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सुकून-ए-क़ल्ब

दिल का इतमीनान, दिल की शांति, आराम, सहायता, चैन और सुख

ख़िल्क़िय्या

प्राकृतिक, फ़ित्री

खिस्यानी बिल्ली खम्बा नोचे

जिसे क्रोध आ रहा हो वह अपनी खीझ या क्रोध दूसरों पर उतारता है, लाचारी में आदमी दूसरों पर क्रोध करता है, लज्जित व्यक्ति दूसरों पर अपनी लज्जा उतारता है, निर्बल की खीझ

सुरूर

मन-मस्तिष्क की शांति या सुकून प्रदान करने वाली अवस्था, ख़ुशी, आनंद, प्रसन्नता, मस्ती, तन्मयता

बे-हिजाबी

बेे-पर्दा होना, बेपर्दगी, घूँघट उठा देना, खुलेबंदों फिरना (स्त्री का)

शरीक-ए-हयात

ज़िंदगी का दोस्त या साथी, अर्थात: जीवनसंगिनी, पत्नी, भार्या, पति

मशवरत

आपस में सोच विचार एवं सलाह या राय का आदान-प्रदान करना, सलाह, मशवरा, परस्पर सुझाव

सितमगर

(प्रायः कविता में) प्रेमिका, माशूक़, महबूब

कोशिश

कोई काम करने के लिए विशेष रूप से किया जानेवाला प्रयत्न, मेहनत, दौड़ धूप, प्रयत्न, प्रयास, चेष्टा, उद्योग, श्रम, उद्यम, उपाय, परिश्रम

बे-नियाज़

जिसे किसी से कुछ लेने की इच्छा न हो निःस्पृह, स्वच्छंद, आज़ाद, बेपरवाह

दीद के क़ाबिल

देखने के लायक़, देखने योग्य

क़ाबिल-ए-दीद

देखने लायक़, अच्छा दिखने वाला

आठ बार नौ त्योहार

सुख-सुविधा और आराम का शौक़ या लगन ऐसा बढ़ा हुआ है कि युग और समय उसको अल्प व्यय नहीं करने देता

चमनिस्तान

ऐसा बाग़ जहाँ फूल ही फूल हों, ऐसी जगह जहाँ दूर तक फूल ही फूल और हरा भरा नज़र आए, वाटिका, चमन, बाग़

'औरत

जाया, भार्या, पत्नी, जोरू

ताग़ूत

शैतान, अत्यन्त निर्दय और अत्याचारी व्यक्ति

मन-भावन

मन को भाने या अच्छा लगने वाला

दादरा

संगीत में एक प्रकार का चलता गाना (पक्के या शास्त्रीय गानों से भिन्न), एक प्रकार का गान, एक ताल

मज़दूर

शारीरिक श्रम के द्वारा जीविका कमाने वाला कोई व्यक्ति, जैसे: इमारत बनाने, कल-कारख़ानों में काम करने वाला, श्रमिक, कर्मकार, भृतक, मजूर

ख़ैर-अंदेश

भलाई की बात सोचने वाला, वह शख़्स जो किसी की भलाई चाहे, शुभचिंतक

मुहावरे

यह भारतीय मुहावरों का एक शब्दकोश है, जो रेख्ता फ़ाउंडेशन की एक पहल है। इसमें सदियों से प्रचलित पारंपरिक कहावतों और मुहावरों का एक मूल्यवान संग्रह शामिल है, जो भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति, समाज और दैनिक जीवन को प्रतिबिंबित करता है। यह शब्दकोश आलोचकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा भाषा और साहित्य के प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और विश्वसनीय संदर्भ स्रोत के रूप में कार्य करता है।

प्रमुख मुहावरे

मुहावरों की सूची

संबंधित परिणाम

कड़ कपूर, कपास, एक मोल हैं

बिलकुल अन्न्धर है, भले बुरे की तमीज़ नहीं, अंधेर नगरी चौपट राजा, टिके सैर भाजी टिके सैर खाजा के मौक़ा पर मुस्तामल

कड़ाही चाटेगा तो तेरे ब्याह में मेंह बरसेगा

कहा जाता है कि कड़ाही चाटने वाले की शादी में बारिश होती है

कढ़ी का सा उबाल

शीघ्र ही घट जाने वाला जोश या क्रोध

कड़ी काट बेलन बनाया

थोड़े लाभ के लिए बड़ी हानि उठाना, छोटी सी चीज़ के लिए बड़ी चीज़ को नष्ट करना

कड़का सोहे पाली ने बारा सोहे माली ने

हर वस्तु अपनी जगह पर अच्छी लगती है, कड़खा तो गड़रियों के मुँह से अच्छा लगता है और बिरहा मालियों के मुँह से

कड़वा झाव, डूबती नाव

बदमिज़ाजी हमेशा नुक़्सान ग़सां पहुंचानी है

कड़वा करेला और नीम चढ़ा

जब कोई क्षुद्र व्यक्ति कुसंग में पड़कर अथवा अचानक मान-सम्मान पा कर और भी बुरा बन जाए तब कहते हैं

कड़वा थू थू, मीठा हप हप

शोहरत का भूखा होना लेकिन बदनामी या आलोचना बर्दाश्त करने से बचना

कड़वे से मिलिए मीठे से डरिए

तीव्र स्वभाव वाले अधिकतर दिल के साफ़ होते हैं एवं हासप्रिय या चापलूस अधिकतर मक्कार होता है इस लिए बुरे स्वभाव वाले से हानि नहीं पहुँचता चापलूस से हानि पहुँचता है

कंग-जहाँ-रंग

जहाँ गंगा का पानी पहुँचता है वहाँ भूमि बहुत उपजाऊ हो जाती है और लोग समृद्ध हो जाते हैं

का टापू में मोर नाचा किस ने देखा

विदेश में कुछ भी करो जब अपने देश में कुछ करो तो हम समझें कि हाँ कुछ किया, परदेस में किसी बड़े काम के करने का आनंद परिवार या देश के लोग वाले नहीं उठा सकते, जब कोई व्यक्ति अपना धन किसी ऐसी जगह ख़र्च करे जहाँ जहाँ देश के नागरिक या रिश्तेदार उसे न देख सकें तो क

काढ़ में या दाढ़ में

कामवासना या भोजन भोग-विलासिता प्रिय लोगों के लिए ये दो ही काम होते हैं

काँड़ा मुझे भाए नहीं और काँड़े बिन सुहाए नहीं

एक शख़्स से नफ़रत करना और बगै़र इस के रह ना सकना

काँड़ा मुझे भावे नहीं और काँड़े बिन सुहावे नहीं

एक शख़्स से नफ़रत करना और बगै़र इस के रह ना सकना

काँड़ा टट्टू , बुद्धू नफ़र

बहुत ग़रीब जिस के पास कुछ ना हो, काना टट्टू बुध्धू नफ़र

काँड़े के ब्याह के सौ सौ जोखों

ऐबदार शैय के लिए हर जगह मुश्किल होती है

काँड़े की एक रग सवा होती है

काने में शरारत अधिक होती है

काँड़ी को कौन सराहे, कानी का बावा

अपनी बुरी चीज़ भी अच्छी लगती है

काँटे बोए बबूल के तो आम कहाँ से खाए

बुरा काम करके भलाई की आशा रखना, फ़ुज़ूल और मुर्खतापूर्ण क्रिया है, जैसा बोओगे वैसा काटोगे, जौ बोओ गे तो गेहूं कैसे काटोगे, जौ बोओगे तो जौ ही काटोगे

काँटे लगी ओस है

जल्दी ख़राब हो जाने वाली है , बहुत नापायदार है

काबुल में क्या गधे नहीं होते

जहाँ अच्छे होते हैं वहाँ बुरे भी होते हैं अर्थात अच्छे बुरे सब जगह होते हैं

काबुल में मेवा भए बृज भए करील

बुरे अच्छे और अच्छे बुरे हो गए या अयोग्य लोगों की सफलता के समय कहते हैं

काछ की तलवार काट नहीं करती

दुर्बल उपाय अलाभदायक होता है

काछ की तलवार क्या काट करेगी

दुर्बल उपाय अलाभदायक होता है

काग काग न भकारे भीक

बहुत कंजूस है किसी को कुछ नहीं देता

काग कौआर खरगोश ये तीनों नहीं माने पोस

काग, को्वा और ख़रगोश मानूस नहीं होते

काग कौआ और ख़रगोश ये तीनों नहीं माने पोस

काग, को्वा और ख़रगोश मानूस नहीं होते

कागा बोले पड़ गए रोले

जब कव्वा बोलता है तो लोग जाग उठते हैं

काग़ज़ की नाव आज न डूबी कल डूबी

अमूल एवं क्षणस्थायी वस्तु के होने न होने का कुछ ए'तिबार नहीं

काग़ज़ की नाव में कौन पार उतरा

क्षणस्थायी वस्तु से कोई लक्ष प्राप्त नहीं होता, कमज़ोर का सहारा लेने वाला सफल नहीं होता

काग़ज़ की नाव पानी पर नहीं चलती

धोखा-धड़ी का काम बहुत दिनों तक नहीं चलता, क्षणस्थायी वस्तु किसी काम नहीं आती

काहे को गूलड़ का पेट फड़वाते हो

किसी का ऐब क्यों ज़ाहिर करते हो, किस लिए किसी के ऐब का राज़ ज़ाहिर करते हो

काजल की कजलौटी फूलों का सिंगार

रंग कजलौटी जैसा पाला और पहनने को चाहिए फूलों का हार, किसी बदसूरत का दिमाक से रहना

काजल की कजलौटी और फूलों का सिंगघार

सूरत ऐसी बुरी और बनाव सिंघार इतना ज़्यादा

काजल की कोठरी में धब्बे का डर

नुक़्सान या अपमान के स्थान पर हमेशा नुक़्सान या अपमान का भय होता है

काजल की कोठरी में जो जाएगा उसे टीका लगेगा

बुरी जगह या बदनामी की जगह जाने से बदनाम ही होगा

काजल की कोठरी में जो जाएगा वो मुँह काला करके आएगा

बुरी जगह या बदनामी की जगह जाने से बदनाम ही होगा

काजल सब को देना आता है पर चितवन भाँत भाँत

काजल सब आँखों में लगाते हैं मगर किसी किसी को भला मालूम देता है

काजल सब कोई दे पर चितवन भाँत भाँत

काजल सब आँखों में लगाते हैं मगर किसी किसी को भला मालूम देता है

काजल तो सब लगाते हैं, पर चितवन भाँत भाँत

काजल या सुर्मा सब आँखों में लगाते हैं परंतु किसी किसी को भला लगता है

काजन काज, न भिकारी भीक

किसी को कोई लाभ नहीं

काका का होके न भए

काका किसी के ना हुए, चचा को कोई पसंद नहीं करता क्यों कि वो बड़े भाई का बराबर का हिस्सादार होता है

काका काहू के न भले

चचा को कोई पसंद नहीं करता, क्योंकि वह संपत्ति में हिस्सा बटाता है

काका की भैंस भतीजे की तोंद

चाचा को बहुत कुछ मिल जाता है भतीजे को कुछ नहीं, संतानहीन व्यक्ति का पैसा उस के भाई भतीजे उड़ाते हैं

काका न करे साका

चाचा झगड़ा नहीं करता

काल बागड़े दीजे और बुरा बामन से हो

क़हत हमेशा बागड़े के इलाक़े से शुरू होता है और ब्रहमन से हमेशा नुक़्सान होता है

काल बागड़े उपजे और बुरा बामन से हो

क़हत हमेशा बागड़े के इलाक़े से शुरू होता है और ब्रहमन से हमेशा नुक़्सान होता है

काल कढ़ाओ, किसान का खाओ

अकाल और सूखा किसान के लिए विनाश का कारण है

काल का मारा सब जग हारा

मौत से लोग पराजित हो जाते हैं

काल का साग ग़रीब का भाग

अकाल में निर्धन के लिए साग पात भी बहुत है

काल के आगे किसी का बस नहीं चलता

किसी की मृत्यु हो जाए तो उसकी मातमपुर्सी के समय कहते हैं

काल के आगे सब लाचार हैं

किसी की मृत्यु हो जाए तो उसकी मातमपुर्सी के समय कहते हैं

काल न छोड़े राजा न छोड़े रंग

मृत्यु राजा हो या फ़क़ीर किसी को नहीं छोड़ती

काल सब को खाए बैठा है

मौत सब को आ कर रहती है, सब मौत के मुँह में जा चुके हैं

काल टले, कलाल न टले

मौत टल सकती है, लेकिन शराबी शराब पीना नहीं छोड़ सकता

काला कलूटा बैगन लूटा

(अविर) स्याह फ़ाम शख़्स को चढ़ाने के लिए कहते हैं

काला कव्वा खाया है

इस शख़्स की निसबत बोलते हैं जो बूढ़ा होजाए मगर बालों पर सफ़ैद ना आए (लोगों का ख़्याल है कि काला कव्वा खाने से उम्र बढ़ती है और बाल सफ़ैद नहीं होते

काला कव्वा सदक़े को

काले व्यक्ति को व्यंग में कहते हैं, काले रंग का कोई महत्व नहीं होता, काले आदमी को चिढ़ाने के बोल

काला मुँह , नीले हाथ पाँव

रुसवाई, बदनामी (पुराने ज़माने में दस्तूर था कि जब किसी की हद दर्जा तहक़ीर-ओ-तज़लील मक़सूद होती या उसे सख़्त सज़ा दी जाती तो काला मुँह और नीले हाथ पाओ करके गधे पर बिठा कर पूरी बस्ती में फ़िराते थे

काला मुँह कर जग दिखलावे तब लालन की लाली पावे

जब तक आदमी घोर अपमान या कष्ट नहीं झेलता कामयाब नहीं होत, कठिनाई उठाकर ही नाम रोशन होता है

काला मुँह करेल के दाँत

सब बातें बिगड़ी हुई

काला-ए-बद-बरेश-ए-ख़ाविंद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) बरी चीज़ मालिक के मुंह पर मारते हैं यानी फेर देते हैं

काले आदमी साबुन से गोरे नहीं होते

प्रयास से स्वभाव नहीं बदलता, बनाओ सिंघार से कुरूप रूप दूर नहीं होती

काले का भाई चकारा

एक से बढ़ कर एक

काले का काटा पानी नहीं माँगता

काले सँप का काटा बचता नहीं, बहुत ज़हरीला, जिसे काला सँप काटे उस की कोई दवा नहीं

काले के आगे चराग़ नहीं जलता

कहा जाता है कि साँप के सामने चराग़ बुझ जाता है

काले के काटे का जंतर न मंतर

धोखेबाज़ से हर समय हानि होती है क्यूँकि उससे सुरक्षित रहना कठिन है, शानदार और धोखेबाज़ या चालबाज़ी से सुरक्षित रहना मुश्किल है

काले के मुँह में हाथ देना

ऐसा काम करना जिसमें जान का ख़तरा हो, जानबूझ कर ख़तरा मोल लेना

काले के मुँह में उँगली हाथ देना

ऐसा काम करना जिसमें जान का ख़तरा हो, जानबूझ कर ख़तरा मोल लेना

काले साँड पर सफ़ेद धब्बा

प्रचुरता में कमी, नाममात्र, बहुत मामूली

काले सर का एक न छोड़ा

हर जवान मर्द पर नीयत ख़राब की

काले सर की एक न छोड़ी

हर जवान मर्द पर नीयत ख़राब की

काली भली न सेत, दोनों को मारो एक ही खेत

दो वस्तुओं में से कौन अच्छी और कौन बुरी है इसका जब कोई निश्चय न हो तब दोनों को ही त्याग देना ठीक है

काली गई बामन के दान

काली गाय ब्राह्मण को दान चली जाती है, इसका मतलब है कि अच्छी चीज़ को दूसरे ले जाते हैं

काम अपना ही काम है

जो काम स्वयं किया जाए वही अच्छा होता है

काम असरा दुख बिसरा, छाछ न देत अहीर

काम हो जाए तो परेशानी भूल जाती है

काम चोर निवाले को हाज़िर

उसके संबंध में कहते हैं जो काम के समय टल जाए और खाने के लिए हाज़िर हो जाए

काम चोर, निवाले हाज़िर

सुस्त या स्वार्थी व्यक्ति जो काम से जी चुराए और खाने के समय आ जाए, अकर्मण्य

काम दूल्हा दुल्हन ही से पड़ता है

आपस का मामा आपस ही में तै होजाता है

काम का न काज का दुश्मन अनाज का

वह व्यक्ति जो खाने में कमी न करे और काम से दूर भागे, सुस्त, काहिल, आलसी

काम करे नथ वाली, पकड़ी जाए चिरकुट वाली

अपराध धनवान करता है और पकड़ा जाता है निर्धन

काम करे सिपाही नाम हो सरदार का

काम कोई करे नाम किसी का हो

काम करने की सौ राहें हैं , न करने की एक नहीं

काम सिदक़ नी्यत से किया जाये तो कई तरीक़े निकल आते हैं अगरना करने की नी्यत हो तो कोई तरीक़ा नहीं निकलता

काम को काम सिखाता है

काम करने ही से आता है, अभ्यास से कौशल पैदा होता है, मनुष्य अनुभव से सीखता है

काम को कोढ़ी, मुँह बज्र

काम के लिए जी चुराना और खाने के लिए मुस्तैद रहना

काम को नाँ , खाने को हाँ

काम चोर काम करने पर आमादा नहीं होता मगर खाने पर मौजूद रहता है

काम को ऊँ हूँ , खाने को हूँ हूँ

रुक : काम चोर नवाले हाज़िर

काम क्रोध, मध, लोभ की जब मन में होवे खान, का पंडित का मूर्खा दोऊ एक समान

काम वासना, क्रोध, घमंड और लोभ अर्थात लालच अगर दिल में हों तो ज्ञानी एवं अनपढ़ दोनों बराबर हैं

काम में धाम , दही में मूसल

किसी काम या बात में बे मौक़ा दख़ल देने के मौक़ा पर मुस्तामल

काम प्यारा है, चाम प्यारा नहीं

महत्ता और प्रसिद्धि सेवा से होती है सूरत से नहीं, सेवा से बड़ाई है

कामा न काजा मंडल बाजा

इस शख़्स के लिए कहते हैं जो काम कुछ ना करे और बुला वजह शोर या धूम मचाए

कान पड़ी काम आती है

सुनी सुनाई बात कभी न कभी काम आ ही जाती है, सुनी हुई अच्छी बात किसी वक़्त याद आ सकती है

कान पर जूँ नहीं फिरती

वह किसी की बात नहीं सुनता

कान प्यारे तो बालियाँ, जोरू प्यारी तो सालियाँ

प्रिय वस्तु से संबंधित सभी वस्तुएँ प्रिय लगती हैं

काना कुता पीच ही से आसूदा

निर्धन को जो मिल जाए उत्तम है

काना मुझे भाए नहीं, काने बिन सुहाए नहीं

एक व्यक्ति से नफ़रत या घृणा करना और बिना उसके रह भी नहीं सकता

काना टट्टू बुद्धू नफ़र

जिस में ऐब दर ऐब हों अर्थात टट्टू भी काना और साईस भी मूर्ख

काने चोर कनौंडे भेंट

ज़ख़म पर चोट ज़्यादा लगती है, जिस बात का डर हो वही पेश आ जाती है, जिस से मिलना ना हो वही अदबदा कर सामने आ जाता है

काने चोट कनौडे भेंट

ज़ख़म पर चोट ज़्यादा लगती है, जिस बात का डर हो वही पेश आ जाती है, जिस से मिलना ना हो वही अदबदा कर सामने आ जाता है

काने के ब्याह को सौ सौ जोखों

काने की शादी बड़ी मुश्किल से होती है

काने की एक रग सिवा होती है

काना आदमी ज़्यादा शरीर होता है, काना आदमी बहुत पाजी होता है

काने को काना प्यारा

मनुष्य को स्वयं जैसा व्यक्ति ही पसंद आता है, दुष्ट व्यक्ति की दुष्ट व्यक्ति से ही बनती है

कानी अपना टेंठ न देखे , देखे और की फुल्ली

ऐबदार अपने बड़े ऐब पर निगाह नहीं करता और दूसरे का ज़रा सा ऐब देख कर भी गिरिफ़त करता है

कानी गाए बामन को दान

खोटे वस्तु या जिस वस्तु में कोई कमी हो उसको दान कर देते हैं

कानी गाय के अलगे बथान

कानी गाय अलग बंधती है अथवा सबसे अलग रहना चाहती है क्योंकि घास चरने में उसे कठिनाई होती है, दूसरे ढोर उसे मारते भी हैं

कानी की शादी में सौ-सौ जोखों

जिसमें कोई दोष हो उसकी उद्देश्य प्राप्ति में बहुत सी रुकावटें पैदा होती रहती हैं

कानी को काना प्यारा, रानी को राना प्यारा

जो जैसा होता है वैसे ही को पसंद करता है, सभी को अपने लिंग या जाति के लोग भले लगते हैं

कानों की सुनी कहते हैं आँखों की देखी कहते नहीं

सुनी सुनाई पर यक़ीन कर लेने और सुनी सुनाई बात को आगे बढ़ाने के अवसर पर बोलते हैं

कांता किनारे रो खड़ा जब सब होए बनास

ख़तरे के क़रीब रहने वाले का एक ना एक दिन तबाह या फ़ना होना यक़ीनी है

कानता में जाना प्यासे आना

बदक़िस्मती से नाकाम रहना

कापर करूँ सिंगार, पिया मोर आँधर

जिस काम का कोई महत्व न हो वह काम करने की क्या आवश्यकता है

कार अज़ दस्त रफ़्ता तीर अज़ कमान जस्ता यार नमी आयद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो बात हो चुकी इस पर अफ़सोस करना फ़ुज़ूल है

कार दुनिया कसे तमाम नकर्द

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) दुनिया का काम किसी ने ख़त्म नहीं क्या, हर काम में इख़तिसार पर नज़र रखू, ज़्यादा हवस ना करो

कार-अज़-दस्त-रफ़्ता

(फ़ारसी कहावत कार अज़ दश्त रफ़्ता तेज़ अज़ कमान जस्ता बाज़ नमी आयद की लघु) धनुष से निकला हुआ तीर और हाथ से निकला हुआ काम वापस नहीं आता, मतलबव जो काम हाथ से निकल गया हो

कार-ए-इमरोज़ ब-फ़र्दा मगुज़ार

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) आज का काम कल पर ना छोड़, काम को बरवक़्त अंजाम देने के लिए बतौर ताकीद-ओ-हिदायत बोला जाता है

कार-ए-सग नीस्त ब मस्जिद ज़नहर

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) कुत्ते को मस्जिद से हरगिज़ कोई काम नहीं होता, मस्जिद में कुत्ते का क्या काम

कासा भर खाना 'असा भर चलना

अपनी अधिकार क्षेत्र से बढ़कर काम न करना या अपनी अधिकार क्षेत्र से आगे न बढ़ना

कासा दीजिए बासा न दीजिए

खाना खिला देना चाहिए मगर नावाक़िफ़ को ठहरने की जगह नहीं देनी चाहिए , एहतियात की बात है

कासनी भर खाना रसा भर चलना

खाना बहुत ज़्यादा खाना और चलना और काम करना कम

कासनी दीजिए मासा न दीजिए

नावाक़िफ़ को खाना खिला दीजीए मगर घर में रहने को जगह ना दीजीए

काट की हाँडी चढ़े न दूजी बार

रुक : काट की हांडी अलख

काट की हाँडी एक दफ़'अ चढ़ती है दो बार नहीं चढ़ती

कमज़ोर चीज़ बार बार काम नहीं देती, दग़ा फ़रेब हर बार कारगर नहीं होता, मकर और धोका हमेशा कामयाब नहीं होता

काट की हँडिया एक दफ़'अ चढ़ती है बार बार नहीं चढ़ती

कमज़ोर चीज़ बार बार काम नहीं देती, दग़ा फ़रेब हर बार कारगर नहीं होता, मकर और धोका हमेशा कामयाब नहीं होता

