँकने वाले व्यक्ति के लिए प्रयुक्त

आप मियाँ सूबे-दार, घर में बीवी झोंके भाड़

यह कहावत उस अवसर पर कही जाती है जब घर की हालत तो ख़राब हो और बाहर शेख़ियाँ मारते फिरें और बाहर अच्छे अच्छे कपड़े पहनें

आप मूए तो जग मुवा

स्वयं मर गये तो कहिये कुल दुनिया मुर गई किसी बात से कुछ उद्देश्य नहीं

आप मुए तो जहान मुआ

अपना सुख और लाभ सब से पहले

आप ने उड़ाई है हम ने भून भून खाई है

हम तुम से ज़्यादा चालाक हैं, तुम्हारी चालों को ख़ूब समझते हैं

आप ने उड़ाईं हम ने भून भून खाईं

हम तुमसे अधिक चालाक हैं, तुम्हारी चालों को ख़ूब समझते हैं

आप राह राह, दुम खेत खेत

बाहरी रूप से निश्छल और निरीह है और भीतर से चालाक और धूर्त, बाहर से अच्छा भीतर से बुरा

आप रहें उत्तर काम करें पच्छिम

शुरू से काम न करने वाले से के लिए प्रयुक्त

आप रूप महारूप

ईश्वर की अभिव्यक्ति सभी अभिव्यक्तियों में प्रमुख है, मनुष्य पर्दे के पीछे दैवीय अभिव्यक्ति का प्रकटीकरण है

आप से आए तो आने दो

जो वस्तु स्वयं से या बिना माँगे मिले ले लेनी चाहिए, इस अवसर पर प्रयोग जहाँ किसी का माल बिना प्रयत्न के हाथ लगे और लेने वाला लालच से लेने का निश्चय करे

आप से अच्छा ख़ुदा

स्वयं से अधिक प्रिय ईश्वर को छोड़कर कोई नहीं, स्वयं ही सबसे प्रिय होती है

आप से गया जग से गया

जो वस्तु अपने हाथ से गई वह मानो संसार में नहीं रही, उसकी परवाह या दुख नहीं होना चाहिए

आप से ख़ूब ख़ुदा

अपने अस्तित्व से अधिक प्रिय ईश्वर के अतिरिक्त कोई नहीं, अपना अस्तित्व सब से अधिक प्रिय होता है

आप सुखी तो जग सुखी

अपने आप को सुख है तो मानो ज़माने भर को सुख है

आप सुखी तो सब सुखी

यदि मनुष्य स्वयं अच्छा हो, तो दुनिया उसके साथ अच्छा व्यवहार करती है

आप सूबेदार , बीवी झोंके भाड़

ऐसा व्यक्ति जो सामर्थ्य के बावजूद पत्नी के शांति और संतोष का ध्यान ना रखे, (स्त्रियों की भाषा में निखट्टू)

आप स्वार्थी सदा दुखी पर स्वार्थी सदा सुखी

स्वार्थ में हानि है और स्वार्थरहित होन में आराम है

आप तो गर्म कर के शर्बत पिलाते हैं

पहले किसी का दिल दुखाना और फिर आराम देना, क्रोध दिला कर फिर मीठी-मीठी बातें करना

आप ज़िंदा जहान ज़िंदा आप मुर्दा जहान मुर्दा

अपनी ही साँस का सब कुछ है, जब अपनी आँख बंद हो गई तो हुआ न हुआ सब बराबर है, अपना सुख और लाभ दूसरों से ज़्यादा महत्वपूर्ण है

आप ज़िंदम जहान ज़िंदम

(अवामी) लोग अपने फ़ायदे या आराम को दूसरों के फ़ायदे या आराम से ऊपर रखते हैं (स्वार्थी व्यक्ति के बारे में प्रयुक्त)

आपा तजे सो हर को भजे

जो स्व का त्याग करे और स्वयं को मिटा दे वो ईश्वर की पूजा कर सकता है

आपन भल हो तो जगत प्रत कारी

आप स्वयं ही भले हो तो सब लोग आप से मोहब्बत रखेंगे

आरा बाश, तेशा मुबाश

आप भी खा दूसरो को भी दे

आरे सर पर चल गए तो भी मदार ही मदार

तकालीफ़-ओ-मसाइब बर्दाश्त करने पर भी अपने इरादे और अक़ीदे से बाज़ नहीं आए

आरती के वक़्त सो गए माल भोग के वक़्त जाग उठे

उस व्यक्ति के बारे में बोलते हैं जो अपने मतलब के समय उपस्थित हो जाए और परिश्रम या कार्य के समय कन्नी काट जाए, काम चोर नवाले हाज़िर

आस बिगानी वो तके जो जीवित ही मर जाय

दूसरों के आश्रित रहने की अपेक्षा से तो मर जाना अच्छा

आस बिरानी जो तके वो जीवित ही मर जाए

पराया भरोसा करने में पूर्णतया हानि है या जीवित मृत्यु के निकट होना है

आस बिरानी वो तके जो जीवित ही मर जाए

पराया भरोसा करने में पूर्णतया हानि है या जीवित मृत्यु के निकट होना है

आस का नाम दुनिया है

उम्मीद के भरोसे पर दुनिया का कारोबार चलता है

आस करे तो पास आवे

जब कुछ उम्मीद हो तो आज्ञा का पालन करे

आस पास बरसे दली पड़ी तोसे

अन्य लाभ उठाएँ और पात्र महरूम रहें, दूसरों को लाभ पहुँचे और अपने मुँह तकें

आस पास बरसे दिल्ली पड़ी तरसे

جس سے دوسروں کو فائدہ ہو اور اپنے محروم رہیں، اس کی نسبت بولتے ہیں

आसा जैसे निरासा मरे

आशावान आशा के आधार पर जीता है और निराश मरता है

आसा जिए निरासा मरे

امید سے دل کو سہارا ملتا ہے، اور نا امید مرتا ہے

आसा मरे निरासा जिए

प्रतीक्षा करने वाले का जीवन प्रतीक्षा के सदमे से कड़वा हो जाता है इस से तो प्रतीक्षा ना करने वाला अच्छा कि उस को प्रतीक्षा का सदमा नहीं उठाना पड़ता

आसक्ती गिरा कुँवें में कहे अभी कौन उठे

किसी घोर आलसी आदमी पर उपहास के लिए बोला जाता है

आसौज बयाला दिन धूप रात पाला

इस महीने में दिन को गर्मी और रात को ठंड होती है

आश्राई करना आसान निबाहना मुश्किल

दोस्ती पैदा कर लेना आसान बात है, मगर दोस्ती के कर्तव्यों का पालन करना कठिन है

आश्नाई मुल्ला ता-सबक़

ग़रज़ निकल जाने के बाद बेताल्लुक़ी, उस शख़्स के लिए बोला जाता है जो मतलब पूरा होने के बाद अजनबी बन जाए

आश्ती और जान जी का डर

मोहब्बत में किसी बात का भय

आसकती गिरा कुँवें में कहे अभी कौन उठे

(व्यंग के रूप में) सुस्त और आलसी आदमी को निंदित करने के अवसर पर प्रयुक्त

आसकती गिरा कुँवें में कहे यहीं भले

(व्यंग के रूप में) सुस्त और आलसी आदमी को निंदित करने के अवसर पर प्रयुक्त

आसमान का थूका मुँह पर आता है

उच्च स्तर पर किसी भी प्रकार का हमला करने से निम्न स्तर की अपमान होती है, पवित्र को बदनाम करने वाला ख़ुद ही बदनाम होता है

आसमान खा गया या ज़मीन निगल गई

यह वस्तु कहाँ ग़ायब हो गइ

आसमान की चील चौखट की कील से ख़ुदा बचाए

हर हानि पहुँचाने वाले और लूटने वाले के लिए उपयोग किया जाता है

आसमान की चील ज़मीन की असील

आकाश में उड़ती हुई चील जब तक किसी ने उसे देखा नहीं अच्छे वंश की ही चिड़िया मानी जाएगी

आसमान ने डाला ज़मीन ने झेला

ताक़तवर और मज़बूत के मुक़ाबले में ज़ोर नहीं चलता उस की सहनी ही पड़ती है

आसमान पर चाँद निकला सब ने देखा

उस अवसर पर प्रयुक्त है जहां यह कहना हो कि यह कोई ढकी छिपी बात नहीं, इस बात से सब अवगत हैं, इस मुद्दे को छिपाया नहीं जा सकता

आसमान पर क्यूँ ढेले फेंकता है

क्योंं कृतघ्नता करता है, क्यों नाशुकरी करता है

आसमान से गिरा बबूल में अटका

एस समस्या से निकलते ही दूसरे समस्या में फँस गया, एक मुसीबत से निकलते ही दूसरे मुसीबत में फँस गया, एक रुकावट दूर हुई थी कि दूसरी रुकावट घटित होगई

आसमान से गिरा खजूर में अटका

किसी काम का पूरा होते होते रह जाना

आस्तीन में साँप पाला है

ऐसे व्यक्ति से भलाई की है जो समय पर शत्रुता करेगा

आता आओ जाता जाओ

(आने जाने वाले पर) कोई प्रतिबंध नहीं, कोई रोक-टोक नहीं, कोई परवाह नहीं आए या जाए

आता आओ जाता जाओ, आता आए जाता जाए

जिसकी इच्छा है आए जिसकी इच्छा है जाए

आटा दाल उल्लू भी है

अच्छाइयों के साथ बुराइयां भी हैं, अच्छी चीज़ों के साथ-साथ बुरी चीज़ें भी हैं

आता है हाथी के मुँह, जाता है च्यूँटी के मुँह

रोग अर्थात बीमारी के आने में देर नहीं लगती परंतु जाती धीरे धीरे है

आटा है न पाटा , मुर्ग़ का है पर काता

सामर्थ्य अथवा सामान नहीं था तो ये कोलाहल क्यों किया

आता हो तो हाथ से न दीजे, जाता हो तो उसका ग़म न कीजे

मिलती चीज़ को छोड़ना और गई हुई चीज़ पर पछतावा करना न चाहिये

आता जाता कुछ नहीं

कुछ नहीं जानता, अनपढ़ है

आटा कठौती में

मतलबी आदमी के मुताल्लिक़ कहते हैं जिसे हर वक़्त अपने मतलब की सूझती है

आता न छोड़िये , जाता न मोड़िये

जो हाथ लगे ले लीजिए जो बस का ना हो उसे जाने दीजिए

आता न छोड़िये , जाते का ग़म न कीजिये

आए तो सब आने दो जाए तो कोई चिंता नहीं

आटा नहीं तो दलिया जब भी हो जाएगा

थोड़ा-बहुत लाभ हो जाएगा

आटा निबड़ा बूचा सटका

आटा ख़तम हुआ और कुत्ते ने अपना रास्ता लिया

आते भले न जाते

आना जाना बराबर है, न आने से फ़ायदा न जाने से

आते जाते में न फँसी तो क्यूँ फँसारे कव्वे

जहाँ को बुद्धिमान व्यक्ति किसी मामले में फँस जाए और साधारण बच जाए तो कहते है

आटे का चराग़ घर रक्खूँ चूहा खाए, बाहर धरूँ काैवा ले जाए

हर तरह से कठिन है, किसी भी हालत में सुख नहीं

आते का मुँह देखती थी जाते की पीठ

प्रतीक्षा की बेताबी ज़ाहिर करने के अवसर पर प्रयुक्त

आते का नाम सहजा , जाते का नाम मुक्ता

ना आने की प्रसन्नता और ना जाने का दु:ख, ना आते को रोकना ना जाते को पकड़ना

आते-आते आएगा

رفتہ رفتہ آئے گا، جلدی نہ کرو

आठ बार नौ त्योहार

हिंदुओं में त्यौहार बहुत होते हैं, हर महीने दो-चार व्रत या त्यौहार पड़ जाते हैं, उस पर भी यह कहावत कही जाती है

