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सुकून-ए-क़ल्ब

दिल का इतमीनान, दिल की शांति, आराम, सहायता, चैन और सुख

ख़िल्क़िय्या

प्राकृतिक, फ़ित्री

खिस्यानी बिल्ली खम्बा नोचे

जिसे क्रोध आ रहा हो वह अपनी खीझ या क्रोध दूसरों पर उतारता है, लाचारी में आदमी दूसरों पर क्रोध करता है, लज्जित व्यक्ति दूसरों पर अपनी लज्जा उतारता है, निर्बल की खीझ

सुरूर

मन-मस्तिष्क की शांति या सुकून प्रदान करने वाली अवस्था, ख़ुशी, आनंद, प्रसन्नता, मस्ती, तन्मयता

बे-हिजाबी

बेे-पर्दा होना, बेपर्दगी, घूँघट उठा देना, खुलेबंदों फिरना (स्त्री का)

शरीक-ए-हयात

ज़िंदगी का दोस्त या साथी, अर्थात: जीवनसंगिनी, पत्नी, भार्या, पति

मशवरत

आपस में सोच विचार एवं सलाह या राय का आदान-प्रदान करना, सलाह, मशवरा, परस्पर सुझाव

सितमगर

(प्रायः कविता में) प्रेमिका, माशूक़, महबूब

कोशिश

कोई काम करने के लिए विशेष रूप से किया जानेवाला प्रयत्न, मेहनत, दौड़ धूप, प्रयत्न, प्रयास, चेष्टा, उद्योग, श्रम, उद्यम, उपाय, परिश्रम

बे-नियाज़

जिसे किसी से कुछ लेने की इच्छा न हो निःस्पृह, स्वच्छंद, आज़ाद, बेपरवाह

दीद के क़ाबिल

देखने के लायक़, देखने योग्य

क़ाबिल-ए-दीद

देखने लायक़, अच्छा दिखने वाला

आठ बार नौ त्योहार

सुख-सुविधा और आराम का शौक़ या लगन ऐसा बढ़ा हुआ है कि युग और समय उसको अल्प व्यय नहीं करने देता

चमनिस्तान

ऐसा बाग़ जहाँ फूल ही फूल हों, ऐसी जगह जहाँ दूर तक फूल ही फूल और हरा भरा नज़र आए, वाटिका, चमन, बाग़

'औरत

जाया, भार्या, पत्नी, जोरू

ताग़ूत

शैतान, अत्यन्त निर्दय और अत्याचारी व्यक्ति

मन-भावन

मन को भाने या अच्छा लगने वाला

दादरा

संगीत में एक प्रकार का चलता गाना (पक्के या शास्त्रीय गानों से भिन्न), एक प्रकार का गान, एक ताल

मज़दूर

शारीरिक श्रम के द्वारा जीविका कमाने वाला कोई व्यक्ति, जैसे: इमारत बनाने, कल-कारख़ानों में काम करने वाला, श्रमिक, कर्मकार, भृतक, मजूर

ख़ैर-अंदेश

भलाई की बात सोचने वाला, वह शख़्स जो किसी की भलाई चाहे, शुभचिंतक

मुहावरे

यह भारतीय मुहावरों का एक शब्दकोश है, जो रेख्ता फ़ाउंडेशन की एक पहल है। इसमें सदियों से प्रचलित पारंपरिक कहावतों और मुहावरों का एक मूल्यवान संग्रह शामिल है, जो भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति, समाज और दैनिक जीवन को प्रतिबिंबित करता है। यह शब्दकोश आलोचकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा भाषा और साहित्य के प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और विश्वसनीय संदर्भ स्रोत के रूप में कार्य करता है।

प्रमुख मुहावरे

मुहावरों की सूची

संबंधित परिणाम

रंडवा बैल जी का जलापा

कम हिम्मत, पस्त हिम्मत, काम चोर

रंग-रेज़ होते तो अपनी दाढ़ी रंगते

यदि किसी बात के योग्य होते तो तरक़्क़ी करते

राई भर नाता और गाड़ी भर आश्नाई

थोड़ा सा या दूर का रिश्ता भी बहुत सी या नज़दीकी बैठक पर वरीयता रखता है

राई भर सगाई पेठा भर प्रीत

ज़रा सा रिश्ता बहुत सी मुहब्बत से बेहतर है

राँड बेटी मर गई , जन्म सुधर गया

हिंदूओं में रांड की शादी नहीं करते उस की बहुत हिफ़ाज़त करनी पड़ती है अगर मर जाये तो ख़ुश होते हैं

राँड भाँड , साँड बिगड़े बुरे

इन (तीनों) से बिगाड़नी नहीं चाहिए ना ज़्यादा अज़ी्यत पहुंचाते हैं तीनों ग़ुस्से में हूँ तो नुक़्सान पहुंचाते हैं इस लिए उन से बना कर रखनी चाहिए

राँड का रोना , बाज़ार का सौदा , किस ने सुना

इन दोनों की दादरसी नहीं होती

राँड का साँड , छिनाल का छिनरा

रांड और रंडी का बेटा दोनों बद चिलिम होते हैं

राँड का साँड साैदागर का घोड़ा, खावे बहुत चले थोड़ा

बेसूरा और लाड-प्यार में पला हुआ व्यक्ति किसी योग्य नहीं होता दोनों हराम-ख़ोर होते हैं इन से कोई काम नहीं किया जाता

राँड के आगे गाली क्या

रुक : रांड से प्रिय कोसना किया

राँड के चर्ख़े की तरह चला जाता है

जो काम कभी रुके ही नहीं अथवा जो आदमी हमेशा चलता-फिरता ही रहे उसके लिए कहा जाता है

राँड की गाँठ में माल का लोक

राँड के पास रुपये की कमी होती है

राँड की राँड

बेवा की बेटी बेवा , बहुत मुफ़लिस, कंगाल

राँड को बेटे का बल , रंडवे को पैसे का बल

रांड को बेटे का सहारा या भरोसा होता है और रंडवे को रुपय पैसे का, रांड का बेटा उस की ताक़त होता और रंडवे रुपया पैसा

