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सुकून-ए-क़ल्ब

दिल का इतमीनान, दिल की शांति, आराम, सहायता, चैन और सुख

ख़िल्क़िय्या

प्राकृतिक, फ़ित्री

खिस्यानी बिल्ली खम्बा नोचे

जिसे क्रोध आ रहा हो वह अपनी खीझ या क्रोध दूसरों पर उतारता है, लाचारी में आदमी दूसरों पर क्रोध करता है, लज्जित व्यक्ति दूसरों पर अपनी लज्जा उतारता है, निर्बल की खीझ

सुरूर

मन-मस्तिष्क की शांति या सुकून प्रदान करने वाली अवस्था, ख़ुशी, आनंद, प्रसन्नता, मस्ती, तन्मयता

बे-हिजाबी

बेे-पर्दा होना, बेपर्दगी, घूँघट उठा देना, खुलेबंदों फिरना (स्त्री का)

शरीक-ए-हयात

ज़िंदगी का दोस्त या साथी, अर्थात: जीवनसंगिनी, पत्नी, भार्या, पति

मशवरत

आपस में सोच विचार एवं सलाह या राय का आदान-प्रदान करना, सलाह, मशवरा, परस्पर सुझाव

सितमगर

(प्रायः कविता में) प्रेमिका, माशूक़, महबूब

कोशिश

कोई काम करने के लिए विशेष रूप से किया जानेवाला प्रयत्न, मेहनत, दौड़ धूप, प्रयत्न, प्रयास, चेष्टा, उद्योग, श्रम, उद्यम, उपाय, परिश्रम

बे-नियाज़

जिसे किसी से कुछ लेने की इच्छा न हो निःस्पृह, स्वच्छंद, आज़ाद, बेपरवाह

दीद के क़ाबिल

देखने के लायक़, देखने योग्य

क़ाबिल-ए-दीद

देखने लायक़, अच्छा दिखने वाला

आठ बार नौ त्योहार

सुख-सुविधा और आराम का शौक़ या लगन ऐसा बढ़ा हुआ है कि युग और समय उसको अल्प व्यय नहीं करने देता

चमनिस्तान

ऐसा बाग़ जहाँ फूल ही फूल हों, ऐसी जगह जहाँ दूर तक फूल ही फूल और हरा भरा नज़र आए, वाटिका, चमन, बाग़

'औरत

जाया, भार्या, पत्नी, जोरू

ताग़ूत

शैतान, अत्यन्त निर्दय और अत्याचारी व्यक्ति

मन-भावन

मन को भाने या अच्छा लगने वाला

दादरा

संगीत में एक प्रकार का चलता गाना (पक्के या शास्त्रीय गानों से भिन्न), एक प्रकार का गान, एक ताल

मज़दूर

शारीरिक श्रम के द्वारा जीविका कमाने वाला कोई व्यक्ति, जैसे: इमारत बनाने, कल-कारख़ानों में काम करने वाला, श्रमिक, कर्मकार, भृतक, मजूर

ख़ैर-अंदेश

भलाई की बात सोचने वाला, वह शख़्स जो किसी की भलाई चाहे, शुभचिंतक

मुहावरे

यह भारतीय मुहावरों का एक शब्दकोश है, जो रेख्ता फ़ाउंडेशन की एक पहल है। इसमें सदियों से प्रचलित पारंपरिक कहावतों और मुहावरों का एक मूल्यवान संग्रह शामिल है, जो भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति, समाज और दैनिक जीवन को प्रतिबिंबित करता है। यह शब्दकोश आलोचकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा भाषा और साहित्य के प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और विश्वसनीय संदर्भ स्रोत के रूप में कार्य करता है।