आठ गाँव का चौधरी और बारह गाँव का राव, अपने काम न आव तो ऐसी तैसी में जाव

चाहे कैसा हो अमीर हो, ओगर अपने कान न आया गो उसका होना न होना बराबर है

आठ गाँव का चौधरी और बारह गाँव का राव, अपने काम न आए तो ऐसी तैसी में जाओ

कोई कैसा ही धनवान अथवा धनी हो जब अपना काम उस से ना निकले तो ऐसे धन-धान्य से क्या लाभ, जिस से कोई लाभ ना हो उस का होना ना होना बराबर है

आठ जोलाहे नौ हुक़्क़ा, तिस पर भी थुकम थुक्का

आवशयकता से अधिक सामान होने के बावजूद झगड़ा होने के अवसर पर प्रयुक्त

आठ जोलाहे नौ हुक़्क़ा, उस पर भी धक्कम धुक्का

आवश्यकता से अधिक सामान होने पर भी झगड़ा

आठ मिले काठ, तुलसी मिले जात

आठ तरह के काठ क्या मिल गए समझ लो जाट मिल गया, जाटों पर फब्ती

आठों पहर काल का डंका सर पर बजता है

मृत्यु हर समय सर पर खड़ी है

आती बहू जनम्ता पूत

पत्नी के आने पर और पुत्र का जन्म होने पर उनकी शिक्षा और प्रशिक्षण प्रारंभ कर देनी चाहिए

आती भली कि जाती

थोड़ी चीज का न मिलने से मिलना और न लेने से लेना अधिक अच्छा है

आती है हाथी के पाँव जाती है च्यूँटी के पाँव

بیماری کے آنے میں دیر نہیں لگتی ہے، اور جاتی آہستہ آہستہ ہے

आतिश का जला पानी को दौड़े

रुक : आग का जिला पानी को दौड़े

आत्मा की आँच बुरी होती है

माता पिता प्रेम से विवश होते हैं

आत्मा में पड़े तो परमात्मा की सूझे

एक भूखा आदमी भगवान के बारे में सोच भी नहीं सकता, पेट के भरने पर ही ईश्वर की ओर ध्यान दिया जाता है

आतूँ को आने दो, जातूँ को जाने दो

جس کی مرضی ہے آئے جس کی مرضی ہے جائے

आव देखा न ताव

بے محل، بے موقع، جلدی سے، بے سوچے سمجھے، بےسمجھے بوجھے

आव जा घर तुम्हारा खाना माँगे दुश्मन हमारा

झूठा सत्कार बहुत करना मगर ख़र्च से कतराना

आवाज़-ए-सगाँ कम न कुनद रिज़्क़-ए-गदा रा

बुरे व्यक्ति के कारण किसी की रोज़ी कम नहीं होती

आवत हाई जावत संतोख

आने पर ख़ुशी हासिल होती है चला जाए तो सब्र करना चाहिये

आवे हाथी की चाल , जावे च्यूँटी की चाल

रोग आते देर नहीं लगती और जाता देर में है

आवे का आवा औंधा है

सब का एक हाल है

आवे का आवा बिगड़ा है

पूरा ख़ानदान बिगड़ा हुआ है, कुल गिरोह ख़राब है

आवे न जावे बृहस्पत कहलावे

आता-जाता कुछ नहीं और योग्य प्रसिद्ध है

आवली टले बरसातों जिये

मुसीबत दूर होने से बहुत लोगों के लिये आराम हो जाता है

आया आदमी आया रिज़्क़ गया आदमी गया रिज़्क़

जो कुछ भी अतिथि या नवजात शिशु के भाग्य में है वह प्रकृति द्वारा आतिथेय या मेज़बान को मिल जाता है

आया बंदा आई रोज़ी, गया बंदा गई रोज़ी

दुनिया में आदमी से ही सब काम लगा है

आया कातिक उठी कुतिया

कातिक के महीने में कुतिया मस्त हो जाती है

आया कर तो जाया कर टट्टी मत खड़काया कर

आने जाने की तुझे अनुमति है मगर दरवाज़ा मत खटखटा

आया कुत्ता खा गया तू बैठी ढोल बजा

निश्चिंत एवं लापरवाह व्यक्ति के प्रति कहते हैं

आया मंगसेर जाड़ा रंग सेर

माघ में ठंड अपने यौवन पर होती है

आया न घाव वैद मँगाओ

معمولی نقصان پر واویلا کرنا

आया पैसा आई मत, गया पैसा गई मत

दौलत इंसान को नई नई बातें समझा देती है और ग़रीबी उस की मत मार देती है

आया रमज़ान भागा शैतान

भले मनुष्य के आने पर बुरा मनुष्य भाग जाता है

आया तो नोश नहीं फ़रामोश

कुछ मिल गया तो खा लिया अन्यथा उपवास ही से पड़ रहे

आया तो नोश नहीं तो फ़रामोश

बहुत आत्मसंतोषी होना, कुछ मिल गया तो खा लिया वर्ना भूखे ही सो गए

आया तो नोश नहीं वर्ना ख़ामोश

बहुत आत्मसंतोषी होना

आयंदा इख़्तियार ब-दस्त-ए-मुख़तार

किसी को समझाते एवं सदुपदेश देते समय कहते हैं, हम ने समझा दिया आगे तुम्हारी इच्छा मानो या न मानो

आयत-ओ-हदीस के बराबर है

व्यंगात्मक, बिल्कुल सत्य, बिल्कुल सही

आयतवार तब जानिये जब हटी लीपें बानिये

वास्तव में छुट्टी उस दिन समझना चाहिये जब बनिये दुकान की लिपाई करें

आज़ादी ख़ुदा की ने'मत है

आज़ादी या स्वतंत्रता से बढ़कर कोई वस्तु नहीं, स्वतंत्रता ईश्वर का वरदान है

आज़्मूदा रा आज़्मूदन जहल अस्त

परखे हुए को परखना अज्ञानता है, किसी को एक बार परख कर फिर परखना मूर्खता है

अब जुग टूटा, पौ मारी जाएगी

चौसर की दो गोटें जब तक एक ख़ाने में थीं पिट ना सकती थीं अब ये साथ (जुग) टूट गया

अब के मुड़िहें हो राजा

जब कोई आदमी यह दंभ करे कि उसके बिना काम चल ही नहीं सकता तब कहते हैं

अब के मुड़िए हो राजा

समय रहते संभल जाने वाला आराम से रहता है

अब खाई तो खाई अब खाऊँ तो राम दुहाई

जो कुछ हुआ सो हुआ, भविष्यत् ना होगा

अब की बात अब के साथ जब की बात जब के साथ

आगे जैसा होगा देखा जाएगा, इस समय तो परिस्थिति के अनुसार ही हमें काम करना होगा

अब की बचे तो घर घर नचे

अगर नर्द एक घर बचे तो बाज़ी जीत ली, ख़ानदान में एक व्यक्ति के क़ाबिल होने से सब को फ़ायदा होता है

अब की छानी की निराली बातें

नए युवा अजीब-अजीब बातें करते हैं, वर्तमान पीढ़ी के छोकरों की बातें समझ में नहीं आतीं

अब पछताए क्या होत जब चिड़ियाँ चुग गईं खेत

अवसर के निकल जाने पर बाद में पछताना व्यर्थ है

अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत

अवसर हाथ से निकल गया तो पछताने से कुछ नहीं होता

अब रंग लाई गिलहरी

अब असल हक़ीक़त सामने आई, अब गुण खुले

अब सतवंती हो कर बैठी लूट खाया संसार

आजन्म बुरे कर्म किए ओर अब साधु-संत बन गए

अब से आए घर से आए

जो हुआ सो हुआ, आगे से नहीं होगा

अब तो हूँ मैं ऊनी ऊनी जब होंगी सब से दूनी

अभी क्या है, अभी तो थोड़ी ख़राबियाँ हैं, आगे चल कर खुल खेलेगी

अब वो पानी मुलतान बह गया

औसर हाथ से जाता रहा, समय गुज़र गया, स्थिती बदल गई

अभी छटी का दूध नहीं सूखा

अभी नादान बच्चे हैं, कुछ अनुभव नहीं रखते

अभी दिल्ली दूर है

अभी तो बहुत रास्ता तै करना है, बहुत काम करने को पड़ा है

अभी एक बूंट की दो दाल नहीं हुए हैं

इसका यह अर्थ भी निकाला जा सकता है कि अभी सब मिल कर ही रहते हैं, अलग नहीं हुए

अभी कल की बात है

थोड़े समय पदले की घटना है

अभी मुँह दाबिये चुल्लू भर छटी का दूध निकल पड़े

अभी नादान बच्चे हैं, कुछ अनुभव नहीं रखते

अभी मुँह की दाल नहीं झड़ी

अभी नादान बच्चे हैं, कुछ अनुभव नहीं रखते

अभी सेर में से पौनी भी नहीं कती है

अभी कुछ भी काम नहीं हुआ

अभी तो बेटी बाप ही के घर है

अभी तक मुआमला क़ाबू से बाहर नहीं हुआ, अभी अवस्था में सुधार संभव है

अभी तो मुँह की दाल भी नहीं झड़ी

जब कोई बालिग़ होते हुए भी मूर्खता की बात करे तो व्यंग में कहते हैं

अभी तो तुम माँ का दूध पीते हो

अगर कोई कम आयु वाला व्यक्ति बढ़ कर बात करे तो कहते हैं

अभी तो तुम्हारे दूध के दाँत भी नही टूटे

अभी तुम्हें अनुभव नहीं है, अभी बच्चे हो, अभी नासमझ हो, अबोधता या लड़कपन का ज़माना है

अबरा की जोरू सब की भावज

निर्धन की हर वस्तु को हर कोई बिना किसी संकोच के प्रयोग करता है

अच्छे हैं पर ख़ुदा काम न डाले

जब कोई आदमी देखने में भला पर व्यवहार में बिल्कुल उसके विपरीत हो तब उसके लिए व्यंग्य में यह कहावत कहते हैं

अच्छे-बुरे में चार अँगुल का फ़र्क़ है

आँख और कान में अर्थात देखने और सुनने में केवल चार अँगुल का अंतर है, कान की सुनी हुई बात सही भी हो सकती है और ग़लत भी इस लिए जब तक किसी बात को स्वयं अपनी आँख से देख न लें तब तक केवल सुनकर उस पर विश्वास न करें