काट की मोरनी और चंदन हार

बदशकल के बनाओ सिंगार करने से मुताल्लिक़ है, ग़ैर मुम्किन बात के इज़हार पर भी बोलते हैं

काता औले दौड़ी

जल्दी में बे सोचे समझे कोई काम कर गुज़रने वाले या जब देखो एक नया मशग़ला उठाने वाले की निसबत बोलते हैं, बगै़र सोचे समझे बोलना या कोई काम करना, उजलत में कोई काम करना

काटा और उलट गया

डस कर पलटी खाना, सांप का क़ायदा है कि काटने के बाद पलट जाता है जिस से इस का ज़हर ज़ख़म में भर जाता है इसी वजह से इस का इतलाक़ ऐसे मूज़ी शख़्स पर होता है जो नुक़्सान पहुंचा करना आश्ना बिन जाता है

काटा मुँह से बोले न सर से खेले

ऐसे शख़्स के बारे में बोलते हैं जिस के मकर-ओ-फ़रेब से नजात मुम्किन ना हो, मर्ज़ का लाइलाज होना

काता सूत पर तीन को, पकी रोटी जड़यावे को

काते हुए सूत को अटेरती है और पकी हुई रोटी खाती है

कातन बैठी दया बाले दिन खोया आले बाले

अच्छा बेकार में समय खोकर असमय काम करना आरंभ किया

काटे है गर्म लोहे को लोहा हमेशा सर्द

हसन-ए-सुलूक से हर मसला ह॒ हो जाता है, रवादारी से हर ज़ंजीर कट सकती है

काटे कटे न टाले टले

निहायत सख़्त जान, वह बला जो किसी तरह न टले, वो मुसीबत जो किसी तौर दफ़ा न हो

काठ छीलो तो चिकना, बात छीलो तो मर खड़ी

लकड़ी को छीलो तो चिकनी होती है, बात को छीला जाए तो कर्कश होती है

काठ का घोड़ा लोहे की ज़ीन जिस पर बैठे लंगड़ दीन

लंगड़े व्यक्ति की सवारी भी हट के होनी चाहिए

काठ का घोड़ा नहीं चलता

पैसे के बिना कुछ नहीं होता

काठ के घोड़े दौड़ाते हैं

कोरी काग़ज़ी कार्यवाही करना

काठ की हंडिया दो बार नहीं चढ़ती

रुक : काठ की हांडी बार बार अलख

काठ की हंडिया दूजे बार नहीं चढ़ती

रुक : काठ की हांडी बार बार अलख

काठ की हाँडी एक दफ़ा' चढ़ती है

पहली ही दफ़ा का झूट यक़ीन का दर्जा रख सकता है, एक दफ़ा की धोके बाज़ी चल सकती है

काठ की हाँडी हर बार नहीं चढ़ती

जालसाज़ी और फ़रेब बार बार नहीं चलता, नापायदार शैय का बार बार एतबार नहीं होता

काठ की हाँडी बार-बार नहीं चढ़ती

काठ की हाँडी एक बार ही आग पर रखने से जल जाती है, पुनः उसे रखने का कोई सवाल ही नहीं उठता, आश्य यह है कि कोई व्यक्ती किसी को एक ही बार धोका दे सकता है

काठ की मूर्ती और चंदन हार

भद्दा आदमी सजावट करे तो कहते हैं

कातिक बात का हातक

कातिक के महीने में बात करने में ही दिन ख़तम हो जाती है (क्योंकि दिन बहुत छोटी होती है)

कातिक कुतिया, माह बिलाई, चैत में चिड़िया, सदा लुगाई

कातिक में कुतिया, माघ में बिल्ली, चैत में चिड़िया और स्त्री हमेशा कामातुर रहती है

कातना तो आता नहीं पोनी तो बनाने लगी

चर्ख़ा कातना आसान है पोनी बनाना मुश्किल है, ऐसी स्त्रियों के संबंध में बोलते हैं जिनको आसान सा काम नहीं आता लेकिन मुश्किल काम करने का दावा करती हैं

कातना तो आता नहीं पोनियाँ तो बनाने लगी

चर्ख़ा कातना आसान है पोनी बनाना मुश्किल है, ऐसी स्त्रियों के संबंध में बोलते हैं जिनको आसान सा काम नहीं आता लेकिन मुश्किल काम करने का दावा करती हैं

काटने वाले को थोड़ा, बटोरने वाले को बहुत

जो काम करे उसे थोड़ा जो बातें बनाए उसे बहुत मिल जाता है

काया बड़ी का माया

जान से बेहतर माल नहीं है अर्थात स्वस्थ से अच्छा धन नहीं है, कंजूस के लिए भी बोलते हैं जो शरीर से अधिक धन को मूल्यवान जाने

काया किश्त है जान जोखों नहीं

बदन की तकलीफ़ है जान का ख़तरा नहीं

काया ले काम, नेकी ले नाम

नेकी से नेकनामी और नामवरी, जिस्मानी ख़ाहिश से नुक़्सान होता है

काया माया का क्या भरोसा है

ज़िंदगी और दौलत का कोई एतबार नहीं

काया पापी अच्छा , मन पापी कुछ नहीं

कौड़ी होना अच्छा है बेईमान होने से

कायथ और कश्मीरी में बड़ा इत्तिफ़ाक़ है

दोनों संप्रादायों में एकरूपता है

कायथ का बेटा पढ़ा भला या मरा भला

कायथ का बेटा या तो पढ़ा-लिखा हो या फिर मर जाए सो अच्छा

कायथ का हथियार क़लम है

कायथ का काम पढ़ना लिखना है

कायथों में सब से छोटे और भाँडों में सब से बड़े की कमबख़्ती है

कायथ छोटों से बहुत काम कराते हैं भांडों में बड़े को करना पड़ता है

कब बाबा मरे, कब बैल बटे

जब किसी बात का इंतिज़ार हो तो कहते हैं , ख़ुदा जाने कब हो कब नहीं ऐसी उम्मीदें ज़ईफ़ होती हैं

कब के बनिया, कब के सेठ

नौ दौलत के मुताल्लिक़ कहते हैं कि पहले नादार था और अब मालदार है

कब की बिल्ली और कब का बिल्ला

जब कोई शख़्स झूटा दावा तजुर्बा कारी का ज़ाहिर करता है इस की निसबत बोलते हैं

कब मरे और कब कीड़े पड़ें

बहुत लंबा काम है, जल्दी नहीं हो सकता

कब मुवा कब कीड़े पड़े

बहुत लंबा काम है जल्द नहीं हो सकता

कब मुवा कब राछस हुआ

नौ-दाैलतिये या वह लोग जिन्हें नया-नया धन मिला हो उनके प्रति कहते हैं

कबाड़ी के छप्पर पर फूस नहीं

जो काठ-कबाड़ का व्यापार करे उसके छप्पर पर फूस न हो ये एक आश्चर्य की बात है

कभी दिन बड़ा कभी शब तवील

रुक : कभी के दिन बड़े कभी की रातें

कभी गाड़ी नाव पर और कभी नाव गाड़ी पर

कभी पदोन्नति होती है और कभी गिरावट, इन्क़िलाब होता ही रहता है, हालात बदलते रहते हैं

कभी घी घना, कभी मुट्ठी भर चना

कभी ऐश, कभी कष्ट, कभी अमीर कभी ग़रीब, समय का परिवर्तन है

कभी घूरे के दिन भी फिरते हैं

ज़माना बदलता रहता है, कभी ग़रीबों और कमज़ोरों का ज़माना भी बदल जाता है, उन के भी अच्छे दिन आ जाते हैं, ग़रीब और कमज़ोर हमेशा ग़रीब कमज़ोर नहीं रहते, बारह बरस में घूरे के भी दिन फिर जाते हैं

कभी के दिन बड़े कभी की रातें

संसार एक हाल पर स्थिर नहीं, कभी उन्नति है कभी अवनति, ज़माना और हालात बदलते रहते हैं

कभी की प्रतीत मर्रन की रीत

कीनावर की दोस्ती में मरने का ताज्जुब नहीं बल्कि रस्म है दोस्ती में जान भी देनी पड़ती है

कभी की प्रीत मर्रन की रीत

कीनावर की दोस्ती में मरने का ताज्जुब नहीं बल्कि रस्म है दोस्ती में जान भी देनी पड़ती है

कभी कूँडे के उस पार कभी इस पार

कम हिम्मत, भंगेड़ी या आलसी के प्रति कहते हैं

कभी कूँडी के उस पार कभी इस पार

सख़्त सस्ती और काहिली ज़ाहिर करने को कहते हैं कि एक ही दायरा में रहता है, कम हिम्मत की सनबत बोलते हैं

कभी न देखा बोरिया और सपने आई खाट

ख़्याली पुलाव पकाने वाले पर नज़र, हैसियत से बाहर ऊँचे ख्याल बांधना

कभी न गाँडू रन चढ़े, कभी न बाजे बम

कायर कभी रणभूमि में नहीं जाता और न कभी उसके आगे नक़्क़ारा अर्थात बाजा बजता है

कभी न काइर रन चढ़े और कभी न बाजे हम

नामर्द किसी जोगा नहीं होता, पस्तहिम्मत से काम नहीं होता, बुज़दिल से कुछ नहीं होसकता

कभी न पूजी द्वारका कभी न करवा चौत तू गधी कुम्हार की तुझे राम से कोत

ना तजुर्बा कार से काम दरुस्त नहीं होरा, औक़ात से ज़्यादा काम ना करना चाहिए

कभी न पूजी द्वारका कभी न करवे चौत तू गधी कुम्हार की तुझे राम से कोत

ना तजुर्बा कार से काम दरुस्त नहीं होरा, औक़ात से ज़्यादा काम ना करना चाहिए

कभी न सोई सांतरा सुपने आई खाट

हमेशा के कंगाल दिल में ख़्याल तवंगरी का

कभी रात बड़ी कभी दिन बड़ा

ज़माना एक हाल पर नहीं रहता, तग़ी्यर-ओ-तबद्दुल ज़माने का मिज़ाज है

कभी रंज, कभी गंज

जब जैसा समय आ जाए भोगना ही पड़ता है

कभी तोला कभी माशा

एक हालत पर टिका न रहने वाला, कभी कुछ कभी कुछ, एक हालत पर क़रार नहीं है

कभी ज़मीन पर, कभी आसमान पर

बहुत ज़्यादा ग़ुस्से में क़ाबू से बाहर होने की जगह कहते हैं

कभू न कुभो टेसू फूला

उसके प्रति कहते हैं जिससे कभी कोई अच्छा काम हो जाए

कबीर दास की उल्टी बानी आँगन सूखा घर में पानी

सामान्यतया घर सूखा और आंगन में पानी होना चाहिए परंतु यहाँ सब काम उल्टा है

कबीर दास की उल्टी बानी, बरसे कंबल भीजे पानी

इसका अर्थ यह लगाया जाता है कि इस संसार में सज्जन पुरुष दुख भोगते हैं और असज्जन मौज उड़ाते हैं

कबित भाट की खेती जाट की

हर शख़्स अपना ख़ानदानी पेशा या काम ही अच्छी तरह कर सकता है

कबूतर-ख़ाने का सा हाल है, एक आता है, एक जाता है

किसी स्थान विशेष पर लोगों का बराबर आना-जाना

कचहरी का दरवाज़ा खुला है

अर्थात सीधे-सीधे लड़ने की जरूरत नहीं, जाकर मुक़द्दमा दायर करो, तुम्हें कोई रोकता नहीं

कच्चा दूध सब ने पिया है

ग़लती हर किसी से हो जाती है

कच्चे बाँस जिधर झुकाओ झुक जाते हैं

बच्चों को शुरू में जैसी शिक्षा दी जाती है वे वैसे ही अच्छे या बुरे बन जाते हैं क्योंकि उनकी बुद्धि कोमल होती है, बड़े होने पर सिखाने का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता

कच्चे बाँस को जिधर निवाओ नियो जाए और पक्का कभी टेढ़ा न हो

बच्चों को शुरू में जैसी शिक्षा दी जाती है वे वैसे ही अच्छे या बुरे बन जाते हैं क्योंकि उनकी बुद्धि कोमल होती है, बड़े होने पर सिखाने का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता

कच्छो के मच्छो

बुरों की औलाद भी बुरी होती है

कच्ची कली कचनाल की तोड़त मन पछ्ताए

नाक़ाबिल इस्तिमाल चीज़ का लेने का कोई फ़ायदा नहीं

कच्ची लकड़ी जिधर मोड़ो मुड़ जाएगी

ना समझ को जिस रास्ते पर चुलाव आसानी से चल जाता है, बचपन ही में जिस तरह चाहो तर्बीयत करो

कच्ची लकड़ी जिस तरफ़ झुकाओ झुक जाएगी

ना समझ को जिस रास्ते पर चुलाव आसानी से चल जाता है, बचपन ही में जिस तरह चाहो तर्बीयत करो

कच्ची रेंडी दस्तर-ख़्वान का ज़रर

नादान और ना तजरबाकार आदमी की सोहबत-ओ-शिरकत से नुक़्सान और इफ़शा-ए-राज़ का ख़ौफ़ लगा रहता है, तिफ़ल नौख़ेज़ से अहितराज़ की निसबत बोलते हैं

कच्ची शीशी मत भरो जिस में पड़े लकीर, बाले-पन की 'आशिक़ी, गले पड़ी ज़ंजीर

बचपन का प्रेम मुसीबत सिद्ध होता है, लड़कपन में प्रेम करना अच्छा नहीं होता, उससे जीवन में कष्ट भोगने पड़ते हैं

कछवे का काटा कठोली से डरे

आफ़त-ए-रसीदा आदमी ज़रासी बात से डर जाता है

कछवे से काटा कठोली से डरे

आफ़त-ए-रसीदा आदमी ज़रासी बात से डर जाता है

कचोरी की बू अब तक नहीं गई

धनवान होकर भी घटिया विचार नहीं गया

कचरी खाए दिन बहलाए, कपड़े फाटे घर को आए

बाहर जाकर व्यर्थ समय नष्ट करने वाले के लिए यह कहावत कहते हैं

कद के कद आए मेरे मन नहीं भाए

इतनी देर के बाद आप का आना हमें पसंद नहीं

कद की तेलन कद का पला

बहुत तुच्छ, जिसकी कोई क़ीमत न हो

कह गया बह गया

बर्बाद हो गया, अकारत हो गया (विशेषकर जब बात या सलाह आदि पर ध्यान न दिया जाए तब प्रयोग किया जाता है)

कहा न अबला कर सके न सिंधू समाए, कहा न पावक में जड़े कहा काल न खाए

कौन सा काम है जो औरत नहीं कर सकती और कौन सी चीज़ में जो समुंद्र में नहीं समा सकती, कौन सी चीज़ है जिसे आग नहीं जला सकती, और कौन चीज़ है जिसे मौत नहीं आती

कहाँ बी-बी कहाँ बाँदी

मालिक और नौकर की बराबरी कैसे हो सकती है

कहाँ बुढ़िया, कहाँ राज कन्या

निम्न और उच्च के बीच क्या संबंध, बड़े और छोटे के बीच क्या प्रतियोगिता

कहाँ गए थे , कहीं नहीं , कहाँ से आए , कहीं से नहीं

करना ना करना सब बेकार हो गया, ना कहीं आए और ना कहीं गए, वहीं के वहीं रहे

कहाँ जाऊँ, चूहे का बिल नहीं मिलता

सख़्त नाचारी ज़ाहिर करने को कहते हैं, कभी भी पनाह नहीं मिलती

कहाँ के इरादे हैं

किधर जाते हो, कहाँ का इरादा है

कहाँ के तीस मार ख़ाँ हैं

कहाँ के ज़बरदस्त दिलावर हैं

कहाँ की बला पीछे लगी

कोई चीज़ अगर अप्रिय लगे तो तंग आकर कहते हैं

कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली

भोज जैसे प्रतापी सम्राट के सामने एक ग़रीब तेली की क्या बिसात

कहाँ राम राम , कहाँ टें टें

रुक: कहाँ राजा भोज कहाँ गंगा तीली

कहानी जैसी झूटी नहीं, बात जैसी मीठी नहीं

साधारण बात है बहुत अच्छी न बहुत बुरी, किसी बात के प्राक्कथन के रूप में कहते हैं

कहानी ये बड़ी है

लंबा क़िस्सा है, लंबी-चौड़ी दास्तान है

कहे से धोबी गधे पर नहीं चढ़ता

कहने पर अमल ना करने वाला और अपनी इच्छा से काम करने वाला है

कहे से कोई कुँएँ में नही गिरता

दूसरे के कहने से कोई नुक़्सान वाला काम नहीं करता, हर एक अपना अच्छा-बुरा ख़ूब समझता है

कहे से कोई कुँवें में नहीं गिरता

दूसरे के कहने से कोई हानिकारक क्रिया नहीं करता, सभी अपना अच्छा और बुरा अच्छे से समझते हैं

कहे से ज़िद सिवा होती है

इसरार करने से ज़िद और बढ़ती है

कहे तो कहे नहीं जाता, कहे बिन रहे नहीं जाता

बड़ी मुश्किल में फन॒से हैं, गोहम मुश्किल-ओ-गिरना गोयम मुश्किल, जान अज़ाब में है

कहें खेत की , सुनें खलियान की

रुक : कहो खेत की सुने खलियान की

कहें कुछ करें कुछ

उनकी बात का भरोसा नहीं कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं, अविश्वसनीय आदमी है

कहें तो माँ मारी जाए , नहीं तो बाप कुत्ता खाए

रुक : कहूं तो माँ मारी जाये अलख

कहीं बूढ़े तोते भी पढ़ते हैं

हर बात अपने वक़्त हर मुनासिब होती है, बूढ़ों की तर्बीयत नहीं हो सकती, हर काम या फ़न की तहसील का ज़माना मुक़र्रर है, इस के गुज़रने के बाद इस का हुसूल मुश्किल होता है

कहीं दाई से पेट छु्पता है

ख़ास-ख़ास लोगों से कोई राज़ की बात छिपी नहीं रह सकती

कहीं डूबे भी तिरे हैं

बिगड़ी हुई चीज़ नहीं सँवरती, बिगड़ी हुई चीज़ों का सँवरना कठिन है

कहीं हथेली पर बी सरसों जमती है

कहीं इतना मुश्किल काम इतनी जल्द हो सकता है, दिक्कत तलब काम इतनी आसानी से नहीं हो सकता

कहीं कव्वों के कोसे से ढोर मरते हैं

किसी के बुरा चाहने से बुरा नहीं होता

कहीं ख़ैर ख़ूबी, कहीं हाए हाए

दुनिया में कहीं ख़ुशी होती है कहीं गुम, ज़माने के अजीब रंग हैं, कहीं ऐश-ओ-आराम कहीं रंज-ओ-मलाल

कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा भानुमति ने कुंबा जोड़ा

निकम्मे लोगों के संयोजन पर या जब किसी का मेल-जोल व्यर्थ व्यक्तियों से हो तो कहते हैं

कहीं नाख़ुन से भी गोश्त जुदा होता है

आपस में रिश्ते नहीं टूटते

कहीं सूखे दरख़्त भी हरे होते हैं

असंभव बात कभी संभव नहीं होती, जो एक बार बर्बाद या नष्ट हो जाए फिर उसकी उन्नति नहीं होती

कहीं थूक से भी सत्तू सनते हैं

ज़रूरी सामान के बगै़र काम नहीं हो सकता, छोटी पूंजी से बड़ा काम नहीं हो सकता

कहीं तिल रखने को जगह नहीं

बहुत भीड़ है, बिलकुल जगह नहीं

कहीं तो सूही चुनरी और कहीं ढेले लात

विवाहित स्त्री के प्रति कहते हैं कि कभी तो सुख और आराम का जीवन व्यतीत करती है और कभी बहुत परेशानी में होती है

कहीं तोला, कहीं माशा

रुक : कभी तौला, कभी माशा नीज़ घड़ी तौला घड़ी माशा

कहीं पत्थर में भी जोंक लगी है

سنگ دل کو رحم نہیں آتا، بد کو نصیحت کا اثر نہیں ہوتا، کنجوس فیاضی نہیں کرسکتا

कहना आसान है, करना मुश्किल

कोई वादा कर के या बात कह कर निभाने मुश्किल होता है, वादा करना आसान है पूरा करना मुश्किल

कहना आसान करना मुश्किल

किसी काम के लिए मुँह से कहना सरल होता है परंतु करना कठिन

कहना और शै है, करना और शै है

मुँह से कहने और करने में बड़ा अंतर है, बोलना आसान है लेकिन करना मुश्किल है

कहने को आँधी, करने को ख़ाक

बेअमल बातूनी, जो बातें बनाए और कुछ भी ना करे धरे, निकम्मा, ज़बानी जमा ख़र्च करने वाला

कहने को मुँह में ज़बान रखते हैं

सवाल का जवाब दे सकते हैं, जैसा कहोगे वैसा सुनोगे, नाममात्र की ज़बान है, बोल-चाल के लायक़ नहीं

कहने को नन्ही खा जावे धन्नी

देखने के लिए थोड़ा और और खाने के लिए बहुत कुछ, देखने में ज़रा सी और खाए बहुत

कहने से बात पराई होती है

मुँह से बात निकल जाए तो प्रसिद्ध हो जाती है

कहने से बात पराई होती है, कहने को मुँह में ज़बान रखते हैं

नाममात्रा ज़बान है कहने के क़ाबिल नहीं

कहने से ज़िद सिवा होती है

आदमी को जिस क़दर समझाओ उसी क़दर वो ज़्यादा हिट करता है

कहो आम की सुने इम्ली की

रुक : कहो दिन की सुने रात की

कहो दिन की सुनो रात की

प्रश्नों कुछ उत्तर कुछ, उत्तर प्रश्नों के उलटा देना

कहो खेत के सुने खलियान की

रुक : कहो दिन की सुने रात की

कहो कुपड़े की सुने गात की

जो बात है सौ उलटी है, कम फ़ह्म की निसबत कहते हैं

कहो तो मैं घर छोड़ दूँ

यहाँ से जाइए, तशरीफ़ ले जाइए जब कोई बहुत देर तक बैठा रहे तो कहते हैं

कहो ज़मीन की सुने आसमान की

रुक : कहो दिन की सुने रात की

कहते की ज़बान नहीं पकड़ी जाती

किसी को कुछ कहने से रोका नहीं जा सकता, किसी की ज़बान को बंद नहीं किया जा सकता, कहने वाले को कोई नहीं रोक सकता

कहूँ तो माँ मारी जाए, न कहूँ तो बाप कुत्ता खाए

हर प्रकार से संकट है, न कहते बनता है न चुप रहते

कैरी पत्तों की आड़ में कब तक छुपेगी

बुराई छुप नहीं सकती ज़रूर ज़ाहिर हो कर रहती है

कैसा ठीक बनाता हूँ

धमकी के तौर पर कहते हैं, बहुत सज़ा दूँगा

कैसी मस्जिद कैसा मंदिर जो देखो वो दिल के अंदर

ये वहदत वजूद वालों का क़ौल है यानी दिल में सब कुछ मौजूद है

कैसी धरपट उड़ी

ख़ूब पिटा, अपमानित किया गया, ज़लील हुआ

ककड़ी का चोर बाँधा या मारा जाता है

बे इंसाफ़ी और ना पुरसान हाली के सबब अदना क़सूर पर बड़ी सज़ा मिलना, अंधेर नगरी चौपट राज होना

ककड़ी की पोंगी बजी बजी , नहीं तोड़ खाई

काम में कुछ बुराई नहीं यूं हुआ तो हुआ नहीं तो और सही, ये काम तरीक़े से आसान ही आसान है