राँड मरे , न खंडर ढए

रांड और खन्डर की उम्र बहुत तवील होती है

राँड नपूती करना के घर मंडी , 'आशिक़ों के घर कड़ाका

(ओ) रंडी या माशूक़ा के घर हलवे मांडे, और उन पर पैसा नचावर करने वालों के घर फ़ाक़ा

राँड रहे जो रंडवे रहने दें

बेवा औरतें बदचलन ना हूँ अगर मर्द उन का पीछा छोड़ दें

राँड रोवे कँवारी रोवे, साथ लगी सत-ख़स्मी रोवे

वहाँ कहते जहाँ कोई झूठी सहानुभूति प्रकट करे

राँड साँड, जोगी, सेढ़ी, सन्यासी, उनसे बचे तो लेवे काशी

रांड, सांड, बुलंद सीढ़ी और सन्यासियों का ख़ौफ़ ज़्यादा होता है दुनिया में ये चीज़ें इंसान को नुक़्सान पहुंचाती हैं अगर उन से बच्चे तो ख़ुदा की इबादत करने चाहिए

राँड साँड, जोगी, सेढ़ी, सन्यासी, उनसे बचे तो सेवे काशी

रांड, सांड, बुलंद सीढ़ी और सन्यासियों का ख़ौफ़ ज़्यादा होता है दुनिया में ये चीज़ें इंसान को नुक़्सान पहुंचाती हैं अगर उन से बच्चे तो ख़ुदा की इबादत करने चाहिए

राँड से बढ़ कर कोसना नहीं

रुक : रांड से प्रिय अलख

राँड से परे कोसना ही नहीं

स्त्री को राँड कहने से बढ़ कर कोई गाली नहीं, राँड कहना स्त्री के लिए सबसे बड़ा श्राप है

राँड से परे कोसना क्या

स्त्री को राँड कहने से बढ़ कर कोई गाली नहीं, राँड कहना स्त्री के लिए सबसे बड़ा श्राप है

राँडा गया लुगाई को , आप लाए या भाई को

जहां कोई काम करने वाला पहले अपने लिए करे फिर दूसरे के लिए तो कहते हैं अपनी ज़रूत दोस्वे की ज़रूरत पर मुक़द्दम है इस लिए ज़रूरतमंद पहले अपनी ज़रूरत पूरी करता है

राँधो न समझाओ मुझे बैठे खिलाओ

ख़ुदग़रज़ पेटू की निस्बत कहते हैं तुम कुछ ही करो, किसी काम के लिए ना कहो खाने के लिए दो, मेरा पेट भर दो

राँग हीरे को काटता है

कभी कमज़ोर भी मज़बूत पर विजयी हो जाता है

राब न राबड़ी बे उठे खाबड़ी

कोई अच्छी या बुरी बात नहीं कही और यूंही तलवार निकाल ली, ख़्वाहमख़्वाह नाराज़ हो गए

राधा को याद करो

अपने काम से काम रक्खो, हम से तुम्हारा कुछ संबंध नहीं, अपने घर प्रसन्न रहो

राधा को याद कीजिए

जाओ हुआ खाओ हमें कुछ पर्वा नहीं

राग भी अपने वक़्त का अच्छा होता है

हर चीज़ अपने समय पर अच्छी होती है

राह चले या पास बसे , जब जानिये

आदमी सफ़र और पड़ोस में रह कर पहचाना जाता है

राह छोड़ कर चले तुरत धोका खाए

राह-ए-रास्त छोड़कर बुरे ढंग इख़तियार करने के नतीजे में हमेशा धोका खाना पड़ता है

राह ही राह, सो राह ही रा, राह ही राह, सो यही है अपना

जो सब की शैली है वही अच्छी है, जो दूसरों की शैली है वही अपनी है

राह पड़े जानए या बाह पड़े जानए

आदमी की अस्लियत हमसफ़र होने या वास्ता पड़ने से मालूम होती है

राज हट , बालक हट , तिर्या हट , जोगी हट

राजा, बच्चा औरत और फ़क़ीर जो दिल में आए करते हैं किसी की नहीं मानते

राज का राज में , नाज का नाज में , ब्याज का ब्याज में , समाज का समाज में

इस मौक़ा पर मुस्तामल जहां ये कहना हो कि हर बात मौक़ा-ओ-महल के मुताबिक होना चाहिए

राजा आगे राज, पीछे छलनी न छाज

विधवा महिला कहती है कि पति के जीवन में ऐश नसीब था उस की मृत्यु के बा'द कुछ भी न रहा

राजा भीम की क़ज़ा राम की रज़ा

जब मृत्यु आती है तो बड़े बड़े नहीं बच सकते

राजा छोड़े नगरी जो भावे सो ले

राजा यदि शहर छोड़ दे तो जिस का दिल चाहे क़ब्ज़ा करे

राजा छुए और रानी होए

जिस पर राजा मेहरबानी करे वही हुकूमत करता है

राजा हुए तो क्या , वो ही जाट के जाट

माल-ओ-दौलत ज़ात और असल को नहीं बदलती

राजा हुए तो क्या हुआ अंत जाट के जाट

कमीना कितने ही बलंद मर्तबा पर पहुंच जाये उस की फ़ितरत नहीं बदलती , दौलतमंद हो जाने के बावजूद पुरानी आदतें नहीं बदलतीं

राजा जोगी किस के मीत

राजा और जोगी किसी के मित्र नहीं होते

राजा का दान प्रजा का अश्नान

ग़रीबों का परिश्रम और अमीरों की दानशीलता एवं उदारता बराबर है

राजा का दूजा, बकरी का तीजा, दोनों ख़राब

राजा के दो लड़के हों तो वह राज्य के लिए आपस में लड़ते हैं और बकरी के तीन बच्चे हों तो भरपेट दूध के लिए