अच्छा किया रहमान ने, बुरा किया शैतान ने

अच्छी बात ईश्वर की तरफ़ से है और बुरी शैतान की तरफ़ से

अच्छे की सोहबत बैठे खाए नागर पान , बुरे की सुह्बत बैठे कटाए नाक और कान

अच्छी सोहबत मुफ़ीद है और बरी सोहबत मुज़िर, जैसी संगत वैसा ही इस का फल मिलता है

अच्छी भई गुड़ सत्तरह सेर

जब कोई वस्तु बहुत सस्ती या आसानी से मिल रही हो तब कहा जाता है कि बहुत अच्छा है, लूटो खाओ, मौज उड़ाओ

अच्छों के अच्छे ही होते हैं

अच्छे आदमी की संतान और वंशज भी अच्छे ही होते हैं

अच्छों की सभी अच्छी होती है

हसीनाओं या अमीरों की बुरी बात को भी लोग अच्छा ही कहते हैं

अच्छे घर बै'आना दिया

जब कोई अपने से अधिक बलवान के साथ झगड़ बैठे और उलझन में पड़ जाए तब यह कहावत कहते हैं

अद्धी की हाँडी भी ठोंक बजा कर लेते हैं

किसी बड़े मुआमले में बे सोचे समझे फ़ैसला नहीं किया जाता

अधेला न दे अधेली दे

कम घाटा से बचने के लिए बड़ा घाटा उठाने वाले के लिए प्रयुक्त है

अध-जल गगरी छलकत जाए

ख़ाली बर्तन बहुत आवाज़ करते हैं, ओछा आदमी थोड़ा सा सक्षम होने पर इतराने लगता है

ऐ तेरी क़ुदरत के खेल, छछूँदर भी डाले चमेली का तेल

बद-सूरत एवं भद्दा व्यक्ति बनाव-श्रिंगार करना

अफ़ीम या खाए अमीर या खाए फ़क़ीर

अमीरों को शौक़ से या आदत के तौर पर अफ़ीम खाने के लिए रुपए की कमी नहीं और फ़क़ीर को माँग कर खा लेने में लाज नहीं होती

अफ़ीमी तीन मंज़िल से पहचाना जाता है

किसी प्रकार की लत रखने वाले की वेशभूषा छिपी नहीं रहती

अफ़लातून के नाती बने फिरते हैं

अपनी बुद्धि पर बड़ा घमंड करते हैं, बड़े अहंकारी हैं

अफ़्सोस दिल गढ़े में

किसी वस्तु को देख-देख के दिल ललचाए परंतु बस न चले, मनचाही न कर पाना

अफ़्सोस दिल गढ़े में चक्की का पाट गले में

अर्थात प्रेम में पड़ गए हैं, किसी के दुखी प्रेमी हैं

अगड़म-बगड़म काठ का ठम्बर

फ़ालतू चीज़ों का ढेर, टूटी-फूटी लकड़ी के तख़्तों एवं शहतीरों का ढेर, कोई काम की चीज़ नहीं

अगर चे गंदा मगर ईजाद-ए-बंदा

रुक ' ईजाद बंदा, अगरचे गंदा ' जो ज़्यादा मुस्तामल है

अगर कोह टले तो टले, न टले फ़क़ीर

पहाड़ भले ही टल जाए पर फ़क़ीर नहीं टलता, वह भीख़ लेकर ही दरवाज़ा छोड़ता है

अग्गम बुद्ध बानिया, पच्छम बुद्ध जाट

बनिया 'अक़्ल में तेज़ होता है और जाट बुद्धू होता है

अघाना बगुला, पोठिया तीत

पेट भरा होने पर कोई भी वस्तु अच्छी नहीं लगती

अघन चूल्हे अधन

: अघिनि के महीने में दिन इतना छोटा होता है कि अधिन गर्म होते होते तमाम होजाता है

अगिन के बच्चे खजूर में बताना

कुछ का कुछ बताना, ज़मीन को पूछने पर आसमान की बताना

अगला गिरा पिछला होशियार

एक को किसी बात से हानि पहुँचे तो दूसरा इससे सीख लेता है

अग्ला गिरा पिछ्ला हुशियार

एक को किसी बात से हानि पहुँचे तो दूसरा इससे सीख लेता है

अगला करे पिछले पर आवे

किसी काम की भलाई-बुराई उन लोगों पर ही आती है जो उसे अंत में करते हैं

अगला लीपा दे बहा अब लीपा आगे ला

पिछला उपकार भुला कर नए उपकार की इच्छा, जब कोई व्यक्ति गुज़रे उपकारों पर मिट्टी डाल कर नए उपकार चाहता है तो इस स्थान पर स्त्रियाँ व्यंग के रूप में कहती हैं कि ये तो वही उदाहरण हुआ कि अगला लीपा दे बहा अब लीपा आगे ला

अगले आहल भी जाते रहे

लाभ की आशा में उल्टा हानि उठाया, पहली बनाई सूरत अभी बिगड़ गई

अगले भए पिछले, पिछले हुए प्राधान

पूराने चाहने वाले या नौकर आदि पीछे छोड़ दिये गए और नए लोगों को वरीयता दी जाने लगी

अगले को घास न पिछले को पानी

स्वार्थी या कंजूस के लिए कहावत है कि वह किसी को कुछ नहीं देता

अगले ने किया पिछले पर आई

बड़े ने ग़लती की छोटे ने सज़ा पाई, किया किसी ने थप गई किसी के सर

अगले पानी पिछले कीच

काम में शीघ्रता करने वाले लाभ में रहते हैं, पहले को पानी पिछले को कीचड़, जो समय पर पहुँच जाता है वही मज़े में रहता है

आगरी न खागरी निरा लाड ही लाड

बिना कुछ दिए केवल बातों में टालना

अहार चूके वो गए ब्योहार चूके वो गए दरबार चूके वो गए सुसराल चूके वो गए

जिस ने ख़ौर-ओ-नोश में सौदागरी में हाकिम के सामने या ससुराल में तकल्लुफ़ से काम लिया या ग़लती की इस ने नुक़्सान उठाया

अहीर देख गड़रिया मस्ताना

यह ऐसे निर्धन व्यक्ति के बारे में कहा जाता है जो धनवान की नक़ल करे

अहीर गाड़ी जात गाड़ी, नाई गाड़ी कुजात गाड़ी

जिस का काम उसी को साझे अगर नाई अहीर की नक़ल करे तो ठीक नहीं

अहीर का क्या जजमान, लप्सी का क्या पकवान

जैसे लपसी कोई बहुत अच्छा पकवान नहीं वैसे ही अहीर भी कोई बहुत अच्छा जजमान नहीं क्योंकि वह अच्छी दक्षिणा नहीं दे सकता

अहीर से तब गुन निकले बालू से जब घी

अहीर में गुण का होना उतना ही कठिन है जितना रेत में घी, दोनों बातें असंभव हैं

अहमद की बला महमूद के सर

ग़लती किसी की दोषारोपण किसी से

अहमद की दाढ़ी बड़ी या महमूद की

उस अवसर पर प्रयुक्त जहाँ यह उद्देश्य हो कि बिना लाभ के चर्चा-परीचर्चा से क्या हासिल, काम से काम है बहस से क्या मतलब

अहमद की पगड़ी महमूद के सर

बेतुका काम, नियम के विरुद्ध या अनियमित और अव्यवस्थित काम करने की जगह प्रयुक्त है

ऐ बाद-ए-सबा ईं हमा अवुर्दा-ए-तुस्त

अब पता चला कि यह सारा फ़साद तुम्हारा ही (या उनका ही) उठाया हुआ है

ऐ बसा आरज़ू कि ख़ाक शुदा

हाय अफ़सोस, ऐसी कितनी ही इच्छाएँ पूरी न हुईं

ऐंचन छोड़ घसीटन में पड़ना

एक विपत्ति तो थी ही दूसरी उस से बढ़ के आ पड़ी

ऐंचन छोड़ घसीटन में फँसना

एक विपत्ति तो थी ही दूसरी उस से बढ़ के आ पड़ी

ऐसा जैसे रुपे के टके भुना लिये

खरा और मामले का अत्यंत साफ़

ऐसा गया जैसे महफ़िल से जूता

तुरंत छुप गया और ग़ायब हो गया

ऐसा कहना जैसे रूपे के टके भुना लिये

सच्चा और मामले का बिलकुल साफ़

ऐसा कहना पक्का कि बासी थक्का

इतना पकाने की आवश्यकता ही नहीं कि जो दूसरे दिन के लिए रखा रहे

ऐसा वैसा भाता नहीं, ख़्वान मलूका आता नहीं

ऐसे अवसर पर बोलते हैं जब किसी व्यक्ति को जो भाग्य है वह पसंद न हो और जो दिल चाहता है वह भाग्य न हो

ऐसे आदमी के दीदे में पेच पसा दीजिये

दिखने अधिक चंचल और ढीट है, उसकी आँखें फोड़ दो तो दिल न दुखे

ऐसे ऐसे मदारी हम ने बहुत चंगे किए हैं

उन जैसे अत्यधिक व्यक्तियों को हम ने ठीक कर दिया है

ऐसे ऐसे तो मेरी जेब में पड़े रहते हैं

मेरे सामने उनकी कोई वास्तविकता नहीं, मैं उनकी तुलना में अत्यधिक चालाक हूँ

ऐसे गए जैसे गधे के सर से सींग

किसी जगह से चुपचाप उठकर चले आना

ऐसे ही तुम ने सोंठ भेजी है

जब कोई बेकार में या बेवजह माँगे तो कहते हैं

ऐसे लड़के बहुत खिलाए हैं

दाँव या बहलाने फुसलाने में आने वाले नहीं

ऐसे पर तो ऐसी काजल दिए पर कैसी

सहज में तो इतनी सुंदर! फिर काजल लगाने पर न जाने कितनी सुंदर लगेगी

ऐसे ऊत रिवाड़ी जाएँ आटा बेच के गाजर खाएँ

ऐसे मूर्ख भला रेवाड़ी जाकर क्या करेंगे जो आटा बेच कर गाजर खाते हैं

ऐसी बहू सयानी जो पैंचा माँगे पानी

बहू ऐसी होशियार है कि पानी भी माँगती है तो उधार (इसलिए कि दूसरे लोग उससे कभी कोई वस्तु मुफ़्त में न माँगे और यदि माँगें भी तो तुरंत लौटा दिया करें)

ऐसी होती कातनहारी, तो काहे फिरती मारी-मारी

ऐसी गुणवान या होशियार होती तो क्यूँ मारी-मारी फिरती

ऐसी क्या क़ाज़ी जी की गधी चुराई है

क्या हम ने कुछ भूल की है, कोई अपराध या पाप नहीं किया तो फिर क्या डर है

ऐसी क्या क़ाज़ी की गधी चुराई है

क्या मैंने किसी का कुछ बिगाड़ा है जो तुम मुझे बिना किसी कारण के धमकी दे रहे हो

ऐसी क्या तेरे ही तले गंगा बहती है

किसी एक लड़ाका स्त्री का दूसरी से कहना कि तू ही बड़ी पाक-साफ़ है और तो सब गंदे हैं अथवा तू ही बड़ी सच्ची है और तो झूठे हैं

ऐसी मेख़ मारी कि पार निकल गई

बहुत चोट दी, बहुत हानि पहुँचाया

अजगर करे न चाकरी पंछी करे न काम, दास मलूका यूँ कहे सब के दाता राम

ईश्वर सब को भोजन देता है, साँप नौकरी नहीं करता और पंछी काम नहीं करते मगर सब को ईश्वर भोजन देता है