कल का लड़का है

थोड़े समय का पैदा हुआ है, अनुभवहीन है, नातजरबाकार है

कल का लीपा देव बहा, आज का लीपा देखो आ

जो हुआ सो हुआ, बीती हुई बातों को जाने दो वर्तमान बात पर ध्यान दो

कल के जोगी कंधे पर जटा

जब तक पूर्णता प्राप्त न हो रूप धारण करने से क्या होता है

कल किस ने देखी है

देर न करो स्पष्ट नहीं कल क्या हो

कलाल की बेटी डूबती चली लोगों ने जाना मतवाली है

लोग ऊपरी हालत को देख कर अनुमान लगाते हैं

कलाल की दुकान पर पानी भी पियो तो शराब का गुमान होता है

बुरे स्थान पर मात्र जाने से ही लोग संदेह करने लगते हैं कि यह भी बुराई में सम्मिलित है

कल्ला चले सत्तर बला टले

भोजन मिलते रहने से बहुत सारी कठिनाइयाँ अपने-आप दूर हो जाती हैं

कल्लर का खेत , जैसे कपटी का हेत

शोर वाला खेत बेवफा की दोस्ती की तरह है जिस से कोई फ़ायदा नहीं होता

कल्लर का खेत जैसे कपटी का हैत

शोर वाला खेत बेवफ़ा की दोस्ती की तरह है जिससे कोई फ़ायदा नहीं होता

कल्ले पटख़ गए

कमज़ोर और दुबला-पतला हो गया

कल्सिरा बड़ी आफ़त है

इंसान बहुत चालक है

कलवार की अगाड़ी और क़साई की पिछाड़ी

शराब शुरू में खरीदनी चाहिए और गोश्त आख़िर में

कल्वारी की अगाड़ी और क़साई की पिछाड़ी

मदिरा पहले और मांस अंत में ख़रीदना चाहिए

कम अस्ल से वफ़ा नहीं

जो वास्तव में उच्च कुल का होता है, उससे कभी धोखा नहीं होता

कम बख़्त गए हाट , न पल्ले तराज़ू , न पल्ले बाट

रुक : कमबख़्त गए बाट, तराज़ू मिले ना बाट

कम खा ग़म न खा

थोड़ा ख़र्च करने से ग़म नहीं होती है

कम ख़र्च बाला नशीन

इस काम या चीज़ की निसबत बोलते हैं जिस पर ख़र्च कम आए या जो क़ीमत में कम मगर बरतने और देखने में उम्दा हो , वो जो क़ीमत में कम इफ़ादीयत में बेहतर हो

कम ख़र्ची में आटा गीला

गरीबी में आटा गीला; आय कम और व्यर्थ ख़र्च बहुत, आटे में पानी अधिक हो जाए तो उसमें आटा और डालना पड़ता है

कमा के खाया ऐसी तैसी जगत में आया

जो ले दे और कमा के खाए उसके दुनिया में आने का क्या फ़ायदा हुआ, अशिष्ट और अज्ञानी लोगों के बारे में कहा जाता है

कमाए न धमाए , मौ को भोज भोज खाए

(औरत अपने निखटू् ख़ावंद की शिकायत करती है) कमाता कुछ नहीं और मुझे तंग करता रहता है, नकठो आदमी हमेशा बीवी के लिए मुसीबत होता है

कमाए न धमाए मोको भूज भूज खाए

औरत अपने निखटू् पति की शिकायत करती है कि कमाता कुछ नहीं और मुझे तंग करता रहता है

कमाउ आवे डरता निकट्ठो आवे लड़ता

कमाने वाला शरीफ़ होता है और लड़ाई झगड़े से डरता है मगर निकम्मा शरीर और लड़ाका हुआ करता है

कमाउ ख़सम किस ने न चाहा

जिस के अस्तित्व से लाभ हो वही प्रिय होता है

कमाऊ आवे डरता निखट्टू आवे लड़ता

कमाने वाला आम तौर पर शरीफ़ और सीधा होता है, और लड़ाई झगड़े से डरता है, निखट्टू् लड़ भिड़ कर रोब डालता है

कमाऊ को किस ने न चाहा

जिससे फ़ायदा हो वह प्रिय होता है

कमाऊ पूत कलेजे मूत

कमाने वाले पुत्र को माँ बहुत चाहती है, कमाने वाले पुत्र को सभी चाहते हैं

कमाऊ पूत की दूर बला

लालन पालन करने वाले के लिए प्रार्थना करना

कमाल-ए-शय ज़वाल-ए-शय

विकास के अंतिम पायदान पर पतन का आरंभ होता है, प्रत्येक चरम का पतन है

कमान चढ़ रही है

बहुत हुक्म और अधिकार प्राप्त है

कमान से निकला तीर और मुँह से निकली बात फिर नहीं आती

हर काम सूझ बूझ से करना चाहिए वर्ना बा'द में पछताना पड़ता है

कमाने को भेड़ खाने को शेर

जो खाए बहुत परंतु काम कुछ न करे

कमानी न पहिया गाड़ी जोत मेरे भैया

लाचारी की स्थिति में डींग मारने के अवसर पर यह कहावत कहते हैं

कमावे धोती वाला उड़वे टोपी वाला

देसी मेहनत करें अंग्रेज़ मज़े उड़ाएँ

कमावे धोती वाला, उड़ावे टोपी वाला

परिश्रम कोई करे और भोग विलास कोई करे

कमावे टोपी वाला उड़ावे धोती वाला

कमाए कोई और मज़े कोई उड़ाए

कमावे टोपी वाला, उड़ावे धोती वाला

कमाए कोई उड़ाए कोई, एक का माल दूसरे के ख़र्च में आने के मौक़ा पर बोलते हैं

कमावें ख़ान-ए-ख़ानाँ उड़ावें मियाँ फ़हीम

कमाए कोई और उसे उड़ाए कोई और दूसरे के माल पर गलच्छ्াरे उड़ाने वाले की निसबत बोलते हैं

कमावें मियाँ ख़ान-ए-ख़ानाँ उड़ावें मियाँ फ़हीम

दौलत कोई कमाए ओर ख़र्च कोई करे, फ़हीम ख़ानख़ाना का ग़ुलाम था, और बहुत दानी था

कमावें रात खिलावें ज़ात

غیرتمند آدمی برادرانہ حقوق کوحتی الوسع ادا کرتے ہیں

कमावें रात, खिलावें ज़ात

बाहया या ग़ैरत मंद आदमी बिरादराना हुक़ूक़ हती अलामकान अदा करते हैं

कमल ओढ़ने से फ़क़ीर नहीं होता

यानी भैंस के साथ ही ज़ाती कमाल भी चाहिए

कमर में बूता नहीं, मदार साहब बेटा दो

बिना परिश्रम किये आराम तलाश करना

कमर में तोशा मंज़िल का भरोसा

रुपय पैसे से हर हाल में दिल जमुई होती है

कमर में तोशा राह का भरोसा

रुपय पैसे से हर हाल में दिल जमुई होती है

कमर न बुता, साँझे सोता

नामर्द आदमी शाम होते ही सो जाता है

कमर न होता, साँझे सोता

नामर्द आदमी सर-ए-शाम सौ जाता है ताकि बीवी के सामने शर्मिंदा ना होना पड़े

कमबख़्त गए हाट न मिले तराज़ू न मिले बाट

दुर्भाग्य आदमी का हर तरह नुक़्सान होता है सौदा लेने जाए तो दुकानदार के पास तराज़ू या बाट नहीं होते, जितना चाहे दे

कम्बख़्त गए हाट, तराज़ू मिले न बाट

बदनसीब की नाकामी पर ये मिसल कहा करते हैं

कमबख़्त का बेटा लहू मूते, बख़्तावर का घोड़ा लहू मूते

बुख़्तावर के माल और कम्बख़्त की जान का नुक़्सान होता है

कम-बख़्त का बेटा लहू मूते, भागवान का घोड़ा

आदमी के लिए ख़ून मूओतना मुज़िर है और घोड़े का लिए निहायत नाफ़े है

कमबख़्त की खिचड़ी कच्ची, बख़्तावर का आटा गीला

भाग्यशाली के घर में बहुत सा आटा गूँधा जाता है, निर्धन के घर में पतली दाल पकाई जाती है

कमबख़्त की ये निशानी, जो सूख गया कुँवें का पानी

दुर्भाग्य का ये चिन्ह है कि कुएं का पानी सूख जाता है

कम-बख़्ती जब आवे ऊँट चढ़े को कुत्ता काटे

कठिनाई के समय में बहुत ज़्यादा चौकन्ना रहने पर भी तकलीफ़ से नहीं बच सकते

कमबख़्ती जो आवे ऊँट चढे़ को कुत्ता काटे

भाग्य ख़राब हो तो सावधानी के बाद भी नुक़्सान होता है

कमबख़्ती की है ये निशानी, सूख गया कुँवें का पानी

सहसा कोई अनिष्ट हो जाने पर भाग्य को कोसना

कमबख़्ती की ये निशानी (जो) सूख गया कुएँ का पानी

कुवें के पानी का सूख जाना, दुर्भाग्य की निशानी है

कम्बल ओढ़ने से फ़क़ीर नहीं होता

यानी भेस के साथ-साथ निजी कमाल भी चाहिए

कमीन कभी कोंडे के इधर कभी उधर

कम हिम्मत कमीना खाने के गर्द रहता है

कमीने की दोस्ती बालू की भेट

कमीने की दोस्ती पाएदार नहीं हो सकती

कमली जितनी भिगे गी (उतनी ही) भारी होगी

आप जितना अधिक फिजूलखर्ची करेंगे, उतना ही अधिक आप पर बोझ पड़ेगा

कमली जितनी भीगेगी , भारी होगी

जितना इसराफ़ करोगे या झगड़ा बढ़ाओगे उतनी ही ज़ेर बारी बढ़ेगी

कम्मल में दोशाले का मज़ा मिलना

ग़ुर्बत में लुतफ़ होना

कम्मल ओढ़ने से (कमली ओढ़े) फ़क़ीर नहीं होता

कमाल भी चाहिए ख़ाली वस्त्र धारण करने से आदमी किसी ख़ास संप्रदाय का नहीं बन जाता

कमज़ोर (का ग़ुस्सा) मार खाने की निशानी

कमज़ोर हमेशा दबता रहता है

कमज़ोर का ग़ुस्सा मार खाने की निशानी

ज़बरदस्त हमेशा दबा रहता है, जिस का कोई पुर्साने हाल ना हो उस को सब दबाते हैं

कन दो गुज़ार (तीर अंदाज़ों की इस्तिलाह)

तीर को कान के पास लाकर छोड़ना, इस तरह तीर ज़्यादा ज़ोर से जाता है

कनौंडी बिल्ली चूहों से कान कटवाए

افسر جو راشی ہو ماتحتوں سے بھی دبتا ہے، جس شخص میں کوئی عیب ہو وہ معمولی آدمیوں سے بھی دبتا ہے

कंधे डाली झोली, चमार छोड़ा न कोई

जब मांगने पर आए तो ग़ैरत कैसी, ज़लील काम करने से ग़ैरत मिट जाती है, भीक मांगने वाले बेग़ैरत होते हैं

कंजा भगवान होता है

करंजा यानी नीली आँखों वाला भाग्यशाली होता है।

कनखजूरे के कितने पाँव टूटेंगे

बहुत बारसूख और अमीर आदमी का कितना नुक़्सान होगा

कन्त न पूछे बात री, मेरा धन सुहागन नाम

जब कोई अपने आप ही व्यर्थ में किसी स्थान का मालिक बना फिरे तब कहते हैं

कन्या पेट में ढूँडती फिरें बर

उसके मुताल्लिक़ कहते हैं जो किसी बात के मुताल्लिक़ बहुत पहले से इंतिज़ाम करे

कपड़ा कहता है तू कर मुझे तह, मैं तुझे करूँ शह

कपड़े को सुरक्षित तरीक़े से पहनने वाले की ख़ुश-पोशाकी सम्मान का कारण होती है

कपड़ा न लत्ता मिस्सी मले अलबत्ता

ग़रीबी में श्रंगार की लालसा वह भी अनुचित

कपड़ा पहने जग भाता खाना खाए मन भाता

कपड़ा सबकी पसंद अर्थात फ़ैशन के अनुसार और खाना अपनी पसंद के अनुसार खाने से आदमी अच्छा रहता है

कपड़ा पहनिये जग भाता खाना खाए खाए मन भाता

लिबास फ़ैशन के मुताबिक़ होना चाहिए खाना अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ , लिबास आम पसंद और ख़ुराक अपनी पसंद के मुवाफ़िक़ खाने से आदमी अच्छा रहता है

कपड़े फाटे घर को आए

नाकाम वापिस आने के मौक़ा पर मुस्तामल

कपड़े फटे, ग़रीबी आई

फटे कपड़े पहनना दरिद्रता का चिह्न है

कपास जिस जगह जाएगी ओटी जाएगी

मज़दूर को जगह बोझ उड़ाना पड़ता है

कपटी की पीत मरन की रीत

कीनावर अर्थात कपटी की दोस्ती में मौत का ख़तरा है, कपटी से प्रेम करना मौत को बुलाना है

कपटी की पीत, मरन की रीत

कपटी की दोस्ती बर्बादी की वजह होती है, कपटी से प्रेम करना मौत को बुलाना है

कर भला हो भला, अंत भले का भला

भला करने वाले का अंत में भला ही होता है

कर गए डाढ़ी वाले , पकड़े गए मूछों वाले

करे कोई और मौरिद-ए-इल्ज़ाम हो दूसरा

कर जाए दाढ़ी वाला पकड़ा जाए मूछों वाला

बड़ों की भूल के लिए छोटे ज़िम्मेदार बनाए जाते हैं

कर खेती परदेस को जाए, ताको जनम अकारत जाए

अगर कृषक परदेस को चला जाए तो आयु बर्बाद करता है

कर ले जो करना है अभी वक़्त है

अभी समय है फिर कुछ न हो सकेगा जीवन में जो कुछ हो सकता है कर लेना चाहिए

कर ले सो काम, भज ले सो राम

इस संसार में जो कुछ हो सकता है कर लेना चाहिए और इश्वर को याद करना चाहिए

कर न कर्तूत लड़ने को मज़बूत

काम कुछ हो नहीं सकता लरने को तैय्यार रीते हैं

कर पानी न मुँह पानी

यह कहावत गंदे व्यक्ति के प्रति कहते हैं जो हाथ मुँह भी न धोए

कर सेवा तो खा मेवा

परिश्रम का फल सुख या हर्ष है

कर तो डर न , कर तो ख़ुदा के ग़ज़ब से डर

रुक : कर तो तोड़ ना कर तो डर

कर तो डर न कर तो डर

ख़ुदाए ताला से हरवक़त पनाह मानकीनी चाहिए, नागहानी आफ़तों से डरना चाहिए

कर तो डर नहीं , ख़ुदा के ग़ज़ब से डर

रुक : कर तो डर ना कर तो डर

करछी हाथ सेलाने ही को करते हैं

करछुल दाल-तरकारी चलाने के लिए ही हाथ में लिया जाता है अर्थात नौकर को काम करने के लिए ही रखते हैं

कर्दा पशेमाँ-ओ-ना कर्दा अरमाँ

इस काम के मुताल्लिक़ कहते हैं जिस का करने वाला पछताए और ना करने वाला उस की तमन्ना करे

कर्दन सद 'एब ओ ना कर्दन यक 'एब

किसी काम को करें तो इस में सैकड़ों ख़राबियां निकाली जाती हैं और ना करना सिर्फ़ एक ख़राबी शुमार की जाती है, एक नहीं से सौ बुलाऐं टलती हैं

कर्दनी ख़्वेश आमदनी पेश, न की हो तो कर देख

किए हुए का परिणाम भुगतना ही पड़ता है

करे दस भरें

एक आदमी ग़लती करता है और मुतअद्दिद या अज़ीज़ों को नतीजा भुगतना पड़ता है

करे एक पकड़े जाएँ सब

एक के दोष का दण्ड सबको मिलता है, एक की भूल का प्रायश्चित्त पूरे समाज को करना पड़ता है

करे घास से यारी तो चरने कहाँ जाए

यदि किसी की मित्रता के कारण जीविका अर्थात रोज़ी छोड़ दिया जाए तो खाएँगे कहाँ से

करे कोई भरे कोई

किसो कोई करे और ख़मयाज़ा किसी और को भुगतना पड़े

करें कल्लू, भरें लल्लू

करे कोई पकड़ा कोई जाए, करे कोई दण्ड कोई भोगे

करें नानी भरें नवासी

ग़लती कोई करे, पकड़ा कोई जाए

करेला और नीम चढ़ा

प्रायः उस दुष्ट व्यक्ति के प्रति बोलते हैं जो किसी कारण से और दुष्ट हो जाए

करगा छोड़ तमाशे जाए नाहक़ चोट जुलाहा खाए

अर्थात अपना काम छोड़ कर औरों की रेस नुक़्सान होता है

करगा छोड़ तमाशे जाए नाहक़ चोट जुलाहा खाए

अपने काम छोड़कर औरों की रेस करने में नुक़्सान होता है

कर्घा छोड़ तमाशे को जाए नाहक़ चोट जुलाहा खाए

(दो सिपाही आपस में किसी शहर के कूचे में ख़ानाजंगी कर रहे थे एक जुलाहा ये ख़बर सुनते ही अपने करघे से उठ कर इस कूचे में आया और तमाश देखने लगा एक तलवार जो दूसरे के सर से एचटी तो जिला है के आ लगी) जब कोई शख़्स दूसरे की रेस कर के अपना काम छोड़ देता है तो नुक़्सान उठाता है

करिया अच्छर भैंस बराबर

अनपढ़ एवं असभ्य व्यक्ति के प्रति बोलते हैं

करके खाना और मगन रहना

जो आदमी मेहनत करके खाता है उसे किसी की पर्वा नहीं होती

कर्म हीन खेती करे , बैल मरें या सूखा पड़े

अगर बदक़िस्मत आदमी खेती करता है तो बैल मर जाते हैं या ख़ुशकसाली हो जाती है, यानी बदक़िस्मत को हर काम में नुक़्सान होता है

कर्म की रेखा नहीं मिटती

भाग्य का लिखा नहीं मिटता

करम रेख न मिटे, करो कोई लाखों चतुराई

कोशिश और बुद्धिमत्ता से भाग्य का लिखा नहीं मिट सकता

कर्म रेखा अमिट है

भाग्य बदल नहीं सकता, भाग्य का लिखा मिट नहीं सकता, भाग्य का लिखा हो कर रहता है

करना चाहे 'आशिक़ी और मामा जी का डर

कोई बात करना हो तो इस बात की परवाह नहीं करना चाहिए कि कोई आपत्ति जताएगा

करना न करतूत लड़ने को मज़बूत

काम का न काज का लड़ने को हर समय तैयार

करने को चाकरी, सोने को घर

मनुष्य को काम और घर की आवश्यकता होती है

करनी ही संग जात है, जब जाय छूट सरीर, कोई साथ न दे सके, मात पिता सत बीर

मनुष्य के मरने पर उसके कर्म ही साथ जाते हैं, माँ-बाप, भाई या कोई कितना भी सज्जन या प्रिय व्यक्ति हो कोई साथ नहीं जाता

करनी करे सो पावे

जैसा काम करोगे वैसा परिणाम निकलेगा, जैसी करनी वैसी भरनी

करनी करे तो क्यूँ करे और करके पछताए, पेड़ बोए बबूल के तो आम कहाँ से खाए

जो बात करनी चाहो करो डरो नहीं और कर के फिर पछताना नहीं चाहिए

करनी ख़ाक की, बात लाख की

बातें लंबी-चौड़ी करना परंतु काम कुछ न करना

करनी न धरनी नाम गुलाबिया

रुक : पढ़े ना लिखे नाम मुहम्मद फ़ाज़िल, निकम्मे पुन या बेहुनरी में बदमिज़ाज

करनी न कर्तूत फूहड़ लड़ने को मज़बूत

व्यर्थ का दंगा-फ़साद करने वाला, प्रायः निकम्मे लड़के से कहते हैं

करनी न करतूत, चलियो मेरे पूत

न काम के न काज के, कहलाते हैं सपूत

करो खेती और भरो डंड

खेती करो और लगान दो

करो तो सवाब नहीं, न करो तो 'अज़ाब नहीं

ऐसा काम जिसके करने या न करने से न कुछ भलाई हो न बुराई

करता अरमान न करता पशेमान

तजुर्बे के बाद ही इंसान किसी काम की ऊंच नीच समझ सकता है

करता उस्ताद न करता शागिर्द

जो श्रम करता है वह दक्ष बन जाता है, न करने वाला अयोग्य रहता है

कर्तब की बिद्दिया है

हर काम अभ्यास से होता है ,कोई कार्य हो करने से ही आता है

करते की बिध्या

इलम की वो पुख़्तगी जो तजुर्बा और मश्क़ से पैदा होती है, करते रहने की महारत का नतीजा, मुसलसल मश्क़ के सबब इलम की पुख़्तगी मश्शाक़ी से हाथ दरुस्त रहता है, मश्क़ से कामयाबी हासिल होती है

करते की बिद्या

इलम की वो पुख़्तगी जो तजुर्बा और मश्क़ से पैदा होती है, करते रहने की महारत का नतीजा, मुसलसल मश्क़ के सबब इलम की पुख़्तगी मश्शाक़ी से हाथ दरुस्त रहता है, मश्क़ से कामयाबी हासिल होती है

कस न आयदा ब जंग उफ़्तादा

कमज़ोर या आजिज़ से कोई जंग नहीं करता

कस न गोयद कि दोग़ मन तुर्श अस्त

अपनी छाछ को कोई बुरा नहीं कहता

कस नमी पुरसद कि भय्या कौन हो ढाई हो या तीन या पौन हो

जब कोई व्यक्ति दरिद्र हो तो उसकी कोई नहीं पूछता कि तुम कौन हो या तेरी क्या हैसियत है

कस्ब-ए-कमाल कुन कि 'अज़ीज़-ए-जहाँ शवी

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) साहब-ए-कमाल ही को इज़्ज़त मिलती है

कश्मीरी बे पीरी जिस में लज़्ज़त न शीरी

बाअज़ का ख़्याल है कि कश्मीरी बेवफ़ा और नादार होते हैं, कश्मीरी ऐसे छींटों का बुरा मानते हैं, कश्मीरीयों के बारे में ये बहुत पुराना ख़्याल है, अब ऐसा ख़्याल करना दरुस्त नहीं है

कश्मीरी से गोरा, सो कोढ़ा

कश्मीरी बहुत सफ़ेद रंग के होते हैं और जिस को बरस हो वही उन से अधिक सफ़ेद रंग का हो सकता है

कश्ती लालच ही के सबब डूबती है

लालच से काम बिगड़ता है

कट खनी कुतिया भुस में ब्याई , टुकड़ा देख कर दौड़ दौड़ आई

तुम्ह की वजह से तुंद मिज़ाज भी मुतीअ होजाता है

कठड़ी हलाल बुक़्चा हराम

थोड़े में रास्ता बाज़ी और बहुत में बेईमानी

काैआ टर टराता ही है , धान पकते ही हैं

को्वा तिलमिलाता ही रहता है मगर धान पक्के बगै़र नहीं रहते, दुश्मन के बुरा चाहने से बुरा नहिं होता

कौड़ी आए तो गुलगुले पकाएँ

थोड़ा बहुत रुपया पैसा, कुछ पाउं तो रंगरलियां मनाएं, रुपय पैसे की आमद पर ऐश की सूझती है

कौड़ी गाँठ की, जोरू साथ की

पैसा गाँठ का ही काम आता है और स्त्री तभी वश में रहती है जब अपने साथ रखी जाए

कौड़ी का माल नहीं

महिज़ निकम्मा है, मुफ़्त लेने के लायक़ भी नहीं, बेहक़ीक़त और बेहैसियत है

कौड़ी के तीन-तीन हैं

बहुत अपमानित हैं

कौड़ी के वास्ते मस्जिद ढाते हैं

थोड़े से फ़ायदे के लिए बहुत सा नुक़्सान उठाते हैं, कोड़ी के इव्ज़ ईमान बीच देते हैं

कौड़ी न हो तो कौड़ी के फिर तीन-तीन

बहुत सस्ती चीज़ के लिए भी कहते हैं

कौड़ी ना रख कफ़न को (बिज्जू की शक़्ल बन रह)