राजा का परचाना और साँप का खिलाना बराबर है

राजाओं और हुकमरानों की संगत में हर समय ख़तरा होता है

राजा कहे सो न्याव पासा पड़े तो दाव

हाकिम जो फ़ैसला करे इंसाफ़ कहलाता है अगर बाज़ी जीते तो दाओ कहलाता है

राजा करे सो न्याव पासा पड़े तो दाँव

हाकिम जो फ़ैसला करे इंसाफ़ कहलाता है अगर बाज़ी जीते तो दाओ कहलाता है

राजा करे सो न्याव पासा पड़े तो दाव

हाकिम जो फ़ैसला करे इंसाफ़ कहलाता है अगर बाज़ी जीते तो दाओ कहलाता है

राजा के आई रानी कहलाई

रुक : राजा के घर आई रानी कहलाई

राजा के घर आई तुरत रानी कहलाई

जब किसी बड़े आदमी के संबंध से एक साधारण आदमी को बड़ा आदमी समझा जाने लगता है तो कहते हैं

राजा के घर काज, हमारे घर ठक ठका

राजा के घर विवाह हमारे घर भुखमरी, प्रजा से धन खींच कर राजा मौज-मज़ा करते हैं उसी से मतलब है

राजा के घर मोतियों का काल

किसी चीज़ का उस स्थान पर उपलब्ध न होना जहाँ वह प्रचुर मात्रा में हो या जहाँ उसके प्रचुर मात्रा के साथ पाया जाना चाहिये

राजा की बेटी क़िस्मत की हेटी

उस व्यक्ति के लिए कहते हैं जो उच्च पद पर होते हुए भी कम भाग्यशाली हो

राजा की सभा नर्क को जाए

अमीरों की संगत में आदमी बिगड़ जाता है

राजा किस के पाहुने, जोगी किस के मीत

राजा और जोगी किसी के मीत नहीं होते

राजा किस के पाहूने, जोगी किस के मीत

(राजा और जोगी) दोनों की मुहब्बत और राह-ओ-रस्म का कोई एतबार नहीं

राजा को मोती का दुख

प्रत्येक व्यक्ति किसी भी स्थिति में किसी न किसी अभाव का शिकार होता है

राजा क्या जाने भूके सार

जिसने भूख सही हो वही जानता है भूख की क़ीमत अमीर आदमी नहीं कर सकता दर्दमंद ही को दूसरे के दर्द का एहसास होता है और कोई नहीं हो सकता

राजा नल पर बिपता पड़ी, भूनी मछली जल में पड़ी

अपने काम बिगड़ जाने के समय कहते हैं

राजा नल पियो बिपता पड़ी भूनी मछली जल में पड़ी

अपने काम बिगड़ जाने के वक़्त कहते हैं, बुरे दिन आएं तो हर नाम में नुकसान होता है कहते हैं कि जब राजा नल बनबास में थे तो उन की रानी ने एक दिन मछली भूओनी चूँकि उस को राख लग गई थी दरिया पर जा कर धोने लगी तो मछली ज़िंदा हो कर तैरने लगी

राजा राज प्रजा सुखी

जहाँ का शासक अच्छा होगा वहाँ के लोग सुखी होंगे

राजा रखे रानी खावे

पुरुष कमाता है एवं स्त्री ख़र्च करती है

राजा रूठेगा अपनी नगरी लेगा

राजा क्रोधित होगा तो देश से निकाल देगा

राजा रूठेगा नगरी लेगा

हाकिम नाराज़ होगा तो जिलावतन कर देगा और क्या करेगा (ऐसे मौक़ा पर मुस्तामल जहां किसी के नाराज़ हो जाने को कोई पर्वा ना हो

राजा रूठें राज लें रानी रूठें भाग लें

ऐसे मौक़ा पर मुस्तामल जहां किसी के रूओठ जाने की कोई पर्वा ना हो

राजा रूठें राज लें रानी रूठें सुहाग लें

ऐसे मौक़ा पर मुस्तामल जहां किसी के रूओठ जाने की कोई पर्वा ना हो

राजा रूठेगा अपना सुहाग लेगा , क्या कसी का भाग लेगा

राजा ख़फ़ा हो तो जो कुछ इस ने देव है वो वापिस ले लेगा, किस्मत पर तो इस का इख़तियार नहीं

राल टपकती है

लालच करता है, हिर्स करता है

राम भरोसा भारी है

ईश्वर पर भरोसा करना अच्छी बात है सबसे बड़ा भरोसा ईश्वर का है

राम भरोसे जो रहें पर्बत पर लहराएँ, तुलसी बरवा बाग़ के सीचत ही कुम्लाएँ

जो ख़ुदा पर भरोसा रखते हैं वो हर जगह सरसब्ज़ रहते हैं बाग़ के पौदे बावजूद सींचने के सूख जाते हैं

राम भरोसे जो रहें वो पर्बत पर हड़ाएँ , तुलसी बरवा बाग़ के सीचत ही कुम्लाएँ

जो ख़ुदा पर भरोसा रखते हैं वो हर जगह सरसब्ज़ रहते हैं बाग़ के पौदे बावजूद सींचने के सूख जाते हैं

राम छोड़ी अजोध्या मन भावे सो ले

राम ने तो अयोध्या छोड़ दी अब जिसकी जो इच्छा हो ले, जब कोई किसी पद या वस्तू आदि का त्याग कर दे और लोग उस पद या वस्तु आदि के संबंध में मनमानी करें या करना चाहते हों तो कहते हैं

राम जी ने बेटा दिया वो भी मुसलमान का, हल्वा पूरी खाता नहीं टुकड़ा माँगे नान का

एक चीज़ बड़ी इच्छाओं के बाद प्राप्त हो और वो भी निष्कर्म या बेकार निकले तो कहते हैं

राम के भगत काठ की गुड़िया, दिन भर ठक-ठक रात आए घुसकुरिया

पुजारियों पर व्यंग है कि ये लकड़ी की पुतली की तरह हैं दिन भर ठक-ठक होती रहती है रात को सो जाते हैं

राम की माया, कहीं धूप कहीं छाया

ऐसे अवसर पर प्रयुक्त जब ये कहना हो कि एक तरफ़ तो कामियाबी की सूरत है और दूसरी तरफ़ उसके बिल्कुल विपरीत

राम मिलाई जोड़ी , एक अंधा एक कोढ़ी

ऐसे मौक़ा पर मुस्तामल जब दोनों ही अयुबी हूँ या दो साथीयों के बारे में ये कहना हो कि दोनों ही बदमाश या दोनों ही बुरे हैं