अजगर के दाता राम

ईश्वर सब को भोजन देता है, ईश्वर अजगर जैसे प्राणी को भी भोजन देता है जो एक स्थान पर अचल हो कर पड़ा रहता है

अजीरन को अजीरन ही ठेले, नहीं तो सर चोहट्टे खेले

शक्तिशाली का शक्तिशाली ही सामना कर सकता है कमज़ोर करे तो जान से जाए

अकाल नहीं काल है

असामयिक मृत्यु अच्छी नहीं होती

अकास बाँधें , पत्ताल बाँधें , घर की टट्टी खुली

सारे ज़माने का इंतिज़ाम करते फिरें मगर अपने घर के बंद-ओ-बस्त से ग़ाफ़िल

अकल खुरा जग से बुरा

बुरे स्वभाव या ईर्ष्यालु व्यक्ति से हर किसी को शिकायत होती है

अकल खुरी-खुरी जग से बुरी

अक्ल खरा जग से बुरा (रुक) की तानीस

अकेला चलिए न बाट, झाड़ बैठिए खाट

कभी अकेले रास्ता नहीं चलना चाहिए और चारपाई पर बैठने के पहले उसे झाड़ लेना चाहिए

अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता

अकेला कोशिश करने वाला किसी मुश्किल काम को जो कई आदमियों के करने का हो नहीं कर सकता, बहुत से लोगों के करने का काम एक आदमी नहीं कर सकता

अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता

अकेला बहादुर व्यक्ति बहुत से लोगों पर भारी नहीं पड़ सकता

अकेला चना क्या भाड़ फोड़ेगा

अकेला कोशिश करने वाला किसी मुश्किल काम को जो कई आदमियों के करने का हो नहीं कर सकता, बहुत से लोगों के करने का काम एक आदमी नहीं कर सकता

अकेला हुस्नो रोए कि क़ब्र खोदे

अकेला व्यक्ति जिस पर मुसीबत के समय में कई कई ज़िम्मेदारियाँ हूँ वह किस किस काम को सँभाले (उस अवसर पर प्रयुक्त है जब कि मुसीबत और परेशानी की स्थिति में काम अत्यधिक आएँ और सँभालने वाला अकेला हो

अकेला न रोता भला न हँसता

जब तक दो चार व्यक्ति उपस्थित न हों, किसी खुशी या ग़म के उत्सव में सम्मिलित न हों आनंद नहीं आता

अकेला पूत कमाई करे, घर करे या कचहरी करे

अकेला कमाई करने वाला व्यक्ति क्या क्या कर सकता है, घर का काम करे या मेहनत और मज़दूरी करे

अकेला सो बावला, दुकेला सो संग, तिकेला सो खट पट, चौकेला सो जंग

आदमी अकेला हो तो उसे घबराहट होती है दो हों तो दिल मज़बूत होता तीन हों तो आपस खटपट शुरू हो जाती है और चार (या ज़्यादा) हों तो लड़ बैठते हैं

अकेला सूरमा चना भाड़ नहीं फोड़ सकका

रुक : अकेला चना भाड़ नहीं भोड़ सकता

अकेले चलिये न बाट झाड़ बैठिये खाट

(शाब्दिक) अकेले सफ़र नहीं करना चाहिए और पलंग को हमेशा झाड़कर उस पर बैठना चाहिए, (अर्थात) सफ़र हो चाहे हज़र दोनों स्थितियों में सावधानी से काम करना चाहिए

अकेले-दुकेले का अल्लाह बेली

अकेले यात्रा करने वाले का ईश्वर ही रक्षक होता है, बिना साथी के यात्रा करने वाला ख़तरे में रहता है

अकेली कहानी गुड़ से मीठी

अपनी कथा बहुत अच्छी लगती है, एक ओर का बयान सब को सत्य लगता है

अकेली लकड़ी कहाँ तक जले

अकेला आदमी काम अच्छी तरह नहीं कर सकता

अक्खो मक्खो सब का दिल रक्खो

प्रत्येक के मुँह पर उसी की सी कहना

अल जाऊँ बल जाऊँ जल्वे के वक़्त टल जाऊँ

(लफ़ज़न) सदक़े हो जाऊं क़ुर्बान हो जाऊं लेकिन रूनुमाई के वक़्त (जब कि कुछ देना पड़ता है) मौक़ा से हिट जाऊं, (मुरादन) ज़बानी मुहब्बत जताते हैं मगर वक़्त पर काम नहीं आते

अलालूँ बलालूँ सहनक सरकालूँ

चिकनी चुपड़ी बातें कर के अपना मतलब निकालने पर ख़ुशामदी के लिए ज़ंज़न मुस्तामल

अलग रहे पर उल्लू

तन्हाई से इंसान को वहशत होती है

अलख पुरुष की माया कहीं धूप कहीं साया

ख़ुदा की शान है, कहीं धूप है कहीं छाँव, ख़ुदा की क़ुदरत स्पष्ट करने के लिए दो विपरीत वस्तुएँ ली गई हैं, कोई धनवान है तो कोई निर्धन, कोई दुखी है तो को सुखी आदि

अलवनी सिल चटोरा कुत्ता

लालची नाकाम रहता है हासिल कुछ नहीं होता

अल-बल ख़ुदा बल

क़ुव्वत-ओ-ताक़त ख़ुदा की ताईद से होती है

अलबेली ने पकाई खीर दूध की जगह डाला नीर

बेढंगी या अज्ञानता में काम बिगाड़ देने के अवसर पर इस का प्रयोग होता है

अल-फ़र्बा ख़्वाह मख़्वाह मर्द आदमी

लंबा तगड़ा आदमी देखने में हिम्मत वाला तो जान ही पड़ता है फिर चाहे वह वैसा हो या न हो

अल-इंतिज़ारु-अशद्दु मिनल-मौत

प्रतीक्षा करना मृत्यु से कठिन है, प्रतीक्षा के घंटों को गिनने से मर जाना आसान है

अल-करीमु-इज़ा-व'अदा-वफ़ा

शरीफ़ आदमी जब कोई वचन है तो उसे पूरा भी करता है

अल्लाह दे अल्लाह दिलावे, बंदा दे मुराद पावे

दान और दानशीलता या उदारता की प्रशंसा में कहते हैं कि अस्ल देने दिलाने वाला तो ईश्वर ही है परंतु फ़क़ीरों को जो दे देगा उसकी मनोकामनाएँ पूरी होंगी

अल्लाह दे और बंदा ले

ऐसे अवसर पर कहते हैं जब कोई परेशानी अधिकता से और लगातार आए और कोई उपाय न हो

अल्लाह दे बंदा सहे

मनुष्य पर जैसी भली-बुरी बनती है सहता है

अल्लाह दे, बंदा पावे

देता ईश्वर है, मनुष्य अपने सत्कर्मो का फल पाता है

अल्लाह दो सींग देवे तो वो भी क़ुबूल हैं

परेशानियों से ऊबे हुए व्यक्ति की उक्ति

अल्लाह ग़नी तो काहे की कमी

ईश्वर पर भरोसा रखो और निराश न हो

अल्लाह का दिया नूर कभी न होवे दूर

बालों की सफेदी ख़िज़ाब के बावजूद झलकती रहती है

अल्लाह का नाम लो

ईश्वर से क्षमा माँगो, झूठ न बोलो, ऐसा नहीं हो सकता

अल्लाह करे बांका पकड़ा जाए, लाल ख़ान के लड़के से जकड़ा जाए

श्राप, ईश्वर करे उसे कड़ा दंड मिले, उसे बेड़ी पहनाई जाए, ईश्वर उस अत्याचारी को नष्ट करे

अल्लाह करे सो हो फ़क़ीर कहे सो हो

ईश्वर को जो मंजूर होता है वही होता है

अल्लाह के घर में किस चीज़ की कमी है

ईश्वर किसी बंदे को देना चाहे तो सब कुछ दे सकता है, ईश्वर असंभव को भी संभव बना सकता है

अल्लाह के घर में किस चीज़ की कमी है

ईश्वर किसी बंदे को देना चाहे तो सब कुछ दे सकता है, ईश्वर असंभव को भी संभव बना सकता है

अल्लाह की लाठी में आवाज़ नहीं

ईश्वर अत्याचारी को इस प्रकार दंड देता है जिस का उसे अनुमान भी नहीं होता

अल्लाह मियाँ के बड़े ब bड़े हाथ

भगवान की कृपा और दया अनंत है, निराश मत होइए, वह कल्याण का कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेंगे

अल्लाह रक्खे तो कौन चक्खे

जिस को ईश्वर बचाना चाहे उसे कौन मार सकता है

अल्लाह शक्कर ख़ोरे को शक्कर ही देता है

ईश्वर प्रत्येक व्यक्ति को उसके सामर्थ्य या हौसले एवं साहस के अनुसार देता है

अल्लाह शुक्र ख़ोरे को शुक्र देता है

ईश्वर प्रत्येक व्यक्ति को उसके सामर्थ्य या हौसले एवं साहस के अनुसार देता है

अल्लाह यार तो बेड़ा पार

ईश्वर दया या कृपा करे तो सारी दुविधाएँ दूर हो जाती हैं

अलक़र्ज़ु-मिक़राज़ुल-मोहब्बत

उधार देने और लेने से मोहब्बत में अंतर आ जाता है, ऋणी और ऋणदाता के परस्पर सबंध प्रायः बिगड़ जाते हैं

अल्सी का झोड़ा न गधा खाए न घोड़ा

کسی کام کا نہیں، کسی مصرف کا نہیں، عمر رسیدہ شخص اپنے متعلق کسرِ نفسی کے طور پر کہتا ہے

अल्सी का झोड़ा न गधा न घोड़ा

किसी काम का नहीं, किसी उपयोग का नहीं, उम्र-दराज़ (अधीक आयु के लोग) अपने को निम्न प्रकट के लिए बोलते हैं

अमानत में ख़ियानत तो ज़मीन भी नहीं करती

धरोहर में बेईमानी तो धरती भी नहीं करती, उसमें जो कुछ गाड़कर रख दिया जाता है वह ज्यों का त्यों मिल जाता है

अमानी अबा दानी इजारा उजाड़ा

जो काम अपनी निरीक्षण में हो वह अच्छा होता है, ठेके का काम अच्छा नहीं होता

अमीर का पाद भी ख़ुश्बूदार होता है

धन के सात दोष छुप जाता है

अमीर का उगाल ग़रीब का आधार

वह वस्तु जो धनी आदमी के लिए बेकार होती है वही एक निर्धन आदमी के लिए उपयोगी होती है

अमीर के पड़ोस में ख़ुदा क़ब्र भी न बनवाए

निर्धन के लिए धनवान का पड़ोसी होना अच्छा नहीं होता

अमीर के पास क़ब्र भी न हो

निर्धन के लिए धनवान का पड़ोसी होना अच्छा नहीं होता

अमीर की दाई सीखी सिखाई

अमीरों के नौकर सभी कला से प्रचित और होशियार होते हैं

अमीर को जान प्यारी फ़क़ीर को एक एक दम भारी

इसका यह मतलब भी हो सकता है कि फ़क़ीर सदैव कष्ट में रहता है

अमीर ने गू खाया तो दवा के लए और ग़रीब ने खाया तो पेट भर ने के लिए

कोई बुरा काम अगर किसी धनवान से हो तो उसको अच्छा समझा जाता है और वही काम कोई निर्धन व्यक्ति करे तो उस पर लान-तान की जाती है