प्रमुख मुहावरे

मुहावरों की सूची

संबंधित परिणाम

ज़ंगी धोने से सफ़ेद नहीं होता

जिसकी बुनियाद में ख़राबी हो उसको सुधारने की कोशिश बेकार है

ज़ंगी की सियाही किसी रंग नहीं जाती

जन्मजात दोष मिटाए नहीं मिटता

ज़ाहिद का क्या ख़ुदा है हमारा ख़ुदा नहीं

ईश्वर सभी पर समान रूप से कृपालु है

ज़ाहिर अज़ शेख़ ओ बातिन अज़ शैतान

ज़ाहिर में नेक लेकिन दरअसल बदकार-ओ-दग़ाबाज़-ओ-मक्कार के मुताल्लिक़ कहते हैं

ज़ाहिर का रहमान बातिन का शैतान

देखने में भला सत्य में बुरा, ऐसे व्यक्ति के संबंध में कहते हैं जिसका बाहरी अच्छा और अन्तःकरण ख़राब

ज़ाहिर के रंग ढंग हैं

दिखावा और दिखावे की बातें हैं

ज़ाहिर की दुनिया है

दिखावे की दुनिया है, दुनिया दिखावट पर जाती है, दुनिया दिखावे को पसंद करती है

ज़ाहिर की टीप टल्लो है

ज़ाहिर की नमूद और जे़ब ज़ीनत है वर्ना हक़ीक़त कुछ नहीं

ज़ाहिरी रंग ढंग हैं

दिखावा या बनावट की बातें हैं

ज़ालिम अपनी क़ब्र आप खोदता है

अत्याचारी अपनी मौत आप बुलाता है, अत्याचारी अत्याचार के लिए दंड पाएगा

ज़ालिम का पैंडा ही निराला है

जिधर से अत्याचारी गुज़रे कोई उधर से नहीं जाता, अन्याय के बहुत से रास्ते हैं अत्याचारी के पास सब से अलग रास्ता होता है

ज़ालिम का ज़ोर सर पर

अत्याचारी से सभी डरते हैं

ज़ालिम की बेल नहीं बढ़ती

अत्याचारी की संतान नहीं बढ़ती

ज़ालिम की चाल ही और है

अत्याचारी के तरीक़े अलग होते हैं, ज़ालिम के तरीक़े मुख़्तलिफ़ होते हैं

ज़ालिम की दाद ख़ुदा देता है

अत्याचारी एवं क्रुर को ख़ुदा ही दंड देता है, सताने वाले का न्याय ख़ुदा करता है, सताने वाले को ख़ुदा दंड देता है

ज़ालिम की दाद ख़ुदा घर

अत्याचारी एवं क्रुर को ख़ुदा ही दंड देता है, सताने वाले का न्याय ख़ुदा करता है, सताने वाले को ख़ुदा दंड देता है

ज़ालिम की रस्सी दराज़ है

अत्याचारी अधिक दिनों तक जीवित रहता है, क्यूँकि उस को मारना कठिन होता है

ज़ालिम की रस्सी दराज़ होती है

जो अत्याचार करता है उसकी आयु अधिक होती है

ज़ालिम की रस्सी दराज़ थी

जो अत्याचार करता है उसकी आयु अधिक होती है

ज़ालिम की 'उम्र कोताह होती है

अत्याचारी बहुत दिनों तक जीवित नहीं रहता

ज़ालिम फूलता फलता नहीं

ज़ुलम इंसान को पनपने नहीं देता, ज़ालिम इंसान औलाद और मुराद से बेनसीब रहता है, ज़ालिम नामुराद-ओ-ना काम रहता है

ज़ालिम सर सब्ज़ नहीं होता

अत्यचारी को उसका अत्याचार पनपने नहीं देता, अत्याचारी संतान और इच्छा से अभागा रहता है, अत्याचारी वंचित एवं असफ़ल रहता है

ज़ालिम तेरा ज़ुल्म कब तक रहेगा, कभी तो ख़ुदा हमारी भी सुनेगा

पीड़ित तंग आकर कहता है एक दिन पीड़ित की विनती भी ख़ुदा सुनता है और अत्याचारी के अत्याचार से मुक्ति मिलती है