अपव्ययी के पास कुछ नहीं होता

कौड़ी पास नहें, खट्टे वाले होत

पास कुछ भी नहीं मुफ़्त की शेख़ी जताते हैं

कौड़ी पास नहीं और चले बाग़ की सैर को

ग़रीबी या निर्धनता में साहसिकता बढ़ाने वाले के संबंधित कहते हैं

कौड़ी पास नहीं, पड़ी अफ़ीम की चाट

ग़रीबी पर अमीरों की आदतें

कौड़ी पे ख़ून नहीं होता

मामूली बात के लिए कोई किसी का नुक़्सान नहीं करता

कौड़ी-कौड़ी माया, जोड़े जो ज़मीं में धरता है, जिस का लहना वही खावे पापी बरिय्या मरता है

कंजूस पापी परेशानी भर कर जोड़ता है, फिर जिस को नसीब होता है वही खाता है

कौड़ी-कौड़ी माया जोड़ी कर बातें छल की, भारी बोझ धरा सर ऊपर किस बिध हो हलकी

धोके-बाज़ी से धन जमा किया और पापों का बोझ सर पर लिया जो किसी तरह हल्का नहीं होता

कौओं के कोसे से बैल नहीं मरते

किसी के बुरा चाहने से किसी को नुक़्सान नहीं पहुंचता

कौओं के कोसे से ढोर नहीं मरते

किसी के बुरा चाहने से किसी को नुक़्सान नहीं पहुंचता

कौन हर रोज़ अतालीक़ हो समझाए गा

हर रोज़ तुम्हें कौन सबक़ पढ़ाए

कौन कहे राजा जी नंगे हो

धनवान एवं शक्तिशाली व्यक्ति में कोई दुर्गुण हो तो कोई नहीं जताता

कौन कहे रान ढाँको

किसी के अवगुण जानना परंतु सावधान न करना इस लिए कि बिना किसी कारण के बुरा कौन बने

कौन कहता है

ऐसा करने को किसी ने नहीं कहा, ऐसा नें करना चाहीए, में नहीं कहता, कोई नहीं कह सकता, किसी की मजाल नहीं कि कोई कुछ कह सके, किस ने कहा, अगर कोई कहता है तो ग़लत कहता है

कौन किसी का

कोई किसी का नहीं होता, कोई अपना नहीं, हर कोई स्वार्थी है

कौन किसी के आवे जावे दाना-पानी लावे

अतिथि भाग्य से आता है, जहाँ का दाना-पानी लिखा होता है वहीं जाता है

कौन किसी के साथ मरता है

कोई किसी का साथ नहीं देता, मरने वाले से लाख मुहब्बत हो कोई उस के साथ नहीं जा सकता, कोई किसी के साथ नहीं मरता, सब मजबूर हैं

कौन पराई आग में गिरता है

कोई किसी के कारणवश संकट मोल नहीं लेता

कौन रूप पर इतना सिंघार

कोई कुरूप स्त्री श्रृंगार करे तो कहते हैं कि रूप तो ठीक नहीं श्रृंगार से क्या होगा

कौन सा दरख़्त है जिसे हवा नहीं लगी

थोड़े-बहुत कष्ट सभी को भोगने पड़ते हैं

कौन सा घर है जिस में मौत नहीं आई

मुसीबत और तकलीफ़ से कोई जगह ख़ाली नहीं

कौन सी चक्की का पिसा खाया है

बलशाली व्यक्ति को कहते हैं कि क्या ख़ूराक खाते हो जिस से इतने मज़बूत एवं मोटे हो गए हो

कौन सी किशमिश है जिस में डंडी नहीं

कोई ऐब से ख़ाली नहीं, कोई ना कोई इल्लत हर एक के साथ लगी होती है, हर शख़्स में कोई ना कोई ख़ामी ज़रूर होती है

कौनसा घर है जिस में मौत नहीं आती

मौत हर जगह आती है, हर जगह रहने वाले मरते हैं

कौनसा ज़हर मिल गया

का बुराई हो गई, क्या ग़लत बात हो गई, क्या ख़राबी पैदा हो गई

कौवे की दुम में अनार की कली

किसी बद-शक्ल आदमी का बढ़िया पोशाक पहनकर निकलना

काैवे कोसा करें खेत पक्का करें

नाहक़ की बददुआ कुछ असर नहीं रखती

कव्वा चला हंस की चाल अपनी चाल भी भूल गया

जो व्यक्ति अपने रहन-सहन को छोड़ कर अपने से बड़े लोगों का अनुकरण करता है वह हानि उठाता है, अपनी चाल छोड़कर बड़ों की नक़्ल करने से सदैव हानि होती है

कौआ कान ले गया कान को नहीं देखते कव्वे के पीछे दौड़े जाते हैं

रुक : को्वा नाक ले गया, नाक को नहीं देखते को्वे के पीछे दौड़े जाते हैं

कौआ कान ले गया कान को नहीं देखते कव्वे के पीछे दौड़े फिरते हैं

रुक : को्वा नाक ले गया, नाक को नहीं देखते को्वे के पीछे दौड़े जाते हैं

कौआ नाक ले गया नाक को नहीं देखते, कव्वे के पीछे दौड़े फिरते हैं

झूओटी बात को बे तहक़ीक़ मान लेने के मौक़ा पर मुस्तामल

कौआ नाक ले गया नाक को नहीं देखते, कव्वे के पीछे दौड़े जाते हैं

झूओटी बात को बे तहक़ीक़ मान लेने के मौक़ा पर मुस्तामल

कव्वा फँसाने की चाल है

चालाक आदमी को धोखा देने का ढंग है

कव्वे के ब्याह में गीत गावत ससित के

अयोग्य के सामने योग्यता की बात करना व्यर्थ है

कव्वे ने दिया टुकड़ा तो मेरा गया भुकड़ा

थोड़ी आमदनी से गुज़ारा करना

कौवों को अंगूरी बाग़

मूर्ख को अच्छी वस्तु की क़द्र नहीं होती

कया मुँह में पंजीरी भरी है

बोलते क्यों नहीं, क्यों चुप हो

के बल मकड़ी नाचे

कमज़ोर चीज़ का सहारा लेने के मौक़ा पर बोलते हैं

के करनी करे, केकरा सिरे बीते

कोई करता है किसी और को भुगतना पड़ता है

केहू के जेठ पूत, केहू के लीखे कनवा

कोई उसे बड़ा बच्चा समझता है, कोई उसे बच्चा ख़याल करता है, कोई अपनी औलाद को अगरचे बच्चा ही हो अक़्लमंद समझता है, दूसरे नादान समझते हैं

खड़ा बनिया पड़े बराबर , पड़ा बनिया मरे बराबर

काहिल इंसान की निसबत कहते हैं कि बेकार खड़ा हुआ आदमी लेटे हुए आदमी की तरह होता है और बे कार लेटे-ए-हुए आदमी शुमार मुरदों में करना चाहिए

खड़ा खेल फ़र्रुख़ आबादी

ज़ना कारी, बगै़र निकाह या अह्द के वपीमां किसी औरत से ताल्लुक़ात क़ायम करना, नाजायज़ ताल्लुक़ात. थोड़ी देर का जिन्सी ताल्लुक़, बगै़र किसी झमेले के वक़्ती अय्याशी

खड़ा तख़्ता पड़ा शहतीर

खड़ा तख़्ता, पड़ा हुआ बीम, दोनों ताक़त में बराबर होते हैं, सीधी क्षैतिज स्थिति में तख़्ता और लेटी हुई स्थिति में बीम: अनिच्छुक और आराम पसंद व्यक्ति

खड़े रस्सी बैठे कोस, खाते-पीते तीन कोस

आदमी यात्रा में जितनी देर खड़ा रहता है उतनी देर में एक रस्सी, जितनी देर बैठता है उतनी देर में एक कोस और खाने पीने में जितना समय नष्ट करता है उतने में तीन कोस चल सकता है, आश्य यह है कि अपना समय नष्ट नहीं करना चाहिए

खड़ी मज़दूरी, चोखा काम

उजरत पूरी और अच्छी हो तो काम भी अच्छा होता है, उजरत हाथ के हाथ मिले तो काम दिल लगा कर किया जाता है

खड़का हुआ और चोर उभड़ा

ज़रा सी आहट हो तो चोर भाग जाता है

खड़का हुआ, चार उभरा, खिचड़ी खाते पुहँचा उतरा

किसी इशारे से मतलब का ताड़ जाना, ज़रा सी आहट से चूर भाग जाता है

खा गया सो अंग लग गया, दे गया सो ले गया, छोड़ गया सो खो गया

जो ख़र्च क्या इस से मज़े उड़ाए, जो ख़ैरात क्या वो आख़िरत में काम आएगा, जो छोड़ गया वो दूसरे खाएंगे

खा के डकार न लेना

पराया धन हज़म कर जाना, पचा लेना

खा के जल्द चलिए कोस, मिरे आप दीब के दोस

खाने के बाद जल्द-जल्द नहीं चलना चाहिए

खा के पछताता है, नहा के नहीं पछताता

नहाना हानि नहीं पहुँचाता खाना कभी-कभी पहुँचाता है

खा ले पहन ले, सो अपना

जिस के बच्चे न हों उसे भी कहते हैं

खाए बकरी की तरह, सूखे लकड़ी की तरह

बहुत खाने के बाद भी दुबला पतला रहने वाले व्यक्ति के बारे में कहते हैं

खाए जैसे बकरी , सूखे जैसे लकड़ी

खाना-पीना अलग नहीं लगता

खाए के गाल और नहाए के बाल नहीं छुपते

संपन्नता और समृद्धि छिपी नहीं रहती

खाए मलीदा एक खाए भुस

अपना-अपना भाग्य कोई धनवान और कोई निर्धन, कोई मज़ा-मौज करता है, कोई कष्टों में जीवन बिताता है

खाए मन भाता और पहने जग भाता

खाना अपनी पसंद का अच्छा होता है और कपड़ा दूसरे की पसंद का, लिबास ज़माने की रविष के मुताबिक़ होना चाहिए

खाए न खिलाए ख़ाला दीदों आगे आए

जो खाए ना खिलाए लेकिन इज़हार मुहब्बत में मुबालग़ा करे उस की निसबत कहते हैं

खाए नाना का, कहलाए दादा का

लाभ किसी से उठाए और नाम किसी का हो

खाए पान, टुकड़े को हैरान

मुफ़लिस ताहम फ़ुज़ूलखर्च, तन पे नहीं लता पान खाएंगे अलबत्ता

खाए पर खाया, वो भी गँवाया

ज़्यादा हिर्स करने वाला आदमी असल सरमाया भी खो देता है

खाए तो घी से, नहीं तो जाए जी से

खाने के शौक़ीन लोगों के प्रति भी कहते हैं

खाए तो मुँह लाल, न खाए तो मुँह लाल

उस व्यक्ति के प्रति बोलते हैं जो अपराध करे या न करे हर हालत में इल्ज़ाम उसी पर लगाया जाये

खाए तो पछताए, न खाए तो पछताए

कोई कार्य जिसे कर के भी पछतावा हो और न कर के भी, किसी भी तरह मनुष्य को संतुष्टि न हो

खाएँ बकरी की तरह सूखें लकड़ी की तरह

बहुत ज़्यादा खाना और फिर भी कमज़ोर और दुबला रहना , कब : खाए बिक्री की तरह सूखे लक्कड़ी की तरह

खाएँ तो घी से नहीं तो जाएँ जी से

ज़िद्दी और हटीले आदमी के मुताल्लिक़ कहते हैं, हो तो अच्छा हो नहीं तो भूका मरना मंज़ूर

खाई भली का माई

खाना माँ से अधिक प्यारा होता है, माँ की मुहब्बत नहीं बल्कि उसके लाड-प्यार की मुहब्बत होती है

खाई मुग़ल की तहरी अब कहाँ जाएगी बाहरी

मुसलमान का खाना खा कर फिर 'औरत कहीं नहीं जाती

खाइए बड़ियाँ टाँगें रहें खड़ियाँ

मुक़व्वी ग़िज़ा खानी चाहिए

खाँड और राँड का जोबन रात को

स्त्री की सुन्दरता रात को अधिक भली लगती है क्यूँकि सुकून एवं निश्चिंतता का समय होता है

खाँड बिना सब राँड रसोई

बगै़र मीठी चीज़ के खाने का कोई मज़ा नहीं

खाँड खारी का एक भाव है

सख़्त बदइंतिज़ामी के मौक़ा पर कहते हैं, टिके सैर भाजी टिके सैर खाजा

खाँड खोंडेगा सो खाँड खाएगा

जो मेहनत करेगा सो मज़े उड़ाएगा

खाँड की रोटी जहाँ तोड़ो वहाँ मीठी

अच्छी वस्तु हर जगह से अच्छी होती है, अच्छी वस्तु का हर भाग अच्छा होता है

खाँडा बाजे रन पड़े और दाँता बाजे घर पड़े

तलवारें चलीं तो युद्ध होता है, झगड़ा हो तो घर ख़राब होता है

खाओ तो कद्दू से , ना खाओ तो कद्दू से

(ओ) यही है खाओ तो ना खाओ तो यानी खाओ या ना खाओ हमें कुछ पर्वा नहीं

ख़ाक डालने से चाँद नहीं छुपता

रुक : चांद पर ख़ाक नहीं पड़ती

ख़ाक डालने से चाँदनी नहीं छुपती

रुक : चांद पर ख़ाक नहीं पड़ती

ख़ाक धूल बकाइन के फूल

नीच, निकम्मा, किसी काम का नहीं, मुफ्त की डींगें हाँकना

ख़ाक को ख़ाक खींचती है

इंसान मर कर ज़मीन ही में दफ़्न होता है

ख़ाक न धूल बकाइन के फूल

फ़ालतू आदमी या ऐसा जो फ़ालतू बात करे

ख़ाक-अज़ तोदा-ए-कलाँ बर्दार

फ़ारसी कहावत उर्दू में प्रयुक्त, अपना काम बड़ी और आला दर्जे की जगह से निकालना चाहिए

ख़ाकी अंडों में बच्चे नहीं होते

कमीने से फ़ायदे की उम्मीद नहीं होती

ख़ाक शो पेश-आज़ाँ कि ख़ाक शवी

मरने से पहले अनुसानको आजिज़ी और उनकसिसारी इख़तियार करनी चालीए, ज़िंदगी ही में नफ़स को ज़ेर करना चाहिए

ख़ाल जो बढ़ा , मस्सा हुआ

अपनी हद से मुतजाविज़ चीज़ बरी मालूम होती है

ख़ाला जी का घर नहीं

किसी कठिन कार्य के लिए संकेतात्मक तौर पर कहा जाता है

ख़ाला का दम और किवाड़ों की जोड़ी

ख़ाला के दम पर गुज़र-बसर करते हैं और घर में किवाड़ की जोड़ी के सिवा कुछ नहीं

ख़ाला का पेट कुंडाला , सात चूहों का एक निवाला

हरीस, तामा और बड़ पेटू के लिए मुस्तामल

ख़ाला के आगे नन्हियाल की बड़ाई

(अविर) अपनी ज़बान से अपनी या अपनों की तारीफ़ करने के मौक़ा पर मुस्तामल

ख़ाला के आगे ननिहाल की बड़ाई

(अविर) अपनी ज़बान से अपनी या अपनों की तारीफ़ करने के मौक़ा पर मुस्तामल

ख़ाला ख़लख़ली दाल पकाए ढल ढली

(अविर) ज़ाहिरी और ऊपरी दिल से मेहमान नवाज़ी या आओ भगत करने के मौक़ा पर उमूमन औरतें बोलती हैं

ख़ाला ख़लख़ली दाल पकाए ढलढली

(अविर) ज़ाहिरी और ऊपरी दिल से मेहमान नवाज़ी या आओ भगत करने के मौक़ा पर उमूमन औरतें बोलती हैं

ख़ाला की मेहमानी हाथ डाल पछतानी

अन्य अंतरिक्ष में हस्तक्षेप करने पर पछताना ही पड़ता है, ख़ाला के घर बार बार जाएं तो फिर आव-भगत नहीं होती, बार बार कहीं नहीं जाना चाहिए

ख़ाला मेरी ख़लसिरी ख़ाला के आँगन मौलसिरी

इस मौके़ पर मुस्तामल जहां ये कहना हो कि वो हर एतबार से मेरे अपने हैं और उन की हर बात मुझे भली लगती है

ख़ाली बैठा बनिया बट्टे बाड़े

ख़ाली बनिया बाट तोलता रहता है यानी अपने आप को मसरूफ़ रखने के लिए बेकार काम करना

ख़ाली बैठे से बेगार भली

रुक : ख़ाली से बेगार भली

ख़ाली बैठे शैतान सूझता है

ख़ाली दिमाग़ शैतान का घर होता है, बेकारी में अशिष्ट विचार मन में जनम लेते हैं

ख़ाली बनिया क्या करे इस कोठी के धान उस कोठी में भरे

बेकार आदमी फ़िज़ूल और लाभहीन कामों में लगा रहता है, बेकाम आदमी उल्टे‍ सीधे काम करता रहता है

ख़ाली बोरी और शराबी को कौन खड़ा रख सकता है

बगै़र सहारे या क़ुव्वत के कोई ज़ोर नहीं चलता

ख़ाली घर दीवानी बीवी

तन्हाई से वहशत होती है या जो शख़्स ख़्वाहमख़्वाह अपने घर की आरास्तगी में मसरूफ़ रहे उस की निसबत भी बोलते हैं

ख़ाली घर में क़लंदर आ बैठे

ख़ाली मकान में कुछ बुरी आत्माएँ हो जाती हैं

ख़ाली हाथ क्या जाऊँ एक संदेसा लेता जाऊँ

काम करवाने के लिये सक्षम व्यक्ति से ज़ोर लगवाने के प्राक्कथन में बोलते हैं

ख़ाली हाथ मुंह तक नहीं जाता

बग़ैर लाभ के कोई काम नहीं किया जाता

ख़ाली हाथ रू सियाह

मुफ़लिस विनादार गुनाह का मुर्तक़िब होता है नीज़ बेतौक़ीर

ख़ाली हड्डी को कुत्ता भी नहीं चचोड़ता

जिस के पास माल न हो उस को कोई नहीं पूछता

ख़ाली ख़रबिती पूरी फ़ज़ीहती

पैसा पास न होने से पूरी ख़राबी होती है।

ख़ाली कुम्हार और भरा कहार

ये चलने में ख़ूब तेज़ होते हैं

ख़ाली पिछोड़ों उड़ अड़ जाए

फ़ुज़ूल काम करने से कुछ फ़ायदा नहीं

ख़ाली से बेगार भली

बेकार बैठने से किसी का काम मुफ़्त में करना बेहतर होता है

ख़ाम को काम सिखा लेता है

जिसको काम नहीं आता काम पड़ने पर सीख जाता है, अनुभव आदमी को परिपक्व बनाता है, तजरबा आदमी को पक्का बना देता है

ख़ामोशी नीम-रज़ा

रुक : अलख़ामोशी नियम रज़ा, किसी की बात सन कर ख़ामोश होजाना बड़ी हद तक उस की तसदीक़-ओ-तौसीक़ या तस्लीम करने के बराबर है

ख़ामोशी-'अलामत-ए-रज़ास्त

रुक : ख़ामोशी नियम रज़ा

खाना खा कर अंगड़ाई लें तो खाया पिया कुत्ते के पेट में चला जाएगा

औरतों का वहम है, खाने के बाद अंगड़ाई से रोकने के लिए कहती हैं ताकि बच्चे खा कर फ़ौरन ना सौ जाएं

खाना मारे मुँह लाल रखते हैं

अपनी पीड़ा और विनाश को छिपाते हैं

खाना न कपड़ा सेंत का भतरा

भर पेट खाने को न मिलने पर कहते हैं

खाना पराया है, पेट तो पराया नहीं

लोभवश कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिस से अपने आप को परेशानी हो

खाना पीना गाँठ का और नरी सलाम-ओ-'अलैक

किसी अमीर आदमी से परिचय हो और उससे कुछ प्राप्त हो तो कहते हैं

खाना पीना गाँठ का निरी सलाम 'अलैक

ऐसी जान-पहचान या दोस्ती से क्या फ़ायदा जब अपना ही ख़र्च करना हो

खाना शराकत, रहना फ़राग़त

खाना दोस्त के साथ मिलकर खाए मगर रहे अकेला

खाना शिराकत रहना फ़राग़त

यारों दोस्तों के साथ बैठ कर खाना अच्छा है, मगर रहना अकेला ही चाहिए

खाना वहाँ खाओ तो पानी यहाँ पियो

जल्दी लौटना, फ़ौरन चले आओ, बहुत जल्द पहुंचो, तुरत आ जाओ, ज़रा भी देर न करो, जिस हालत में हो उसी हालत में चल दो

खाने फ़िर'औनी और तरीक़ा मसनूनी

प्रकट और अंतर्मन में अंतर है, सामान्य प्रक्रिया के विपरीत कार्य होते हैं

खाने के दाँत और हैं दिखाने के और

दिखावटी चीज़ें काम नहीं देतीं

खाने के गाल, नहाने के बाल छुपे नहीं रहते

ऐश-ओ-आराम की हालत छिपी नहीं रहती

खाने को जच्चा कमाने को नन्हा बच्चा

उस व्यक्ति के मुताल्लिक़ कहते हैं जो खाने को हाज़िर हो और काम से जी चुराए

खाने को मव्वा , पहनने को अमव्वा

मुफ़लसी में ज़ाहिरी नमूद रखना, खाना नसीब नहीं है मगर उम्दा लिबास है

खाने को न मिले खली, नाम को बख़्त बली

नाम बड़ा दर्शन छोटे, नाम हालात के बिल्कुल उल्टा

खाने को न मिले, ख़ैर, पर नशे को मिले

मादक द्रव्यों का व्यसनी व्यक्ति भोजन की अधिक परवाह नहीं करता परंतु मादक द्रव्यों के बिना नहीं रह सकता

खाने को पहले नहाने को पीछे

लेने या खाने को उपस्थित और काम करने से दूर भागना

खाने को पीछे, नहाने को पहले

खाने के पहले नहाना चाहिए

खाने को सब से पहले मौजूद काम के नाम मूत

काम चोर, खाने को ती्यार काम से बेज़ार

खाने को शेर कमाने को बकरी

जो खाए बहुत परंतु काम कुछ न करे, खाने को मौजूद मगर कमाने से जी चुराता हो

खाने को ऊँट कमाने को मजनूँ

निकम्मा आदमी, काम काज में सुस्त खाने पीने में चुस्त, काम चोर जो नौकरी चाकरी न करे मुफ़्त में माल उड़ाए

खाने में चटनी, पलंग पर नटनी

चटनी खाने को स्वादिष्ट बना देती है और नटनी की अभिनय मोहक होती है

खाने में शर्म क्या और घूँसों में उधार क्या

मार का बदला उसी समय चुका लेना चाहिए

ख़ान-ए-ख़ानाँ खाने में बिताना

खाने में कुछ छुपा होना, बताना कहते हैं पगड़ी के बीच के हिस्से को, चौंका खाने में बिरयानी या चावल भी मख़रूती अंदाज़ से उठे रहते हैं बीच में अशर्फ़ियां वग़ैरा रख दी जाती थीं बैरम ख़ान ख़ान-ए-ख़ानां जब किसी को खाना भेजता तो इस में पोशीदा तौर पर अशर्फ़ियां रख देता था, जब किसी पर एहसान किया जाये और उसे ज़ाहिर ना होने दें तो इस मौक़ा पर बोलते हैं

ख़ान-ए-ख़ानाँ की कमाई मियाँ फ़हीम ने उड़ाई

उस अवसर पर बोलते हैं जब पराया माल अंधाधुंध ख़र्च किया जाए

खारी कुँवें पर डोल डाल देंगे, भरो और पियो

ग़रीब आदमी अपनी बेटी के ब्याह की निसबत कहा करता है कि देना लेना तो कुजा मुझको पानी पिलाने तक का मक़दूर नहीं है, निहायत ग़रीब हूँ

