कड़ कपूर, कपास, एक मोल हैं
बिलकुल अन्न्धर है, भले बुरे की तमीज़ नहीं, अंधेर नगरी चौपट राजा, टिके सैर भाजी टिके सैर खाजा के मौक़ा पर मुस्तामल
कड़वा करेला और नीम चढ़ा
जब कोई क्षुद्र व्यक्ति कुसंग में पड़कर अथवा अचानक मान-सम्मान पा कर और भी बुरा बन जाए तब कहते हैं
कड़वे से मिलिए मीठे से डरिए
तीव्र स्वभाव वाले अधिकतर दिल के साफ़ होते हैं एवं हासप्रिय या चापलूस अधिकतर मक्कार होता है इस लिए बुरे स्वभाव वाले से हानि नहीं पहुँचता चापलूस से हानि पहुँचता है
कंग-जहाँ-रंग
जहाँ गंगा का पानी पहुँचता है वहाँ भूमि बहुत उपजाऊ हो जाती है और लोग समृद्ध हो जाते हैं
का टापू में मोर नाचा किस ने देखा
विदेश में कुछ भी करो जब अपने देश में कुछ करो तो हम समझें कि हाँ कुछ किया, परदेस में किसी बड़े काम के करने का आनंद परिवार या देश के लोग वाले नहीं उठा सकते, जब कोई व्यक्ति अपना धन किसी ऐसी जगह ख़र्च करे जहाँ जहाँ देश के नागरिक या रिश्तेदार उसे न देख सकें तो क
काँटे बोए बबूल के तो आम कहाँ से खाए
बुरा काम करके भलाई की आशा रखना, फ़ुज़ूल और मुर्खतापूर्ण क्रिया है, जैसा बोओगे वैसा काटोगे, जौ बोओ गे तो गेहूं कैसे काटोगे, जौ बोओगे तो जौ ही काटोगे
काका का होके न भए
काका किसी के ना हुए, चचा को कोई पसंद नहीं करता क्यों कि वो बड़े भाई का बराबर का हिस्सादार होता है
काला कव्वा खाया है
इस शख़्स की निसबत बोलते हैं जो बूढ़ा होजाए मगर बालों पर सफ़ैद ना आए (लोगों का ख़्याल है कि काला कव्वा खाने से उम्र बढ़ती है और बाल सफ़ैद नहीं होते
काला कव्वा सदक़े को
काले व्यक्ति को व्यंग में कहते हैं, काले रंग का कोई महत्व नहीं होता, काले आदमी को चिढ़ाने के बोल
काला मुँह , नीले हाथ पाँव
रुसवाई, बदनामी (पुराने ज़माने में दस्तूर था कि जब किसी की हद दर्जा तहक़ीर-ओ-तज़लील मक़सूद होती या उसे सख़्त सज़ा दी जाती तो काला मुँह और नीले हाथ पाओ करके गधे पर बिठा कर पूरी बस्ती में फ़िराते थे
काले के काटे का जंतर न मंतर
धोखेबाज़ से हर समय हानि होती है क्यूँकि उससे सुरक्षित रहना कठिन है, शानदार और धोखेबाज़ या चालबाज़ी से सुरक्षित रहना मुश्किल है
काली गई बामन के दान
काली गाय ब्राह्मण को दान चली जाती है, इसका मतलब है कि अच्छी चीज़ को दूसरे ले जाते हैं
कान पड़ी काम आती है
सुनी सुनाई बात कभी न कभी काम आ ही जाती है, सुनी हुई अच्छी बात किसी वक़्त याद आ सकती है
काने चोर कनौंडे भेंट
ज़ख़म पर चोट ज़्यादा लगती है, जिस बात का डर हो वही पेश आ जाती है, जिस से मिलना ना हो वही अदबदा कर सामने आ जाता है
काने चोट कनौडे भेंट
ज़ख़म पर चोट ज़्यादा लगती है, जिस बात का डर हो वही पेश आ जाती है, जिस से मिलना ना हो वही अदबदा कर सामने आ जाता है
काने को काना प्यारा
मनुष्य को स्वयं जैसा व्यक्ति ही पसंद आता है, दुष्ट व्यक्ति की दुष्ट व्यक्ति से ही बनती है
कानी गाय के अलगे बथान
कानी गाय अलग बंधती है अथवा सबसे अलग रहना चाहती है क्योंकि घास चरने में उसे कठिनाई होती है, दूसरे ढोर उसे मारते भी हैं
कार दुनिया कसे तमाम नकर्द
(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) दुनिया का काम किसी ने ख़त्म नहीं क्या, हर काम में इख़तिसार पर नज़र रखू, ज़्यादा हवस ना करो
कार-अज़-दस्त-रफ़्ता