ज़ालिम ज़ुल्म करे, नेक बख़्त बर्ग भरे

अत्याचारी अत्याचार करता है भाग्याशाली भुगतते हैं

ज़ामिन न होवे बाप का, ये ज़ामिनी घर पाप का

उत्तरदायित्व बनना या ज़मानत देना बहुत बुरा है, इस से इंकार कर देना अच्छा है

ज़ात गँवाई, पेट न भरा

कुछ लोग लालच के कारण अपने सिद्धांत एवं धर्म परिवर्तन करते हैं उनके संबंध में कहा जाता है कि अपमानित भी हुए और लाभ भी न हुआ, ख़ुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम

ज़ात का बैरी ज़ात, काठ का बैरी काठ

अपने सगे संबंधी मनुष्य के अधिक दुश्मन होते हैं जिस तरह यदि किसी लोहे के औज़ार के साथ लकड़ी का दस्ता अर्थात बेंट इत्यादि न लगाया जाए तो वो काटता नहीं

ज़ात के बुलाए बराबर बैठे कम ज़ात बुलाए नीचे बैठे

एक पदवी वालों से समान व्यवहार किया जाता है और निम्न पद वाले से घृणा का, अपने समान आदमियों का सम्मान करनी चाहिए, नीच कमीनों को नीचे बैठना चाहिए

ज़ात के बुलय्या बराबर बैठा कम ज़ात के बुलय्या नीचे बैठा

एक पदवी वालों से समान व्यवहार किया जाता है और निम्न पद वाले से घृणा का, अपने समान आदमियों का सम्मान करनी चाहिए, नीच कमीनों को नीचे बैठना चाहिए

ज़ात की बेटी ज़ात ही में जाती है

कुलीन का रिश्ता कुलीन में ही होता है, कुलीन का विवाह कुलीन के साथ ही होता है

ज़ात में तुर्क , बाजे में हुड़ुक

(हिंदू) मुसलमान और बाजा बहुत शोर मचाते हैं

ज़ात पड़ी खोह में और रोटी पड़ी मुँह में

जो व्यक्ति रुपए के आगे शालीनता का मुल्य न जाने

ज़ात-पात न पूछे कोए हर को भजे सो हर का होए

जो शख़्स मेहनत और रियाज़त करता है मक़बूल होता है और इस की ज़ात को कोई नहीं पूछता है

ज़बान आज खुली कल बंद

ज़िंदगी का कोई भरोसा नहीं

ज़बान बदलने से घर बदलना बेहतर है

वचन न निभाने से हानि स्वीकार लेना अच्छा और ज़रुरी है

ज़बान गोश्तीन अस्त तेग़-ए-आहनी

(फ़ारसी कहावत उर्दू में प्रयुक्त) ज़बान गोश्त का एक लोथड़ा होकर तलवार का काम करती है, सर उड़ाती है

ज़बान ही हाथी पर चढ़ावे, ज़बान ही सर कटावे

ज़बान ही उन्नति एवं सौभाग्यता का कारण है और ज़बान ही विनाश एवं तबाही का कारण है

ज़बान ही ज़बान है

ख़ाली ख़ूली बातें हैं, ज़बानी जमा ख़र्च है, मौखिक कार्यवाही करना

ज़बान हिलाना मुश्किल है

कोई बोल नहीं सकता, कोई आपत्ति नहीं कर सकता, कोई एतराज़ नहीं कर सकता

ज़बान जने एक बार, माँ जने बार बार

ज़बान का वचन एक ही होता है, ज़बान से एक बार जो कह दिया सो कह दिया, उस से पलटना नहीं चाहिए