अमीर ने पादा सेहत हुई ग़रीब ने पादा बे-अदबी हुई

कोई बुरा काम अगर किसी धनवान से हो तो उसको अच्छा समझा जाता है और वही काम कोई निर्धन व्यक्ति करे तो उस पर लान-तान की जाती है

अन के धन पर चोर राजा

चोर मुफ़्त का माल चाहता है

अन माँगे मोती मिले, माँगे मिले न भीक

अक्सर बिना मेहनत और तलाश के बड़ा काम बन जाता है और कभी कभी मामूली सा काम भी मेहनत के बावजूद नहीं बनता

अन मिली की कुसल है

दुश्मन से मुक़ाबला नहीं हुआ इस वास्ते बच गए, दुश्मन के सामने नहीं होना चाहिए इसी में बचाव है

अनाड़ी का सौदा बारह बाट

नौसिखिया का सौदा या काम भरोसेमंद नहीं होता इधर उधर बिखरा होता है

अनाड़ी का सोना बारा बानी

मूर्ख का सोना हमेशा चोख़ा होता है क्योंकि उसे खरे-खोटे की पहचान नहीं होती

अनाज काल नहीं राज काल है

महँगाई शासकों की कुप्रबंध की वजह से है अनाज की वजह से नहीं

अंदर छूत नहीं, बाहर कहें दूर-दूर

उस व्यक्ति के लिए कहा जाता है जो दिखावा करता है

अंडे बबूल में, बच्चे खजूर में

कोई चीज़ कहीं है कोई कहीं, एक भी ठिकाने से नहीं

अंडे होंगे तो बच्चे बहुत हो रहेंगे

संसाधन उपलब्ध हों तो परिणाम भी निश्चित ही है, यदि नींव होगी तो भवन भी निर्माण हो जाएगा

अंडे सेवे फ़ाख़्ता , कव्वे मेवे खाएँ

मशक़्क़त करे कोई और मज़े उड़ाए कोई

अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई

परिश्रम कोई करे और कोई लाभ उठाए

अन-देखा चोर बाप बराबर

जिस चोर की चोरी पकड़ी नहीं गई, उसे साहूकार अर्थात 'इज़्ज़त वाला ही माना जाएगा

अंधा बाँटे रेवड़ी अपनों ही को दे

उस अवसर पर प्रयुक्त जब कोई अधिकार रखने वाले के अतिरिक्त हर सूरत से अपने संबंधी या दोस्त ही को लाभ पहुँचाए

अंधा बाँटे रेवड़ियाँ अपनों ही को दे

उस अवसर पर प्रयुक्त जब कोई अधिकार रखने वाले के अतिरिक्त हर सूरत से अपने संबंधी या दोस्त ही को लाभ पहुँचाए

अंध बादशाह लंगड़ा वज़ीर काठ का घोड़ा लोहे का ज़ीन

जब प्रतिनिधी (या पूरा अमला या घराना आदि) सब निकम्मे ठहरे तो काम ढंग से क्योंकर हो

अंधा बगुला कीचड़ खाए

लापरवाह, उतावला, बेढंगा आदमी सदा ठोकर खाता और नुक़्सान उठाता है

अंधा बटे रस्सी और पीछे बछड़ा खाए

इधर काम करता जाता है और उधर भूल से सारा किया कराया ख़राब होता चला जाता है (असावधान या मूर्ख से संबंधित प्रयुक्त)

अंधा चूहा थोथे धान

जो जिस वस्तु के योग्य होता है उसे वही वस्तु मिलती है, वह उसी से संतुष्ट हो जाता है

अंधा देखे तो पतियाए

इच्छा पूरी हो जाए तो संतुष्टी हो, काम हो जाए तो जानें

अंधा दोज़ख़ी बहरा बहिश्ती

अंधे को दूसरों की तरफ से बेईमानी का शंका रहता है और बहरा अपनी और दूसरों की बुराई सुनने के पाप से बचा रहता है

अंधा गाए बहरा बजाए

जब किसी काम के करने में अयोग्य व्यक्ति एक साथ लगे हों

अंधा हादी बहरा मुरशिद

सलाहकार साथी सभी अयोग्य या अपात्र

अंधा हाथी अपनी ही फ़ौज को मारे

नासमझ आदमी अपने मित्रों को हानि पहुँचाता है

अंधा जाने आँखों की सार

किसी चीज का मूल्य उस को बहुत होती है उससे वंचित है

अंधा जिया बुरे हालों

अंधे की ज़िंदगी बुरे हाल में कटती है, (इसका प्रयोग तब किया जाता है जब किसी के साधन सीमित होते हैं और गुज़रा करना मुश्किल होता है)

अंधा कहे मैं सरग चढ़ मूतूँ और मुझे कोई न देखे

अनाचारी खुल्लम-खुल्ला निंदित आचरण करके चाहता है कि उसके कर्मो का पता किसी को न चले तो यह कैसे संभव है

अंधा क्या चाहे दो आँखें

इस कहावत का प्रयोग उस समय करते हैं जब किसी की इच्छा के लिए पूछा जाता है

अंधा क्या जाने बसंत की बहार

जो किसी चीज़ की वास्तिकता के बारे में न जानता हो वह उस की क्या क़द्र कर सकता है, जिसे किसी बात का अनुभव न हो वह उस के बारे में क्या कह सकता है

अंधा लकड़ी एक ही बार खोता है

एक ही बार विश्वास किया जाता है, अगर कोई धोखा दे तो दूसरी बार विश्वास नहीं किया जाता

अंधा माँगे दो आँखें

मनुष्य वही चाहता है जो उसे चाहिए, जिसे जिस वस्तु की आवश्यकता हो वह उसी की चिंता करता है

अंधा मुल्ला टूटी मसीत

जैसे अंधे मुल्ला जी वैसी ही उनकी टूटी मस्जिद अर्थात दोनों एक से

अंधा न्योते दो जने आएँ

अंधे को बुलाऐं तो दूसरा इस के साथ पहुंचाने के लिए आता है, इस मौक़ा पर मुस्तामल जब एक को कुछ दें तो दूसरे को भी देना पड़े, एक का लिहाज़ करें तो दूसरे का भी लिहाज़ करना पड़ जाये

अंधा राजा चौपट राज

ऐसी जगह के प्रति कहते हैं जहाँ शासक की लापरवाही या मूर्खता से हर तरफ़ ज़ुल्म लूट मार और सार्वजनिक कुव्यवस्था का प्रचलन हो

अंधा सिपाही कानी घोड़ी, बिधना ने आप मिलाई जोड़ी

खुल कर कोई बात करना और यह आशा रखना कि किसी पर स्पष्ट न हो

अंध तब पतयाए जब दो आँखें पाए

इच्छा पूरी हो जाए तो संतुष्टी हो, काम हो जाए तो जानें

अंधे के आगे हीरा कंकर

رک : اندھے کو رات دن برابر ہے ۔

अंधे के आगे रोना अपने दीदे खोना

अयोग्य को निशुल्क प्रामर्श देना सर दर्द मोल लेना है, चेतनाशुन्य व्यक्ति से अपना दर्द कहना बेकार है

अंधे के आगे रोना अपने नैन खोना

अयोग्य को निशुल्क प्रामर्श देना सर दर्द मोल लेना है, चेतनाशुन्य व्यक्ति से अपना दर्द कहना बेकार है

अंधे के आगे रोना अपनी आँखें खोना

अयोग्य को सलाह देना अनावश्यक कष्ट उठाने के समान है, असंवेदनशील व्यक्ति के सामने अपना दुख-दर्द व्यक्त करना बेकार

अंधे के आगे रोना अपनी आँखें खोना

अयोग्य को निशुल्क प्रामर्श देना सर दर्द मोल लेना है, चेतनाशुन्य व्यक्ति से अपना दर्द कहना बेकार है

अंधे के हाथ बटेर लगी

कोई वस्तु संयोग से या आशा के विपरीत हाथ आ गई, कम-हौसला को उसकी गुणवत्ता से अधिक मिल गया

अंधे के हिसाब दिन-रात बराबर

मूर्ख भले-बुरे में अंतर नहीं कर सकता, मंद-बुद्धि को अच्छे-बुरे के अंतर का ज्ञान नहीं होता क्यूँकि उसे कुछ दिखाई नहीं देता

अंधे के पाँव तले बटेर दब गई, कहा हर रोज़ शिकार खाएँगे

मूर्ख से आकस्मिक कोई अच्छा काम हो जाए तो उसे वह अपना उल्लेखनीय कार्य समझता है

अंधे की दाद न फ़रियाद

अत्याचारी तथा आततायी को कौन टोक सकता है

अंधे की जोरू का ख़ुदा रखवाला

मूर्ख का माल जिसका जी चाहता है खाता है

अंधे की लाठी

बूढ़ापे का सहारा, बुढ़ापे की संतान

अंधे की लकड़ी

बुढ़ापे का सहारा, बुढ़ापे की संतान

अंधे को अँधेरे में बहुत दूर की सूझी

ऐसे अवसर पर जब कोई मूर्ख अचानक कोई पते की बात कह जाए

अंधे को अंधा कहा वो लड़ पड़ा

दोषयुक्त व्यक्ति को दोष की पकड़ बुरी लगती है, पर निर्दोष को नहीं

अंधे को अंधा रास्ता क्या बताए

जो खुद ही भटका हुआ है वह दूसरों का नेतृत्व क्या करेगा

अंधे को जुवा मु'आफ़

अज्ञात के दोष की पकड़ नहीं होती है

अंधे ने चोर पकड़ा, दौड़ियो ऐ मियाँ लंगड़े

ऐसे समय पर भी प्रयुक्त होता है जहाँ ये कहना हो कि ऐसों के सहायक ऐसे ही होने चाहिएँ

अंधेर नगरी चौपट राजा

ऐसी जगह के प्रति कहते हैं जहाँ शासक की लापरवाही या मूर्खता से प्रत्येक ओर अत्याचार, लूट मार और सार्वजनिक कुव्यवस्था का प्रचलन हो

अंधेरी नगरी चौपट राज

ज्ञानी अज्ञानी और बुरे भले में अंतर न होने के समय पर बोलते हैं

अंधी माँ पूतों का निज मुँह देखे

असंभव बात संभव नहीं, नामुमकिन बात मुमकिन नहीं

अंधी नायन आईने की तलाश

ऐसी चीज़ का प्रोत्साहन करने वाला जिस की योग्यता न हो

अंधी नगरी चौपट राज

ऐसी जगह के प्रति कहते हैं जहाँ शासक की लापरवाही या मूर्खता से प्रत्येक ओर अत्याचार, लूट मार और सार्वजनिक कुव्यवस्था का प्रचलन हो

अंधी पीसे कुत्ता खाए

इस कहावत का प्रयोग उस समय होता है जब कोई अपने परिश्रम से बनाई गई किसी वस्तु का स्वयं उपयोग न कर सके और दूसरे उसका मज़ा लूटें