राम ना मारे , अपनी मराए

ख़ुदा नहीं मारता अपनी बेवक़ूफ़ी तबाह कराती है

राम नाम जपना पराया माल अपना

ख़ुद को नेक करके धोखा देने और लाभ प्राप्त करने के अवसर पर कहते हैं

राम नाम को आ सगनी भोजन को तैयार

फ़र्ज़शनासी के मौक़ा पर मस्त और फ़ायदे के मुक़ाम पर मुस्तइद ख़ुसूसन काहिल और हरामख़ोर नौकर के हक़ में कहते हैं

राम नाम ले सो धका पावे , चूतड़ हिलावे सो टका पावे

निकोकार बुरी हालत में रहते हैं और बदकार मज़े उड़ाते हैं

राम राम सत है

ईश्वर जिसका सहायक है उसका कोई क्या बिगाड़ सकता है

राम राम तो कहो मन मेरे , पाप कटेंगे छन में तेरे

ए मेरे दिल ख़ुदा का नाम तो ले तेरे सारे गुनाह पल भर में बख़्शे जाऐंगे

राम सुहाए करे तो कोई क्या कर सके

जिसे अल्लाह रखे उसे कौन चक्ख्াे

राम-राम जपना पराया माल अपना

धूर्त साधुओं या पाखंडियों के लिए कहा जाता है

रानी दीवानी हुई , औरों को पत्थर, अपनों को लड्डू मारे

दीवाना बह कार-ए-ख़ुद होशयार, उनकी दीवानगी में भी अपना ही फ़ायदा है

रानी गईं हाट , लाईं रीझ कर चक्की के पाट

आदमी बाअज़ वक़्त फ़ुज़ूल चीज़ें ख़रीद लेते हैं जो जो उन के किसी मुसर्रिफ़ की नहीं होतीं तो ऐसे मौक़ा पर कहते हैं

रानी को बाँदी कहा हँस दी , बाँदी को बाँदी कहा रो दी

नीच को नीच कहो तो वह बिगड़ जाता है अगर शरीफ़ को कहो तो वह कोई परवाह नहीं करता

रानी को कौन कहे आगा ढक

बड़े आदमी को ग़लती करते हुए देखकर कौन टोक सकता है

रानी रूठ गई, अपना सुहाग लेगी

जब ये कहना हो कि हमें किसी के रूठने या नाराज़ होने की कोई पर्वा नहीं तो ऐसे मौक़ा पर कहते हैं

रानी रूठेंगी, अपना सुहाग लेगी

जब ये कहना हो कि हमें किसी के रूठने या नाराज़ होने की कोई पर्वा नहीं तो ऐसे मौक़ा पर कहते हैं

रानी रूठेगी अपना सुहाग लेगी

उस महिला के संबंध में कहते हैं जो रूठ जाए कि रूठ जाएगी तो हमारा क्या बिगड़ जाएगा

रास्त-गो मुफ़्लिस मज्लिस में झूटा

जो लोग रिश्वत देकर विपक्ष के ख़िलाफ़ झूठी गवाही दिलाते हैं उनकी आलोचना में कहते हैं

रास्ती मूजब रज़ा-ए-ख़ुदास्त

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) सच्चाई से ख़ुदा ख़ुश होता है सच्च, बोलना चाहिए

रास्ती रा ज़वाल के बाशद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) सच्चाई को ज़वाल नहीं

रात भर गाई बजाई बच्चे की नूनी नहीं

लड़का होने की ख़ुशी मनाई गई परंतु उसमें पुरुपत्व के कोई चिह्न ही नहीं

रात भर मिम्याई और एक बच्चा बियाई

मेहनत बहुत की और फ़ायदा कम पाया

रात भर पीसा और छलनी में उठाना

मेहनत तो बहुत की मगर ज़ाए कर दी

रात भर पीसना और चपनी में उठाना

जितनी अधिक मेहनत करो, उतना ही कम पुरस्कार पाना, अधिकतम मेहनत करके कम लाभ उठाना

रात गई बात गई

अवसर निकल जाने या समय बीत जाने के बा'द कुछ नहीं होता

रात हटाई तड़के आई, भूक बेदना बुरी ए भाई

भूख के लिए कहते हैं, रात को किसी तरह मिटाई सुब्ह फिर लग गई

रात का खाया याद नहीं रहता

बहुत भूल जाने वाला आदमी है

रात का पेट भारी है

रात सबका दोष छुपाने वाली है

रात कम और स्वांग बहुत

वक़्त कम है और काम ज़्यादा

रात की मालज़ादी, दिन की ख़ूज़ादी

रात को बदकारी करती है दिन को शरीफ़ बिन जाती है इस औरत के लिए मुस्तामल जो बज़ाहिर पार्सा अर दरअसल बदकार हो

रात को निय्यत हराम

लोक-विश्वास है कि रात में सोचा गया काम सफल नहीं होता

रात को साँप का नाम नहीं लेते हैं

लोक-निश्वास है कि साँप का नाम रात को लिया जाए तो वह निकल आता है इस लिए रस्सी कह देते हैं

रात कोताह अफ़्साना दराज़

वक़्त कम है और काम ज़्यादा, रात थोड़ी कहानी बड़ी

रात माँ का पेट

रात का जुर्म या ऐब छुपा रहता है, रात को सब आराम पाते हैं

रात माँ का पेट है

रात को सब आराम पाते हैं, रात को खोट एवं दुर्गुण छुपे रहते हैं

रात नर्बदा उतरी, सुबह उठ कुआँ देख डरी

रात में तो नर्मदा तैर कर उतर गई और सुबह कुआँ देख कर डरती है

रात नर्यदा उतरी सुब्ह कुएँ से डरी नीज़ सुब्ह कुवाँ देख डरी

ख़्वामख़्वाह नख़रे बघारती है दिखाने को डरती है ख़तरनाक काम कर जाये और थोड़े ख़तरे से डर जाये

रात नर्यदा उतरी सुब्ह कुँवें से डरी नीज़ सुब्ह कुँवाँ देख डरी

ख़्वामख़्वाह नख़रे बघारती है दिखाने को डरती है ख़तरनाक काम कर जाये और थोड़े ख़तरे से डर जाये

