दाई जाने अपने पाई
आया को ज़च्चा और प्रसूता की पीड़ा और दर्द की परवाह नहीं होती, उस को अपना आराम और लाभ ही दिखाई देता है
दाई के सर पान फूल
ग़रीब आदमी के सर पर तहमत थुप जाती है, कमज़ोर और ग़रीब पर आसानी से इल्ज़ाम लगा दिया जाता है
दादा ले पोता बरते
यानी दादा के ज़माने की चीज़ का पोते की वंश तक प्रयोग में आना, मज़बूत चीज़ की बारे में कहते हैं
दादा मरेंगे जब बैल बटेंगे
(पहले) जब दादा मरेंगे आदि, दादा के मरने पर संपत्ति विभाजित होगी, जब किसी मामले में देरी प्रदर्शित करनी हो तो कहा जाता है।
दाग़ लगाए लँगोटिया यार
पुराने दोस्त ही धोखा देते हैं, वह तुम्हारा कच्चा चिट्ठा जानते हैं, तुम अगर उन को कोई दुख दोगे तो वह तुम्हारा भेद खोल देंगे
दाहने हाथ का खाया हराम है
कुसुम दिलाने के लिए यानी अगर तुम इस बात को ना करो तुम ने जो कुछ अपने सीधे हाथ से खाया या खाओ के वो हराम में दाख़िल होगा
दाम आवे काम
रुपया बचाया जाए तो समय पर काम आता है, रुपया बहुत लाभदायक होता है
दामन निचोड़ दें तो फ़रिश्ते वुज़ू करें
ख़्वाजा मीर दर्द की एक ग़ज़ल क मशहूर मिस्रा या एक पंकति, स्वयं को बहुत पूनीत, सज्जन और प्रतिष्ठित दिखाने के अवसर पर अतिश्योक्ति के रूप में बोलते हैं
दाना-दाना पर मोहर होती है
जिस के भाग्य का हो उसी को मिलता है, बिना भाग्य के एक दाना भी नहीं मिलता, जो भाग्य में होता है वो लाख व्यवधान के पश्चात भी मिल जाता है
दाने को टापे सवारी को पादे
ऐसे व्यक्ति के बारे में कहते हैं कि जो खाए तो पेट भर के और काम पड़े तो जी चुराए, खाने पीने को हर समय तैयार काम करने से घबराता है
दारू-ए-ग़ज़ब-ख़ामोशी
ग़ुस्से का इलाज चुप रहना है अगर ग़ुस्से होने वाले को जवाब ना दिया जाये तो इस का गु़स्सा ठंडा पड़ जाता है
दाश्ता-आबद-ब-कार
सुरक्षित रखी हुई वस्तु (जिसकी त्वरित ज़रूरत न हो) कभी न कभी काम आही जाती है
दाता दतार सुथनी उतार
कोई स्त्री अपने पति की दानशीलता से ऊबी हुई है और खीझकर कहती है कि वह हज़रत इतने उदार हैं कि मेरा पैजामा भी उतार कर दे सकते हैं
दहन सग ब-लुक़्मा दोख़्ता बिह
फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल, निवाला दे कर कुत्ते का मुंह बंद कर देना बेहतर है (इस महल पर मुस्तामल है जब किसी शख़्स को इस की ईज़ा से बचने के लिए कुछ दें
दही की गवाही चूरा
जब दो ऐसे लोग परस्पर मिल जाएँ अर्थात साथ कर लें जिससे काम और सुन्दर हो जाए तो भी कहते हैं
दह-रवाँ , दह-दवाँ , दह-परान
माह रमज़ान के दिन जल्द जलद गुज़र जाने का ज़िक्र इन अलफ़ाज़ में किया जाता है, यानी इबतिदाई दस दिन नसबन रवां (मामूली चाल) के होते हैं, दूसरे दस दिन दवां (यानी दौड़ते हुए) और तीसरा अशरा प्राण (उड़ते हुए) यानी बड़ी तेज़ी से गुज़र जिऐता है
दम है तो क्या ग़म है
जान है तो कोई चिंता नहीं, जान है तो कठिनाइयां दूर हो सकती हैं, जान है तो जहान है
दम हज़ार दम