ख़ारिश्ती कुतिया मख़मल की झूल

बदशकल आदमी पर फबती, जो उम्दा लिबास पहने और इस पर जे़ब ना दे, वो शख़्स जो जामा जे़ब ना हो

खात पड़े तो खेत नहीं तो रेत का रेत

ख़र्च करे तो काम बनेगा नहीं तो बिगड़ेगा, जब तक खेत में खात् ना पड़े ज़मीन काबिल-ए-ज़िराअत नहीं होती

खाता भी जाए और बड़ाता भी जाए

खाता है और खाने में ख़राबी भी निकालता है

खाते हैं नानी के टुकड़े , कहलाते हैं दादी के पोते

खावे किसी का कहला वे किसी का, ख़र्च किसी का नाम किसी का

खाते-पीते जग मिले, अवसर मिले न कोए

ख़ुशहाल अर्थात धनवान के सब दोस्त होते हैं, ग़रीब से कोई नहीं मिलता

खावे चना, रहे बना

खाने पर कम ख़र्च करने से आदमी अमीर हो जाता है

खावे घोड़ा या खावे रोड़ा

घोड़े और मकान पर बहुत ख़र्च होता है

खावे जैसे बकरी, सूखे जैसे लकड़ी

रुक : खाए बिक्री की तरह सूखे लक्कड़ी की तरह

खावे मोट, तोड़े कोट

मोट या मोठ की दाल पौष्टिक मानी जाती है

खावे मूँग रहे ऊँघ

कमज़ोर भोजन खाने वाला, कमज़ोर ही रहता है; जैसा भोजन वैसी ही शक्ति और प्रभाव; मूँग खाने वाला सुस्त हो जाता है

खावे पान, टुकड़े को हैरान

तन पर लत्ता नहीं किंतु पान खाएंगे, निर्धनता में बड़ा स्वभाव, निर्धनता में रसिया और निर्धनता में अमीरों जैसा बनना

खावे तो आवे

कुछ आशा हो तो आज्ञा का पालन करे, लाभ की आशा हो तभी कोई किसी के पास आता है

ख़ाविंद चोन का भी बुरा होता है

मालिक अगर आटे का बना हुआ भी हो तो बुरा होता है मतलब ये है कि चाहे मालिक कितना सीधा और नेक हो मगर ख़िदमतगार को हमेशा बुरा लगता है

खाया बड़ी कि माया

अच्छा भोजन या रुपयों का संग्रह, जिसका प्रयोग धन की महानता और श्रेष्ठता दर्शाने के लिए किया जाता है

खाया मुँह नहाए बाल नहीं छुपते

ख़ुशहाली नहीं छुपती

खाया पिया अंग लगा

जो ख़र्च क्या उस से फ़ायदा हुआ

खाया सो अपना, रहा सो बेगाना

इंसान जो ख़र्च करे उस का अपना होता है, उसके मर जाने पर दूसरे उस का माल खाएँगे या ख़र्च करेंगे

खाया सो खोया

(ख़र्च किया व्यर्थ हुआ) दान-पुण्य करते तो अच्छा होता, काम आता

खग जाने खग ही की भाषा

चालाक ही चालाक की बात समझ सकता है

ख़ैर जो हुआ सो हुआ

अच्छा अब बीती बातों को जाने दो, हो गया सो हो गया, चिंता न करो

ख़ैर का बेड़ा पार है

भले का काम सफल होता है

ख़ैर की चोटी ख़ैरात का नाड़ा पढ़ ले मुल्ला 'अक़्द ऊधारा

उसके संबंधित कहते हैं जिसके पास कुछ न हो और बड़ी-बड़ी योजनाएँ बनाए

ख़ैराँ ही ख़ैराँ देंगे , कोई ऐसे ही दाता देंगे

ख़ुमराओं के मांगने की सदा यानी ख़ुदा सलामत रखे, देंगे क्यों के ऐसे ही सखी दिया करते हैं

ख़ैरात घर से शुरू' होती है

पहले अपने पीछे पराये, परोपकार अपने घर से ही प्रारंभ होता है

ख़ैरात के टुकड़े और बाज़ार में डकार

माँग कर गुज़ारा करने वाले शेख़ी बघारने वाले या डींग मारने वाले के संबंधित कहते हैं

ख़लील ख़ाँ फ़ाख़्ता उड़ा चुके

थोड़ा सा काम करके बहुत इतराने वाले के लिए व्यंग्य से कहते हैं

ख़लील ख़ाँ ने फ़ाख़्ता मारी

۔मिसल अदना काम पर बहुत इतराने वाले की निसबत बोलते हैं

ख़ल्क़ का हल्क़ किस ने बंद किया है

कोई किसी की ज़बान को नहीं रोक सकता

ख़ल्क़ ख़ुदा की हुक्म बादशाह का

शाही उद्घोषणा या आदेश का वर्णन करने में एक परिचयात्मक वाक्यांश

ख़ल्क़ की ज़बान ख़ुदा का नक़ारा

जो बात प्रसिद्ध हो जाए वह अधिकतर उचित होती है

ख़ंदा-सोगंदा

जो हरवक़त हंसे वो नेक चलन नहीं

ख़ंजर तले तक दम लिया तो फिर क्या

मुसीबतों में थोड़ा सा आराम मिला तो कौन सी बड़ी बात है

ख़र ख़ुश न ख़ाविंद ख़ुश

۔मिसल। ऐसा नालायक़ नकमसा है कोई ख़ुश नहीं

खरा खेल फ़र्रुख़ आबादी

रुक : खड़ा खेल फ़र्ख़ आबादी

ख़राब ख़स्ता अनाज सस्ता

परेशानी और तबाही के लिए प्रयुक्त

ख़राब ख़स्ता नम्क सस्ता

रुक : ख़राब ख़स अनाज सस्

ख़रादी का काठ काटे ही कटे

हर काम करने से होता है

ख़रबूज़ चाहे धूप को और आम चाहे मेंह, नारी चाहे ज़ोर को, और बालक चाहे नेह

ख़र बूज़ा धूओप से मज़े पर आता है और आम मीना से औरत ज़ोर आवर से ख़ुश होती है बच्चा प्यार से यानी हर शैय अपने मर्ग़ूब शैय को चाहती है

ख़रबूज़ का नुक़सान है

कमज़ोर की हर सूरत में ख़राबी होती है, ग़रीब ही को देना पड़ता है

ख़रबूज़ ख़रबूज़े को देख रंग बदलता है

आदमी जिस सोहबत में बैठे वैसा हो जाता है

ख़रबूज़ा हर तरह ज़रर है

कमज़ोर की हर सूरत में ख़राबी होती है, ग़रीब ही को देना पड़ता है

ख़रबूज़ा का नुक़सान है

कमज़ोर की हर सूरत में ख़राबी होती है, ग़रीब ही को देना पड़ता है

ख़रबूज़ा ख़रबूज़े को देख रंग बदलता है

आदमी जिस सोहबत में बैठे वैसा हो जाता है

ख़रबूज़ा ख़रबूज़े को देख रंग पकड़ता है

आदमी जिस सोहबत में बैठे वैसा हो जाता है

ख़र्च घना और पैदा थोड़ी, किस पर बाँधूँ घोड़ा घोड़ी

आय कम और ख़र्च अधिक है क्या करूँ, बिना आमदनी के कोई शौक़ भला कैसे किया जा सकता है

ख़र्च से समंदर ख़ाली हो जाता है

दौलत कितनी ही हो ख़र्च करने से ख़त्म हो जाती है

खरे से खोटा ऐसे को सरासर टूटा

बद नी्यत के काम में कभी बरकत नहीं होती, जो शख़्स नेक से बदी करे वो नुक़्सान उठाता है

खरे से खोटा उसे हमेशा 'अर्श का टूटा

बद नी्यत के काम में कभी बरकत नहीं होती, जो शख़्स नेक से बदी करे वो नुक़्सान उठाता है

ख़र-ए-'ईसा अगर ब-मक्का रवद चूँ बयायद हुनूज़ ख़रश बाशद

एक अक्षम कमीने का सुधार नहीं किया जा सकता है भले ही वह सबसे अच्छी संगति में रहे

ख़र-ए-'ईसा ब-आस्माँ न-रवद

कमीना आदमी अच्छे आदमीयों की संगति से भी इस योग्य नहीं हो पाता कि किसी ऊंचे पद पर पहुंच जाये, अगर किसी अच्छे आदमी से कुछ संबंध हो मगर उसमें व्यक्तिगत गुण न होंं तो वो इस संबंध की बिना पर अच्छे पद पर नहीं पहुँच सकता

ख़रगोश के सींग की तरह ग़ायब हो जाना

ख़रगोश के सींग नहीं होते यानी ये ना मुम्किनात में से है संसार जब अपने बाहरी रूप के साथ ख़रगोश के सींग की तरह ग़ायब हो जाता है और सिर्फ़ सत ही सतरह जाता है तब वही सत सामान्य है

खरी कहे सो बुरा

सच्ची बात कहने वाला बुरा होता है

खरी कहया दाढ़ी जाड़

जो सच कहे वही बुरा

खरी मज़दूरी चोखा काम

अच्छी मज़दूरी होगी तो ही अच्छे दाम मिलेंगे, अच्छे काम की अच्छी मज़दूर मिल सकती है

खरिया में कोइला

नामौज़ूं बात, बदवजे़ चीज़, अच्छों में बुरा, हसीनों के मजमे में बदसूरत

खर्सा प्यारा बीजना सबाले प्यारी आग, बरखा प्यारी तीन चीज़ कम्बल, छावा, राग

गर्मी में पंखा अच्छा लगता है सर्दी में आग, बारिश में कम्बल, साया और राग

ख़स अगर बर आसमाँ रवद हमा ख़स अस्त व गौहर अगर दर ख़लाब उफ़्तद हमाँ नफ़ीस

तिनका अगर आसमान पर चला जाए तो भी तिनका है और मोती अगर कीचड़ में गिर पड़े तो भी नफ़ीस है, बुरी चीज़ बुरी है अच्छी चीज़ अच्छी, कमीना आदमी कितना ही बढ़ जाए कमीना ही है और शरीफ़ आदमी कितना ही तबाह हो जाए तब भी उसकी शराफ़त में फ़र्क़ न आएगा

ख़स कम जहाँ पाक

यह कहावत वहाँ बोलते हैं जहाँ किसी वस्तु या आदमी का होना या न होना दोनों बराबर हों

ख़सम छूटे पर रस्म न छूटे

जहाँ रीति-रिवाजों का सख़्ती से पालन किया जाता हो वहाँ बोलते हैं

ख़सम देवर दोनों एक सास के पूत, ये हो या वो हो

कुछ जाति की उस रस्म की ओर इशारा जहाँ एक भाई शादी करता है और दूसरे भाई उस 'औरत से संभोग करते रहते हैं

ख़सम दिल का ज़ख़्म

जो शौहर ख़्वाहमख़्वाह बीवी को तकीफ़ दे

ख़सम जोरू की लड़ाई किसी को न भाई

पति-पत्नी को मिलजुल कर रहना चाहिए, पति-पत्नी की लड़ाई सबको नापसंद है

ख़सम का आसरा कर , आसंगा मत कर

आसरार बमानी उम््ीद, आसनगा बमानी घमंड मतलब ये है कि ग़रूर करना बुरा है

ख़सम का खाए भय्या का गीत गाए

नफ़ा किसी से हो और मुहब्बत किसी से रखें

ख़सम का सुख सोने को बाबा टी लग कर रोने को

रुक : ख़सम क्या सुख सपने को अलख

ख़सम क्या सुख सहने को या पटी से लग कर रोने को

हरकाम फ़ायदा की उम््ीद पर किया जाता है अगर फ़ायदा ना हो अबस है

ख़सम क्या सुख सहने को या पेट से लग कर रोने को

हरकाम फ़ायदा की उम््ीद पर किया जाता है अगर फ़ायदा ना हो अबस है

ख़सम मार कर सती हुई

औरतों के मकर वफ़रीब के मुताल्लिक़ केते हैं, दुआ करने के पछताई

ख़सम न पूछे बात मेरा धन्ना सुहागन नाम

कोई मुँह लगाना नहीं पर आप ही इतराता है

ख़सम राज , आप राज

शौहर की ज़िंदगी में बीवी का राज होता है

ख़सम से छूटे तो यारों के जाए

व्यभिचारिणी स्त्री के संबंध में कहते हैं जो अन्य पुरुषों से सम्बन्ध रखती है

खट खट सुनार की एक चोट लोहार की

कमज़ोर की बहुत सी तद्बीरों पर ज़ोरावर की एक तदबीर ग़ालिब आ जाती है , कब : सौ सुनार की एक लोहार की

ख़ता दो ख़ता तीसरी ख़ता मादर ब-ख़ता

एक ग़लती माफ़ नहीं होती, बार बार की ग़लती कमीनापन और शरारत की दलील है

खटिया खुला बिटिया पारस

जब एक महिला गर्भवती होती है तो उसका बहुत महत्व होता है

खत्री पुत्रम , कभी न मित्रम , जब देखो जब दगम दगा

खत्रियों की बेवफ़ाई मशहूर है किसी का दोस्त नहीं होता, मौक़ा मिलते ही दग़ा देता है

खत्री से गोरा पिंड रोगी

जो व्यक्ति खतरी से ज़्यादा गोरा हो उसे सफ़ेद दाग़ का मरीज़ समझना चाहिए

खट्टा अंगूर कौन खाए

मशहूर कहानी है कि एक लोमड़ी दरख़्त में अंगूर का ख़ोशा देख कर बहुत ललचाई और इस तक पहुंचने की कोशिश भी की लेकिन ना पहुंच सकी आख़िर-ए-कार बोली जाने भी दो, खट्टा अंगूर कौन खाए, ये इस मौक़ा पर बोलते हैं जब कोई किसी काम में कोशिश करे और नाकामयाब होने पर इस में ऐब लगा के छोड़ दे अब ऐसे मौक़ा पर अंगूर खट्टे हैं बोलते हैं

खेदी गलवांत पेड़ ही नीचे आती है

थक थका कर इंसान आख़िर घर को ही आता है

खेल बताशों का मेल है

अच्छी जोड़ी मिली है, बहुत उचित है, दो एक जैसी अच्छी वस्तुओं का मेल

खेल का खेल नफ़ा' में बच्चा

मज़ा मज़े में बच्चा नफ़ा में, तफ़रीह भी और फ़ायदा भी , जब किसी काम में हर सूरत से नफ़ा या दुहरा फ़ायदा हो तो बोलते हैं

खेल खिलाड़ी का भगत भय्या जी की

तमाशा तो खिलाड़ी दिखाते हैं एवं नाम संचालक का होता है

खेल खिलाड़ी का पैसा मदारी का

खेलने वाला खेल दिखाता है एवं पैसा मदारी को मिलता है

खेल लड़कों का मौत चिड़ियों की

एक शख़्स के लिए तमाशा होता है दूसरे के लिए मुसीबत होती है, किसी की जान पर बनती है कोई लुतफ़ उठाता है

खेल में रो दे सो कव्वा

खेल में रोने वाला बुरा होता है

खेल न जाने मुर्ग़ी का उड़ाने लगा बाज़

योग्यता और प्रतिभा से अधिक काम करना, हद से बढ़ कर काम करना

खेले पूत बला ले मय्या

औलाद की मुहब्बत की निसबत बोलते हैं, फ़ायदा कोई उठाए, नुक़्सान किसी का हो

खेलेंगे न खेलने देंगे

ज़िद में न तो ख़ुद करना न दूसरों को करने देना, किसी काम में ज़िद करना, न ख़ुद करना न दूसरे को करने देना

खेप हारी जनम नहीं हारा

हानि हुई परंतु दिल नहीं हारा

खेत बारानी , जैसे नियम राजानी

बारानी खेत इस तरह नाक़ाबिल-ए-एतबार है जैसे राजा की मेहरबानी दोनों का एतबार नहीं

खेत गए किसान

आदमी के व्यवसाय का पता उस के काम से चलता है

खेत कटाया, अन दाता पाया

सारी बरकत अनाज की है

खेत खाए गधा, मारा जाए जुलाहा

किसी की आफ़त किसी पर आना, क़सूर कोई करे सज़ा किसी को मिले

खेत खाया है, काटो तो लहू नहीं

बेबरकती की जगह पर बोलते हैं

खेत खिलाड़ी का , भग्त भया जी का

दूसरे के नक़क़सान से तजुर्बा हासिल करना

खेत नबाशद कि गील सुख गई

जो कुछ तुम समझे थे ये वो बात नहीं है

खेत पड़े किस्नाई

बिन आए की सारी बात है

खेती कर के हम मरे, बहोरे के कोठे भरे

क़र्ज़दार किसान का कहना कि हम तो खेती करके मरते हैं और साहूकार का घर भरता है

खेती ख़सम सेती

खेती में ख़ुद मालिक को काम करना चाहिए, दूसरों पर छोड़ देने से कोई फ़ायदा नहीं होता, काम मालिक की तवज्जोह और उस की दिलचस्पी ही से अच्छी तरह होता है

खेती राज रजाए, खेती भीक मँगाए

जब पैदावार बहुत हो तो किसान मज़े उड़ाता है, जब फ़सल ना हो तो भीक मांगता है

खेती रखे बाड़ को, बाड़ रखे खेती को

एक दूसरे की हिफ़ाज़त करते हैं

खिचड़ी खाते पहुँचा उतरा

झूठी नख़रे दिखाना, थोड़े नाज़ से ज़्यादा सदमा पहुँचना

खिचड़ी पके खद बद खों

ऐसी इज़तिरारी हरकत जिस के नतीजे में पशेमानी उठानी पड़े

खिचड़ी-खाचड़ी हो गया

बना काम बिगड़ गया

खिचड़ियाँ पक रही हैं

अधिक शोर शराबा है, बड़ा शोर-ओ-गुल बरपा है

ख़िदमत से 'अज़मत है

कठोर परिश्रम से सफलता मिलती है, मालिक को ख़ुश रखने से सम्मान मिलता है और लाभ भी होता है, सेवा से ही बड़ापन सिद्ध होता है

खींचा तानी वो भरे जो पराए बीच में पड़े

जो दूसरों की बातों में दख़ल दे उसे मारा मारा फिरना पड़ता है, दूसरों की बातों में दख़ल देने वाले को परेशानी उठानी पड़ती है, जो दूसरों के मुआमलात में दख़ल देता है उसे खींचातानी में मुबतला होना पड़ता है यानी कभी एक फ़रीक़ उसे निशाना-ए-तन्क़ीद बनाता है कभी दूसरा

खींचो न कमान बनो न पठान

जब तक कोई बड़ा काम ना करे इज़्ज़त नहीं मिलती, तकलीफ़ उठाए बगै़र बड़ा नही बना जाता, मुसीबत या दुख झेले बगै़र राहत नहीं मिलती

खींचूँगा वो बाल कि जिसकी ख़बर दूर तक होगी

इन पोशीदा और छिपे हुए ऐबों का इज़हार करूंगा जिस से तमाम आलम में ज़िल्लत-ओ-रुसवाई हो कर तुम्हारे बुज़ुर्गों की इज़्ज़त-ओ-आबरू ख़ाक में मिल जाएगी, ऐसे ऐब निकालूंगा कि सख़्त रुसवाई होगी

खींचूँगा वो बाल कि जिसकी ख़बर दूर तक जाएगी

इन पोशीदा और छिपे हुए ऐबों का इज़हार करूंगा जिस से तमाम आलम में ज़िल्लत-ओ-रुसवाई हो कर तुम्हारे बुज़ुर्गों की इज़्ज़त-ओ-आबरू ख़ाक में मिल जाएगी, ऐसे ऐब निकालूंगा कि सख़्त रुसवाई होगी

खील बताशों का मुँह

शेखचिल्ली (एक अफ़सानवी किरदार) एक मर्तबा कुछ माल चुरा कर लाया, उस की माँ को अंदेशा था कि ये चोरी का हाल छिपा नहीं सकेगा लिहाज़ा इस ने माल छिपा दिया और खीलें बताशे इस तरह गिराए कि शेखचिल्ली समझे कि ये आसमान से गिरे हैं, तहक़ीक़ात होने पर शेखचिल्ली ने चोरी का इक़बाल करलिया और बताया कि जिस दिन खेल बताशों का मीना बरसा था उस दिन मैंने चोरी की थी, ये मिसल इस मौक़ा पर मुस्तामल है जब कोई ग़ैर मुईन ज़माना बताए या ऊओट पटांग बात करे

खिलाड़ी को देख कर खिलाड़ी नहीं रह सकता

प्रेरणा और प्रलोभन का प्रभाव अवश्य होता है

खिलाए का नाम नहीं, रुलाए का नाम है

अच्छे व्यवहार और अच्छी सेवा की कोई शाबाश नहीं देता परंतु बुरी बात की तुरंत पकड़ हो जाती है

खिलाए सोने का निवाला , देखे शेर की निगाह से

वालदैन को चाहिए कि बच्चों को अच्छे से अच्छा खिलाईं मगर अदब-ओ-तहज़ीब सिखाने में कोई रियायत ना बरतें

खिलाओ सोने का निवाला , देखो शेर की निगाह से

रुक : खिलाए सोने का निवाला देखे शेर की निगाह से

खिलावे भात मारे लात

यदि कोई भलाई करके ताने दे तो उस के बारे में कहते हैं

खिलावे घी शक्कर , मारे एक ही टक्कर

कोई किसी पर एहसान कर के ताना देता है तो इस की निसबत कहते हैं

खिलावे शक्कर, मारे एक टक्कर

रुक : खिलावे भात मारे लात

ख़िल्क़त भेड़िया धसान है

लोग आँख बंद कर के या बे सोचे समझे दूसरों के पीछे हो लेते हैं जैसे बेड़ों का तरीक़ा है जिधर एक चली उसी तरफ़ सब भेड़ें चलने लगती हैं , लोग दूसरों की देखा देखी काम करते हैं

खिस्यानी बिल्ली खम्बा नोचे

जिसे क्रोध आ रहा हो वह अपनी खीझ या क्रोध दूसरों पर उतारता है, लाचारी में आदमी दूसरों पर क्रोध करता है, लज्जित व्यक्ति दूसरों पर अपनी लज्जा उतारता है, निर्बल की खीझ

ख़िज़्र ने नाव डुबोई

रुक : नीज़ नाव किस ने डुयवटी ख़्वाजा ने ख़िज़र ने यानी जिन से फ़ायदा की उम््ीद थी उन्हों ने नुकसान पहुंचाया, खिलाफ-ए-तवक़्क़ो नुक़्सान पहुंचने पर बोलते हैं

खोदा पहाड़ निकली चूहिया

बहुत मेहनत की, पर परिणाम बहुत कम मिला, मेहनत बहुत की और हासिल बहुत कम हुआ

खोदे कुवा आपी डुब मुवा

अपनी हलाकत या तबाही के ख़ुद अस्बाब पैदा करना, ऐसे शख़्स के लिए बोलते हैं जो दूसरों की तकलीफ़ का सामान करता है मगर ख़ुद ही इस का शिकार हो जाता है

खोल घड़ा, कर धड़ा

ऐसे व्यक्ति के लिए कहते हैं जो किसी वस्तु को लेने के लिए बहुत जल्दी मचाए परंतु देने के लिए जिसके पास पूरे दाम न हों

खोल कीसा खा हरीसा

रुपया ख़र्च करने से ही लुतफ़ हासिल होता है, गिरह का ज़र ख़र्श कर और दुनिया का मज़ा उठा