(फ़ारसी कहावत कार अज़ दश्त रफ़्ता तेज़ अज़ कमान जस्ता बाज़ नमी आयद की लघु) धनुष से निकला हुआ तीर और हाथ से निकला हुआ काम वापस नहीं आता, मतलबव जो काम हाथ से निकल गया हो
कार-ए-इमरोज़ ब-फ़र्दा मगुज़ार
(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) आज का काम कल पर ना छोड़, काम को बरवक़्त अंजाम देने के लिए बतौर ताकीद-ओ-हिदायत बोला जाता है
काता औले दौड़ी
जल्दी में बे सोचे समझे कोई काम कर गुज़रने वाले या जब देखो एक नया मशग़ला उठाने वाले की निसबत बोलते हैं, बगै़र सोचे समझे बोलना या कोई काम करना, उजलत में कोई काम करना
काटा और उलट गया
डस कर पलटी खाना, सांप का क़ायदा है कि काटने के बाद पलट जाता है जिस से इस का ज़हर ज़ख़म में भर जाता है इसी वजह से इस का इतलाक़ ऐसे मूज़ी शख़्स पर होता है जो नुक़्सान पहुंचा करना आश्ना बिन जाता है
काटे कटे न टाले टले
निहायत सख़्त जान, वह बला जो किसी तरह न टले, वो मुसीबत जो किसी तौर दफ़ा न हो
काठ की हाँडी बार-बार नहीं चढ़ती
काठ की हाँडी एक बार ही आग पर रखने से जल जाती है, पुनः उसे रखने का कोई सवाल ही नहीं उठता, आश्य यह है कि कोई व्यक्ती किसी को एक ही बार धोका दे सकता है
कातिक बात का हातक
कातिक के महीने में बात करने में ही दिन ख़तम हो जाती है (क्योंकि दिन बहुत छोटी होती है)
कातना तो आता नहीं पोनी तो बनाने लगी
चर्ख़ा कातना आसान है पोनी बनाना मुश्किल है, ऐसी स्त्रियों के संबंध में बोलते हैं जिनको आसान सा काम नहीं आता लेकिन मुश्किल काम करने का दावा करती हैं
काया बड़ी का माया
जान से बेहतर माल नहीं है अर्थात स्वस्थ से अच्छा धन नहीं है, कंजूस के लिए भी बोलते हैं जो शरीर से अधिक धन को मूल्यवान जाने
कभी घूरे के दिन भी फिरते हैं
ज़माना बदलता रहता है, कभी ग़रीबों और कमज़ोरों का ज़माना भी बदल जाता है, उन के भी अच्छे दिन आ जाते हैं, ग़रीब और कमज़ोर हमेशा ग़रीब कमज़ोर नहीं रहते, बारह बरस में घूरे के भी दिन फिर जाते हैं
कभी तोला कभी माशा
एक हालत पर टिका न रहने वाला, कभी कुछ कभी कुछ, एक हालत पर क़रार नहीं है
कच्चे बाँस जिधर झुकाओ झुक जाते हैं
बच्चों को शुरू में जैसी शिक्षा दी जाती है वे वैसे ही अच्छे या बुरे बन जाते हैं क्योंकि उनकी बुद्धि कोमल होती है, बड़े होने पर सिखाने का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता
कच्ची रेंडी दस्तर-ख़्वान का ज़रर
नादान और ना तजरबाकार आदमी की सोहबत-ओ-शिरकत से नुक़्सान और इफ़शा-ए-राज़ का ख़ौफ़ लगा रहता है, तिफ़ल नौख़ेज़ से अहितराज़ की निसबत बोलते हैं
कह गया बह गया
बर्बाद हो गया, अकारत हो गया (विशेषकर जब बात या सलाह आदि पर ध्यान न दिया जाए तब प्रयोग किया जाता है)
कहें कुछ करें कुछ
उनकी बात का भरोसा नहीं कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं, अविश्वसनीय आदमी है
कहीं बूढ़े तोते भी पढ़ते हैं
हर बात अपने वक़्त हर मुनासिब होती है, बूढ़ों की तर्बीयत नहीं हो सकती, हर काम या फ़न की तहसील का ज़माना मुक़र्रर है, इस के गुज़रने के बाद इस का हुसूल मुश्किल होता है
कहते की ज़बान नहीं पकड़ी जाती
किसी को कुछ कहने से रोका नहीं जा सकता, किसी की ज़बान को बंद नहीं किया जा सकता, कहने वाले को कोई नहीं रोक सकता
कम ख़र्च बाला नशीन
