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चुपड़ी और दो दो

उम्दा भी और ज़्यादा भी, हसब-ए-मंशा और बकसरत, कामयाबी और बहुत से फ़ाइदों के साथ (ऐसे मवाक़े पर मुस्तामल)

दो और दो चार

नपी तुली (बात), बिलकुल सही, जिस के ठीक होने में कोई शक ना हो

सत्तर और दो बहत्तर

(अधिकता को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त) बहुत अधिक, बहुत ज़्यादा, बहुत से, सैंकड़ों

कुछ दो और कुछ लो

आपसी समझ, आदान-प्रदान

कुछ लो और कुछ दो

रुक : कुछ दो और कुछ लो

भूके से कहा दो और दो क्या, कहा चार रोटियाँ

स्वार्थी व्यक्ति के संबंध में कहते हैं

लाद दो लदा दो और लादने वाला भी साथ दो

जो कुछ करना ज़रूरी है वो तुम ही करो, हम से कुछ ना हो सकेगा (हर किस्म का बोझ दूसरों पर डालने वाले के लिए मुस्तामल)

बीनी और दो गोश से

من تنہا ، اکیلا.

दो और देना

दो थप्पड़, घूंसे या जूते या डंडे और मारना , सज़ा में कुछ और इज़ाफ़ा करना

दो बात करो दो चीत करो , मेरा मतलब कुछ और है

मेरे मतलब की कुछ नहीं कहते, मीर मतलब की कहीं

दो जूते लगाइए और कहिए क़ुसूर हुआ

किसी की इंतिहाई ज़िल्लत कर के जब कोई माफ़ी का ख़्वास्तगार होता है तो कहते हैं

चीज़ न राखो अपनी और चोरों गाली दो

रुक : चीज़ ना रखे अलख

तुरई और कद्दू ला'नत ब-हर दो

दोनों का मज़ा एक समान अर्थात दोनों स्वादहीन एवं बे-मज़ा होते हैं

दो दिन की कोतवाली फिर वही खुर्बा और जाली

रुक : दो दिन की चांदनी अलख

मेरे मियाँ के दो कपड़े, सुत्थन नाड़ और बस

बहुत निर्धन है केवल एक पाजामा और बस

नर की दो जगह तौक़ीर नहीं भैंस के और कस्बी के

दोनों जगह माद्दा से काम चलता है, भैंस का नर ऐसा काम नहीं देता जैसे बैल इस लिए उसे उमूमन मार डालते हैं

मेहमान और बुख़ार को अगर खाना न दो तो फि नहीं आते

फ़ाक़े से बुख़ार में फ़ायदा रहता है और मेहमान को खाना ना मिले तो बार बार नहीं आता

दो हाजू की जोरू और सौदागर की घोड़ी जितनी कूदे उतनी ही थोड़ी

नई नवेली दुल्हन के मुताल्लिक़ कहते हैं कि वो जितने नख़रे दिखाए कम है

मेरे मियाँ के दो कपड़े, सुत्थन नाड़ा और बस

बहुत निर्धन है केवल एक पाजामा और बस

साईं का रख आसरा और वाही का ले नाम, दो जग में भरपूर हों जो तेरे सगरे काम

ईश्वर पर भरोसा रख और उसी का नाम ले तो दोनों लोकों में तेरे काम पूरे होंगे

आता तो सब ही भला थोड़ा बहुत कुछ, जाते दो ही भले दलिद्दर और दुख

जो मिले अच्छा जो जाए बुरा

आता तो सभी भला थोड़ा बहुत कुछ, जाता बस दो ही भले दलिद्दर और दुख

जो मिले अच्छा जो जाए बुरा

नाक और दो कान ले कर भागना

ख़ाली हाथ बेसर-ओ-सामान भाग जाना या छुप कर भाग जाना

आता तो सब ही भला, थोड़ा बहुता, कुच्छ, जाते तो दो ही भले, दालिद्दर और दुःख

जो मिले अच्छा जो जाए बुरा

मुर्दों पर कफ़न है और ज़िंदों पर क़बा

तही दस्ती ज़ाहिर करने के लिए मुस्तामल

हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में चुपड़ी और दो दो के अर्थदेखिए

चुपड़ी और दो दो

chup.Dii aur do doچُپْڑی اور دو دو

कहावत

मूल शब्द: चुपड़ी

चुपड़ी और दो दो के हिंदी अर्थ

  • उम्दा भी और ज़्यादा भी, हसब-ए-मंशा और बकसरत, कामयाबी और बहुत से फ़ाइदों के साथ (ऐसे मवाक़े पर मुस्तामल)