क्षण भर में मृत्यु जीवन से बदल जाती है, देखते ही देखते रोगी ठीक हो जाता है, (रोगी और उसके परिचारकों के ढारस बँधाने के लिए उपयोग किया जाता है)
दम का दमामा है
जीवन का ही सारा खेल है, जीवन कुछ दिन है इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता
दम में हज़ार दम
एक के सहारे बहुतों की गुज़र होती है अर्थात एक के व्यक्तित्व से हज़ारों को लाभ
दमड़ी की निहारी में टाट के टुकड़े
सस्ती चीज़ ख़राब होती है, कहते हैं एक आदमी ने दमड़ी की निहारी ली उसमें से टाट का टुकड़ा निकला दुकानदार से शिकायत की तो उसने कहा की दमड़ी की निहारी में क्या ज़रबफ़्त का टुकड़ा निकलता
डंडना अच्छा हंडना बुरा
एक जगह रह कर नुक़्सान उठाना इतना बुरा नहीं जितना कि जगह जगह सुकूनत इख़तियार करना या मारे मारे फिरना बुरा है
दर बंद सत्तर दर खुले
जाविका का एक माध्यम समाप्त हुआ तो क्या चिंता किसी दूसरे माध्यम से अल्लाह ताला रोज़ी देगा
डर दो तरफ़ होता है
जब एक आदमी अपने दुश्मन पर किसी भी तरह से हमला करता है, तो उसे भी अपनी जान का डर होता है कि पता नहीं किसका हमला सफल हो जाए
दर्द को वो समझे जो दर्दमंद हो
दूसरे की पीड़ा वही समझ सकता है जो स्वयं उसी पीड़ा से पीड़ित रहा हो, दूसरे की तकलीफ़ को वह आदमी समझ सकता है जो ख़ुद उसी तकलीफ़ में मुबतला रह चुका है
दरोग़ को फ़रोग़ नहीं
झूठ कभी नहीं पनपता, झूठ कामयाब नहीं होता, झूठ में सफलता नहीं होती, झूट फलता फूलता नहीं
डसा पानी नहीं माँगता
ऐसे मौक़ा पर बोलते हैं जब किसी शख़्स का ज़ुलम-ओ-सितम या वार जान लेवा साबित होता है ज़रब ऐसी कारी होती है कि मज़रूब उसी वक़्त दम तोड़ देता है
दस्त ब-कार व दिल ब-यार
हाथ काम में और दिल दोस्त में, जब कोई व्यक्ति हाथ से कुछ काम कर रहा हो पर उस पर ध्यान केंद्रित न हो दिल में कुछ और सोच रहा हो
दस्त शिकस्ता वबाल-ए-कर्दन
टूटा हवा हाथ गर्दन के लिए वबाल है यानी जब तक किसी चीज़ से हमारा काम निकलता रहता है इस योक्त तक हम उस की क़दर करते हैं और वो चीज़ हम को प्यारी होती है मगर जब वो हमारे काम की नहीं रहती तो इस को अपने पास रखना भी हमें गिरां गुज़रता है
दस्तार और गुफ़्तार अपनी ही काम आती है
अपने हाथ से अपनी पगड़ी (दोपट्टा) बांधना चाहिए और अपनी बात ख़ुद ही कहना मुनासिब है दोसे के ज़रीये दोनों ठीक नहीं क्यों कि अपनी बात या मतलब को जैसे ख़ुद कह सकता है इस तरह दूसरे से अदा नहीं हो सकता
दौड़ चले न गिर पड़े
जो व्यक्ति बुरे काम करता है वह हानि उठाता है, ग़लत रास्ते पर चले न ठोकर खाए
दौलत अंधी होती है
धनवान आदमी निर्धन के बारे में नहीं सोचता, धनवान दोस्तों को देख कर दूर भागता है
दौलत लुटे कोयलों पर मोहर
उचित समय पर ख़र्च करते समय मितव्ययी होने और अनुचित समय ख़र्च की परवाह न करने के अवसर पर बोलते हैं
देखा न भाला सदक़े गईं ख़ाला
बिना देखे ही किसी की सुनी सुनाई या मात्र कथन के आधार पर किसी की प्रशंसा करना, झूठ मूठ का प्यार जताने वालों पर व्यंग्य के रुप में प्रयुक्त