इस काम या चीज़ की निसबत बोलते हैं जिस पर ख़र्च कम आए या जो क़ीमत में कम मगर बरतने और देखने में उम्दा हो , वो जो क़ीमत में कम इफ़ादीयत में बेहतर हो
कम ख़र्ची में आटा गीला
गरीबी में आटा गीला; आय कम और व्यर्थ ख़र्च बहुत, आटे में पानी अधिक हो जाए तो उसमें आटा और डालना पड़ता है
कमाए न धमाए , मौ को भोज भोज खाए
(औरत अपने निखटू् ख़ावंद की शिकायत करती है) कमाता कुछ नहीं और मुझे तंग करता रहता है, नकठो आदमी हमेशा बीवी के लिए मुसीबत होता है
कमाऊ पूत कलेजे मूत
कमाने वाले पुत्र को माँ बहुत चाहती है, कमाने वाले पुत्र को सभी चाहते हैं
कर्दन सद 'एब ओ ना कर्दन यक 'एब
किसी काम को करें तो इस में सैकड़ों ख़राबियां निकाली जाती हैं और ना करना सिर्फ़ एक ख़राबी शुमार की जाती है, एक नहीं से सौ बुलाऐं टलती हैं
करे दस भरें
एक आदमी ग़लती करता है और मुतअद्दिद या अज़ीज़ों को नतीजा भुगतना पड़ता है
करे एक पकड़े जाएँ सब
एक के दोष का दण्ड सबको मिलता है, एक की भूल का प्रायश्चित्त पूरे समाज को करना पड़ता है
करेला और नीम चढ़ा
प्रायः उस दुष्ट व्यक्ति के प्रति बोलते हैं जो किसी कारण से और दुष्ट हो जाए
कर्घा छोड़ तमाशे को जाए नाहक़ चोट जुलाहा खाए
(दो सिपाही आपस में किसी शहर के कूचे में ख़ानाजंगी कर रहे थे एक जुलाहा ये ख़बर सुनते ही अपने करघे से उठ कर इस कूचे में आया और तमाश देखने लगा एक तलवार जो दूसरे के सर से एचटी तो जिला है के आ लगी) जब कोई शख़्स दूसरे की रेस कर के अपना काम छोड़ देता है तो नुक़्सान उठाता है
कर्म रेखा अमिट है
भाग्य बदल नहीं सकता, भाग्य का लिखा मिट नहीं सकता, भाग्य का लिखा हो कर रहता है
करते की बिध्या
इलम की वो पुख़्तगी जो तजुर्बा और मश्क़ से पैदा होती है, करते रहने की महारत का नतीजा, मुसलसल मश्क़ के सबब इलम की पुख़्तगी मश्शाक़ी से हाथ दरुस्त रहता है, मश्क़ से कामयाबी हासिल होती है
करते की बिद्या
इलम की वो पुख़्तगी जो तजुर्बा और मश्क़ से पैदा होती है, करते रहने की महारत का नतीजा, मुसलसल मश्क़ के सबब इलम की पुख़्तगी मश्शाक़ी से हाथ दरुस्त रहता है, मश्क़ से कामयाबी हासिल होती है
कश्मीरी बे पीरी जिस में लज़्ज़त न शीरी
बाअज़ का ख़्याल है कि कश्मीरी बेवफ़ा और नादार होते हैं, कश्मीरी ऐसे छींटों का बुरा मानते हैं, कश्मीरीयों के बारे में ये बहुत पुराना ख़्याल है, अब ऐसा ख़्याल करना दरुस्त नहीं है
कौड़ी का माल नहीं
महिज़ निकम्मा है, मुफ़्त लेने के लायक़ भी नहीं, बेहक़ीक़त और बेहैसियत है
कौन कहे रान ढाँको
किसी के अवगुण जानना परंतु सावधान न करना इस लिए कि बिना किसी कारण के बुरा कौन बने
कौन कहता है
ऐसा करने को किसी ने नहीं कहा, ऐसा नें करना चाहीए, में नहीं कहता, कोई नहीं कह सकता, किसी की मजाल नहीं कि कोई कुछ कह सके, किस ने कहा, अगर कोई कहता है तो ग़लत कहता है
कौन किसी का
कोई किसी का नहीं होता, कोई अपना नहीं, हर कोई स्वार्थी है
कौन किसी के साथ मरता है
कोई किसी का साथ नहीं देता, मरने वाले से लाख मुहब्बत हो कोई उस के साथ नहीं जा सकता, कोई किसी के साथ नहीं मरता, सब मजबूर हैं
खड़ा खेल फ़र्रुख़ आबादी
ज़ना कारी, बगै़र निकाह या अह्द के वपीमां किसी औरत से ताल्लुक़ात क़ायम करना, नाजायज़ ताल्लुक़ात. थोड़ी देर का जिन्सी ताल्लुक़, बगै़र किसी झमेले के वक़्ती अय्याशी