ज़बान के आगे खाई-ख़ंदक़ बराबर है

जो मुँह में आया वह बक दिया, बिना सोचे समझे जो मुँह में आया बोल दिया

ज़बान के आगे ख़ंदक़ है

बहुत बढ़ बढ़ कर बातें करने वाले के बारे में कहते हैं

ज़बान के आगे ख़ंदक़ नहीं

कोई किसी की ज़बान बंद नहीं कर सकता, नहीं पकड़ सकता

ज़बान के तले ज़बान है

दो भिन्न प्रकार की बात करना

ज़बान क्या चली दो हल चल गए

जब कहते हैं कि बहुत बातें बिना सोचे समझे की जाएँ, बिना सोचे समझे बक-बक करना

ज़बान में बवासीर है

उस व्यक्ति के बारे में कहते हैं जो बहुत बक्की हो

ज़बान फुल झड़ी को मात करती है

तड़ाक़ तड़ाक़ बे झिजक बातें करना, ज़बान का क़ैंची की तरह चलना

ज़बान से बेटा बेटी पराए हो जाते हैं

मानव को ज़बान का बड़ा पास रखना चाहिए, बातों से व्यक्ति संतान को भी अपना विरोधी बना लेता है इसलिये ख़्याल रखना चाहिए कि ज़बान से क्या बात निकलती है

ज़बान से बेटा बेटी पराए होते हैं

मानव को ज़बान का बड़ा पास रखना चाहिए, बातों से व्यक्ति संतान को भी अपना विरोधी बना लेता है इसलिये ख़्याल रखना चाहिए कि ज़बान से क्या बात निकलती है

ज़बान से ख़ंदक़ पार

शेख़ी ही शेख़ी है कर कुछ नहीं सकते

ज़बान से निकली अंबर चढ़ी

बात मुँह से निकली और प्रसिद्ध हुई

ज़बान-ए-ख़ल्क़ को नक़्क़ारा-ए-ख़ुदा समझो

जो बात संसार की ज़बाँ पर होती है आमतौर पर सच्च और सही होती है

ज़बान-ए-ख़ल्क़ नक़्क़ारा-ए-ख़ुदा

जो बात जनता की ज़बान पर हो वह अधिकतर सत्य निकलती है

ज़बान-ए-शीरीं मुल्क-गीरी

नर्म शब्दों और मीठी ज़बान से दुनिया जीत ली जाती है

ज़बान-ए-यार-ए-मन-तुर्की-ओ-मन-तुर्की-नमी-दानम

फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल, मेरे दोस्त की ज़बान तुर्की है और में तुर्की ज़बान जानता नहीं, जब किसी बात या किसी की ज़बान समझ में नहीं आती तो ये कहते हैं

ज़बानी जमा' ख़र्च है

कोरी बात करना

ज़बरदस्त का बीघा सो बिस्वे का

विवश व्यक्ति का भाग भी बड़ा होता है

ज़बरदस्त का ठेंगा सर पर

शक्तिशाली व्यक्ति एवं सत्ता वाले के सामने बस नहीं चलता, शक्तिशाली के आगे सब को दबना पड़ता है, उसकी माननी पड़ती है

ज़बरदस्त के बीसों बिस्वे

शक्तिशाली एवं प्रभावी व्यक्ति हमेशा विजयी रहता है

ज़बरदस्त के बिस्वे बीस

शक्तिशाली एवं प्रभावी व्यक्ति हमेशा विजयी रहता है

ज़बर्दस्त की लाठी सर पर

शक्तिशाली का सब कहा मानते हैं

ज़बरदस्त मारे और रोने न दे

ऐसे अवसर पर प्रयुक्त जब कोई व्यक्ति अत्यचार करे और शिकायत भी न करने दे

ज़बरदस्त सब का जँवाई

शक्तिशाली व्यक्ति का सभी लोग दामाद की तरह आदर करते हैं अर्थात उससे सभी दबते हैं

ज़हीन की दूर बला

बुद्धिमान को कोई वस्तु होनि नहीं पहुँचा सकती

ज़हर हथेली पर रखा हो बे खाए नहीं मरता

अर्थात अपराध एवं भूल के बिना दंड की कोई आशंका नहीं

ज़हर के हाथ में लेने से बे खाए नहीं मरता

अपराध किए बिना दंड नही मिलता, जुर्म किए बिना सज़ा नहीं होती

ज़हर को ज़हर मारता है

ज़हर का असर ज़हर से समाप्त किया जाता है, विष का प्रभाव विष से ही दूर किया जाता है, कोई सरकश जब अपने से बड़ी ताक़त वाले से दब जाता है तो कहते हैं