देखे राही बोले सिपाही
यदि कोई मामला हो अर्थात कहीं लूटमार हो तो राहगीर तो खड़ा होकर तमाशा देखता है किंतु सिपाही उसमें अवश्य बोलता है अर्थात सामने तो हिम्मत वाला ही आता है
देखिए क़साई की नज़र खिलाइए सोने का निवाला
किसी को अपनी संतान को शिष्टाचार और सीख देने के लिए बोला जाता है, हर प्रकार की सुख-सुविधा के साथ प्रशिक्षण देना, शिष्टाचार सिखाना, लाड-प्यार देना मगर मर्यादा न लाँघने देना
देखो-देखो
मुतवज्जा करने के लिए, किसी चीज़ की तवक़्क़ो में इसका इंतिज़ार करने के मौक़ा पर
देस चोरी , प्रदेस भीक
वतन से बाहर पस्त से पस्त तर पेशा इख़तियार करने में कोई श्रम-ओ-आर नहीं मगर वतन में वही काम छुप कर करना होता है (हिफ़्ज़-ए-आबरू के लिए वतन छोड़ने के मौक़ा पर मुस्तामल है)
धाड़ है
लोग मुतफ़र्रिक़ इधर उधर के जमा होगए हैं काम देने वाले नहीं, ग़ैर मुनज़्ज़म जमईयत है, सलीक़े से काम नहीं करसकती
ढाक तले की फूहड़ महवे तले की सुघड़
बा सामान हर तरह से बासलीक़ा और बे सामान बदसलीक़ा कहलाता है (मो्वा (महो) फुलदार दरख़्त है और ढाक है फल का) अमीर के सब काम अच्छ्াे मालूम होते हैं
ढाक तले की फुवड़ मव्वे तले की सुघड़
बा सामान हर तरह से बासलीक़ा और बे सामान बदसलीक़ा कहलाता है (मो्वा (महो) फुलदार दरख़्त है और ढाक है फल का) अमीर के सब काम अच्छ्াे मालूम होते हैं
ढाके के बंगाल कूज़े के कंगाल
ढाके में कूज़े (कुल्ल्हड़) बनते थे, ढाके वालों के पास कूज़ा न होना, जिस चीज़ की बहुतायत हो उससे वंचित रहना, अर्थात नदी में रह कर प्यासे रहना
धन चाहे तो धर्म कर, मुक्ति चाहे भज राम
यदि धन चाहता है तो दान कर, यदि मुक्ति चाहता है तो ईश्वर को याद कर, आश्य यह है कि धर्म करने से धन की और भजन एवं आराधना करने से मुक्ति की प्राप्ति होती है
धरती की माँ साँझ
संध्या धरती की माता है क्यूँकि दिन के परिश्रम के बाद सबको इसी की गोद में शांति मिलती है
धीरा सो गंभीर
आहिस्ता गहिरा होता है, जो पानी आहिस्ता चले वो गहिरा होता है , मुस्तक़िल मिज़ाज आदमी कामयाब रहता है
धोबी बेटा चाँद सा सेटी पटाख़
परिश्रमी कितना ही अच्छे वस्त्र धारण करने वाला हो अपने काम और परिश्रम ही में लगा रहता है, पराई पूंजी पर मज़ा उड़ाने वाले के संबंधित बोलते हैं
धोबी का कुत्ता घर का न घाट का
आवारा व्यक्ति के प्रति कहते हैं अर्थात जिसका कहीं ठिकाना न हो, जो व्यक्ति किसी तरफ़ का न हो उसके प्रति भी व्यंगात्मक तौर पर कहते हैं
दीदे झुकते हैं तो घुटनों की तरफ़
फ़ित्रती उसूल के तहत आँखें आगे ही जुखती हैं , (मजाज़न) तरफदारी अपनों ही की होती है, अपनों की मुरव्वत आ ही जाती है (जानिबदारी, पासदारी बरतने के मौक़ा पर मुस्तामल है)
दीगर ब-ख़ुद मनाज़ा कि तुर्की तमाम शुद
फ़ारसी मिसल उर्दू में मुस्तामल, अब अपने ऊपर नाज़ ना करो क्योंकि तुर्की तमाम होगई यानी तुम्हारा सारा ज़ोर शोर ख़त्म हो गया, रोब दाब मिट गया ब ग़रूर किसी बात पर है