रात पड़े उपासी, दिन को खाए बासी

बहुत ग़रीब एवं निर्धन है रात को भूखा सोता है और दिन को बासी खाता है

रात थोड़ी कहानी लम्बी

समय थोड़ा है और काम बहुत अधिक

रात थोड़ी स्वाँग बहुत

समय थोड़ा है और काम बहुत अधिक

रातों काता कातना, सर पर नहीं तातना

रात भर सूत काता फिर भी सिर ढकने को कपड़ा नहीं अर्थात व्यर्थ परिश्रम

रातों रोई एक ही मरा

रात भर रोती रही अथवा कोसती रही परंतु मरा केवल एक ही, प्रयास बहुत लाभ थोड़ा

राज़-ए-दरून-ए-पर्दा ज़रिंदान-ए-मस्त ब-पुर्स

पर्दे के अंदर का राज़ मस्त रिंदों से पूछो , राज़ राज़दार ही को मालूम होता है इस से पूछना चाहिए

राज़-ए-दरून-ए-पर्दा ज़रिंदान-ए-मस्त पुर्स

पर्दे के अंदर का राज़ मस्त रिंदों से पूछो , राज़ राज़दार ही को मालूम होता है इस से पूछना चाहिए

रफ़ीक़-ए-कुंज तंहाई किताब अस्त

फ़ारसी, कहावत उर्दू में मुस्तामल

रह बेबाक रह

रास्त बाज़ ईमानदार को कुछ डर नहीं, बेख़ता पर कुछ इल्ज़ाम नहीं आ सकता

रह री कुतिया मेरी आस, मैं आऊँ कातिक मास

कोई स्त्री अपने निकम्मे और झूठा दिलासा देने वाले पति से कह रही है

रहा करीमना तौ घर गया, गया करीमना तौ घर गया

स्त्री का (शायद) अपने निखट्टू पति के प्रति कहना कि करीम रहा तो भी घर नष्ट होगा न रहा तो भी नष्ट होगा

रहे झोंपड़े में, ख़्वाब देखे महलों का

सामर्थ्य से बढ़ कर आशाएँ लगाना

रहे महमूद के, अंडे दे मस'ऊद के

ख़र्च किसी का और मेहरबानी किसी और पर

रहे तो नेग से, जाए तो जड़ बेख़ से

इज़्ज़त से रहना चाहिए या तबाह हो जाना चाहिए

रहे तो टेक से, जाए तो जड़ बेख़ से

इज़्ज़त से रहना चाहिए या तबाह हो जाना चाहिए

रहे तो वाह वाह, न रहे तो वाह वाह

जब किसी के जाने या किसी के रहने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, तो बोलते हैं

रहें झोंपड़े में ख़्वाब देखें महलों का

ऐसे मौक़ा पर बोलते हैं जब कोई शख़्स मुफ़लिस और मजबूर हो और तो नगरों की बातें करे

रहें झोंपड़ों में ख़्वाब देखें महलों का

ऐसे मौक़ा पर बोलते हैं जब कोई शख़्स मुफ़लिस और मजबूर हो और तो नगरों की बातें करे

रहें झोपड़ों में ख़्वाब देखें महलों का

ऐसे मौक़ा पर बोलते हैं जब कोई शख़्स मुफ़लिस और मजबूर हो और तो नगरों की बातें करे

रही बात थोड़ी, ज़ीन, लगाम, घोड़ी

किसी खंड अथवा भाग के प्राप्ति को सम्पूर्ण प्राप्ति मान लेना

रही तो आप से गई तो सगे बाप से

रुक : ''रहे तो आप से और ना रहे तो सगे बाप से''

रहमान जोड़े पली पली लुक़मान लुढ़ावे कुप्पा

किसी बख़ील का जमा क्या हुआ माल कोई मस चटपट उड़ा दे, या बाप दादा तो रुपया छोड़ जाएं और औलाद लुटा दे, नीज़ अपनी पूंजी में इत्तिफ़ाक़ीया नुक़्सान पर भी कहते हैं , (किफ़ायत शिआर थोड़ा थोड़ा जोड़ता है और फ़ुज़ूलखर्च सब खा उड़ा देता है)

रहमान जोड़े पली पली शैतान लुढ़ावे कुप्पा

किसी बख़ील का जमा क्या हुआ माल कोई मस चटपट उड़ा दे, या बाप दादा तो रुपया छोड़ जाएं और औलाद लुटा दे, नीज़ अपनी पूंजी में इत्तिफ़ाक़ीया नुक़्सान पर भी कहते हैं , (किफ़ायत शिआर थोड़ा थोड़ा जोड़ता है और फ़ुज़ूलखर्च सब खा उड़ा देता है)

रहमान जोड़े पली पली शैतान लुढ़ावे कुप्पे

किसी बख़ील का जमा क्या हुआ माल कोई मस चटपट उड़ा दे, या बाप दादा तो रुपया छोड़ जाएं और औलाद लुटा दे, नीज़ अपनी पूंजी में इत्तिफ़ाक़ीया नुक़्सान पर भी कहते हैं , (किफ़ायत शिआर थोड़ा थोड़ा जोड़ता है और फ़ुज़ूलखर्च सब खा उड़ा देता है)

रहना दरिया में और मगरमछ से बैर

रुक : दरिया में रहना और मगरमच्छ से बीर

रहना की जाई ग़रीब के गले लगाई

बदनसीब की बेटी ग़रीब से ब्याही गई

रहने को झोंपड़े नहीं , ख़्वाब देखे महलों के

झोंपड़ा मयस्सर आता नहीं दिल में ख़्याल महलों का उभरा हुआ है, मुफ़लिसी में उमनग-ए-तो एंग्री है

रहतों का घर नहीं होता

असल आबादी मालिक ही से होती है

रजा किया जाने भूके की सार

जिसे खाने को मिले वह भूख को क्या जाने

रजब हटीले की छुरी

रजब हटीला फ़र्ज़ी बुला है जिस से औरतें डरती थीं

रख दे बेटी आले में , काम आएगा तेरे चाले में

किफ़ायत शिआरी का फ़ायदा ज़रूरत के मौकों पर महसूस होता है

रख पछ्तावा कुछ नहीं, बेच पछ्तावा अच्छा

सौदागर अगर माल रख छोड़े और मूल्य गिर जाए तो बहुत बुरी बात होती है परंतु वह बेच दे और मूल्य चढ़ जाए तो वो इतनी बुरी बात नहीं होती