ज़ख़्मी दुश्मनों में दम ले तो मरे न ले तो मरे

किसी काम के करने या न करने में दोनों तरह से हानि होना, शत्रुओं में घिर कर हानि ही होती है

ज़माना आँखों से गुज़र चुका है

जब अपने बारे में ये बताना हो कि बहुत अनुभव हो चुका है तो कहते हैं

ज़माना बदले तुम भी बदलो

अगर ज़माना तुम्हारे साथ नहीं तो तुम ज़माने का साथ दो (कब : ज़माना बा तो ना साज़िद अलख

ज़माना देख डाला है

बड़ा अनुभवी है, बड़ा तजरबाकार है

ज़माना देखे बैठे हैं

हम ने इन आँखों से नामालूम क्या क्या देख डाला है, अधिक अनुभवी हैं, बहुत तजरबाकार हैं

ज़माना एक रंग पर नहीं रह्ता

किसी के परिस्थितियाँ एक समान नहीं रहतीं, समय एक जैसा नहीं रहता

ज़माना एक सा नहीं रह्ता

समय और परिस्थितियाँ हमेशा बदलती रहती हैं

ज़माना गिर्गिट की तरह रंग बदलता है

समय और परिस्थितियाँ कभी एक सी नहीं रहतीं, समय कभी कुछ कभी कुछ होता है

ज़माने की हवा एक हालत पर नहीं रहती

समय एक सा नहीं रहता, वक़्त और हालात हमेशा बदलते रहते हैं

ज़मीन दिगर, आसमान दिगर

ज़मीन की कहना आसमान की सुनना, एक दूसरे की ज़िद होने के मौक़ा पर बोलते हैं

ज़मीन को मारे, ज़मीन-दार चौंके

दुर्बल को मार कर शक्तिशाली पर भय डालने के अवसर पर प्रयुक्त

ज़मीन पाँव के नीचे नहीं ठहरती

बुरा ज़माना है, कोई किसी का नहीं, अधिक घबराहट है

ज़मीन पाँव के नीचे नहीं थमती

बुरा ज़माना है, कोई किसी का नहीं, बहुत घबराहट है

ज़मीन पाँव के नीचे से निकली जाती है

बुरा ज़माना है, कोई किसी का नहीं, बहुत घबराहट है

ज़मीन फटे और समा जाऊँ

अत्यधिक लज्जित एवं जीवन उचाट हो जाने के स्थान पर बोलते हैं

ज़मीन सख़्त है आसमान दूर

विवश हो जाने के स्थान पर बोलते हैं

ज़मीन से आसमान नहीं मिलता

इन दोनों में बहुत दूरी है, दो विपरीत चीज़ें कभी आपस में नहीं मिलतीं

ज़मीन टल जाए और ये न टले

ये बला तो आके रहेगी, ख़ाह कुछ हो, ये मुसीबत तो बहरसूरत नाज़िल होगी, ये शख़्स तो चाहे कुछ भी हो अपनी जगह से हल्लेगा नहीं, ये हुक्म तो हर सूरत में वाजिब उल-तामील है

ज़मीन टुल्लद न टुल्लद मिर्ज़ा साहिब

(ज़मीन जुंबद् न जुंबद् गुल मुहम्मद के अनुमान पर अवामी उर्दू वाक्य) अपनी बात पर अड़ जाने वाले या अपनी जगह से न हिलने वाले के संबंध में कहते हैं