दीवाली जीत साल भर जीत
हिंदुओं का मानना है कि यदि दिवाली पर जुआ जीतते हैं, तो पूरे वर्ष हर काम में सफलता मिलती है
दीवार के भी कान हैं
दीवार भी कान रखती है, दीवारों के भी कान होते हैं, यह एक कहावत हैं जिसका अर्थ होता है “सतर्क रहना”, कोई आप की बात सुन सकता है, जहां गोपनीयता रखनी जरूरी समझे वहां इस मुहावरे को प्रयोग में लाया जाता है
दीवार खाई आलों ने , घर खाया सालों ने
इन सालों पर तंज़ है जो बहनोई के टुकड़ों पर पड़ते हैं , दीवार ताक़चों की वजह से कमज़ोर हो जाती है और घर सालों की वजह से तबाह हो जाता है, बेगानों से बेगानों की निसबत ज़ियाद ज़रर पहुंचता है
दीवार-ए-हम-गोश-दारद
फ़ारसी कहावत उर्दू में प्रयुक्त, दीवार भी कान रखती है, दीवारों के भी कान होते हैं, यह एक कहावत हैं जिसका अर्थ होता है “सतर्क रहना”, कोई आप की बात सुन सकता है, जहां गोपनीयता रखनी जरूरी समझे वहां इस मुहावरे को प्रयोग में लाया जाता है
दीवार-गोश-दारद
फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल, रुक : दीवार के भी कान हैं
दिल का घाव रानी जाने या राव
दिल की पीड़ा और दुःख को केवल वही जानता है जो इससे पीड़ित होता है, जिस पर मुसीबत पड़ती है उसको वही ख़ूब समझता है
दिल्ली में रह कर भाड़ झोंका
जब कोई अच्छे स्थान या वातावरण में काफ़ी दिनों तक रह कर भी कुछ न सीख सके तो उसके प्रती व्यंग में ऐसा कहते हैं. अनाड़ी ही रहा, अच्छी जगह रह कर भी कुशलता नहीं प्राप्त कर सका, अनभिज्ञ व्यक्ति कभी उन्नति नहीं कर सकता
दिन दूनी रात चौ-गुनी
दिन प्रतिदिन और घड़ी-घड़ी अधिक, बहुत जल्दी जल्दी और बहुत अधिक बढ़ना, ख़ूब उन्नति पर होना
दिवाली जीत साल भर जीत
(हिंदू धर्म) अच्छी शुरुआत का शुभ अंत, दिवाली के दिन की जीत का प्रभाव साल भर तक रहता है
दिया है तो देख ले
दो अर्थ है= यदि तू ने दिया है तो यहीं होगा या चराग़ है तो ढ़ूँढ़ ले
दिया ही आड़े आता हे
पुन करना वक़्त बड़े पर काम आता है, ख़ैरात की बरकत से बिगड़े काम बिन जाते हैं और जान की सलामती है
दिया ठीकरे में , लगे साथ खाने
गुस्से या हक़ारत के मौक़ा पर मुस्तामल है जब कोई अदना आदमी अपने को बड़ों के बराबर का समझने लगे या अपने को उन का हम पिला शुमार करने लगे, बड़ों से बराबरी का दावा करने लगे उस वक़्त कहते हैं
दिए तले अंधेरा
आँख पर लापरवाही का पर्दा, धनसंपन्नता के साये तले निर्धनता, ज्ञान के साये में अज्ञानता
दो चून के बुरे होते हैं
एक के मुक़ाबले में दो शख़्स अगर ज़ईफ़ भी हूँ तब भी एक को अकेला होने की विजय से उन से डरना चाहिए, दो कमज़ोर भी मिल को क़वी हो जाते हैं
दो घर मुसलमानी उन में भी आना कानी
मुस्लमानों की नाइत्तिफ़ाक़ी की तरफ़ इशारा है कि गांव में दो मुस्लमान हूँ तो वो बी आपस में लड़ते रहते हैं, थोड़े से आदमी इन में भी नाइत्तिफ़ाक़ी
दो तलवारें एक मियान में नहीं रह सकतीं