रख पत, रखा पत

दूसरों की लाज रखो तो तुम्हारी भी लाज रहेगी

रक्खा तो चश्मों से, उड़ा दिया तो पश्मों से

किसी को पहले तो बहुत आदर से रखना और उसके पश्चात अनादर करके भगा देना

रक्खे तो प्रीत, नहीं तो पलीत

निबाहा जा सके तो प्रेम नहीं तो एक फ़ज़ीहत है

रले मिले पंचों रहे, जान जाए पर सच न कहे

पंचायत के साथ मेल-जोल रखना चाहिए चाहे झूठ ही बोलना पड़े

रमज़ान का नमाज़ी मुहर्रम का ग़ाज़ी

ऐसे ऐसी व्यक्ति के संबंध में बोलते हैं जो कुछ दिन कोई काम करे और जम कर न करे, दिखावटी

रंडी का जोबन रकाबी में

खाने पीने से रंडी का जोबन बना रहता है अर्थात उसकी सेहत अच्छी रहती है

रंडी का कोठा कबूतर की छतरी

किसी महिला का ऊपरी घर कबूतर की छतरी की तरह होता है, जिसका उपयोग उस अवसर पर किया जाता है, जहाँ कहना हो कि उस जगह से बचना चाहिए

रंडी का यार सदा ख़ुवार

रंडी का यार हमेशा मुफ़लिस रहता है, रंडी का आश्ना हमेशा ज़लील होता है

रंडी के घर माँडे और 'आशिक़ों के घर कड़ाके

क्योंकि मर्द अपना रुपया रन्डीयों को दे आते हैं वो मज़े उड़ाती हैं और उन के घर फ़ाक़ा होता है

रंडी के नाक न होती तो वो गूह खाती फिरती

औरत बहुत बेवक़ूफ़ होती है

रंडी के सैंकड़ों यार

रंडी बहुत से आदमियों से संबंध रखती है कभी किसी एक आदमी की प्रतिबद्ध नहीं होती

रंडी की गाली और भूत के पत्थर की चोट नहीं लगती

रंडी की गालियों का कोई बुरा नहीं मानता

रंडी की कमाई, या खाए ढाड़ी या खाए गाड़ी

रंडी की कमाई केवल संगीतकार या गाड़ी-बान खाते हैं

रंडी किस की जोरू , भड़वा किस का साला

ख़राब औरत या मर्द किसी के हो कर नहीं रहते

रंडी माँगे रुपैया ले ले मेरी मैया, फक्कर माँगे पैसा चल बे साले कैसा

मर्द अय्याशी पर ख़र्च करता है पुण्य के काम पर ख़र्च करने से घबराता है

रंडी मोम की नाक होती है

औरत को जिस काम पर चाहो लगा दो

रंडी तेरा यार मर गया , कहा कौन सी गली का

रन्डीयों के बहुत से यार होते हैं वो किसी एक की हो कर नहीं रहती हैं

रंडियों की ख़र्ची और वकीलों का ख़र्चा पेश्गी दिया जाता है

यदि वह पहले न ले लें तो उन्हें कोई बा'द में नहीं देता,

रंग लाई गिलहरी

नए नए पर पुरज़े निकालने वाले या शेखी शान दिखाने वाले (बतौर फबती इस्तिमाल करते हैं

रपट पड़े की हर गंगा

यहाँ उस व्यक्ति से आशय है जिस का पैर फिसल जाए और दरिया में गिर पड़ने के कारण से अकारण हर गंगा कहे

रक़्स कर्दन ख़ुद न दानद सेहन रा गोयद कज अस्त

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) रुक: नाच ना जाने आंगन टेरहा

रस दे मरे तो बिस क्यों दे

जो काम नरमी से हो सकता है इस में सख़्ती नहीं करनी चाहिए

रस दे मरे तो बिस क्यों दीजे

जो काम नरमी से हो सकता है इस में सख़्ती नहीं करनी चाहिए

रस दिए मरे तो बिस क्यों दीजे

जो काम नरमी से हो सकता है इस में सख़्ती नहीं करनी चाहिए

रस मारे रसायन हो

पारे को जलाओ तो चाँदी हो जाता है

रसन जल गई लेकिन बल अब तक वही है

दौलत और इज़्ज़त ख़त्म हो गई . ग़रूर बदस्तूर बाक़ी है रस्सी जल गई पर बल ना गया

रस्सी जल गई ऐंठन न गई

तबाह हो गए परंतु घमंड नहीं गया

रस्सी जल गई पर बल नहीं गया

धन-दौलत सम्मान या प्रतिष्ठा एवं महत्व जाता रहा मगर घमंड न गया या अंदाज़ एवं स्वभाव में बदलाव न आया

रस्सी का साँप बन गया

बिना सर-पैर की बात की धूम अथवा दिखावा है

रत्ती भर धन साथ न जावे, जब तू मर कर जीव गँवावे

मृत्यु के समय ज़रा सा धन भी साथ नहीं जाता इस लिए धन-दौलत पर भरोसा और मान नहीं करना चाहिए

रत्ती भर की तीन चपाती, खाने वाले सात संघाती

व्यवस्था थोड़ी और अतिथि अधिक, मेहमान अधिक और खाना थोड़ा

रत्ती भर नाता, न गाड़ी भर आश्नाई

न किसी से हमें थोड़ा भी रिश्ता जोड़ना है और न बहुत सी जान-पहचान अर्थात हमें किसी से कुछ मतलब नहीं

रत्ती दान न धी को दिया, देखो री समधन का हिया

जब जहेज़ थोड़ा हो तो कहती हैं कि बेटी को कोई जहेज़ नहीं दिया है क्या ही साहस है

रत्ती दे कर माँगे तोला, वा को कौन बतावे भोला

जो थोड़ा दे कर बहुत माँगे उसे कौन मूर्ख कह सकता है

रत्तियों जोड़े तोलों खोवे, वा को लाभ कहाँ से होवे

अपव्ययी अर्थात बेकार ख़र्च करने वाले आदमी को कभी लाभ नहीं होता, जो थोड़ा कमा कर अधिक ख़र्च करे उसे लाभ नहीं हो सकता