ज़मीन उठ खड़ी हुई है

उफ़्तादा और बेतरद्दुद थी अब इस में तरद्दुद होने लगा

ज़मीनदार की जड़ हरी

ज़मीनदार हमेशा मौज करता है अर्थात 'ऐश का जीवन व्यतीत करता है

ज़मीन-दार को किसान, बच्चे को मसान

ज़मींदार को किसान हानि पहुँचाता है और बच्चे को मसान

ज़मीन-दारी , दोब की जड़ है

भू-अधिकार में सदैव लाभ होता है, भू-अधिकार टिकाऊ होता है

ज़मीन-दारी , खेड़े की दोब है

भूमि स्वामित्व स्थायी है, भूमि स्वामित्व में हमेशा लाभ होता है

ज़मीन-दारी दूब की जड़ है

ज़मींदारी बहुत टिकाऊ और स्थायी होती है

ज़न ज़मीन ज़र तीनों लड़ाई के घर

महिला, भूमि और धन, इन तीनों चीज़ से दुनिया में झगड़े पैदा होते हैं, यह तीनों चीज़ें लड़ाई का कारण बनती हैं

ज़नान-ए-पर्दा-नशीं मस्लहत चुनाँ दानंद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) पर्दे में रहने वाली औरतें मस्लहत किस तरह समझ सकती हैं

ज़न्नल-मूमिनीना-ख़ैरन

(अरबी कहावत उर्दू में प्रयुक्त) धर्मनिष्ठ लोगों का विचार भला होता है, वह किसी के संबंध में बुरा विचार नहीं करते

ज़र बल न बाँह बल

न रुपया है न हाथों में शक्ति है

ज़र बल न ज़ोर बल

न रूपया है न शरीर में बल है, हर प्रकार से निर्बल है

ज़र दार का सौदा है बे ज़र का ख़ुदा हाफ़िज़

धनवान व्यक्ति जो चाहे ले सकता है निर्धन कुछ नहीं कर सकते

ज़र गया ज़र्दी छाई, ज़र आया सुर्ख़ी आई

दौलत के हानि से दुख होता है एवं आदमी उदास नज़र आने लगता है और दौलत मिलने से ख़ुशी होती है

ज़र है तो घर है नहीं खंडर है

रुपया पैसा हो तो घर अच्छ्াी हालत में नज़र आता है नहीं तो खंडर बिन जाता है

ज़र हे तो नर है नहीं तो कुम्हार का ख़र है

निर्धन व्यक्ति किसी काम का नहीं होता, निर्धन व्यक्ति का कोई महत्व नहीं होता

ज़र हज़ार ज़ेब लगाता है बे-ज़र बिगड़ा नज़र आता है

रुपया से सब कुछ हो जाता है दरिद्र या कंगाल किसी काम का नहीं

ज़र का तो ज़र्रा भी आफ़्ताब है, बे-ज़र की मिट्टी ख़राब है

धन का तो एक कण भी सूर्य के समान है, धनहीन की ही बर्बादी होती है

ज़र के आगे ज़ोर नहीं चलता

रुपये-पैसे वाले के सामने शक्तिशाली आदमी कुछ नहीं कर सकता

ज़र को ज़र ही खींचता है

धन से धन पैदा होता है

ज़र नीस्त 'इश्क़ टें टें

कंगाली में मुहब्बत नहीं होती, माली सामर्थ्य के बिना प्रेम का दावा बेकार एवं अयोग्य भरोसा होता है

ज़र फैलाया और कार बर आया

धन ख़र्च करने से हर काम हो जाता है

ज़र ज़र कशद दर जहाँ गंज गंज

(फ़ारसी कहावत उर्दू में प्रयुक्त) दुनिया में रूपया रूपए को खींचता है और ख़ज़ाना खज़ाने को