खड़ा तख़्ता पड़ा शहतीर
खड़ा तख़्ता, पड़ा हुआ बीम, दोनों ताक़त में बराबर होते हैं, सीधी क्षैतिज स्थिति में तख़्ता और लेटी हुई स्थिति में बीम: अनिच्छुक और आराम पसंद व्यक्ति
खड़े रस्सी बैठे कोस, खाते-पीते तीन कोस
आदमी यात्रा में जितनी देर खड़ा रहता है उतनी देर में एक रस्सी, जितनी देर बैठता है उतनी देर में एक कोस और खाने पीने में जितना समय नष्ट करता है उतने में तीन कोस चल सकता है, आश्य यह है कि अपना समय नष्ट नहीं करना चाहिए
खड़ी मज़दूरी, चोखा काम
उजरत पूरी और अच्छी हो तो काम भी अच्छा होता है, उजरत हाथ के हाथ मिले तो काम दिल लगा कर किया जाता है
खाए मलीदा एक खाए भुस
अपना-अपना भाग्य कोई धनवान और कोई निर्धन, कोई मज़ा-मौज करता है, कोई कष्टों में जीवन बिताता है
खाई भली का माई
खाना माँ से अधिक प्यारा होता है, माँ की मुहब्बत नहीं बल्कि उसके लाड-प्यार की मुहब्बत होती है
ख़ाला की मेहमानी हाथ डाल पछतानी
अन्य अंतरिक्ष में हस्तक्षेप करने पर पछताना ही पड़ता है, ख़ाला के घर बार बार जाएं तो फिर आव-भगत नहीं होती, बार बार कहीं नहीं जाना चाहिए
ख़ाली घर दीवानी बीवी
तन्हाई से वहशत होती है या जो शख़्स ख़्वाहमख़्वाह अपने घर की आरास्तगी में मसरूफ़ रहे उस की निसबत भी बोलते हैं
ख़ाम को काम सिखा लेता है
जिसको काम नहीं आता काम पड़ने पर सीख जाता है, अनुभव आदमी को परिपक्व बनाता है, तजरबा आदमी को पक्का बना देता है
ख़ामोशी नीम-रज़ा
रुक : अलख़ामोशी नियम रज़ा, किसी की बात सन कर ख़ामोश होजाना बड़ी हद तक उस की तसदीक़-ओ-तौसीक़ या तस्लीम करने के बराबर है
ख़ान-ए-ख़ानाँ खाने में बिताना
खाने में कुछ छुपा होना, बताना कहते हैं पगड़ी के बीच के हिस्से को, चौंका खाने में बिरयानी या चावल भी मख़रूती अंदाज़ से उठे रहते हैं बीच में अशर्फ़ियां वग़ैरा रख दी जाती थीं बैरम ख़ान ख़ान-ए-ख़ानां जब किसी को खाना भेजता तो इस में पोशीदा तौर पर अशर्फ़ियां रख देता था, जब किसी पर एहसान किया जाये और उसे ज़ाहिर ना होने दें तो इस मौक़ा पर बोलते हैं
खावे मूँग रहे ऊँघ
कमज़ोर भोजन खाने वाला, कमज़ोर ही रहता है; जैसा भोजन वैसी ही शक्ति और प्रभाव; मूँग खाने वाला सुस्त हो जाता है
खावे पान, टुकड़े को हैरान
तन पर लत्ता नहीं किंतु पान खाएंगे, निर्धनता में बड़ा स्वभाव, निर्धनता में रसिया और निर्धनता में अमीरों जैसा बनना
खावे तो आवे
कुछ आशा हो तो आज्ञा का पालन करे, लाभ की आशा हो तभी कोई किसी के पास आता है
ख़ाविंद चोन का भी बुरा होता है
मालिक अगर आटे का बना हुआ भी हो तो बुरा होता है मतलब ये है कि चाहे मालिक कितना सीधा और नेक हो मगर ख़िदमतगार को हमेशा बुरा लगता है
खाया बड़ी कि माया
अच्छा भोजन या रुपयों का संग्रह, जिसका प्रयोग धन की महानता और श्रेष्ठता दर्शाने के लिए किया जाता है
खाया सो खोया
(ख़र्च किया व्यर्थ हुआ) दान-पुण्य करते तो अच्छा होता, काम आता
ख़र-ए-'ईसा ब-आस्माँ न-रवद
कमीना आदमी अच्छे आदमीयों की संगति से भी इस योग्य नहीं हो पाता कि किसी ऊंचे पद पर पहुंच जाये, अगर किसी अच्छे आदमी से कुछ संबंध हो मगर उसमें व्यक्तिगत गुण न होंं तो वो इस संबंध की बिना पर अच्छे पद पर नहीं पहुँच सकता
ख़रगोश के सींग की तरह ग़ायब हो जाना