किसी एक वस्तु के दो समान इच्छुक नहीं रह सकते, दो विलोन वस्तुएँ एक स्थान पर इकट्ठी नहीं रह सकतीं, एक देश में दो राजा नहीं हो सकते, एक स्त्री के दो पति नहीं हो सकते
डोंडू क्या जाने साबुन का भाओ
जिस चीज़ से किसी को ताल्लुक़ ना हो वो इस चीज़ की हक़ीक़त क्या बयान कर सकता है, जब कोई शख़्स ख़्वाहमख़्वाह इस अमर में दख़ल दे जिस का उसे इलम ना हो तो कहते हैं
डोम और चना मुँह लगा बुरा
इसलिए कि डोम धृष्ट होता है और चना आदमी खाते-खाते बहुत खा जाता है जिससे मनुष्य को हानि पहुँचती है
दोस्त का डिगा पाँव दुश्मन का लगा दाँव
दुश्मन से ज़रूर बदला लेना चाहीए, ज़रासी चूओक हो जाये तो दुश्मन को क़ाबू मिल जाता है जो शख़्स ताक़तवर दोस्त रखना हो अर उस की हिमायत में कमी हो जाये तो दुश्मनों की जुर्रत बढ़ जाती है और वो क़ाबू पा जाते हैं
दु'आ और दवा नित करनी चाहिये
बीमारी की हालत में ईश्वर से नित प्रार्थना भी करनी चाहिए और दवा भी खानी चाहिए अर्थात दवा करे तो स्वास्थ्य की प्रार्थना भी करनी चाहिए
दुग्दाना में दो गए , माया मिली न राम
तज़बज़ब में आदमी ना उधर का रहता है ना उधर का यानी यकसू तबीयत नहीं रखने से ख़ुदा और दौलत दोनों में से कोई भी हासिल नहीं होता, दो कामों का एक साअत बंद-ओ-बस्त करने में दोनों बिगड़ जाते हैं
दुख का एक , सुख के सौ
मुसीबत में एक आदमी भी मुश्किल से साथ देता है ज़माना-ए-आसाइश में सैकड़ों दोस्त बिन जाते हैं
दुनिया और मतलब
दुनिया वाले स्वार्थी होते हैं अपने मतलब ही से काम रखते हैं
दुनिया बा उम्मीद क़ाइम
दुनिया उम्मीद पर क़ायम है, इंसान उम्मीद के सहारे ज़िंदगी बसर करता है, मुस्तक़बिल से मायूस नहीं होना चाहीए
दुनिया बे-सबात है
दुनिया मिटने वाली है, संसार नष्ट होने वाला है, संसार का जीवन हमेशा नहीं रहने वाला है, दुनिया निरंतर नहीं है, जीवन जल्दी समाप्त हो जाती है, ज़िंदगी जल्दी ख़त्म हो जाती है
दुनिया फ़ानी है
जगत अस्थायी है, संसार समाप्त होने वाली है, दुनिया ख़त्म होने वाली है
दुनिया मुर्दा-पसंद है
मृत्यु के बाद दुनिया में सम्मान होता है, जीवित लोगों का कोई सम्मान नहीं करता अर्थात जीवित लोगों को कोई नहीं पूछता, लोग मरने के बाद प्रशंसा करते हैं
दुनिया रोटी है और मज़हब चूरन
आम तौर पर लोग दुनिया के प्रुस्तार होते हैं और मज़हब को बराए नाम मानते हैं, दुनिया में कामयाबी के लिए मज़हब का नाम भी लेते रहते हैं
दुश्मन कहाँ , बग़ल में
दुश्मन को साथ रखने या उस की पर्दाख़्त करने के मौक़ा पर मुस्तामल, ख़ुद ही दुश्मन की सरपरस्ती की जा रही है, दुश्मन वही है जिस की परवरिश हो रही है
दूल्हा तो वो पर दो-शाला अपना
ज़ाहिरी बनाओ सजाओ की हक़ीक़त खोलना होता ये मिसल बोलते हैं, मतलब ये होता है कि इस की सारी सज धज हमारे ही तुफ़ैल से है फिर भी हमें से एकड़ता है
दुल्हा-दुलहन मिल गए, झूटी पड़ी बरात
जब दो आदमी अपने अपने समर्थकों को लेकर आपस में लड़ रहे हों परंतु बा'द में उन में आपस में समझौता हो जाए और उनके साथियों को मूर्ख बनना पड़े तब कहते हैं