रज़ील की दो न अशराफ़ की सौ

कमीने की दो गालियां भी शरीफ़ की सौ गालियों से बढ़ कर होती हैं

रज़ील की दोस्ती पानी की लकीर , शरीफ़ की दोस्ती पत्थर की लकीर

कमीने और कमज़र्फ़ की किसी बात का भरोसा नहीं

रेत की दीवार , ओछा यार , किसी काम का नहीं

दोनों को उस्तिवार और क़ियाम नहीं

रेता हाथ मुँह तक नहीं पहुँचता

ख़ाली हाथ काम नहीं चलता

रीछ का एक बाल भी ग़नीमत है

अपनी करामात दिखाता है, रीछ का बाल लड़कों को नज़र से बचाने के लिए ता'वीज़ में रख कर बाँधते हैं

रीझेंगे तो पत्थर मारेंगे

ख़ुश होंगे तो मारेंगे, उखड़ मिज़ाज शख़्स की चाहत की निस्बत बोलते हैं

रीस भली होंस बुरी

रशक, तक़लीद या हिर्स करना हसद करने से बेहतर है

रीत की कौड़ी न ऊत बिलाव की ढेरी

एक अक़लमंद आदमी बहुत से बेवक़ूफ़ों से बेहतर है , इख़लास मंदी की एक कोड़ी बहुत है , जो काम क़ाअदे के साथ हो वो अच्छ्াा और जो काम बेक़ाइदा हो वो बुरा

रीत न सत्वाँसा मेरा लाडला नवासा

मुहब्बत तो बहुत ज़ाहिर करे मगर ख़र्च कुछ नहीं करे तो कहते हैं

रिझे का सिंघार और भूके का उधार

ऐसी चीज़ के मुताल्लिक़ कहते जो मालदार के लिए जे़ब-ओ-ज़ेबाइश और ग़ैरब के लिए बुरे वक़्त का सहारा हो

रिकाबी में जब तक भात , मेरा तेरा साथ

फ़ायदा का लालच रखता है, मतलब का यार है

रिन बड़ी हत्या है

क़र्ज़ या उधार लेना बहुत बुरी बात है

रिश्वत-ख़ोर जहन्नमी है

रिश्वत लेने वाला नर्क में जाता है मतलब रिश्वत लेना बुरा काम है

रियासत बे-सियासत नहीं होती

बिना रोब (डर) ज़मींदारी नहीं चल सकती, रियासत या ज़मींदारी के प्रबंध पर कहा गया है

रिज़ाली के नाख़ुन हुए

कमीने या कमज़र्फ़ को इक़तिदार या दौलत मिली

रिज़ाली की जोरू को सदा तलाक़

तुच्छ की दोस्ती पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए, कमीना और घटिया व्यक्ति अपने वचन का कुछ मूल्य नहीं रखता

रिज़ालों की दोस्ती पानी की लकीर , शरीफ़ों की दोस्ती पत्थर की लकीर

कमीनों की दोस्ती का कोई एतबार नहीं, शरीफ़ों की दोस्ती पाएदार होती है

रिज़्क़ है न मौत

बड़ा अभागा है मृत्यु भी नहीं आती कि भुखमरी की मुसीबत से छुटकारा हो

रिज़्क़ का दर बंद

आजीविका का साधन समाप्त करना, रोज़गार का माध्यम समाप्त करना

रो-रो के पूछ ले हँस के उड़ा दे

गद्दार दोस्त के मुताल्लिक़ कहते हैं जो दोस्त का राज़ मालूम करने के लिए तो मिन्नत ख़ुशामद करे मगर मालूम होने पर परवाह ना करे

रोए बग़ैर माँ भी दूध नहीं देती

बगै़र मशक्कत कोई मक़सद हासिल नहीं होता

रोए से दान नहीं मिलता

बगै़र मेहनत के कुछ हासिल नहीं होता, महिज़ तलब करने से कुछ नहीं मिलता

रोग का घर खाँसी, लड़ाई का घर हाँसी

मामूली खांसी बढ़ कर शदीद मर्ज़ की सूरत इख़तियार कर सकती है और हंसी मज़ाक़ अक्सर बाइस-ए-फ़साद होता है

रोग का जड़ खाँसी, लड़ाई की जड़ हाँसी

मामूली खांसी बढ़ कर शदीद मर्ज़ की सूरत इख़तियार कर सकती है और हंसी मज़ाक़ अक्सर बाइस-ए-फ़साद होता है

रोगी से रोगी मिले कहे कि नीम खा नीम

जैसी अपनी बुद्धि होती है मनुष्य दूसरे को भी वैसी ही सलाह देता है

रोगिय भावे सो बैद बतावे

रोगी जो पसंद करे हकीम वही खाने को बताते हैं

रोने को थी ही इतते में आ गए भैया

रोने के लिए बहाना मिल गया, कोई काम पहले करने को थे कि बहाना भी मिल गया

रोता जावे मुवे की ख़बर लावे

बदशगुनी का परिणाम बुरा होता है, बदक़िस्मत का जो काम है वह मनहूस ही होता है, हर एक चीज़ के आसार से अंजाम मालूम हो जाता है

रोते बनेगा न गाए , साहो फिरें मुँह दबाए

किसी नुक़्सान हो जाने की हालत में बोलते हैं कि सदमा हो तो ना रोया जा सकता है ना हिंसा, चप लग जाती है

रोते गए मूए की ख़बर लाए

जिस बदशगुनी से गए वही ही बदख़बर लाए

रोते क्यों हो ? कहा सूरत ही ऐसी है

इस में ये ऐब पैदाइशी है, या जो शख़्स हरवक़त चीं बजबें रहे और परेशान सूरत बनाए रखे इस के मुताल्लिक़ कहते हैं

रोते रिज़्क़ बने

रिज़्क मेहनत एवं कठिन परिश्रम से मिलता है

रोटी और औलाद से किसी का पेट भरा है

हर शख़्स रोज़ी और औलाद की कसरत चाहता है

रोटी गई मुँह में ज़ात गई गूह में

नीच ज़ात से शादी करने या ईसाई या मुसलमान होजाने के मौक़ा पर कहते हैं, ख़ुशहाली या रिज़्क की ख़ातिर इंसान ज़लील काम भी कर गुज़रता है