ख़रगोश के सींग नहीं होते यानी ये ना मुम्किनात में से है संसार जब अपने बाहरी रूप के साथ ख़रगोश के सींग की तरह ग़ायब हो जाता है और सिर्फ़ सत ही सतरह जाता है तब वही सत सामान्य है
खरी मज़दूरी चोखा काम
अच्छी मज़दूरी होगी तो ही अच्छे दाम मिलेंगे, अच्छे काम की अच्छी मज़दूर मिल सकती है
खरिया में कोइला
नामौज़ूं बात, बदवजे़ चीज़, अच्छों में बुरा, हसीनों के मजमे में बदसूरत
ख़स कम जहाँ पाक
यह कहावत वहाँ बोलते हैं जहाँ किसी वस्तु या आदमी का होना या न होना दोनों बराबर हों
खट्टा अंगूर कौन खाए
मशहूर कहानी है कि एक लोमड़ी दरख़्त में अंगूर का ख़ोशा देख कर बहुत ललचाई और इस तक पहुंचने की कोशिश भी की लेकिन ना पहुंच सकी आख़िर-ए-कार बोली जाने भी दो, खट्टा अंगूर कौन खाए, ये इस मौक़ा पर बोलते हैं जब कोई किसी काम में कोशिश करे और नाकामयाब होने पर इस में ऐब लगा के छोड़ दे अब ऐसे मौक़ा पर अंगूर खट्टे हैं बोलते हैं
खेल का खेल नफ़ा' में बच्चा
मज़ा मज़े में बच्चा नफ़ा में, तफ़रीह भी और फ़ायदा भी , जब किसी काम में हर सूरत से नफ़ा या दुहरा फ़ायदा हो तो बोलते हैं
खेलेंगे न खेलने देंगे
ज़िद में न तो ख़ुद करना न दूसरों को करने देना, किसी काम में ज़िद करना, न ख़ुद करना न दूसरे को करने देना
खेती ख़सम सेती
खेती में ख़ुद मालिक को काम करना चाहिए, दूसरों पर छोड़ देने से कोई फ़ायदा नहीं होता, काम मालिक की तवज्जोह और उस की दिलचस्पी ही से अच्छी तरह होता है
ख़िदमत से 'अज़मत है
कठोर परिश्रम से सफलता मिलती है, मालिक को ख़ुश रखने से सम्मान मिलता है और लाभ भी होता है, सेवा से ही बड़ापन सिद्ध होता है
खींचा तानी वो भरे जो पराए बीच में पड़े
जो दूसरों की बातों में दख़ल दे उसे मारा मारा फिरना पड़ता है, दूसरों की बातों में दख़ल देने वाले को परेशानी उठानी पड़ती है, जो दूसरों के मुआमलात में दख़ल देता है उसे खींचातानी में मुबतला होना पड़ता है यानी कभी एक फ़रीक़ उसे निशाना-ए-तन्क़ीद बनाता है कभी दूसरा
खींचो न कमान बनो न पठान
जब तक कोई बड़ा काम ना करे इज़्ज़त नहीं मिलती, तकलीफ़ उठाए बगै़र बड़ा नही बना जाता, मुसीबत या दुख झेले बगै़र राहत नहीं मिलती
खींचूँगा वो बाल कि जिसकी ख़बर दूर तक होगी
इन पोशीदा और छिपे हुए ऐबों का इज़हार करूंगा जिस से तमाम आलम में ज़िल्लत-ओ-रुसवाई हो कर तुम्हारे बुज़ुर्गों की इज़्ज़त-ओ-आबरू ख़ाक में मिल जाएगी, ऐसे ऐब निकालूंगा कि सख़्त रुसवाई होगी
खींचूँगा वो बाल कि जिसकी ख़बर दूर तक जाएगी
इन पोशीदा और छिपे हुए ऐबों का इज़हार करूंगा जिस से तमाम आलम में ज़िल्लत-ओ-रुसवाई हो कर तुम्हारे बुज़ुर्गों की इज़्ज़त-ओ-आबरू ख़ाक में मिल जाएगी, ऐसे ऐब निकालूंगा कि सख़्त रुसवाई होगी
खील बताशों का मुँह
शेखचिल्ली (एक अफ़सानवी किरदार) एक मर्तबा कुछ माल चुरा कर लाया, उस की माँ को अंदेशा था कि ये चोरी का हाल छिपा नहीं सकेगा लिहाज़ा इस ने माल छिपा दिया और खीलें बताशे इस तरह गिराए कि शेखचिल्ली समझे कि ये आसमान से गिरे हैं, तहक़ीक़ात होने पर शेखचिल्ली ने चोरी का इक़बाल करलिया और बताया कि जिस दिन खेल बताशों का मीना बरसा था उस दिन मैंने चोरी की थी, ये मिसल इस मौक़ा पर मुस्तामल है जब कोई ग़ैर मुईन ज़माना बताए या ऊओट पटांग बात करे
ख़िल्क़त भेड़िया धसान है