अंधों में काना राजा

मूर्खों में कम बुद्धि वाला भी बुद्धिमान समझा जाता है, निर्गुणों में कम गुण वाले ही का बहुत सम्मान होता है

अंधाें ने बाज़ार लूटा

ऐसा काम किया जो संभव न था, ऐसी बात की जो अनहोनी थी (किसी से न हो सकने वाली बात के हो जाने पर आश्चर्यचकित होने की जगह)

अंधों ने गाँव मारा दौड़ियो बे लंगड़ो

अयोग्यों के दोस्त भी अयोग्य, निकम्मों के साथी भी निकम्मे होते हैं

अन-होनी होनी नहीं और होनी होवनहार

असंभव बात कभी नहीं होती और भाग्य का लिखा कभी नहीं टलता, जो भाग्य में लिखा है अवश्य होता है

अन-होत में औलाद

ग़रीबी में बहुत से बच्चे का होना, निर्धन बहुत संतान वाला होता है, ग़रीबी में बहुत संतान का होना अखरता है

अन-होती को होत को ताकत है सब को, अन-होनी होनी नहीं होनी, होवे सो होए

जो होना है या जो भाग्य में है वह होकर रहता है, जो नहीं होना या जो भाग्य में नहीं है वह कभी नहीं होगा, यद्यपि बहुत से लोग असंभव बात की आशा रखते हैं, परंतु असंभव बात होती नहीं

अनी की टली हज़ार बरस

परेशानी कुछ समय के लिए टालना कभी कभी संतोष योग्य होता है, जान बच जाये तो समझो हज़ार वर्ष की ज़िंदगी मिली

अनजान की मिट्टी ख़राब

अनाड़ी सदा हानि उठाता है, अज्ञान कष्ट का कारण होता है और उससे काम नहीं बनता

अनकर खेती अनकर गाय, वो पापी जो मारन जाय

दूसरों के काम में पड़ना मूर्खता है

अन्न धन अनेक धन, सोना रूपा कितेक धन

अन्न ही सबसे बड़ा धन है, सोना-चाँदी उसके सामने कुछ नहीं

अन्नासु 'अला दीन-ए-मुलूकिहिम

लोग आमतौर पर (कपड़ा पहनने और उठने-बैठने, आदि) में अपने राजाओं, बादशाहों या बुज़ुर्गों के रंग-ढंग को अपनाते हैं

अनोखे गाँव ऊँट आया तो लोगों ने कहा परमेसुर आया

अज्ञानी हर अनोखी वस्तु से बहुत प्रभावित होते हैं

अनोखे के घर घोड़ी

कमज़र्फ़, छिछोरे या कमीने के घर दौलत या नेअमत

अनोखी जुर्वा साग में शुर्वा

मूर्ख महिला उल्टे काम करती है

अनोखी के हाथ आई कटोरी, पानी पी पी हुई अनोखे घर कटोरा

कमीने के हाथ कोई चीज़ आ जाए तो उसे दिखाने के लिए उस का बहुत प्रयोग करता है

अंत भला सो भला

सब बातों को सोच कर अंत में जिस निर्णय पर पहुँचा जाए उसे ही ठीक मानना चाहिए

अंत भले का भला

अच्छे काम का परिणाम अच्छा होता है

अंत बुरे का बुरा

बुरे काम का परिणाम बुरा होता है, बुरे व्यक्ति को दंडित अवश्य किया जाता है

अंत मिटा सो मिटा

अपना हक़ हासिल करने में कोशिश ज़रूर करना चाहिए

अपना अपना है पराया पराया है

जो आशा अपनों से होती है वो ग़ैर से नहीं हो सकती, ग़ैर कभी अपना नहीं हो सकता

अपना बैल कुल्हाड़ी नाथें

अपनी चीज़ को जिस तरह प्रयोग में लाएँ दूसरे को उस पर क्या आपत्ति हो सकती है

अपना भात पराए हाथ

अपना माल दूसरे के हवाले करना या अपनी दौलत दूसरे के लिए छोड़ जाने के मौक़ा पर प्रयुक्त

अपना भी ख़ुदा है

कोई साथ दे या न दे कोई हरज नहीं, ख़ुदा हमारा मालिक और मददगार है, (सब की तरफ़ से मायूस होने के मौक़ा पर प्रयुक्त)

अपना बिस्मिल्लाह दूसरे का न'ऊज़ु-बिल्लाह

लोग अपनी वस्तु की प्रशंसा करते हैं, और दूसरे की वस्तु पर फटकार भेजते हैं

अपना दाम खोटा परखने वाले का क्या दोष

जब अपनी ही कोई चीज़ बुरी है तो इसमें आलोचकों का क्या दोष? वे तो उसे बुरी बताएँगे ही

अपना दे लड़ाई मोल ले

क़र्ज़ देना, दुश्मन बनाने के बराबर है, ऋण प्रेम की क़ैंची है

अपना दे, बलय्या ले

क़र्ज़ दे और फिर चापलूसी करे, उपकार करे और फिर दबे

अपना धौंसा आप बजाओ

अपनी समस्या से स्वयं निपटें, अपना ढोल स्वयं पीटें

अपना धौंसा आप ले जाओ अपने हाथ बजाओ

अपना काम आप करो हम तुम्हारे साथ शरीक नहीं होते

अपना दीजिए दुश्मन कीजिए

क़र्ज़ देना, दुश्मन बनाने के बराबर है, ऋण प्रेम की क़ैंची है

अपना दिल दिल है दूसरे का लोथड़ा

अपनी आवश्यकता के आगे दूसरे की आवश्यकता का महत्व नहीं होता

अपना घर अपना बाहर

स्वार्थी के लिए यह कहावत कहते हैं

अपना घर दूर से सूझता है

प्रत्येक व्यक्ति अपनी किसी अच्छाई या दुर्बलता को भली-भाँती जानता है

अपना घर हग भर, पराए घर थूक का डर

अपनी वस्तु को चाहे जिस तरह से व्यवहार करें, दूसरे की वस्तु के लिए सावधानी करनी पड़ती है

अपना घर ख़ुशी भाए सो कर

अपनी वस्तु को चाहे जिस तरह से व्यवहार करें, दूसरे की वस्तु के लिए सावधानी करनी पड़ती है

अपना घर सौ कोस से नज़र आता है

प्रत्येक व्यक्ति अपनी किसी अच्छाई या दुर्बलता को भली-भाँती जानता है

अपना घोलो अपना पियो

जेब का पौसा लगाव और आराम करो

अपना घुटना खोलिए और आप ही लाजों मरिए

अपनों के दोष खोलने से अपने आप को ही लज्जित होना पड़ता है, अपनी प्यारी वस्तु तिरस्कार अपना ही तिरस्कार है

अपना घुटना खोलिए और आप ही मरिए लाज

अपनों के दोष खोलने से अपने आप को ही लज्जित होना पड़ता है, अपनी प्यारी वस्तु तिरस्कार अपना ही तिरस्कार है

अपना हारा और मेहरी का मारा कौन कहता है

जुवारी अपना नुक़्सान और जोरू से मार खाने वाला अपना अपमान बयान नहीं करता, हर व्यक्ति अपने अपमान और ज़िल्लत पर पर्दा डालता है

अपना हाथ अपने सर पर

कोई अभिभावक एवं उत्तराधिकारी नहीं, कोई स्थिति पूछने वाला नहीं

अपना हाथ जगन नाथ

स्वायत्तता बहुत बड़ी बात है, अधिकार दूसरे की अतिरिक्त अपने पास होना अच्छा है

अपना है ही ना दूसरे के दानी

झूठ-मूठ की डींगें मारने वाला, दूसरे के माल पर दानी बनना

अपना ही माल जाए और आप ही चोर कहलाए

एक तो हानि हो ऊपर से इल्ज़ाम लगे, अपनी ही हानि हो और अपनी ही बद-नामी

अपना ही मतलब सूझता है

स्वार्थपरता दिखाने के समय कहते हैं कि हर व्यक्ति को अपना लाभ ही दिखता है

अपना कहे मुँह बंद होता है, ग़ैर कहे से मुँह खुल जाता है

सगा-संबंधी मांगे तो दया में मुँह बंद हो कर रह जाता है, मना नहीं किया जाता, परंतु दूसरे के अनुरोध पर मना कर सकते हैं (संबंधी में लड़की के लिए लड़के का न्योता देते समय निकटता का दबाव डालने के लिए प्रयुक्त)

अपना के बेरी बीड़ी दूसरे के खीर पूड़ी

अपने घर जो आए उसे पान खिला कर टाल दे और ख़ुद दूसरों के घर जाकर अच्छे खाने खाए

अपना के जुड़े न उनका के दानी

अपने पास तो कुछ नहीं दूसरों को देने का वचन

अपना लाल गँवाए के दर दर माँगे भीक

अपनी पूंजी नष्ट करके कंगाल फिरता है

अपना लेना क्या, पराया देना क्या

बेईमान क़र्ज़ लेकर वापस न करने वाले के लिए उपहास के तौर पर प्रयुक्त है अर्थात जो आदमी लेन-देन के संबंध में लापरवाह हो उस के प्रति कहते हैं

अपना माल छाती तले

अपनी चीज़ अपने क़ब्ज़े में अधिक सुरक्षित रहती है

अपना मारे छाँव में बिठाए ग़ैर मारे धूप में बिठाए

अपने फिर अपने होते हैं, दूसरों की अपेक्षा अपनों का आसरा लेना बेहतर है चाहे निर्दयी हों

अपना मारे छाँव में डाले ग़ैर मारे धूप में डाले

अपने फिर अपने होते हैं, दूसरों की अपेक्षा अपनों का आसरा लेना बेहतर है चाहे निर्दयी हों

अपना मारेगा तो फिर छाँव में बिठाएगा

अपने फिर अपने होते हैं, दूसरों की अपेक्षा अपनों का आसरा लेना बेहतर है चाहे निर्दयी हों

अपना मकान कोट समाँ

अपने घर की हैसियत क़िले की सी होती है जिसमें इंसान ख़ुद को ज़्यादा सुरक्षित महसूस करता है

अपना मरन जगत की हाँसी

अपनी तबाही जगत की हँसी अर्थात लोग दूसरों की हानि पर हँसते हैं

अपना निकाल मुझे डालने दे

अपने लाभ के लिए दूसरे की हानि का इच्छुक होना

अपना पैसा खोटा परखने वाले का क्या दोष

जब अपनी ही कोई चीज़ बुरी है तो इसमें आलोचकों का क्या दोष? वे तो उसे बुरी बताएँगे ही

अपना पैसा खोटा तो परखने वाले का क्या दोस

अपनी वस्तु या संतान ख़राब हो या अपने में कोई कमी हो तो आपत्ति जताने वाले को क्या आरोप दिया जाये

अपना पैसा खोटा तो परखने वाले का क्या दोश

अपनी वस्तु या संतान ख़राब हो या अपने में कोई कमी हो तो आपत्ति जताने वाले को क्या आरोप दिया जाये

अपना पैसा खोटा तो परखने वाले का क्या लाग

अपनी वस्तु या संतान ख़राब हो या अपने में कोई कमी हो तो आपत्ति जताने वाले को क्या आरोप दिया जाये