खोले खीसा खावे हरीसा

रुक : खोल कीसा खा हरीसा

खोटा पैसा खोटा बेटा वक़्त पर काम आता है

रुक : खोटा पैसा बुरे वक़्त के काम आता है

खोटा पैसा खोटा बेटा बुरे वक़्त पर काम आता है

किसी वस्तु को निकम्मी समझकर मत फेंको किसी समय वह भी काम आ सकती है

खोटा सोना कस्ता नहीं

झूठे की क़द्र याए इज़्ज़त नहीं होती, झूठे का सम्मान नहीं होता

ख़ुद फ़ज़ीहत और को नसीहत

रुक : ख़ुद रा फ़ज़ीहत अलख

ख़ुद कर्दा रा चे 'इलाज, ख़ुद कर्दा रा 'इलाजे नीस्त

अपने किए का क्या इलाज और क्या दवा-दारू, अपने किए का कोई 'इलाज नहीं इस लिए संतोष करना चाहिए

ख़ुद कर्दा रा 'इलाज नीस्त

अपने किए का क्या इलाज और क्या दवा-दारू

ख़ुदा अमीर के पास क़ब्र भी न बनवाए

अमीर का पड़ोस ज़हमत का बाइस होता है

ख़ुदा भरे को भरता है

जिसके पास हो ईश्वर उसे और देता है

ख़ुदा भी भरे को भरता है

जिसके पास हो ईश्वर उसे और देता है

ख़ुदा भूका उठाता है भूका सुलाता नहीं

ईश्वर हर एक को खाने को देता है, ईश्वर दाता है

ख़ुदा छप्पर फाड़ कर हुन बरसावे

ग़ैर मुतवक़्क़े तौर पर दौलत का मिल जाना

ख़ुदा चिड़िया का घोंसला भी न उजाड़े

मतलब यह है कि मनुष्य तो एक ओर, ईश्वर किसी पक्षी को भी बेघर न करे

ख़ुदा दे खाने को तो बला जाए कमाने को

आलसी अस्तित्व और निखट्टू अपने समर्थन की पुकार करते हैं

ख़ुदा देख के जामा क़ता' करता है

पति-पत्नि दोनों ही एक ही स्वभाव के हों तो कहते हैं (तथा किसी अवसर या परिस्थिती के लिए भी कहते हैं)

ख़ुदा देता है तो छप्पर फाड़ के देता है

ईश्वर देने पर आए तो बिना वास्ते के जीविका प्रदान करता है

ख़ुदा देता है तो नहीं पूछ्ता तू कौन है

ईश्वर अच्छे या बुरे की जाँच कर के नहीं देता, ईश्वर की कृपा सामान्य है, ईश्वर को जिसे देना होता है उसे देता है, फिर वह कोई भी हो

ख़ुदा दो सींग दे तो वो भी भले

ईश्वर की प्रसन्नता में प्रसन्न हैं, ईश्वर का दिया सर आँखों पर

ख़ुदा दो सींग दे तो वो भी सहे जाते

ईश्वर का दिया कष्ट भी स्वीकार है

ख़ुदा गंजे को नाख़ुन न दे

भगवान एक कम उत्साही और नीच आदमी को कोई अधिकार या सत्ता न दे

ख़ुदा गंजे को पंजे न दे

भगवान कमज़ोर स्वभाव और नीच व्यक्ति को शासक न बनाए

ख़ुदा हाज़िर-ओ-नाज़िर है

ईश्वर हर जगह मौजूद है, ईश्वर सर्वव्यापी और सर्वज्ञ है

ख़ुदा है तो क्या ग़म है

ख़ुदा भरोसा हो तो मुश्किल आसान हो जाती है

ख़ुदा जाने ऊँट किस करवट बैठे

नहीं जानता अंत क्या हो, भगवान जाने अंतिम परिणाम क्या निकले

ख़ुदा जब किसी को नवाज़ता है तो छप्पर फाड़ कर नवाज़ता है

अल्लाह जिस तरह चाहे और जब चाहे अपने बंदों पर लुतफ़-ओ-करम की बारिश कर देता है

ख़ुदा जब किसी को नवाज़ता है तो इस से सलाह मशवरा नहीं करता

अल्लाह जिस तरह चाहे और जब चाहे अपने बंदों पर लुतफ़-ओ-करम की बारिश कर देता है

ख़ुदा जिस को बचाए उस पर आफ़त क्यों कर आए

अल्लाह की हिफ़ाज़त में कोई आफ़त नहीं आ सकती

ख़ुदा जिस को रक्खे उसे काैन चक्खे

अल्लाह की मदद शामिल हो तो कोई नुक़्सान नहीं पहुंच सकता

ख़ुदा का दिया काँधे पर पंचों का दिया सर पर

चार लोगों की बात स्वीकार करनी ही पड़ती है

ख़ुदा का दिया नूर, कभी न होए दूर

(प्राकृतिक सुंदरता को सौंदर्यीकरण की आवश्यकता नहीं) ईश्वर जो देता है वह हमेशा क़ायम रहता है

ख़ुदा का दिया सब कुछ है

हर तरह की आराम है

ख़ुदा का मारा हराम, अपना मारा हलाल

गैर-मुस्लिम मुसलमानों पर आपत्ति करते हैं कि ए लोग अपने वध किए हुए को हलाल और मरे हुए को हराम मानते हैं

ख़ुदा काम आता है

ईश्वर ही मदद करता है

ख़ुदा के देने से पेट भरता है

बंदा नहीं अल्लाह ही बंदे की हक़ीक़ी मदद कर सकता है, रिज़्क देने वाला हकेतन अल्लाह ही है

ख़ुदा के घर में कमी नहीं है

अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है

ख़ुदा के घर में कौनसी शय नहीं

अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है

ख़ुदा के घर में क्या इंसाफ़ नहीं

भगवान न्याय करता है वह अत्याचार की सज़ा ज़रूर देता है

ख़ुदा के घर में सब कुछ

ईश्वर के लिए हर बात संभव है

ख़ुदा के हाँ से जवाब हो चुका अपनी ख़ूशी जीते हैं

(ज़िंदगी के दिन पूरे हो गए हैं) नाउम््ीदी की हालत में ज़िंदगी बसर करना

ख़ुदा के कारख़ाने में क्या दख़्ल

ख़ुदा के मामले में बंदे के दखल की कोई जगह नहीं, अल्लाह के हुक्म में बंदा का बस नहीं

ख़ुदा ख़ुद मीर-ए-सामान अस्त अस्बाब-ए-तवक्कुल रा

भरोसा करने वाले की ईश्वर स्वयं सहायता करता है

ख़ुदा की बातें ख़ुदा ही जाने

अल्लाह की बातें अल्लाह ही जाने, क़ज़ा-ओ-क़दर

ख़ुदा की चोरी नहीं तो बंदे की क्या चोरी

किसी बुरे काम को करते समय कोई दूसरों की नज़रों में आए तो बोला जाता है

ख़ुदा की चोरी नहीं, तो बंदे की क्या चोरी

(कोई बुरा काम करने पर ढिटाई से कहते हैं) जब अल्लाह का डर नहीं तो बंदों का क्या डर

ख़ुदा किसी को किसी का मुहताज न करे

भगवान किसी को दरिद्र न करे, किसी से काम न पड़े

ख़ुदा किसी को लाठी से नहीं मारता

देखने में तो लोग अत्याचार करके बच जाते हैं मगर परिणाम के समय अवश्य पकड़ जाते हैं

ख़ुदा को देखा नहीं 'अक़्ल से पहचाना है

बिना देखे ईश्वर पर विश्वास है, यह कहावत उस समय कहते हैं जब किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती है

ख़ुदा को देखा नहीं तो 'अक़्ल से पहचाना

उस समय कहते हैं जब किसी बात के प्रमाण की आवश्कता न हो

ख़ुदा को क्या मुँह दिखाओगे

अल्लाह पाक को क्या जवाब दोगे

ख़ुदा को मुँह दिखाना है

(नारवा बात पर दूसरे को इबरत दिलाने या अपनी बरायत दिखाने के लिए इस्तिमाल किया जाता है), अल्लाह के सामने जाना है, मरना है, अल्लाह से डरो

ख़ुदा लाठी ले कर नहीं मारता

रुक : ख़ुदा की लाठी बे आवाज़ है

ख़ुदा मेहरबान तो कुल मेहरबान

ईश्वर की कृपा हो तो सबकी कृपा मिलने लगती है

ख़ुदा मुँह न दिखाए

बुरे आदमी की निस्बत कहते हैं जिस से मिलना नागवार हो

ख़ुदा नख़्वास्ता शैतान के होश बाख़्ता

अल्लाह ना करे, शैतान ना बहकाये

ख़ुदा नकटे का खिलवाए , उकटे का न खिलवाए

ख़ुदा कमज़र्फ़ का एहसानमंद ना बनाए

ख़ुदा पंच अंगुश्त यक्साँ न कर्द

फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल, दुनिया में सब एक तरह के नहीं होते, एक दूसरे से नहीं मिलता

ख़ुदा रज़्ज़ाक़ है बंदा क़ज़ाक़ है

भगवान देता है, इंसान एक-दूसरे से छीन लेता है

ख़ुदा रिजाले को नाख़ुन न दे जो अपना सर खुजाए

कमीने आदमी को इतनी ताक़त और हुकूमत ने मिले कि जिस के ग़लत इस्तिमाल से वो अपना नुक़्सान कर ले

ख़ुदा सब के लिए और बंदा अपने लिए

आदमी स्वार्थी होता है, ख़ुदा सबका पालने और रक्षा करने वाला होता है

ख़ुदा सब की मेहनत सुवारत करता है अकारत नहीं करता

ईश्वर हर एक को उसके परिश्रम का फल देता है, ईश्वर सब का परिश्रम सफल करता है

ख़ुदा सर पर दो सींग दे तो वो भी सहे जाते हैं

जो कष्ट आए वो झेलना ही पड़ता है, ईश्वर की प्रसन्नता में प्रसन्न रहना अच्छी बात है

ख़ुदा शकर ख़ोरे को शकर देता है

अल्लाह पाक हर शख़्स को इस के हौसले के मुवाफ़िक़ देता है

ख़ुदा शकर-ख़ोरे को शकर ही देता है

ईश्वर हर व्यक्ति को उसकी इच्छा और ख़र्च के अनुसार देता है, जिसे जिस वस्तु की कामना हो उसको मिल जाती है

ख़ुदा सींग दे तो वो भी सही

(अविर) राज़ी बर्ज़ा हैं - ख़ुदा का दिया सर आँखों पर

ख़ुदा वास्ते बिल्ली भी चूहे नहीं मारती

कोई बिना कारण अत्याचार करे तो कहा जाता है

ख़ुदा ज़ालिम से पाला न डाले

ईश्वर अत्याचारी से बचाए

ख़ुदाई एक तरफ़ जोरू का भाई एक तरफ़

सारी ख़ुदाई एक ओर जोरू का भाई एक ओर, सारी खुदाई, दूसरी ओर जुरू का भाई, पत्नी के भाई का ध्यान. उसके लिए बोलते हैं जो जुरू का ग़ुलाम और आज्ञाकारी हो, अधिकतर एक ओर सारी खुदाई इत्यादि

ख़ुदाई हो

ईश्वर ही करे

ख़ुदाई ख़्वार गधे सवार

तबाह, बर्बाद और परेशान

ख़ुदाई क्या हुई मोम की नाक

अल्लाह ताला से मामूली मामूली काम की तकमील की उम््ीद करता जो बंदे को ख़ुद करना चाहिए

ख़ुदाई से निराला कारख़ाना

संसार भर से अद्भुत कार्य, ज़माने भर से अनोखा काम, दुनिया भर से अजीब काम

ख़ुदी और ख़ुदाई में बैर है

अहंमन्यता और ईश्वर में बैर है, ईश्वर अहंकार को पसंद नहीं करता

खुंडा हथियार और का बठियार किसी काम नहीं आता

कुंद हथियार और दूसरे का ख़ावंद वक़्त पर काम नहीं आते

खुंडा हथियार और का बठियार किसी काम नहीं आते

कुंद हथियार और दूसरे का ख़ावंद वक़्त पर काम नहीं आते

खुर खाँसी बनिए के जाए, उस के घर गए गुड़ खाए

रुक : खुर खांसी तेरी दालई के अलख

खुरचन मथुरा की और सब नक़्ल

मथुरा की मिठाई बहुत मशहूर है विशेष रूप से पेड़े, क़लाक़न्द वग़ैरा

ख़ुर्दा न बुर्दा मुफ़्त का दर्द-ए-गुर्दा

हासिल ना वसूल बला वजह की परेशानी

खुर्ली में एक कुत्ता

ये मिसल उस शख़्स के लिए बोलते हैं जो ऐसी चीज़ें दूसरों को इस्तिमाल नहीं करने देता जो इस के लिए किसी सूरत से कारआमद नहीं है

ख़ुश वो पठानी निकल गया पानी

जब किसी के काम से ख़ुश हूँ तो कहते हैं

ख़ुशामद से आमद है

ख़ुशामद से अक्सर फ़ायदा हो रहता है

ख़ुशामद से बर-आमद है

चापलूसी से लाभ होता है, चापलूसी से काम निकलता है, ख़ुशामद से ही पैसा मिलता है

ख़ुशामद से ख़दा राज़ी है

कहने-सुनने और मिन्नत-समझौते का असर होता है

ख़ुश्का खाओ पनीर के साथ

चूँकि अनुचित बात का ये जवाब होता है इसलिए पनीर और ख़ुशका (सादा उबला हुआ चावल) अर्थात बे-मेल चीज़ों का नाम लिया जाता है, ख़ुद कमाओ ख़ुद मज़े से खाओ, चलो हटो, सरको, अपना रास्ता लो, बिदा हो, चंपत हो,

खुटके पर सोना है

जन्मजात धनी है

ख़ूब गुज़रेगी जो मिल बैठेंगे दीवाने दो

दो हमख़याल और हममशरब आदमी मिल जाएं तो वक़्त बहुत अच्छा गुज़रता है

ख़ून सर पर चढ़ कर बोलता है

क़त्ल छिपा नहीं रहता

ख़ून वो जो सर पर चढ़ कर बोले

हत्या छिपी नहीं रहती, बुरी बात प्रकट हो ही जाती है

ख़ुज़ मा सफ़ा

(इख़तियार करे जो कुछ ठीक है) माक़ूल बात इख़तियार करने के मौक़ा पर मुस्तामल

ख़ुज़ मा सफ़ा

(इख़तियार करे जो कुछ ठीक है) माक़ूल बात इख़तियार करने के मौक़ा पर मुस्तामल

ख़ुज़ मा सफ़ा दि' मा कदिर

इख़तियार करो कुजू कुछ कि पाक (सच्च है) और छोड़ दो वो जो नापाक या गदला है (माक़ूल बात इख़तियार करने और बुरी बात तर्क करने के मौक़ा पर मुस्तामल

ख़ुज़ मा सफ़ा दि' मा कदिर

इख़तियार करो कुजू कुछ कि पाक (सच्च है) और छोड़ दो वो जो नापाक या गदला है (माक़ूल बात इख़तियार करने और बुरी बात तर्क करने के मौक़ा पर मुस्तामल

ख़्वाजा हिंद का राजा दुख दलिदर भाजा

ख़्वाजा मुईन उद्दीन अजमेरी के मुताल्लिक़ कहते हैं

कि कर्द कि नयाफ़्त

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जिस ने किया इस ने पाया, हर शख़्स को अपने आमाल का नतीजा मिलता है

कि ख़रबस्ता ब, गरचे दुज़्द आशनास्त

गधे का बाँधना बेहतर है, अगरचे चोर दोस्त है, अगरचे इतमीनान हो सावधानी बेहतर है

की लाठी दस का बोझ

एक व्यक्ति पर कई आदमियों के व्यय की ज़िम्मेदारी, एक शख़्स पर कई लोगों के ख़र्च का बोझ, एक शख़्स की बदौलत कई आदमियों की मुश्किल हल

कीसा में नहीं खली की डली , बाँका छेला फिरे गली गली

मुफ़लिसी में इतराने के मौक़ा पर कहते हैं

कीसा में रूपया मुँह में गुड़

अगर आदमी के पास पैसा हो तो ज़िंदगी का लुतफ़ है, रुपया पास होता है तो दिल ताज़ा मुंह शीरीं रहता है

किन आँखों से देखूँ

देखा नहीं जाता

किराए का टट्टू लग गया मद्दू

पैसा भी खर्चा तकलीफ़ भी उठाई

किराया का टट्टू लग गया मद्दू

पैसा भी खर्च किया और कष्ट भी सहा

किरिया और तरकारी खाने ही के लिए है

झूठी सौगंध खाए तो उसकी औचित्यता में कहते हैं

किस धान का चाँवल है

किस बाग़ की मूली है

किस के कान में फ़रिश्ते ने नहीं फूँका

मुराद: हर शख़्स को ख़ुशफ़हमी होती है

किस की बकरी और कौन डाले घास

अपनी चीज़ की रखवाली आप ही करनी पड़ती है, दूसरे की चीज़ की देख भाल कोई नहीं करता

किस की हालत देख कर मत ललचावे जी, अजी रूखी सूखी खा कर ठंडा पानी पी

किसी की अच्छी चीज़ देख कर लालच नहीं करना चाहिए जो कुछ मिले इस पर क़नाअत करनी चाहिए

किसी का धन कोई खाए, पापी का माल अकारत जाए

कमाए कोई उड़ाए कोई, बख़ील कमाता और जोड़ता है खाते दूसरे हैं

किसी का घर जले कोई तापे

उस व्यक्ति के बारे में बोलते हैं जो लोगों की बर्बादी से भी लाभ उठाना चाहे

किसी का लड़का कोई मन्नत माने

किसी के घर बच्चा हो कोई ख़ुशी करे, किसी का काम बने कोई ख़ुश हो

किसी का मुँह चले किसी का हाथ

बदज़ुबानी का नतीजा मार खाना है

किसी के खाए किसी के गीत गाए

लाभ किसी से उठाए प्रशंसा किसी की करे

किसी की आई मुझ को आ जाए

(कोसना) दूसरे की मौत मुझको आ जाए, क्रोध या पीड़ा की स्थिति में अपने आप को बददुआ देना

किसी की माँ ने धोंसा खाया है जो तुम्हारा मुक़ाबला करे

कौन तुम्हारा प्रतिस्पर्धा अर्थात मुक़ाबला कर सकता है अर्थात हर व्यक्ति अशिष्ट और मुँहफट से कनिया जाता है

किसी को अपना कर रखो या किसी के हो रहो

दुनिया में दो तरह से ही काम चलता है, या तो किसी को अपना एहसानमंद बना लो या किसी के एहसानमंद हो कर रहो

किसी को बैंगन बाए, किसी को अन-पच

कोई एक वस्तु किसी के लिए हानिकर होती है तो दूसरे के लिए लाभदायक

किसी को तवे में दिखाई देता है किसी को आर्सी में

कोई लायक़ है और कोई साधारण योग्यता का, हर व्यक्ति अपनी समझ के अनुसार काम करता है

किसी ने मुँह आर्सी में देखा किसी ने आईने में

मुख़्तलिफ़ तरह के काम करने अगर एक ही नतीजा बरामद हो तो कहते हैं

किया और कर न जाना

काम को अंजाम दिया लेकिन सलीक़े से नहीं

किया और कर न जाना, मैं होती तो कर दिखाती

काम पूरा किया परंतु शिष्टता या सभ्यता से नहीं किया, हमारी राय या सुझाव मानते तो यह हानि न होती

कोढ़ और ढीट

मूर्ख और हठी, बेवक़ूफ़ और ज़िद्दी

कोढ़ में खाज

कष्ट पर और अधिक कष्ट पहुँचता है, विपत्ति पर विपत्ति, कठिनता पर कठिनता, अत्याचार पर अत्याचार

कोढ़ी डरावे थूक से

नीच आदमी लोगों को तंग करने के लिए घृणित उपाय काम में लाता है क्योंकि उसके उन उपायों का कोई उत्तर नहीं दिया जा सकता

कोढ़ी के जूँ नहीं होती

मुझे कोई नहीं मारता, जो ख़ुद मुसीबत में है उस पर क्या आपदा आएगी; मुसीबत में फँसे हुए का कोई साथी नहीं होता

कोढ़ी को दाल-भात, कमासुत को फटा

निकम्मे को अच्छी वस्तुएँ मिलती हैं और कमाऊ को कुछ नहीं मिलता

कोढ़ी मरे, संगती चाहे

कष्टग्रस्त दूसरों को भी कष्ट में देखना चाहता है

कोई आईने में देखे, कोई आरसी में

जिसके पास जो वस्तु जैसी होती है वह उसी से अपना काम चलाता है

कोई आँखों का अंधा कोई 'अक़्ल का अंधा

कोई अज्ञानता और ज्ञान के अभाव के कारण मूर्ख, कोई शिक्षित और अज्ञान

कोई आगे न कोई पीछे

पिताहीन, निःसन्तान, अनाथ, जिसका कोई उत्तराधिकारी न हो उसके बारे में कहते हैं

कोई अब बोले , कोई जब बोले , मेरी नकटी शपाशप बोले

निहायत बेग़ैरत और बेहया की निसबत कहते हैं, जो बोलता ही चला जाये

कोई भी माँ के पेट से तो ले कर नहीं निकलता है

हर व्यक्ति को सीखना पड़ता है, जन्मजात विद्वान कोई नहीं होता, काम करने से ही आता है, कोई माँ के पेट से सीख कर नहीं आता

कोई दम में सरसों फूलती है

थोड़ी देर में मदहोश या बेसुध हो जाएगा, थोड़ी देर में होश ठिकाने पर आ जाएँगे, शामत आने वाली है

कोई हाल मस्त कोई माल मस्त

कोई अपनी ग़रीबी पर संतुष्ट है तो कोई अपनी दौलत के नशे में डूबा है, हर कोई अपनी हालत में ख़ुश है

कोई 'इल्म को दोस्त रखता है, कोई रूपे को

किसी को विद्या से प्रेम होता है तो किसी को धन से

कोई जले तो जलने दो मै आप ही जलता हूँ

मैं आप ही मुसीबत में गिरफ़्तार, हूँ मुझे किसी की मुसीबत से किया

कोई जलता है तो जलने दो, मैं आप ही जलता हूँ

में आप ही मुसीबत में हूँ, किसी की मुसीबत से मुझे क्या ग़रज़

कोई जिए कि मरे उन को अपने काम से काम

۔मक़ूला। ख़ुदग़रज़ आदमी की निसबत कहते हैं जिस को किसी के रंज विरह हित की पर्वा ना हो।

कोई काम करे दाम से, हम दाम करें काम से

परिश्रमियों की गर्वयात्मक युक्ति

कोई कह के सुनाए, हम कर के दिखाएँ

चुनौती अर्थात शत्रु को ललकारने के लिए बोला जाता है

कोई कहाँ से लाए

मिल नहीं सकता, मजबूरी है, नापैद होने और मजबूरी ज़ाहिर करने के लिए बोलते हैं

कोई कल सीधी नहीं

हर बात में घुमाव है, कोई पहलू ठीक नहीं

कोई कम न समझे

हजव-ए-मलीह है यानी आप पड़े बदज़ात हैं, बड़े होशयार हैं, बड़े चलते हुए हैं, दौर की कोड़ी लाते हैं

कोई कौड़ी के दो बेर भी हाथ से न खाए

सख़्त ज़लील-ओ-बेवुक़त है

कोई किसी का दर्द बांट नहीं लेता

अपना दुख और अपनी पीड़ा खुद ही झेलनी पड़ती है, अपना दुख और दर्द अपने ही उठाने से उठता है

कोई किसी का कुछ नहीं कर सकता

सभी को अपना-अपना बल-बूता है, सभी का ईश्वर मालिक है

कोई किसी का नहीं होता

किसी के दुख में कोई साझेदार नहीं होता

कोई किसी की क़ब्र में नहीं जाता

सदैव कोई किसी के साथ नहीं रहता, कोई किसी के बदले नहीं मरेगा, हर एक अपना ही उत्तरदायी है