English meaning of chup.Dii aur do do

  • double advantageous, as per one's wishes, double the better

چُپْڑی اور دو دو کے اردو معانی

  • Roman
  • Urdu
  • عمدہ بھی اور زیادہ بھی، حسب منشا اور بکثرت، کامیابی اور بہت سے فائدوں کے ساتھ (ایسے مواقع پر مستعمل)

Urdu meaning of chup.Dii aur do do

  • Roman
  • Urdu

  • umdaa bhii aur zyaadaa bhii, hasab-e-manshaa aur bakasrat, kaamyaabii aur bahut se faa.ido.n ke saath (a.ise mavaaqe par mustaamal

खोजे गए शब्द से संबंधित

चुपड़ी और दो दो

उम्दा भी और ज़्यादा भी, हसब-ए-मंशा और बकसरत, कामयाबी और बहुत से फ़ाइदों के साथ (ऐसे मवाक़े पर मुस्तामल)

दो और दो चार

नपी तुली (बात), बिलकुल सही, जिस के ठीक होने में कोई शक ना हो

सत्तर और दो बहत्तर

(अधिकता को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त) बहुत अधिक, बहुत ज़्यादा, बहुत से, सैंकड़ों

कुछ दो और कुछ लो

आपसी समझ, आदान-प्रदान

कुछ लो और कुछ दो

रुक : कुछ दो और कुछ लो

भूके से कहा दो और दो क्या, कहा चार रोटियाँ

स्वार्थी व्यक्ति के संबंध में कहते हैं

लाद दो लदा दो और लादने वाला भी साथ दो

जो कुछ करना ज़रूरी है वो तुम ही करो, हम से कुछ ना हो सकेगा (हर किस्म का बोझ दूसरों पर डालने वाले के लिए मुस्तामल)

बीनी और दो गोश से

من تنہا ، اکیلا.

दो और देना

दो थप्पड़, घूंसे या जूते या डंडे और मारना , सज़ा में कुछ और इज़ाफ़ा करना

दो बात करो दो चीत करो , मेरा मतलब कुछ और है

मेरे मतलब की कुछ नहीं कहते, मीर मतलब की कहीं

दो जूते लगाइए और कहिए क़ुसूर हुआ

किसी की इंतिहाई ज़िल्लत कर के जब कोई माफ़ी का ख़्वास्तगार होता है तो कहते हैं

चीज़ न राखो अपनी और चोरों गाली दो

रुक : चीज़ ना रखे अलख

तुरई और कद्दू ला'नत ब-हर दो

दोनों का मज़ा एक समान अर्थात दोनों स्वादहीन एवं बे-मज़ा होते हैं

दो दिन की कोतवाली फिर वही खुर्बा और जाली

रुक : दो दिन की चांदनी अलख

मेरे मियाँ के दो कपड़े, सुत्थन नाड़ और बस

बहुत निर्धन है केवल एक पाजामा और बस

नर की दो जगह तौक़ीर नहीं भैंस के और कस्बी के

दोनों जगह माद्दा से काम चलता है, भैंस का नर ऐसा काम नहीं देता जैसे बैल इस लिए उसे उमूमन मार डालते हैं

मेहमान और बुख़ार को अगर खाना न दो तो फि नहीं आते

फ़ाक़े से बुख़ार में फ़ायदा रहता है और मेहमान को खाना ना मिले तो बार बार नहीं आता

दो हाजू की जोरू और सौदागर की घोड़ी जितनी कूदे उतनी ही थोड़ी

नई नवेली दुल्हन के मुताल्लिक़ कहते हैं कि वो जितने नख़रे दिखाए कम है

मेरे मियाँ के दो कपड़े, सुत्थन नाड़ा और बस

बहुत निर्धन है केवल एक पाजामा और बस

साईं का रख आसरा और वाही का ले नाम, दो जग में भरपूर हों जो तेरे सगरे काम

ईश्वर पर भरोसा रख और उसी का नाम ले तो दोनों लोकों में तेरे काम पूरे होंगे

आता तो सब ही भला थोड़ा बहुत कुछ, जाते दो ही भले दलिद्दर और दुख

जो मिले अच्छा जो जाए बुरा

आता तो सभी भला थोड़ा बहुत कुछ, जाता बस दो ही भले दलिद्दर और दुख

जो मिले अच्छा जो जाए बुरा

नाक और दो कान ले कर भागना

ख़ाली हाथ बेसर-ओ-सामान भाग जाना या छुप कर भाग जाना

आता तो सब ही भला, थोड़ा बहुता, कुच्छ, जाते तो दो ही भले, दालिद्दर और दुःख

जो मिले अच्छा जो जाए बुरा

मुर्दों पर कफ़न है और ज़िंदों पर क़बा

तही दस्ती ज़ाहिर करने के लिए मुस्तामल

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