अपना पेट तो कुत्ता भी पालता है

स्वार्थ कोई गुण नहीं, दूसरों की सेवा करना बड़ी बात है

अपना पूत और पराया ढींगर

अपनी हर वस्तु प्यारी होती है और दूसरे की ख़राब, अपने बच्चे को कम-आयु और दूसरे के उसी आयु के बच्चे को जवान समझते हो

अपना पूत पतिंगर दूसरे का ढटिंगर

रुक : अपना बाला और का धींग

अपना रख पराया चख

अपना माल रखना दूसरे का माल ख़र्च करना, अपनी वस्तु सुरक्षित रखना एवं दूसरे की वस्तु का उपयोग करना

अपना सोना खोटा परखने वाले को क्या दोख

अपनी वस्तु या संतान ख़राब हो या अपने में कोई कमी हो तो आपत्ति जताने वाले को क्या आरोप दिया जाये

अपना सोना खोटा परखने वाले को क्या दोस

अपनी वस्तु या संतान ख़राब हो या अपने में कोई कमी हो तो आपत्ति जताने वाले को क्या आरोप दिया जाये

अपना सोना खोटा परखने वाले को क्या दोश

अपनी वस्तु या संतान ख़राब हो या अपने में कोई कमी हो तो आपत्ति जताने वाले को क्या आरोप दिया जाये

अपना सोना खोटा, परखने वाले को क्या दोष

अपनी वस्तु या संतान ख़राब हो या अपने में कोई कमी हो तो आपत्ति जताने वाले को क्या आरोप दिया जाये

अपना सूप मुझे दे तू हाथों पछोड़

जब कोई अपनी आवश्यक्ता की वस्तु किसी को दे दे और माँगने पर वापस न मिले तो व्यंग में बोलते हैं

अपना ठीक नहीं और का नीक नहीं

न अपनी समझ से काम लेते हैं न दूसरे की विचारों पर कार्य करते हैं

अपना तो तन पहले ढाँको दूसरे को नंगा पीछे कहना

प्रथम अपने दोष दूर करो दूसरे को बुरा फिर कहना

अपना तोशा अपना भरोसा

अपने परिश्रम और कमाई का सहारा है, अपने व्यक्तित्व और अपनी क्षमता पर विश्वास किया जा सकता है

अपना उल्लू कहीं नहीं गया

प्रत्येक स्थिति में अपना मतलब निकल जाएगा, किसी न किसी को मूर्ख बना लेंगे

अपने बावलों को रोए दूसरे के बावलों को हँसे

अपने पागलों को रोना और दूसरे के पागलों को हँसना, अपनी हानि पर पश्चाताप करना और दूसरे की हानि पर ख़ुश होना

अपने बच्चे को ऐसा मारूँ कि पड़ोसन की छाती फटे

इस अवसर पर वाक्य के रुप में बोलते हैं जब दूसरे की जलन में या दूसरे को दिखाने के लिए कोई व्यक्ति अपनी हानि करे

अपने बछड़े के दाँत दूर से मा'लूम होते हैं

अपने आदमियों के लच्छनों या गुणों से सब सूचित होते हैं

अपने बछड़े के दाँत सब को मा'लूम होते हैं

अपने आदमियों के लच्छनों या गुणों से सब सूचित होते हैं

अपने बछड़े के दाँत सभी पहचानते हैं

अपने आदमियों के लच्छनों या गुणों से सब सूचित होते हैं

अपने दाम बनावें काम

जिसे पैसा देंगे वही काम कर देगा

अपने दाम खोटे तो परखने वाले पर क्या दोष

अपनी चीज़ या बच्चे ख़राब हों या उनमें कोई कमी हो तो आपत्ति करने वाले पर क्या दोष दिया जाए

अपने दही को कौन खट्टा कहता है

हर कोई अपने माल की प्रशंसा करता है

अपने दही को कोई खट्टा नहीं कहता

हर कोई अपने माल की प्रशंसा करता है

अपने घर में कुत्ता शेर है

अपने क्षेत्र में हर व्यक्ति की बहादुरी और साहस बढ़ जाता है, समर्थन मिलने पर कायर भी बहादुर हो जाता है (ऐसे व्यक्ति के लिए बोलते हैं जो दूसरे की हिमायत के बल पर धमकाए या ऐंठे

अपने घु्टने खोलो आप ही लाजों मरो

अपनों के दोष खोलने से अपने आप को ही लज्जित होना पड़ता है, अपनी प्यारी वस्तु तिरस्कार अपना ही तिरस्कार है

अपने हाथ के बल बल जाइए जैसा मन हो तैसा खाइए

अपने हाथ का काम ठीक मन-मर्ज़ी के अनुसार होता है (कारीगर इच्छानुसार काम करने के बाद गर्व से कहता है

अपने हल्वे माँडे से काम

अपने लाभ से मतलब, अपने मतलब से, मतलब, दूसरे के लाभ होनि से मतलब नहीं

अपने ही घर से आग लगी है

अपनों ही का उठाया हुआ फ़साद, किसी ग़ैर की शरारत नहीं

अपने झोंपड़े की ख़ैर माँगो

अपने कुशल क्षेम की प्रार्थना करो, अपने बचाव का प्रयास करो, अपनी कुशल मनाओ फिर दूसरे की चिंता करना

अपने झोपड़े की ख़ैर माँगो

तुम्हें दूसरों की क्या पड़ी अपनी तो ख़बर लो

अपने किये को भुगतना

अपने कर्माें की सज़ा पाना, जैसा करना वैसा भरना, जैसा किया वैसा भुगतो, कोई उसमें क्या करे

अपने लगे तो पीठ में और के लगे तो भीट में

दूसरों की परेशानी का किसी को एहसास नहीं होता

अपने माल को क़ाज़ी की दुहाई क्या

जो काम अपने वश का हो उसमें दूसरे की सहायता नहीं लेना चाहिए

अपने मन से जानिये पराए मन की बात

जैसा तुम दूसरे को समझते हो वैसा ही वह तुम को समझता है

अपने मंडन में दूसरों का खंडन

अपने लाभ के लिए दूसरे की हानि करना

अपने मरे बिन स्वर्ग नहीं मिलता

अपना काम बिला अपने परिश्रम के ठीक नहीं होता

अपने मूए राम नहीं

जब ख़ुद मर गए तो फिर किसी ज़ंद, के अंजाम की क्या फ़िक्र, अपनी मौत के बाद ज़िन्दों का हश्र जो हो सौ हो, मुतरादिफ़: अज़ सरमन कुन फ़ैकूँ शुद शुद बा शुद

अपने नैन गंवा के दर-दर माँगे भीक

जो व्यक्ति अपनी किसी वस्तु की रक्षा नहीं कर सकता उसे कष्ट भोगना पड़ता है, अपनी संपत्ति उजाड़ कर अब माँगते फिरते हैं

अपने नैनाँ मुझे दे और तू झुलाती फिर

अपने काम और ज़रूत की चीज़ तुम्हें दे दें तो हमारा काम क्यूँ कर चलेगा, हमारी ज़रूरत की चीज़ तुम ले गए अब हम अपनी ज़रूरत पर किस से माँगते फिरें

अपने औड़ बटाए वा की वह जाने

अपने काम से काम दूसरों से किया मतलब

अपने पत्तों से मूली भारी

जब अपने ही बोझ में दबे बैठे हैं तो दूसरे का बोझ किस तरह सँभालेंगे

अपने पूत कुंवारे फिरें पड़ोसन के फेरे

दूसरों को देना अपनों को वंचित रखना

अपने से बचे तो और को दें

पहले हक़ स्वजनों का है बाद में दूसरों का

अपने सूई न जाने दो, दूसरे के भाले कोंचो

स्वयं थोड़ी पीड़ा भी गवारा नहीं दूसरे पर बड़ी बड़ी विपत्तियाँ ढाई जाती हैं

अपने तन का फोड़ा सताता है

प्रिय और क़रीबी लोगों से ही दुख पहुँचता है

अपने-अपने घर सब बादशाह हैं

अपने घर के सब मालिक हैं चाहे जो करें, अपने घर में सब बड़े हैं

अपने-अपने क़दह की सब ख़ैर मनाते हैं

हर कोई अपनी भलाई चाहता है, सब अपना प्याला भरा रखना चाहते हैं, सब अपना स्वार्थ तकते हैं

अपनी अपनी डफ़ली अपना अपना राग

सब की बातें एक दूसरे से अलग अलग हैं, मिली जुली कार्रवाई ग़ायब है, जितने मुँह उतनी बातें

अपनी अपनी गोर, अपनी अपनी मंज़िल

कोई किसी का साथी नहीं, प्रत्येक अपने कार्यों के लिए स्वयं ज़िम्मेदार है

अपनी अपनी करनी आप पार उतरनी

जो प्रामर्श या सलाह के विरुद्ध काम करेगा उसका परिणाम भुगतेगा, जैसा करेगा वैसा फल पाएगा

अपनी 'अक़्ल और पराई दौलत बड़ी मा'लूम होती है

हर आदमी अपने को दूसरों की अपेक्षा अधिक बुद्धिमान और दूसरों को अपनी अपेक्षा अधिक धनवान समझता है

अपनी बड़ाई अपने हाथ है

अपनी 'इज़्जत अपने हाथ में है, मनुष्य की प्रतिष्ठा एवं सम्मान उसके अपने हाथ में होता है

अपनी बैर घोलम घाला दूसरे की बेर टालम टोला

अपना मतलब पूरा होने के बाद दूसरे का काम पड़ने पर टाल-मटोल करना

अपनी बुराई दूसरे पर छाई

एक की बला दूसरे के सर जा पड़ी

अपनी छाछ को कोई खट्टा नहीं बताता

अपनी वस्तु को सभी अच्छा बताते हैं

अपनी छाछ को कोई खट्टा नहीं कहता

प्रत्येक अपनी वस्तु को अच्छा समझता है

अपनी दाढ़ी सब बुझाते हैं

सब अपनी चिंता पहले करते हैंअर्थात पहले आप फिर बाप

अपनी दाँव को मछ्ली दूसरे की दाँव को काँटा

स्वार्थी, मतलबी, मतलब को पहचानने वाला

अपनी डफ़ली अपना राग

सबकी विभिन्न और अलग अलग आवाज़, प्रयत्न या कार्य आदि

अपनी गाँठ का पैसा पराया आसरा कैसा

जो ख़ुद कमाता खाता है दूसरों का मुहताज नहीं होता

अपनी गाँठ न हो पैसा तो पराया आसरा कैसा

अपने भरोसे पर काम करना चाहिए

अपनी गली में कुत्ता भी शेर होता है

अपने क्षेत्र में हर व्यक्ति की बहादुरी और साहस बढ़ जाता है, समर्थन मिलने पर कायर भी बहादुर हो जाता है (ऐसे व्यक्ति के लिए बोलते हैं जो दूसरे की हिमायत के बल पर धमकाए या ऐंठे