लोग आँख बंद कर के या बे सोचे समझे दूसरों के पीछे हो लेते हैं जैसे बेड़ों का तरीक़ा है जिधर एक चली उसी तरफ़ सब भेड़ें चलने लगती हैं , लोग दूसरों की देखा देखी काम करते हैं
खिस्यानी बिल्ली खम्बा नोचे
जिसे क्रोध आ रहा हो वह अपनी खीझ या क्रोध दूसरों पर उतारता है, लाचारी में आदमी दूसरों पर क्रोध करता है, लज्जित व्यक्ति दूसरों पर अपनी लज्जा उतारता है, निर्बल की खीझ
ख़िज़्र ने नाव डुबोई
रुक : नीज़ नाव किस ने डुयवटी ख़्वाजा ने ख़िज़र ने यानी जिन से फ़ायदा की उम््ीद थी उन्हों ने नुकसान पहुंचाया, खिलाफ-ए-तवक़्क़ो नुक़्सान पहुंचने पर बोलते हैं
खोदे कुवा आपी डुब मुवा
अपनी हलाकत या तबाही के ख़ुद अस्बाब पैदा करना, ऐसे शख़्स के लिए बोलते हैं जो दूसरों की तकलीफ़ का सामान करता है मगर ख़ुद ही इस का शिकार हो जाता है
खोल घड़ा, कर धड़ा
ऐसे व्यक्ति के लिए कहते हैं जो किसी वस्तु को लेने के लिए बहुत जल्दी मचाए परंतु देने के लिए जिसके पास पूरे दाम न हों
खोल कीसा खा हरीसा
रुपया ख़र्च करने से ही लुतफ़ हासिल होता है, गिरह का ज़र ख़र्श कर और दुनिया का मज़ा उठा
ख़ुदा को मुँह दिखाना है
(नारवा बात पर दूसरे को इबरत दिलाने या अपनी बरायत दिखाने के लिए इस्तिमाल किया जाता है), अल्लाह के सामने जाना है, मरना है, अल्लाह से डरो
ख़ुदाई एक तरफ़ जोरू का भाई एक तरफ़
सारी ख़ुदाई एक ओर जोरू का भाई एक ओर, सारी खुदाई, दूसरी ओर जुरू का भाई, पत्नी के भाई का ध्यान. उसके लिए बोलते हैं जो जुरू का ग़ुलाम और आज्ञाकारी हो, अधिकतर एक ओर सारी खुदाई इत्यादि
खुर्ली में एक कुत्ता
ये मिसल उस शख़्स के लिए बोलते हैं जो ऐसी चीज़ें दूसरों को इस्तिमाल नहीं करने देता जो इस के लिए किसी सूरत से कारआमद नहीं है
ख़ुशामद से बर-आमद है
चापलूसी से लाभ होता है, चापलूसी से काम निकलता है, ख़ुशामद से ही पैसा मिलता है
ख़ुश्का खाओ पनीर के साथ
चूँकि अनुचित बात का ये जवाब होता है इसलिए पनीर और ख़ुशका (सादा उबला हुआ चावल) अर्थात बे-मेल चीज़ों का नाम लिया जाता है, ख़ुद कमाओ ख़ुद मज़े से खाओ, चलो हटो, सरको, अपना रास्ता लो, बिदा हो, चंपत हो,
ख़ुज़ मा सफ़ा
(इख़तियार करे जो कुछ ठीक है) माक़ूल बात इख़तियार करने के मौक़ा पर मुस्तामल
ख़ुज़ मा सफ़ा
(इख़तियार करे जो कुछ ठीक है) माक़ूल बात इख़तियार करने के मौक़ा पर मुस्तामल
ख़ुज़ मा सफ़ा दि' मा कदिर
इख़तियार करो कुजू कुछ कि पाक (सच्च है) और छोड़ दो वो जो नापाक या गदला है (माक़ूल बात इख़तियार करने और बुरी बात तर्क करने के मौक़ा पर मुस्तामल
ख़ुज़ मा सफ़ा दि' मा कदिर
इख़तियार करो कुजू कुछ कि पाक (सच्च है) और छोड़ दो वो जो नापाक या गदला है (माक़ूल बात इख़तियार करने और बुरी बात तर्क करने के मौक़ा पर मुस्तामल
कि कर्द कि नयाफ़्त
(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जिस ने किया इस ने पाया, हर शख़्स को अपने आमाल का नतीजा मिलता है
की लाठी दस का बोझ
एक व्यक्ति पर कई आदमियों के व्यय की ज़िम्मेदारी, एक शख़्स पर कई लोगों के ख़र्च का बोझ, एक शख़्स की बदौलत कई आदमियों की मुश्किल हल
कोढ़ में खाज
कष्ट पर और अधिक कष्ट पहुँचता है, विपत्ति पर विपत्ति, कठिनता पर कठिनता, अत्याचार पर अत्याचार
कोढ़ी डरावे थूक से