ज़र, ज़ोर, ख़ुदा-दाद है

ये चीज़ें आदमी स्वयं प्राप्त नहीं कर सकता, धन एवं बल ख़ुदा का दिया हुआ उपहार है

ज़रा में औलिया ज़रा में भूत

चंचल स्वभाव, थोड़ी सी बात में ख़ुश और थोड़ी सी बात में नाराज़ हो जाने वाला

ज़रा सा मुँह बड़ा पेट

लालची, लोभी या बहुत खाने वाले बच्चे के बारे में कहते हैं

ज़रा सा मुँह बड़ी बातें

जब कोई छोटी उम्र वाला बड़े मुद्दों पर बात करता है, तो कहते हैं

ज़रा सी बिटिया गज़ भर की चुटिया

योग्यता की कमी और घमंड की ज़्यादती

ज़रा ज़रा सा कर लिया और अपना पल्ला भर लिया

थोड़ा थोड़ा संचय करने से बहुत हो जाता है

ज़राफ़त ख़ान-ए-आज़र्म-ओ-जंग अस्त

(फ़ारसी कहावत उर्दू में प्रयुक्त) हँसी मज़ाक़ लड़ाई झगड़े का घर है

ज़राफ़त-ए-आतिश अफ़रोज़ जुदाई अस्त

(फ़ारसी कहावत उर्दू में प्रयुक्त) हँसी मज़ाक़ से जुदाई की आग रौशन होती है अर्थात दिल-लगी मज़ाक़ में अधिक्तर मन दुखी हो जाता है, कभी कभी हँसी हँसी में लड़ाई होने लगती है और लोगों में मेल था जुदाई हो जाती है

ज़राफ़त-ए-बिस्यार हुनर नदीमाँ अस्त ओ 'ऐब-ए-हकीमाँ

(फ़ारसी कहावत उर्दू में प्रयुक्त) बहुत अधिक हँसी दिल लगी मुसाहिबों के लिए हुनर है और ज्ञानियों के लिए दोष

ज़रबफ़्त के लिबास में टाट का टुकड़ा

सुंदर वस्तु में ख़राब वस्तु सम्मिलित कर देना, लगा देना, मख़मल में टाट का पैवंद या चिप्पी

ज़र-दादन-ओ-दर्द-ए-सर-ख़रीदन

अपनी संपत्ति खोना और मुफ़्त की परेशानी उठाना

ज़र-दार मर्द ना हर घर में रहे कि बाहर

सोने से पुरूष का शासन और प्रताप है घर में भी और बाहर भी

ज़र-मी-ख़ूरम

(फ़ारसी कहात उर्दू में मुसतामल) अपने रुपय को खाना इस मौक़ा पर बोलते हैं जब अपना पैसा ख़र्च हुआ हो और इस से फ़ायदा ना उठाया जाये

ज़र्रा रा बा ख़ुर्शीद चे निस्बत

कण की सूर्य से क्या तुलना, निम्न का श्रेष्ठ से कोई जोड़ नहीं है

ज़रूरत ईजाद की माँ है

आवश्यकता के करण नई नई ईजादें हुई हैं

ज़रूरत का कोई क़ानून नहीं

मनुष्य जैसा अवसर देखता है आवश्यकता पड़ने पर वैसा ही करता है, किसी नियम का प्रतिबंध नहीं होता

ज़रूरत में सब रवा है

धन में जो काम किया जाए वह सब ठीक है

ज़ौक़ में शौक़ दस्तूरी में बच्चा

निशुल्क या लगाव के काम में कोई लाभ प्राप्त हो जाने के अवसर पर या निशुल्क आय से संबंधित कहते हैं

ज़ौक़ में शौक़ नफ़ा' में लड़का

निशुल्क या लगाव के काम में कोई लाभ प्राप्त हो जाने के अवसर पर या निशुल्क आय से संबंधित कहते हैं

ज़ौक़-ए-चमन ज़े-ख़ातिजर-ए-बुलबुल नमी-रवद

चमन का शौक़ बुलबुल के दिल से नहीं जाता यानी जिस बात का किसी को शौक़ हो वो दिल से नहीं जाती

ज़ौक़-ए-चमन_ज़े_ख़ातिर-ए-सय्याद मी-रवद

आखेटक के हृदय मे वाटिका का मोह शेष नहीं रहा अर्थात जो कार्य स्वयं की भावना से किया जाता है उसमें अपार हर्ष का अनुभव होता और जो कार्य आवश्यकता की पूर्ती के लिए विवश्तापूर्वक करना पड़ता है उसमें आनंद शेष नहीं रहता और प्रत्येक दिन का दर्शन आनंद और अभिलाषा का अंत कर देता है