अपनी ग़रज़ बावली

किसी उद्देश्य के पीछे आदमी पागल सा बन जाना है, स्वार्थ आदमी को विवश कर देता है

अपनी ग़रज़ को गधे चराते हैं

अपनी ज़रूरत या फ़ायदे के लिए घटिया से घटिया काम करना पड़ता है

अपनी गिरह का क्या जाता है

उसका क्या बिगड़ता है

अपनी हाई और पर गँवाई

अपना पाप दूसरे के सर मंढ दिया, अपनी पराई और पर थोप दी

अपनी हाई और परछाई

अपना पाप दूसरे के सर मंढ दिया, अपनी पराई और पर थोप दी

अपनी हाई-मराई कोई नहीं भूलता

अपना दुख कोई नहीं भूलता, अपनी हानि सब को याद रहती है, अपना भुगता सबको याद रहता है

अपनी 'इज़्ज़त अपने हाथ

मनुष्य को वह काम ही नहीं करना चाहिए कि उसकी प्रतिष्ठा एवं सम्मान पर आँच आए

अपनी करनी अपनी भरनी

जो जैसा करेगा वैसा पाएगा, अच्छे कर्मों का फल मिलेगा और बुरे कर्मों की सज़ा मिलेगी

अपनी करनी पार उतरनी

अपना ही किया काम आता है, अपने ही कर्म छुटकारे का कारण बनते हैं

अपनी करनी परवान क्या हिंदू क्या मुसलमान

अपने कार्यों का बदला हर अच्छे बुरे को मिलेगा

अपनी कोख का पूत नौशादर

अपनी संतान सबको अच्छी लगती है

अपनी लिट्टी पर सब आग रखते हैं

हर एक अपने लिए प्रयास करता है, अपनी रोटी सब सेंकते हैं अर्थात सब अपना स्वार्थ देखते हैं

अपनी मस्लहत हर शख़्स ख़ूब जानता है

हर व्यक्ति अपनी उत्तमता को समझता है, हर व्यक्ति अपनी कमज़ोरियाँ या कठिनाइयाँ अच्छी तरह जानता है

अपनी मूँछ मुँडा दूँ

पराजय स्वीकार लेना (अपनी बात पर ज़ोर देने के अवसर पर प्रयुक्त जब यह कहना हो कि अगर ऐसा न हो (या हो) तो मुझे मर्द न समझना)

अपनी नाक कटी तो कटी पराई बद-शुगूनी तो हो गई

अपना नुक़्सान या रुसवाई हुई तो क्या, दुश्मन को तो तकलीफ़ पहुँच गई

अपनी पीड़ पराई बातें

मनुष्य अपने ही दुख-दर्द की अनुभूति करता है दूसरे की पीड़ा का अनुभव नहीं करता

अपनी पीठ नहीं दिखाई देती

मानव को अपने दोष नहीं दिखते

अपनी पुश्त नहीं सूझती

मानव को अपने दोष नहीं दिखते

अपनी रान खोलना आप लाजों मरना

अपनों के दोष खोलने से अपने आप को ही लज्जित होना पड़ता है, अपनी प्यारी वस्तु तिरस्कार अपना ही तिरस्कार है

अपनी टाँग खोलना आप ही लाजों मरना

अपनों के दोष खोलने से अपने आप को ही लज्जित होना पड़ता है, अपनी प्यारी वस्तु तिरस्कार अपना ही तिरस्कार है

अपनी तो ख़बर लो फिर दूसरे की कहना

दूसरों पर आपत्ति जताने से पहले अपने दोषों पर भी गौर करना जरूरी है

अपनी तो ये देह भी नहीं

सब अधिकार अस्थायी हैं एक दिन इन सब को छोड़ना पड़ेगा

अपनी-अपनी सब गाते हैं

सब अपनी कहना चाहते हैं, कोई दूसरों की सुनना नहीं चाहता

अरंड की जड़ चाकरी

नौकरी का कोई भरोसा नहीं होता भगवान जाने कब छूट जुए (जैसे अरंड की जड़ जो इतनी कमज़ोर होती है कि ज़रा सी तेज़ हवा चली और पेड़ गिरा

अरे मेरे कर्म जहाँ टटोला वहीं नर्म

आजकल तो हर काम में क़िस्मत यावरे पर है

अरहर की टट्टी गुजराती ताला

गुजराती ताला बहुत मज़बूत होता है और अरहर की टट्टी बहुत कमज़ोर होती है उसको ताला लगाना बेकार है क्यूँकि चोर उसे आसानी से हटा सकता है

अर्ज़ां-ब-'इल्लत

चीज़ अगर सस्ती है उसमें ज़रूर कुछ न कुछ ख़राबी होगी (कभी इसके साथ गिराँ बहिकमत भी कहा जाता है)

असल कहे सो दाढ़ी जाड़

जो सच कहे वही बुरा

असल के असल होते हैं

भले आदमी की संतान भली होती है, अच्छे कुल में अच्छे ही पैदा होते हैं

अस्बाब में अस्बाब, एक चंग एक रबाब

किसी फक्कड़ कला-प्रेमी की उक्ति

अशर्फ़ियाँ लुटीं और कोयलों पर मुहर

बड़े बड़े ख़र्च होते हैं और थोड़ी-थोड़ी सी बातों में कृपणता से काम लिया जाये (उस व्यक्ति के संबंध में बोलते हैं जो यूँ तो हज़ारों रुपए लुटा दे मगर कुछ अनीवार्य अवसरों में कंजूसी से काम ले)

अशर्फ़ियों की लूट और कोयलों पर मोहर

रुक : अशर्फ़ियां लटें अलख

अशराफ़ के लड़के बिगड़ते हैं तो भड़वे बनते हैं

भले आदमियों के लड़के कुसंग में पड़कर जब बिगड़ते हैं तो फिर किसी काम के नहीं रहते

अशराफ़ पाँव पड़े, कमीना सर चढ़े

शरीफ़ की शराफ़त का प्रभाव कमीन पर उल्टा होता है, शरीफ़ की नरमी से तिरस्कृत व्यक्ति शेर हो जाता है

असील घोड़े को चाबुक की ज़रूरत नहीं

जिस तरह अच्छे घोड़े को मारने की ज़रूरत नहीं पड़ती, इसी तरह अच्छे लड़के को पढ़ने के लिए अच्छे आदमी को काम के लिए डाँट-डपट करने की ज़रूरत नहीं पड़ती

असील मुर्ग़े की एक टाँग

अपनी हठ पर स्थापित, हठ पर अड़ा हुआ

असील मुर्ग़ी टके-टके

भले लोगों का अपमान है

अस्ल अस्ल है नक़्ल नक़्ल है

जो बात मूल में होती है वह उसकी प्रतिलिपि में नहीं होती

अस्ल से ख़ता नहीं, कम-अस्ल से वफ़ा नहीं

नीच से सत्यता और सच्चरित्रता की आशा नहीं करनी चाहिए

अस्सी बरस का झड्डू नाम मियाँ मा'सूम

बूढ़ा हो गया और बच्चों की सी हरकतें करता है

अस्सी बरस की 'उम्र नाम मियाँ मासूम

यह कहावत उस के लिए कहा जाता है जो आयु में बड़ा हो और बचकानी हरकत करे

अस्सी साई असे बधाई

एक व्यक्ति का उम्मीद दिला कर दूसरे से मामला कर लेने के अवसर पर प्रयुक्त

अस्सी-लुस्सी

बुढ़ापे में निर्बलता और कमज़ोरी अवश्यंभावी है, बूढ़े आदमी की आंतरिक गर्मी बहुत कम और नमी अधिक होती है

अत का भला न बरसना, अत की भली न धुप, अत का भला न बोलना, अत की भली न चुप

बहुतात किसी चीज़ की अच्छी नहीं, न अधिक वर्षा की न अधिक धूप की, न अधिक बातें अच्छी न अधिक ख़ामोशी

अत का भोला सोंझना डाल पात से जाए

जो हद से गुज़रता है नुक़्सान उठाता है

अटल है

अपनी बात से नहीं फिरता, अपनी जगह से नहीं हटता

अटका बनिया सौदा दे

अटका हुआ बनिया सौदा इसलिए देता है कि पिछला उधार वसूल करने का अन्य कोई उपाय उसके पास नहीं होता

अटकल-पच्चू ग़ैर मुक़र्रर

एक अनिश्चित अथवा केवल अनुमान पर आधारित बात के लिए कहते हैं

औड़न हार बलैंडे साँप दिखाए

फ़रेबी और हीला वर है

औंधा खाए लौंदा

बेहया और बेशरम अपना काम हर तरह निकाल लेते हैं

औंधे मुँह शैतान का धक्का

कष्ट पर कष्ट, मुर्खता पर मुर्खता

औंधी-खोपड़ी, उल्टी मत

मूर्ख के संबंधित कहते हैं

औधू बन आए की बात है

किसी काम में अप्रत्याशित रूप से सफलता मिलने पर कहते हैं

औधू तुझे द्वारका जाने

तुम जैसे हो हम तुम्हें ख़ूब जानते हैं

औघट चले न चौपट गिरे

जो व्यक्ति बुरा कार्य करता है घाटा उठाता है, बीच का रास्ता अपनाना चाहिए

औलाद की आँच बुरी होती है

औलाद की मोहब्बत आदमी को बेचैन कर देती है, औलाद के लिए इंसान हर क़िस्म की तकलीफ़ बर्दाश्त करता है

औलती का पानी बड़ैड़ी पहुँचा

बात कहाँ से कहाँ जा पहुँची

औलती का पानी मगरी पर नहीं जाता

पाजी एवं शरीफ़ बराबर नहीं हो सकते

औलतियों भंग चुवादी

सबको मूर्ख बना दिया, मूर्खों का दड़बा खोल दिया

और के दाँव अंडे बच्चे हमारे दाँव कुड़ुक

दूसरों को बहुत कुछ मिलता है हमें कुछ नहीं मिलता

और की भूक न जानें, अपनी भूक आटा साने

अपनी परेशानी का ख़्याल होता है दूसरे की परेशानी का एहसास नहीं होता

और की खटाई अपने आगे आई

दूसरे की तकलीफ़ या ज़िम्मेदारी को ख़ुद उठाना पड़ा

और की फुल्ली देखते हैं, अपना टेंट नहीं निहारते

अवगुणी अपने अवगुण नहीं देखता दूसरों के अवगुण अथवा त्रुटि देखता है

औरों को नसीहत ख़ुद मियाँ फ़ज़ीहत

दूसरों को तो नसीहत (उपदेश) करते हैं और स्वयं उसका पालन नहीं करते, स्वयं बुरे काम करके दूसरों को उपदेश देना

अवसर चूकी डोमनी गाए ताल बे ताल

जो समय पर चूक जाए उसे पछताना पड़ता है

औसर का चूका आदमी डाल का चूका बंदर नहीं सँभलता

अवसर हाथ से जाता रहे तो फिर काम नहीं बनता

अवसर की दौसर पड़ जाना

कठिनाई पर कठिनाई आना

अव्वल मरना आख़िर मरना फिर मरने से क्या है डरना

ख़तरे या संकट के काम में साहस बढ़ाने के लिए बोलते हैं

अयाना जाने हिया सियाना जाने क्या

बच्चा प्रेम को जानता है होशियार लेने देने को समझता है

अज़ ख़िर्स मूए बस अस्त

अयोग्य थोड़ी सी भी योग्यता की बात करे तो बहुत है, कंजूस अगर कुछ भी दे निकले तो काफ़ी है

संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .

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