नीच आदमी लोगों को तंग करने के लिए घृणित उपाय काम में लाता है क्योंकि उसके उन उपायों का कोई उत्तर नहीं दिया जा सकता
कोढ़ी के जूँ नहीं होती
मुझे कोई नहीं मारता, जो ख़ुद मुसीबत में है उस पर क्या आपदा आएगी; मुसीबत में फँसे हुए का कोई साथी नहीं होता
कोई आगे न कोई पीछे
पिताहीन, निःसन्तान, अनाथ, जिसका कोई उत्तराधिकारी न हो उसके बारे में कहते हैं
कोई कहाँ से लाए
मिल नहीं सकता, मजबूरी है, नापैद होने और मजबूरी ज़ाहिर करने के लिए बोलते हैं
कोई कम न समझे
हजव-ए-मलीह है यानी आप पड़े बदज़ात हैं, बड़े होशयार हैं, बड़े चलते हुए हैं, दौर की कोड़ी लाते हैं
कोई तापे किसी का घर जले
एक को तकलीफ़ हो दूसरा ख़ुशी मनाए, किसी का नुक़्सान किसी और के लुतफ़ या ख़ुशी का सब हो, (रुक : कोई मरे कोई मलारें गावी
कोई तो पूछेगा
किसी को तो ज़रूर दया आएगी, कोई तो सुनेगा, कोई तो पूछेगा
कोई तोलों कम , कोई मोलों कम
कोई माद्दी ख़ूबीयों कीवजह से बड़ा होता है कोई माअनवी ख़ूबीयों कीवजह से, हर शख़्स अपनी हैसियत के मुवाफ़िक़ इज़्ज़त रखता है
कोल्हू काट मोगरी बनानी
किसी मूल्यवान वस्तु को कम मूल्य की चीज़ बनाना, क़ीमती चीज़ को ख़राब करके कम क़ीमत चीज़ बनाना, कन काम के वास्ते बड़ा काम ख़राब करना
कोसा जिए असीसी मरे
मरना जीना किसी की ख़ाहिश से नहीं बल्कि मुक़द्दर से होता है जिसे मरने की बददुआ दी जाये वो नहीं मरता जिस को जीने की दुआ दी जाये वो मर जाता है
कोतह-गर्दन तंग-पेशानी
छोटी गर्दन और छोटे माथे वाला, अनुप्रास-शास्त्र के अनुसार ऐसा व्यक्ति जो बहुत दुष्ट एवं उपद्रवी हो, उत्पाती, कुबुद्धि
कुँवार जाड़े का
शीत ऋतु का प्रारंभ कुँवार माह से होता है, कुँवार का महीना शुरू हुआ नहीं कि जाड़े आ गए, सर्दी का मौसम कुँवार से शुरू होता है
कुँवार का सा झल्ला, आया बरसा चल्ला
कुँवार के महीने में बारिश बहुत ज़ोर से होती है, मगर थोड़ी सी देर ठहर कर आसमान साफ़ हो जाता है उस व्यक्ति के मुताल्लिक़ कहते हैं, जिसे बहुत ग़ुस्सा आए और थोड़ी देर बाद जाता रहे
कुँवारी करे अरमान , ब्याही हो पशेमान
ग़ैर शादी शुदा तो शादी की ख़ाहिश करती है और शादीशुदा पछताती है (शादी के मुताल्लिक़ कहते हैं और बावजूद कामयाब होने के कुछ नफ़ा ना उठाने के मौक़ा पर भी बोलते हैं)
कुँवारी को सदा बसंत
आज़ाद और मुजर्रद के लिए हरवक़त ख़ुशी का मौक़ा है, मुराद ये है कि ग़ैर शादीशुदा औरत को वो दुख नहीं होते जो शादी के बाद सहने होते हैं
कुछ स्वार्थी कुछ पर मार्थी
कुछ अपने लिए कुछ ख़ुदा के लिए , कुछ दुनिया का काम कुछ आख़िरत का काम , दीन-ओ-दुनिया दोनों का ख़्याल चाहिए
कुछ तुम समझे कुछ हम समझे
वक़्त गया बात गई, राज़ की बात को दिल में रखू ज़ाहिर ना होने दो, हमारा तुम्हारा लेखा जो खा बराबर है, हिसाब-ए-दोस्ताँ दर-ए-दिल
कुलेल में ग़ुलेल
प्रसन्नता और आनंद में अचानक विकार उत्पन्न होना, ख़ुशी और मज़े में यकायक फ़साद पैदा हो जाना
कुल्लु इनाइन यतरश्शिहु बिमा फ़ीह
(अरबी कहावत उर्दू में प्रयुक्त) हर बर्तन से वही चीज़ टपकती है जो इस में होती है, इस क़ौल से अक्सर ये मुराद होती है कि जो दिल में होता है वही ज़बान पर आता है या जो जैसा होता है वैसा काम करता है
कुल्लु मन 'अलैहा फ़ान
(करानी आयात बतौर कहावत मुस्तामल) हर चीज़ को जो रोय ज़मीन पर है फ़ना ज़रूरी है, रोय ज़मीन पर जो चीज़ है वो फ़ानी है