कोई किसी की क़ब्र पर नहीं मूतता

कोई किसी की क़ब्र पर फ़ातिहा पढ़ने, फूल चढ़ाने तो क्या मूतने भी नहीं जाता

कोई कुछ कहता है कोई कुछ कहता है

जितने मुँह उतनी बातें

कोई क्या जाने

किसी को नहीं मालूम, कोई समझ नहीं सकता

कोई क्या करे

मजबूरी है, चारा नहीं, बस नहीं चलता

कोई ले के ओढ़े बिछाए

कोई क्या करे, किसी काम में लाए, किस मुसर्रिफ़ का, बेकार है

कोई मरे कोई मलारें गावे

एक को दुख हो और दूसरा ख़ुशी मनाए

कोई मरते पे मरता है

जो ख़ुद किसी पर आशिक़ हो उससे दिल न लगाना चाहिए

कोई मरते पीछे नहीं मरता

किसी दूसरे की ख़ातिर मुसीबत मूल नहीं ली जाती

कोई मोल में भारी, कोई तौल में

किसी में कोई गुणवत्ता होती है किसी में कोई

कोई मोलों भारी , कोई तोलों भारी

हर शख़्स अपनी हैसियत के मुवाफ़िक़ इज़्ज़त रखता है, किसी में कोई सिफ़त है तो किसी में कोई

कोई मुझ को न मारे तो मैं सारे जहान को मारूँ

कायर या भीरु अथवा झगड़ालू व्यक्ति के लिए व्यंगात्मक तौर पर कहते हैं

कोई न पूछे बात मेरा धन सुहागन नाम

कोई पूछे न गिने आप ही आप इतरावे

कोई नहीं पूछ्ता कि तेरे मुँह में कै दाँत हैं

बहुत शांति का ज़माना है, किसी तरह की पूछताछ नहीं

कोई पाँव से आता है वो सर के बल आए

अजुज़-ओ-इन्किसार के इज़हार के लिए कहते हैं, अपने को बतौर आजिज़ कमतर और घटा कर पेश करना

कोई पूछे न पूछे , मेरा धन सुहागन नाम

आप ही आप इतराए जाना चाहे कोई पूछे या ना पूछे

कोई सुने न सुने मैं कहता हूँ

उसके बारे में कहते हैं जो हर समय बातें करता रहता है

कोई तापे किसी का घर जले

एक को तकलीफ़ हो दूसरा ख़ुशी मनाए, किसी का नुक़्सान किसी और के लुतफ़ या ख़ुशी का सब हो, (रुक : कोई मरे कोई मलारें गावी

कोई तन दुखी , कोई मन दुखी , दुखी सारा संसार

दुनिया में हर शख़्स किसी ना किसी तकलीफ़ या रंज में मुबतला है, दुनिया में हर शख़्स किसी ना किसी अज़ी्यत में गिरफ़्तार है, दुनिया दारालमहन है

कोई तक़दीर के लिखे को नहीं मिटा सकता

किसी को ये क़ुदरत नहीं कि नविश्ता-ए-तक़दीर को बदल दे, क़िस्मत को कोई नहीं बदल सकता

कोई तो पूछेगा

किसी को तो ज़रूर दया आएगी, कोई तो सुनेगा, कोई तो पूछेगा

कोई तोलों बड़ा कोई मोलों बड़ा, कोई तोलों कम कोई मोलों कम

हर शख़्स अपनी अपनी हैसियत के मुवाफ़िक़ इज़्ज़त रखता है, यानी किसी में कोई सिफ़त ज़्यादा है और किसी में कोई दूसरी सिफ़त

कोई तोलों भारी कोई मोलों भारी, कोई तोलों कम कोई मोलों कम

हर शख़्स अपनी अपनी हैसियत के मुवाफ़िक़ इज़्ज़त रखता है, यानी किसी में कोई सिफ़त ज़्यादा है और किसी में कोई दूसरी सिफ़त

कोई तोलों कम , कोई मोलों कम

कोई माद्दी ख़ूबीयों कीवजह से बड़ा होता है कोई माअनवी ख़ूबीयों कीवजह से, हर शख़्स अपनी हैसियत के मुवाफ़िक़ इज़्ज़त रखता है

कोइल बोले सेह बंदी डोले

बरसात के आने पर सहि बंदी के मुलाज़िम मौक़ूफ़ होते हैं

कोइले की दलाली में हाथ काले

बुरी संगति से बुराई ही मिलती है और बुरे काम का फल भी बुरा होता है

कोइलों की दलाली में हाथ काले

बुरे काम में प्रणय का अंजाम बदनामी है, जिस काम के करने से नाहक़ बदनामी हो उस की निसबत बोलते हैं

कोदों का भात किन भातों में ममिया-सास किन सासों में

दूर के रिश्ते का क्या एतबार, कोदों का भात सब भातों में हेठा समझा जाता है, उसी तरह ममिया सास भी सासों में सबसे हेठी समझी जाती है, अर्थात इन दोनों का कोई महत्त्व नहीं है

कोफ़्ता रा नान नही कोफ़्ता अस्त

कुछ पाए हुए व्यक्ति के लिए सूखी रोटी भी ग़नीमत है

कोह कनी कनी और काह बरआरी

पहाड़ खोदना और घास बरामद करना यानी फ़ुज़ूल काम करना, वक़्त ज़ाए करना

कोक माँग भरी पुरी रहे

रुक : कोख मांग भरी परी रहे, शौहर ज़िंदा रहे और औलाद होती रहे

कोख की आँच नहीं सही जाती, पेट की आँच सही जाती है

भूका रहा जा सकता है किंतु मामता नहीं छोड़ी जा सकती

कोख की आँच सही जाती है, पेड़ू की आँच नहीं सही जाती

संतान की मृत्यु सही जाती है, किंतु भूख की ज्वाला सहन नहीं होती

कोल्हू काट मोगरी बनानी

किसी मूल्यवान वस्तु को कम मूल्य की चीज़ बनाना, क़ीमती चीज़ को ख़राब करके कम क़ीमत चीज़ बनाना, कन काम के वास्ते बड़ा काम ख़राब करना

कोल्हू की रखवाली, मुँह चिकना पेट ख़ाली

ऐसा काम जिस में बज़ाहिर नफ़ा नज़र आए मगर दरहक़ीक़त कुछ फ़ायदा ना हो

कोल्हू से खल उतरी, भई बैलों जोग

आदमी बूढ़ा होकर निकम्मा या निठल्ला हो जाता है

कौन कहे राजा जी नंगे होते हो, कौन कहे रानी ढाँको

मालदार महान व्यक्ति में कोई दोष नहीं निकालता

कोना कमाई पर तेल बुकवा

कम आय पर बनाव-श्रृंगार, कमाई-धमाई कुछ न करके शौक़ीन बने फिरना

कोने रूप पर इतना सिंगार

कोई बदसूरत औरत बहुत बनाव सिंगार करे तो कहते हैं

कोस चली नहीं बाबा प्यासी

उस व्यक्ति के संबंध में कहते हैं जो थोड़ा सा काम करने के पश्चात थकावट की शिकायत करने लगे

कोस चली नहीं बाबा प्यासी, कोस न चली बाबुल प्यासी

उस व्यक्ति के मुताल्लिक़ कहते हैं जो थोड़ा सा काम करने के बाद थकावट की शिकायत करने लगे

कोस न चली बाबुल प्यासी

काम शुरू' करते ही अथवा थोड़ा सा काम करने के बाद ही थकावट की शिकायत करना

कोसा जिए असीसी मरे

मरना जीना किसी की ख़ाहिश से नहीं बल्कि मुक़द्दर से होता है जिसे मरने की बददुआ दी जाये वो नहीं मरता जिस को जीने की दुआ दी जाये वो मर जाता है

कोत में बंदूक़ न दफ़्तर में नाम

गुज़ारे की कोई सूरत ना होना

कोताह गर्दन दुम दराज़

जिसकी गर्दन छोटी हो वह मक्कार या कपटी होता है

कोताह गर्दन तंग पेशानी, हरमज़दगी की यही निशानी

छोटी गर्दन और तंग अर्थात पतली मस्तिष्क वाला बड़ा शरीर और फ़सादी, फ़ित्ना पैदा करने वाला शैतान समझा जाता है

कोतह-गर्दन तंग-पेशानी

छोटी गर्दन और छोटे माथे वाला, अनुप्रास-शास्त्र के अनुसार ऐसा व्यक्ति जो बहुत दुष्ट एवं उपद्रवी हो, उत्पाती, कुबुद्धि

कोतह-गर्दन तंग-पेशानी हराम-ज़ादे की यही निशानी

छोटी गर्दन और छोटी पेशानी वाला, शरीर, फ़सादी

कोठे चढ़ कर देखा , घर घर एक ही लेखा

सब का एक सा हाल है, कोई भी परेशानीयों से महफ़ूज़ नहीं है

कोठे वाला रोवे, छप्पर वाला सोवे

धनी को हर समय चिंताएँ लगी रहती हैं, निर्धन निश्चिंत होकर सोता है

कोठी अनाज , कोतवाली राज

घर में ख़ुशहाली होतो बाहर इज़्ज़त होती है, दौलत और हुकूमत दोनों में

कोठी धोए कीच हाथ लगे

परिश्रम करके भी कुछ न मिला, आशा के अनुसार नहीं मिला

कोठी में चावल घर में उपास

मूर्ख को धन से भी ख़ुशी नहीं मिलती क्योंकि उसे ख़र्च करना नहीं आता

कोठी में से मोठी नहीं निकली

बाप-दादा की संपत्ति में से अभी कुछ व्यय नहीं हुआ

कोयल बोली और सेह-बंदी डूबी

बरसात में कोयल आती है और उस समय सहबंदी के कर्मचारियों को निलंबित कर दिया जाता है

कोयला होय न ऊजला, सज्जी साबुन लाय

प्राकृतिक ऐब बनाव-श्रृंगार से दूर नहीं हो सकता

कोयलों की दल्लाली में मुँह भी काला कपड़े भी काले

बुरे काम से बुराई ही जन्म लेती है

कुँआँ बेचा है कुँएँ का पानी नहीं बेचा

ख़्वाह मख़्वाह हुज्जत या तकरार करने पर कहते हैं

कुँएँ पर गए प्यासे आए

फ़ायदे की जगह से फ़ायदा न हुआ निराश रहे

कुंजड़न की अगाड़ी मारे क़साई की पिछाड़ी

कुंजड़ों से अव़्वल ख़रीद यए, कसाइयों से पीछे

कुंजड़े की अगाड़ी , क़साई की पछाड़ी

तरकारी अव्वल वक़्त और गोश्त आख़िर वक़्त अच्छा मिलता है

कुंज्ड़न (कुंज्ड़े) की अगाड़ी (मारे) क़साई की पिछाड़ी

अगर आप अच्छी चीज़ ख़रीदना चाहते हैं तो तरकारी पहले और गोश्त आख़िर वक़्त में खरीदें

कुँवार जाड़े का

शीत ऋतु का प्रारंभ कुँवार माह से होता है, कुँवार का महीना शुरू हुआ नहीं कि जाड़े आ गए, सर्दी का मौसम कुँवार से शुरू होता है

कुँवार का सा झल्ला, आया बरसा चल्ला

कुँवार के महीने में बारिश बहुत ज़ोर से होती है, मगर थोड़ी सी देर ठहर कर आसमान साफ़ हो जाता है उस व्यक्ति के मुताल्लिक़ कहते हैं, जिसे बहुत ग़ुस्सा आए और थोड़ी देर बाद जाता रहे

कुँवारी करे अरमान , ब्याही हो पशेमान

ग़ैर शादी शुदा तो शादी की ख़ाहिश करती है और शादीशुदा पछताती है (शादी के मुताल्लिक़ कहते हैं और बावजूद कामयाब होने के कुछ नफ़ा ना उठाने के मौक़ा पर भी बोलते हैं)

कुँवारी खाए रोटी ब्याही खाए बोटी

कुँवारी से ब्याही की सम्मान ज़्यादा होती है

कुँवारी खाए रोटियाँ, ब्याही खाए बोटियाँ

कुंआरी लड़की तो सिर्फ़ रोटियाँ ही खाती है किंतु ब्याही बाप की बोटियाँ खा जाती है

कुँवारी को सदा बसंत

आज़ाद और मुजर्रद के लिए हरवक़त ख़ुशी का मौक़ा है, मुराद ये है कि ग़ैर शादीशुदा औरत को वो दुख नहीं होते जो शादी के बाद सहने होते हैं

कुँवें के पास प्यासा आता है

किसी शैय का हाजतमंद या तालिब ख़ुद इस के पास पहुंचता है

कुँवें पर गए और प्यासे आए

जहाँ बड़े फ़ायदे की आशा हो वहाँ से वंचित रहने के अवसर पर बोलते हैं

कुबड़ी तो लाख चले जब कुब चल^ने भी दे

(अविर) चाओ बहुत मगर कुछ मजबूरियां लाहक़

कुचाल संग हाँसी, जीव जान की फाँसी

चरित्रहीन के साथ हँसी-मज़ाक़ करना मरने के बराबर है

कुछ आता है न जाता है

नालायक़ है, अकौशल है, निकम्मा है, किसी काम का नहीं

कुछ आवे न जावे

अयोग्य है, निकम्मा है, काम से परिचित नहीं

कुछ बसंत की भी ख़बर है

जिसे सचमुच ही किसी शुभ अवसर के आने की सूचना न हो, उस से भी कह सकते हैं

कुछ दिया ही आगे आ गया

कभी की ख़ैरात काम आगई , ख़ुदा ने किसी नेकी के सब मुसीबत से बचा लिया

कुछ दिया लिया आगे आ गया

ख़ैर ख़ैरात ने मुसीबत से बचा लिया (किसी मुसीबत-ए-नागहानी से बच जाने के मौक़ा पर कहा करते हैं

कुछ दिए कुछ दिलाए कुछ का देना ही क्या

टाल मटोल करने वाले आदमी की निसबत कहते हैं

कुछ गेहूँ गीले कुछ जाँगर ढीले

(अविर) हीले करनेवाली और बहानाबाज़ औरत के बारे में कहते हैं

कुछ गेहूँ गीले कुछ जंदरे ढीले

(अविर) हीले करनेवाली और बहानाबाज़ औरत के बारे में कहते हैं

कुछ गुड़ ढीला , कुछ बनिया

कुछ इस का क़सूर है कुछ इस का , क़सूर दोनों का है

कुछ खाई , कुछ बाँधी पोट

खाया पिया और साथ लेकर भी चले

कुछ ख़लल तो है जिस से ये ख़लल है

कहीं कुछ गड़बड़ी तो ज़रूर है जिससे यह सब हो रहा है

कुछ खो के सीखते हैं

आदमी ठोकर खाकर ही सीखता है

कुछ लोहा खोटा, कुछ लोहार

ग़लती दोनों की है कुछ उसकी ग़लती कुछ उसकी

कुछ सोना खोटा और कुछ सुनार खोटा

ताली दोनों हाथ से बजती है , लड़ाई या बिगाड़ दोनों तरफ़ से होता है

कुछ सोने खोट , कुछ सुनार खोट

कुछ सोना खोटा और कुछ सुनार खोटा, ख़ता दोनों की है, कुछ लोहा खोटा, कुछ लोहार (रुक

कुछ स्वार्थी कुछ पर मार्थी

कुछ अपने लिए कुछ ख़ुदा के लिए , कुछ दुनिया का काम कुछ आख़िरत का काम , दीन-ओ-दुनिया दोनों का ख़्याल चाहिए

कुछ तो बावली, कुछ भूतों खदेड़ी

मूर्ख औरत के संबंधित कहते हैं कि पहले ही मूर्ख थी हालात ने और भी मत मार दी

कुछ तो गेहूँ गीले, कुछ जंदरी ढीली

जिससे आटा ठीक नहीं पिस रहा है अर्थात दोनों ओर ही कहीं कुछ त्रुटि है

कुछ तुम ने समझा, कुछ हम ने समझा, औरों को ख़बर न हुई

अगर तुम मेरी बात समझ गए तो मैं भी तुम्हारी बात समझ गया

कुछ तुम समझे कुछ हम समझे

वक़्त गया बात गई, राज़ की बात को दिल में रखू ज़ाहिर ना होने दो, हमारा तुम्हारा लेखा जो खा बराबर है, हिसाब-ए-दोस्ताँ दर-ए-दिल

कुछ ऊदा ने दिया कुछ पूदा ने दिया हमारा काम चल ही गया

उधर उधर से अपना काम निकाल लेना, थोड़ा थोड़ा बहुत होता है (इस शख़्स की निसबत बोलते हैं जो इधर उधर से अपना काम निकाल ले)

कुछ ऊदे ने दिया कुछ पूदे ने दिया हमारा काम हो ही गया

उधर उधर से अपना काम निकाल लेना, थोड़ा थोड़ा बहुत होता है (इस शख़्स की निसबत बोलते हैं जो इधर उधर से अपना काम निकाल ले)

कुदाली न फाव्ड़ा बड़ा हमारा

शेखी बहुत, पास कुछ नहीं, डहनग मारे और शेखी बघारने वाले की निसबत बोलते हैं

कुफ़्र की नक़्ल कुफ़्र नहीं

कुफ़्र का अनुकरण करने अर्थात कुफ़्र को दोहराने से कुफ़्र नहीं होता

कुफ़्र टूटा ख़ुदा-ख़ुदा कर के

बड़ी मुश्किल से मनाया गया, सहमति बनी, आख़िरकार अभियान ख़त्म हो गया, मरहला तै पाया

कुजा राजा भोज , कुजा गंगा तेली

कहाँ राजा भोज और कहाँ गंगा तीली, चह निसबत ख़ाक रा बा आलिम पाक (जहां हैसियत का ज़्यादा फ़र्क़ हो वहां बोलते हैं)

कुल्हिया में गुड़ थोड़ा ही फूटता है

बड़े काम को छुपा कर नहीं किया जा सकता

कुलेल में ग़ुलेल

प्रसन्नता और आनंद में अचानक विकार उत्पन्न होना, ख़ुशी और मज़े में यकायक फ़साद पैदा हो जाना

कुल्लु इनाइन यतरश्शिहु बिमा फ़ीह

(अरबी कहावत उर्दू में प्रयुक्त) हर बर्तन से वही चीज़ टपकती है जो इस में होती है, इस क़ौल से अक्सर ये मुराद होती है कि जो दिल में होता है वही ज़बान पर आता है या जो जैसा होता है वैसा काम करता है

कुल्लु मन 'अलैहा फ़ान

(करानी आयात बतौर कहावत मुस्तामल) हर चीज़ को जो रोय ज़मीन पर है फ़ना ज़रूरी है, रोय ज़मीन पर जो चीज़ है वो फ़ानी है

कुल्लु नफ़्सिन ज़ाइक़त-उल-माैत

(पवित्र क़ुरआन का एक वाक्य जो लोकोक्ति के रूप प्रयुक्त है) हर आत्मा को मृत्यु का स्वाद चखना होगा, हर जानदार की मृत्यु निश्चित है

कुल्लु शैٖइन युरजिओ इला असलिही

हर चीज़ अपनी असल की तरफ़ लौटती है (अरबी मक़ूला उर्दू में मुस्तामल)

कुल्लु तवीलिन अहमक़ इल्ला 'उमर

(अरबी कहावत उर्दू में प्रयुक्त) हज़रत उमर के अलावा हर लंबे डील-डौल वाला व्यक्ति का आदमी मूर्ख है

कुल्लु तवीलिन अहमक़ व कुल्लु क़सीरिन फ़ित्नतुन

हर लंबे क़द वाला मूर्ख होता है और हर नाटे क़द वाला आदमी फ़सादी होता है (अरबी कहावत उर्दू में प्रचलित)

कुल्लु-अमरिन मरहूनुन ब-औक़ातिही

अरबी वाक्य उर्दू में प्रयुक्त, हर कार्य अपने समय के साथ निर्धारित कर दिया गया है अर्थात हर एक कार्य का एक निर्धात समय है

कुल्लु क़लीलिन-फ़ित्नतुन इल्ला 'अली

(अरबी कहावत उर्दू में प्रचलित) हज़रत अली के अलावा हर छोटे डील-डौल का आदमी फ़ित्ना है

कुल्लुन्नासे राज़िन 'अन 'अक़्लिही

अरबी कहावत उर्दू में प्रयुक्त, हर एक को अपनी अक़्ल पर भरोसा होता है

कुल्लु-शैइन यरजिओ'-इला-अस्लिहि

हर चीज़ अपने अस्ल की तरफ़ लौटती है

कुंबे वाले के चारों पल्ले भारी

जिस के हिमायती हूँ या जिस का कुम्बा बड़ा हो इस का दिल ग़नी रहता है

कुंबे वाले के चारों पल्ले कीचड़ में है

परिवार वाला हर समय कष्ट में घिरा रहता है, परिवार वाले को हमेशा कोई न कोई मुसीबत लगी रहती है

कुम्हार कहे से गधे पर नहीं चढ़ता

अपनी इच्छा से तो काम करना परंतु किसी के कहने से न करना

कुम्हार के घर बासन का काल

जहाँ कोई वस्तु बहुत होती हो और वहाँ वह न मिले तो यह कहावत कहते हैं

कुम्हार पर बस न चला गधिया के कान ऐंठे

किसी के किए की दूसरे को सज़ा देना, शक्तिशाली पर बस नहीं चलता तो निर्बल को दबाते हैं

कुम्हार से पार न बसाए, गधिया के कान ऐंठे

बलवान पर ज़ोर न चले तो कमज़ोर को धमकाए

कुम्हारी का ग़ुस्सा उतरे गधी पर

زبردست پر زور نہ چلے تو کمزور کو دھمکائے

कुनद हम-जिंस बा हम-जिंस परवाज़

हर वस्तु अपनी जैसी समान वस्तु की तरफ़ आकर्षित होती है अर्थात उच्च उच्च की ओर निम्न निम्न की ओर

कुंजड़े की अगाड़ी, क़साई की पिछाड़ी

कबड़ीए के यहां जब सब्ज़ी ख़रीदे तो होशयारी यही है कि पहले ख़रीदे इस लिए कि कबड़या पहले साफ़ सब्ज़ी बेचता है और आख़िर में ख़राब माल फ़रोख़त करता है और कसाई के यहां जब गोश्त ख़रीदे तो आख़िर में इस लिए कि कसाई इबतिदा में ख़राब माल बेचता है और आख़िर में अच्छा माल फ़रोख़त करता है

कुपूत बेटा मरा भला

बुरे या अवज्ञाकारी बेटे का मर जाना अच्छा है

कुरेल में ग़ुल्ला लगा

ऐन ऐश के वक़्त रंज पहुंचा

कुश्ता कुश्ता मी कुनद

कुश्ता अगर कच्चा रह जाए तो बहुत नुक़्सान पहुँचाता है

कुसुम का रंग तीन दिन फिर बद-रंग

कुसुम का रंग जल्दी ख़राब हो जाता है, चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात

कुठिया नाच , कुलिया राज

कमीना थोड़ी दौलत पर इतराता है

कुतिया चोरों मिल गई, पहरा देवे सो कौन

अपने दुश्मन हो जाएँ तो बचाव कठिन है, रक्षक ही हानि पहुँचाए तो कोई नहीं बचा सकता

कुतिया चोरों से मिल गई तो मदत आवे कौन

मुहाफ़िज़ ही नुक़्सान पहुंचाए तो फिर बचाओ कैसा

कुतिया चोरों से मिल गई तो पहरा देवे कौन

मुहाफ़िज़ ही नुक़्सान पहुंचाए तो फिर बचाओ कैसा

कुटनी से तो राम बचावे, प्यारी से तो पत उतरावे

कुटनी से ईश्वर बचाए यह प्रेमी से भी अपमान कराती है

कुत्ता भौंका ही करता है, हाथी चला ही जाता है

दुनिया के काम रुकते नहीं चाहे लोग कुछ भी कहें

कुत्ता भौंके , न पहरे-दार जागे

असल वजह या बुनियादी बात पर ऐसी होदशयारी से काम करना कि रुकावट डालने वालों को ख़बर ही ना हो

कुत्ता भौंके क़ाफ़िला सिधारे

किसी के रुकावट डालने से कोई काम रुकता नहीं है

कुत्ता भी अपनी गली में शेर होता है

अहने इलाक़े में हर शख़्स की जुर्रत बढ़ जाती है , हिमायतों को देख कर सब के हौसले बढ़ जाते हैं, अपने ठिकाने पर मौजूद हो तो इंसान का हौसला बढ़ा हुआ होता है