ज़ौक़-ए-गुल चीदन अगर दारी ब-गुल्ज़ार बेरौ

अगर तुझे फूल चुनने का शौक़ है तो किसी बाग़ में जाओ, अर्थात अगर तुम किसी उद्देश्य में विजय प्राप्त करना चाहते हो तो घर से निकलो और उस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए उचित उपाय करो, बिना थोड़ी दौड़-धूप किए घर बैठे रहने से उद्देश्य पूर नहीं हो सकता

ज़ेरों से शेर होते हैं

छोटे कमज़ोर बच्चे से ही बड़ा एवं ताक़तवर आदमी बनता है

ज़ेवर रजे का , सिंघार और भूके का अधार है

ज़ेवर दौलतमंदों के लिए ज़ीनत का बाइस और ग़रीबों का सहारा है

ज़िंदा है तो क्या मरी तो क्या

अस्तित्व बेकार है, जीवित रहना या न रहना सब समान है

ज़िंदा रही तो क्या मरी तो क्या

अस्तित्व बेकार है, जीवित रहना या न रहना सब समान है

ज़िंदगी चलती फिरती छाओं है

जीवन अस्थिर है, दुनिया अविश्वसनीय है

ज़िंदगी ज़िंदा दिली का नाम है

दुनिया में आदमी को हँसमुख एवं अच्छे स्वभाव का होना चाहिये हतोत्साहित व्यक्ति का जीवन बेकार है

ज़ियारत-ए-बुज़ुर्गां-कफ़्फ़ारा-ए-गुनाह

बुज़ुर्गों की ज़ियारत से गुनाह माफ़ हो जाते हैं

ज़ोर बादशाह दाँव वज़ीर है

पहलवानों की मिसल है, ताक़त की तारीफ़ है ताक़त तदबीर से अफ़ज़ल दर्जा रखती है बादशाह जस्सी ताक़त और वज़ीर जैसी चालाकी होशयारी

ज़ोर के आगे ज़र्ब नहीं चलती

शक्तिशाली आदमी पर साधारण प्रहार का असर नहीं होता, शक्तिशाली आदमी चोट नहीं खाता, शक्तिशाली पर कोई दांव नहीं चलता

ज़ोर के आगे ज़ुल्म नहीं चलता

शक्तिशाली पर दुरुपयोग नहीं किया जा सकता, ताक़तवर के सामने सब बेकार है

ज़ोर नहीं ज़ुल्म नहीं, 'अक़्ल की कोताही

ज़ोर या ज़ुल्म इतना कष्टदायक नहीं होता जितना मूर्ख होता है

ज़ोर थोड़ा, ग़ुस्सा बहुत, मार खाने की निशानी

दुर्बल क्रोधित व्यक्ति सामान्यतया मार खाता है

ज़ुलैख़ा पढ़ी पर ये न जाना 'औरत है या मर्द

किसी बात या घटनाक्रम को प्रारंभ से अंत तक सुनना या पढ़ना किन्तु इस पर बिल्कुल ध्यान न देना

ज़ुलैख़ा तो सारी पढ़ गए पर ये न जाना कि वो 'औरत थी या मर्द

किसी बात या घटना को प्रारंभ से अंत तक सुनना या पढ़ना किन्तु इस पर बिल्कुल ध्यान न देना

ज़ुलैख़ा ज़न है कि मर्द

किसी बात या घटनाक्रम को प्रारंभ से अंत तक सुनना या पढ़ना किन्तु इस पर बिल्कुल ध्यान न देना

ज़ुल्म की टहनी कभी फलती नहीं

अत्याचार का परिणाम अच्छा नहीं होता

ज़्यादा मार में तौबा भूल जाती है

कष्ट सहते सहते आदमी असंवेदनशील हो जाता है

ज़्यादा मिठास में कीड़े पड़ जाते हैं

सीमा से अधिक अच्छा स्वभाव हानिकारक होता है, सीमा से अधिक मेल जोल से संबंध बिगड़ जाते हैं

संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .

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