कुल्लु नफ़्सिन ज़ाइक़त-उल-माैत
(पवित्र क़ुरआन का एक वाक्य जो लोकोक्ति के रूप प्रयुक्त है) हर आत्मा को मृत्यु का स्वाद चखना होगा, हर जानदार की मृत्यु निश्चित है
कुंजड़े की अगाड़ी, क़साई की पिछाड़ी
कबड़ीए के यहां जब सब्ज़ी ख़रीदे तो होशयारी यही है कि पहले ख़रीदे इस लिए कि कबड़या पहले साफ़ सब्ज़ी बेचता है और आख़िर में ख़राब माल फ़रोख़त करता है और कसाई के यहां जब गोश्त ख़रीदे तो आख़िर में इस लिए कि कसाई इबतिदा में ख़राब माल बेचता है और आख़िर में अच्छा माल फ़रोख़त करता है
कुत्ता भी अपनी गली में शेर होता है
अहने इलाक़े में हर शख़्स की जुर्रत बढ़ जाती है , हिमायतों को देख कर सब के हौसले बढ़ जाते हैं, अपने ठिकाने पर मौजूद हो तो इंसान का हौसला बढ़ा हुआ होता है
कुत्ता भी दुम हिला कर बैठता है
कुत्ते तक में सफ़ाई की इतनी समझ है कि बैठने से पहले अपनी पूँछ से ज़मीन झाड़ लेता है, कोई आदमी सफ़ाई का ख़्याल न रखे तो कहते हैं
कुत्ता देखेगा न भौंकेगा
हरीस और लालची को किसी के माल का पता चल जाये तो ज़रूर उसे खसोटने कीता क में लगेगा, इस लिए दुश्मन के सामने से हिट जाना बेहतर होता है
कुत्ते का बैरी कुत्ता
हमजिंस या आपस वाले ही दुश्मनी करते हैं, अब्नाए जिंस ही एक दूसरे को सताते हैं, आदमी का आदमी दुश्मन है
कुत्ते की पूँछ कभी सीधी नहीं होती
स्वभाव पर संगति का प्रभाव नहीं होता, स्वभाव की विकृति या दुष्टता कभी दूर नहीं होती, लाख प्रयास के बावजूद जब कोई बदलाव न हो तो कहते हैं
कूँडी इस पार या उस पार
इस ओर या उस ओर, इधर या उधर, अनुकूल या प्रतिकूल, मामला एक ओर, निश्चित निर्णय, दो टूक बात
क्या जाती दुनिया देखी
क्या दुनिया के फ़ानी होने का एहसास हो गया जो तुम्हारे रवैय्ये में इतनी तबदीली आ गई (किसी की ख़िलाफ़ आदत नेकी या हुसन-ए-अमल देख कर कहते हैं)
क्या ख़ुदाई है
ईश्वर की महिमा और शक्ति का क्या कहना, इश्वर की क्या महिमा है (आश्चर्य, व्यंग और ताना के लिए बोलते हैं)
क्या लेना
कोई ग़रज़ नहीं , बेमुसर्रफ़ है, बे कार है
क्या मछलियाँ सड़ी जाती हैं
मेरी मछलियाँ सड़ नहीं जाएँगी जो जल्दी करूँ, मुझे कोई जल्दी नहीं, विशेषतः जब कोई लड़की के विवाह में जल्दी करे तो कहते हैं
क्या मुँह दिखाओगे
लंबे समय तक याद रखेंगे या कृपालु रहेंगे, मुद्दत तक याद रखेंगे या एहसानमंद रहेंगे
क्या मुँह से फूल झड़ते हैं
(तारीफ़ के लिए) किस क़दर ख़ुश बयां है, कैसा फ़सीह है नीज़ जब कोई शख़्स बदकलामी करता है तो इस से तनज़्ज़ा भी कहते हैं
क्या क़ाज़ी गिला करेगा
कोई ताना नहीं करेगा, कोई नाम नहीं धरेगा, कोई मुँह पर बात नहीं लाएगा, कोई भी टिप्पणी या चुनौती नहीं देगा
क्या सर्राफ़े का टका है
मुफ़्त का माल समझ कर लापरवाही से ख़र्च करना किसी तरह मुनासिब नहीं, बिना मेहनत कमाया हुआ धन सही लेकिन ये फ़िज़ूलख़र्ची उचित नहीं
क्या शान में बट्टा लग जाएगा
उसको कहते हैं जो किसी काम में संकोच करते हों अर्थात उस से वैभव या महिमा में फ़र्क़ आ जाएगा या कमी पैदा होगी
क्या उधार की माँ मरी है
लेन देन का दस्तूर दुनिया से उठ नहीं गया है तुम नहीं दोगे तो दूसरे से लेंगे, उस समय प्रयोग किया जाता है जब कोई क़र्ज़ देने में हीला हवाला करता है