कुत्ता भी बैठता है तो दुम हिला कर बैठता है

जो आदमी अपने मकान को मैला कुचैला और गंदा रखता है उसको सफ़ाई करने के लिए ज़ोर देते हुए बोलते हैं

कुत्ता भी दुम हिला कर बैठता है

कुत्ते तक में सफ़ाई की इतनी समझ है कि बैठने से पहले अपनी पूँछ से ज़मीन झाड़ लेता है, कोई आदमी सफ़ाई का ख़्याल न रखे तो कहते हैं

कुत्ता भी दुम हिला कर जगह साफ़ कर लेता है

रुक : कुत्ता भी दम हिला कर बैठता है

कुत्ता चौक चढ़ाए तो चपनी चाटने जाए

रुक : कुत्ता राज बिठाया अलख

कुत्ता देखेगा न भौंकेगा

हरीस और लालची को किसी के माल का पता चल जाये तो ज़रूर उसे खसोटने कीता क में लगेगा, इस लिए दुश्मन के सामने से हिट जाना बेहतर होता है

कुत्ता घास खाए तो सभी पाल लें

यदि काम सरल हो जाए तो सब ही कर लें, सरल काम सब कर लेते हैं

कुत्ता घर का रहा न घाट का

रुक : धोबी का कुत्ता, घर का ना घाट का

कुत्ता मरे अपनी पीड़, मियाँ माँगें शिकार

दूसरों की सुविधा असुविधा का कोई विचार न कर के केवल अपना स्वार्थ देखना

कुत्ता मुँह लगाने से सर चढ़े

कमीने आदमी को मुँह लगाओ तो बहुत बेतकल्लुफ़ी करता है

कुत्ता पाए तो सवा मन खाए, नहीं तो ज़बान ही चाट कर रह जाए

जब जो मिल जाए उसी में संतोष कर लेने वाला व्यक्ति के प्रति कहते हैं

कुत्ता पाले वो कुत्ता, सासुरे जवाई कुत्ता, बहन के घर भाई कुत्ता,सब कुत्तों का वो सरदार जो रहे बेटी के बार

कुत्ता पालने वाला, ससुराल में रहने वाला और बहन के घर रहने वाला भाई बहुत अपमानित हैं, सबसे तुच्छ एवं अपमानित वो है जो बेटी के घर रहे

कुत्ता टेढ़ी पूँछ है , कभी न सीधी हो

बद आदमी की बदख़स्लत नहीं जाती

कुत्ते भौंकने से हाथी नहीं डरता

नीच और घटिया लोगों की धमकी की अच्छे लोग कोई चिंता नहीं करते

कुत्ते का बैरी कुत्ता

हमजिंस या आपस वाले ही दुश्मनी करते हैं, अब्नाए जिंस ही एक दूसरे को सताते हैं, आदमी का आदमी दुश्मन है

कुत्ते का गूह न लीपने का ना पोतने का

रुक : बिल्ली का गाह ना लेपने का ना पोतने का , नाकारा चीज़ के बारे में कहते हैं

कुत्ते के भौंकने से हाथी नहीं डरता

अपमानित एवं कमीने लोगों की धमकी से शरीफ़ एवं दिलेर नहीं डरते

कुत्ते की दुम बारा बरस के बा'द भी टेढ़ी ही निकली

तबीयत और फ़ित्रत की कजी कोशिश से दूर नहीं होती, बदतीनत को सोहबत का कुछ असर नहीं होता (लाख कोशिश के बावजूद भी जब कोई तबदील ना आए तो कहते हैं)

कुत्ते की दुम बारह बरस ज़मीन में गाड़ी टेढ़ी ही निकली

तबीयत और फ़ित्रत की कजी कोशिश से नहीं जाती, बदतीनत पर सोहबत का कुछ असर नहीं होता (लाख कोशिश के बावजूद जब कोई तबदीली वाक़्य ना हो तो कहते हैं)

कुत्ते की दुम बारह बरस ज़मीन में गाड़ो टेढ़ी ही रहेगी

तबीयत और फ़ित्रत की कजी कोशिश से नहीं जाती, बदतीनत पर सोहबत का कुछ असर नहीं होता (लाख कोशिश के बावजूद जब कोई तबदीली वाक़्य ना हो तो कहते हैं)

कुत्ते की दुम कभी सीधी नहीं होती

रुक : कुत्ते की पूंछ कभी सीधी नहीं होती

कुत्ते की मौत आए तो मस्जिद की तरफ़ भागता है

तुच्छ और कमीने व्यक्ति के प्रति भी बोलते हैं

कुत्ते की पूँछ कभी सीधी नहीं होती

स्वभाव पर संगति का प्रभाव नहीं होता, स्वभाव की विकृति या दुष्टता कभी दूर नहीं होती, लाख प्रयास के बावजूद जब कोई बदलाव न हो तो कहते हैं

कुत्ते को घी हज़्म नहीं होता

ओछे के पेट में बात नहीं रहती, ओछा थोड़ी भी संपत्ति अथवा सम्मान पा कर इतराने लगता है

कुत्ते को घी नहीं पचता कुत्ते को खीर नहीं पचती

ओछे या तुच्छ को कोई अच्छी वस्तु मिल जाए तो वह उसे संभाल नहीं सकता

कुत्ते को हड्डी भली लगती है

कुत्ता अपने मालिक के बल पर ही भौंकता है

कुत्ते को मस्जिद से क्या काम

बुरे आदमी को नेक काम से कोई ताल्लुक़ नहीं होता

कुत्ते को मौत आए तो मस्जिद में मूत जाए

जब बुरे आदमी की मृत्यु आती है तो वो बुरा काम करता है, मुसीबत आने को हो तो ख़तरे की तरफ़ भागता है

कुत्ते तेरा मुँह नहीं, तेरे साईं का मुँह है

कुत्ता अपने मालिक के बल-बूते पर ही भौंकता है

कुत्तों का वो सरदार जो रहवे बेटी के द्वार

बहुत बे इज़्ज़ती की बात है , बे मौक़ा और बेमहल बात अच्छी नहीं होती

कुत्तों को दूँ पर तुझे न दूँ

जिसे कोई वस्तु देने को दिल न करे और वह अड़ जाए तो उस समय इस कहावत का प्रयोग करते हैं

कौड़ियों का रहना और महलों के ख़्वाब देखना

अपनी हैसियत से अधिक की इच्छा प्रकट करना, अपनी हैसियत से ज़्यादा की ख़्वाहिश या इज़हार करना, रहें झोंपड़ी में ख़्वाब देखें महलों के

कूए के पास प्यासा आता है कुवा नहीं जाता

ग़रज़मंद को चाहिए कि जहां ग़रज़ निकले वहां जाये, बेग़र्ज़ को क्या पेड़ पड़ी है

कूए की आवाज़ है

जैसी कहोगे वैसी सुनोगे

कूए में भंग पड़ी

सब मस्त और मूर्ख हैं

कूएँ के पास प्यासा आता है

किसी शैय का तालिब ख़ुद इस के पास पहुंचता है

कूएँ में भंग पड़ी

मदहोश होना, सब नशे में धुत हो गए, सब बेवक़ूफ़ होगए

कूएँ पर गए और प्यासे आए

जहां बड़े फ़ायदे की उम्मीद हो वहां से महरूम रहना, महरूमी-ओ-तिश्ना कामी

कूँडे के इस पार या उस पार

रुक : कोंडी के इस पार या उस पार, सुसत आदमी के मुताल्लिक़ कहते हैं

कूँडी इस पार या उस पार

इस ओर या उस ओर, इधर या उधर, अनुकूल या प्रतिकूल, मामला एक ओर, निश्चित निर्णय, दो टूक बात

कूँजड़ी अपने बेर खट्टे नहीं बताती

अपनी चीज़ को कोई बुरा नहीं कहता

कूँज-कूँज हमारी कौड़ी दे जा अपनी कौड़ी ले जा

बच्चों का एक खेल, जब कूंजों की क़तार देखते हैं तो दोनों हाथों की मुट्ठियाँ आपस में रगड़ते हैं और यह कहते हैं

कूद बछ्ड़े कूद , तेरी नलियों में गूद

जब तक ताक़त है शरारत किए जाओ

कूद मूए कूद तेरी नलियों में गूद, निकल गया गूद तो रह गया मर्दूद

जब तक शरीर में शक्ति है शरारतें या मस्ती किए जा या काम किए जा, जब शक्ति जाती रही तो कोई तुझे पूछेगा नहीं

कूद-कूद मछ्ली बगुले को खाए

उलटा समय है कि निर्बल शक्तिशाली के मुँह आता है या घटिया व्यक्ति भला आदमी पर चढ़ जाता है

कूदते कूदते नचनिया हो जाता है

अभ्यास करते करते एक विशेषज्ञ, अनुभवी व्यक्ति या शिक्षक हो जाना

कूक करूँ तो जग हँसे चिपके लागे घाव ऐसे कठिन सीना कूके बिद करूँ उपाव

इश्क़ की तारीफ़ है अगर आवाज़ निकालूँ तो लोग हँसें और चुप रहूँ तो अधिक तकलीफ़ हो, इस का इलाज किया जाए

कूटो तो चूना, नहीं तो ख़ाक से दूना

चूना जितना अदिक कूटा जाएगा उतना ही मज़बूत होगा, इसी तरह जितनी मेहनत की जाए मेहनत से उतना ही लाभ हो सकता है

कूज़े ढलें कि माट

कोई नहीं कह सकता कि पहले बूढ़े मरेंगे या जवान

कूज़े में दरिया बंद करना

۲ . नामुमकिन काम को मुम्किन कर दिखाना

कुवा बेचा है कुवे का पानी नहीं बेचा

रुक : कंवां बेचा है कुँवें का पानी नहीं बेचा, ग़द्दार और बदमुआमला के क़ौल-ओ-फे़अल में तज़ाद होता है

कुवाँ बेचा है , कुँवें का पानी नहीं बेचा

बहाना तराशी या धोका देने के लिए जब कोई चाल चली जाये तो कहते हैं, चीज़ दे दी जाये और फ़ायदा ना उठाने दिया जाये नीज़ रुक : कौवा बेचा है कौए का पानी नहीं बेचा

कुवार जाड़े का दुवार

कुवार के महीने से सर्दी शुरू हो जाती है

कुवारी खाए रोटी , ब्याही खाए बोटी

कुंवारी बेटी से ब्याही का ख़र्च ज़्यादा बढ़ जाता है

कुवारी को अरमान , ब्याही पशेमान

बावजूद कामयाब होने के कुछ नफ़ा ना उठाना, कुवारी को हवस कि ऐश करूं ब्याही को पछतावा कि बला में फंसी

कुवारी को सदा बसंत है

आज़ाद और अकेला के लिए हर वक़्त ख़ुशी है, आज़ाद को हर समय ऐश है कुछ फ़िक्र नहीं होता

कुँवें का ब्याह गीत गावें मसीत का

अनुचित अवसर पर बात कहना या कार्य करना, बेमौक़ा बात या काम करना

क्या बैल चलेगा

क्या काम आवेगा

क्या भरोसा है ज़िंदगानी का, आदमी बुलबुला है पानी का

मनुष्य का जीवन पानी के बुलबुले की तरह नश्वर है

क्या भेड़, क्या भेड़ की लात

कमज़ोर क्या करेगा, कमज़ोर की किसी बात का असर नहीं होता

क्या चंदन की चुटकी क्या गाड़ी भर काठ

अच्छी वस्तु थोड़ी सी भी बहुत सी बुरी वस्तु से अच्छी होती है

क्या दाल भात का निवाला है

आसान काम नहीं है, कोई मामूली बात नहीं है

क्या दम का भरोसा है

ज़िंदगी का कोई भरोसा नहीं है

क्या दर्ज़ी का कूच क्या क़याम

दरवेश या फ़क़ीर व्यक्ति जहाँ चाहे बिना झिझक चला जाये कोई रोकने टोकने वाला नहीं होता

क्या धूप में बाल सफ़ेद किए हैं

बूढ़े और उम्र रसीदा होने पर भी कवी तजुर्बा ना हुआ

क्या दिन जाते देखे

बीते दिनों की याद में कहते हैं

क्या घास में साँप नहीं चलता

यह असंभव बात नहीं है

क्या गोमती का पानी पिया है

लखनऊ वालों के लिए व्यंगात्मक तौर पर कहते हैं

क्या गुप-चुप के लड्डू खाए हैं

बोलते क्यों नहीं, चुप क्यों हो

क्या गूँगे का गुड़ खाया है

क्यूँ नहीं बोलते, क्यूँ चुप्पी साध ली है, किस लिए गूँगे से बन गए हो

क्या हाथों में मेहंदी लगी है

कोई काम से बचे तो स्त्रियाँ कहती हैं

क्या हिजड़ों ने राह मारी है

आने से क्यों डरते हो, डरने की क्या बात है

क्या जाने गँवार, घूँगटवा का यार

गंवार किया जाने इशक़बाज़ी कैसे होती है

क्या जाती दुनिया देखी

क्या दुनिया के फ़ानी होने का एहसास हो गया जो तुम्हारे रवैय्ये में इतनी तबदीली आ गई (किसी की ख़िलाफ़ आदत नेकी या हुसन-ए-अमल देख कर कहते हैं)

क्या काँटों में हाथ पड़ता है

क्या ऐब लगता है, क्या नुक़्सान होता है

क्या करेगा दौला जिसे दे तिसे मौला

अल्लाह के दीन में किसी का नियंत्रण नहीं है

क्या ख़ाक लुटी थी

क्या बाँटी गई थी

क्या ख़ुदा है

ऐसा शख़्स नहीं जिस से सरताबी ना हो सकती हो

क्या ख़ुदाई है

ईश्वर की महिमा और शक्ति का क्या कहना, इश्वर की क्या महिमा है (आश्चर्य, व्यंग और ताना के लिए बोलते हैं)

क्या कोई शाख़ निकलती है

कोई अनोखी बात है क्या , क्या सुरख़ाब का पर लगा है

क्या कोइलों की नाव डूब जाएगी

मामूली नुक़्सान होगा

क्या क्या अरमान रह गए

बहुत इच्छाएँ रह गईं, तमन्नाएँ नहीं निकलीं

क्या क्या अरमान साथ ले गया

ज़िंदगी में इच्छाएं पूरी न हुईं, मृतक के बारे में कहते हैं

क्या क्या इरादे थे

बहुत इरादे थे, हसरत न निकली

क्या क्या कुछ कहा

कौन कौन सी बात न कही, कौन कौन सी गाली न दी, बहुत कुछ बुरा भला कहा

क्या क्या न किया

कौन सी कसर बाक़ी रखी, सब कुछ तो क्या, कौन सी कसर उठा ना रखी

क्या लड़ाई में पान फूल बटते हैं

झगड़े फ़साद में खातिरदारी थोड़ी होती है

क्या लड़े सूरमा, क्या लड़े अनजान

लड़ने का काम बहादुरों का है या फिर जो मूर्ख होता है वही लड़ाई मोल लेता है

क्या ला'ल लगे हैं

(व्यंग्यात्मक) क्या गुण हैं, कोई गुण नहीं

क्या लाल लगे हुए हैं

क्या सुर्ख़ाब का पंख लगा है, ऐसी क्या विशेषताएँ हैं, कोई ख़ास बात नहीं

क्या ले गया शेर शाह, क्या ले गय सलीम शाह

माल-ओ-दौलत किसी के साथ नहीं जाता

क्या लेना

कोई ग़रज़ नहीं , बेमुसर्रफ़ है, बे कार है

क्या मछलियाँ हैं जो सड़ी जाती हैं

रुक : किया मछलियां सड़ी जाती हैं , क्या जल्दी है, इस वक़्त मुस्तामल जब कोई किसी काम में ख़ुसूसन लड़की के ब्याह में जल्दी करता है

क्या मछलियाँ सड़ी जाती हैं

मेरी मछलियाँ सड़ नहीं जाएँगी जो जल्दी करूँ, मुझे कोई जल्दी नहीं, विशेषतः जब कोई लड़की के विवाह में जल्दी करे तो कहते हैं

क्या मैं तेरी पट्टी के नीचे पैदा हुई हूँ

मैं क्या किसी बात में तुझ से कम हूंँ अथवा क्या मैं तेरी दबैल हूँ

क्या मक्खी ने छींक दिया

काम न करने का क्या कोई बहाना हाथ आ गया, क्यों काम नहीं करना चाहते

क्या मुँह और क्या मसाला

जब कोई ऐसा काम अपने ज़िम्मे ले जिसे वह न कर सके अर्थात वह इसके योग्य न हो तो इसे कहते हैं

क्या मुँह दिखाओगे

लंबे समय तक याद रखेंगे या कृपालु रहेंगे, मुद्दत तक याद रखेंगे या एहसानमंद रहेंगे

क्या मुँह में घूँगनियाँ हैं

रुक : क्या मुंह में पंजीरी भरी है

क्या मुँह में पंजीरी भरी है

जो स्पष्ट न बोले उस के प्रति कहते हैं

क्या मुँह से फूल झड़ते हैं

(तारीफ़ के लिए) किस क़दर ख़ुश बयां है, कैसा फ़सीह है नीज़ जब कोई शख़्स बदकलामी करता है तो इस से तनज़्ज़ा भी कहते हैं

क्या नंगी नहाए क्या निचोड़े

निर्धन के पास क्या धरा है, दरिद्र आदमी क्या देगा क्या दिलाएगा

क्या पाँव में मेहंदी लगी है

बहुत धीरे चलने पर कहते हैं कि क्या पाँव में मेंहदी लगी है जो इतने धीरे चलते हो

क्या पर्देसी की पीत, क्या फूस का तापना, दिया कलेजा काढ़, हुवा नहीं अपना

किसी प्रेमिका का अपने कृतघ्न प्रेमी के प्रति उपालंभ

क्या पटाक पड़े थे

कैसा हंगामा होता था, क्या उत्साह या ख़ुशी हुई थी, कुछ भी न था

क्या पिदड़ी, क्या पिदड़ी का पुलाव

बेहक़ीक़त और बेहैसियत शैय के लिए बोलते हैं, इंतिहाई कम हैसियत, इंतिहाई बेहक़ीक़त

क्या क़ाज़ी गिला करेगा

कोई ताना नहीं करेगा, कोई नाम नहीं धरेगा, कोई मुँह पर बात नहीं लाएगा, कोई भी टिप्पणी या चुनौती नहीं देगा

क्या क़यामत की घड़ी थी

बहुत परेशानी का समय था, अधिक मुसीबत का वक़्त था

क्या साँप का पाँव देखा है

जब कोई असंभव बात हो तो व्यंग में कहते हैं

क्या साँप सूँघ गया

क्यों नहीं बोलते, चुप क्यों हो, उत्तर क्यों नहीं देते

क्या सर्राफ़े का टका है

मुफ़्त का माल समझ कर लापरवाही से ख़र्च करना किसी तरह मुनासिब नहीं, बिना मेहनत कमाया हुआ धन सही लेकिन ये फ़िज़ूलख़र्ची उचित नहीं

क्या सौ रूपे की पूँजी , क्या एक बेटे की औलाद

सौ रुपय की पूंजी थोड़ी होती है और एक बेटा ना काफ़ी होता है, सौ रुपय बहुत थोड़ी हो निजी है और एक बेटा काफ़ी औलाद नहीं, किसी वक़्त मर जाये

क्या शान में बट्टा लग जाएगा

उसको कहते हैं जो किसी काम में संकोच करते हों अर्थात उस से वैभव या महिमा में फ़र्क़ आ जाएगा या कमी पैदा होगी

क्या शहर शम्ला है

क्या अंधेर नगरी है

क्या सोवे राजा का पूत, क्या सोवे जोगी का अबधूत

आराम से या तो राजा का बेटा सविता है या फ़क़ीर का क्योंकि उन को कोई फ़िक्र नहीं होती

क्या सोवे राजा का पूत, क्या सोवे जोगी का अवभूत

आराम से या तो राजा का बेटा सविता है या फ़क़ीर का क्योंकि उन को कोई फ़िक्र नहीं होती

क्या सुरख़ाब का पर लगा है

क्या आपको कोई विशेष गुण मिला है, क्या कोई अनोखी या दुर्लभ चीज़ है

क्या ताक लगाई है

कितना मान सम्मान बना हुआ है

क्या तार बैठता है

यह काम क्यों होता है, क्या होता है

क्या तमाशे की बात है जिस का जाए वो चोर कहलाए

जिसका नुक़्सान हो उसके सिर पर आरोप हो, पुलिस वाले जब चोरी का सुराग़ न मिले तो ये सिद्ध करने की कोशिश करते हैं कि वादी ने सामान इधर-उधर कर दिया

क्या था और क्या हो गया

समय अस्त-व्यस्त हो गया, बना हुआ काम या बात बिगड़ गई

क्या तुम्हारा ख़ुदा है, हमारा नहीं

ऐसे समय पर कहते हैं जब कोई व्यक्ति अत्याचार करे, जब कोई शख़्स ज़ुलम-ओ-सितम करे तो कहते हैं

क्या तुम्हारे सुर्ख़ाब का पर लगा है

क्या तुम्हीं सबसे बढ़ कर हो

क्या तुम्हारी गधी चुरीई है

मैंने तुम्हारा कौन सी ग़लती की है, जो बुरा भला कहते हो

क्या उधार की माँ मरी है

लेन देन का दस्तूर दुनिया से उठ नहीं गया है तुम नहीं दोगे तो दूसरे से लेंगे, उस समय प्रयोग किया जाता है जब कोई क़र्ज़ देने में हीला हवाला करता है

क्या ज़िंदगी का भरोसा है

ज़िंदगी का कुछ एतबार नहीं

क्यों अंधा न्योता जो दो जने आएँ

ऐसा काम क्यों करे जो दुगना नुक़्सान हो या बालाई ख़र्च आ पड़े

क्यों अंधा न्योता जो दो जने आवें

ऐसा काम क्यों करे जो दुगना नुक़्सान हो या बालाई ख़र्च आ पड़े

क्यों बहिश्त में लातें मारते हो

बुरे काम से क्यों नहीं बचते, क्यों पाप करते हो, अंत क्यों ख़राब करते हो

क्यों गूह में ढेला डालो क्यों छीटें लो

जैसा करोगे वैसा भरोगे, बुरे काम का बुरा अंजाम होता है, बिलावजह अपने सर क्यों मुसीबत मूल लो

क्यों कही क्यों कहाई

क्यों किसी से ऐसी बात कही जाए कि बदले में हमें भी वैसी ही कड़ी बात सुननी पड़े

क्यों न होवे चुड़ैल बनीनी, जिसके बड़े महाजिन हैं

जैसे बुज़ुर्ग वैसी औलाद, जिस के बुज़ुर्ग बड़े जिन होंगे वो यक़ीनन चुड़ैल होगी , बनियों से मज़ाक़ है कि बनीए की बीवी चुड़ैल क्यों ना होगी क्योंकि इस के बुज़ुर्ग महाजन यानी बड़े जिन् हैं

क्यों न होवे चुड़ैल बन्यानी, जिसके बड़े महाजिन हैं

जैसे बुज़ुर्ग वैसी औलाद, जिस के बुज़ुर्ग बड़े जिन होंगे वो यक़ीनन चुड़ैल होगी , बनियों से मज़ाक़ है कि बनीए की बीवी चुड़ैल क्यों ना होगी क्योंकि इस के बुज़ुर्ग महाजन यानी बड़े जिन् हैं

क्यूँकर री तू उतरी पार, क्यूँकर री तू चाली बात, क्यूँकर री तू ने ये घर जाना, क्यूँकर री तू ने मुझे पहचाना

महिलाओं के बहुत बातें करने पर व्यंग्य है कि कोई अतिथि आए तो आवभगत या सेवा-सत्कार करने के बजाय सवालों की बोछाड़ कर देती हैं

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