रोटी ही के कार ने दर दर माँगें भीक , रोटी ही के वास्ते करें कार सब ठीक

रोटी की ख़ातिर भीक मांगते फिरते हैं और रोटी ही के लिए नौकरी करते हैं

रोटी का न कपड़े का सेंत मेंत का भुत्रा

ऐसे नाकारा शख़्स के बारे में कहते हैं जो मुफ़त ख़ोरी के बावजूद रुअब जमाए या एकड़ फ़ूं दिखाए

रोटी खाए शक्कर से दुनिया खाए मक्कर से

अगर तुम ख़ुशहाली से ज़िंदगी बसर करना चाहते हो तो लोगों को धोका फ़रेब देते रहो या ख़ुशामद करते रहो, दुनिया मकर से हासिल होती है

रोटी को रोवे और चूल्हे पीछे सोवे

रोटी का मारा उसी की जुस्तजू में रहता है, निहायत ग़रीब है खाने तक को नहीं मिलता

रोटी को रोवे, खपड़ी को टोहवे

रोटी का मारा उसी की जुस्तजू में रहता है, निहायत ग़रीब है खाने तक को नहीं मिलता

रोटी को शक्कर दुनिया को मक्कर

अगर तुम ख़ुशहाली से ज़िंदगी बसर करना चाहते हो तो लोगों को धोका फ़रेब देते रहो या ख़ुशामद करते रहो, दुनिया मकर से हासिल होती है

रोटी को टोटी , पानी को बला , ख़सम को दादा

बहुत भोली या बेवक़ूफ़, तंज़न कहते हैं

रोटी न कपड़ा सेंत सेंत का भुत्रा

मुफ़त में क़बज़ा या इख़तियार जताता है, देता दिलाता कुछ नहीं

रोटी पड़ी मुँह में ज़ात पड़ी गुह में

रोओ पिया किसी तरह हाथ आ जाये कुछ पर्वा नहीं

रोटी क़िस्मत की हुक़्क़ा पाँव दौड़ी का

रोटी तो क़िस्मत से मिलती है मगर हुक़्क़ा (यानी ऐश) उसे मिलता है जो दौड़ धूओप करे

रोटी तो किसी तौर कमा खाए मुछंदर

(तंज़न) कोई भी शख़्स हो उसे रोज़ी हासिल करने के लिए कोई ना कोई ज़रीया ढूओनडना पड़ता है

रोवे चोर पराए धन को

किसी की सख़ावत को देख कर नाराज़ होना या ग़ैर के माल पर शेखी मारना, हासिद की निस्बत मुस्तामल

रोया सो धोया

बहुत गंदा है यदि रोए मुँह धोया जाता है

रोज़ रोज़ की दवा भी ग़िज़ा हो जाती है

आम तौर पर दवा इस्तिमाल की जाये तो इस का असर नहीं होता, मामूल की चीज़ की एहमीयत बाक़ी नहीं रहती

रोज़ा छुड़ाने गए थे नमाज़ गले पड़ी

जब एक संकट से बचने के प्रयास में दूसरी संकट खड़ी हो जाती है तो उस समय कहते हैं

रोज़ा रखे न नमाज़ पढ़े सहरी भी न खाए तो महज़ काफ़िर हो जाए

ये कहावत उन लोगों की है जो इंद्रियों के वश में रहते हैं, रोज़ा नमाज़ न सही मगर सहरी ज़रूर खानी चाहिए

रोज़ा रक्खा रक्खा आख़िर खोला तो गूह से

लड़की को अच्छ्াी जगह चूड़ कर बुरी जगह ब्याह लेना , देर में सोच सोच कर क़दम उठाया वो भी ग़लत

रोज़ा रोज़ रोज़ , बंदा चंद रोज़

रोज़ा तो हमेशा रहेगा लेकिन बंदा चंद रोज़ का मेहमान है बाअज़ लोग जब रोज़ा रखना नहीं चाहते तो कहते हैं

रोज़े छुड़ाने गए नमाज़ गले पड़ी

जब एक आफ़त से बचने की तदबीर या फ़िक्र में एक दूसरी आफ़त सर पड़ जाये तो बोलते हैं

रोज़े ख़ोर ख़ुदा का चोर

जो व्यक्ति रोज़े नहीं रखता वह ईश्वर का पापी है

रोज़े को गए नमाज़ गले पड़ी

रुक : रोज़े छुराने गए नमाज़ गले पड़ी

रोज़गार और दुश्मन बार बार नहीं मिलते

अवसर का लाभ उठाना चाहिए, नोकरी मिले तो ले लेना चाहिए, दुश्मन मिले तो बदला लेना चाहिए

रोज़गार हम्माम की लुंगी है

नौकरी एक की नहीं होती, कभी कोई उस जगह पर होता है कभी कोई यानी इस का कोई एतबार नहीं (नहाने के वक़्त हम्मामी लुनगी देता है और फिर ले लेता है)

रोज़ी ब-क़द्र-ए-हिम्मत हर कस मुक़र्रर अस्त

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) हर शख़्स की रोज़ी उस की हिम्मत के मुवाफ़िक़ मुक़र्रर है यानी जितनी हिम्मत जो शख़्स करेगा उतनी ही रोज़ी उसे मिलेगी

रोज़ी का मारा दर दर रोए, पूत का मारा बैठ कर रोए

बेकारी का दुख प्रियजन की मृत्यु से अधिक होता है

रोज़-नौ-रोज़ी-ए-नौ

नया दिन, नई रोज़ी, यानी कल के लिए आज से फ़िक्र करने की ज़रूरत नहीं, आज जो कुछ मिला है उसे इत्मीनान और बेफिक्री से सिर्फ़ करो कल की बात कल के साथ, जिस ख़ुदा ने आज देव है वही कल भी देगा. इस क़ौल के मिस्दाक़ वो लोग भी हो सकते हैं जो अपनी रोज़ी रोज़ रोज़ बदला करते हैं

रुमूज़-ए-'आशिक़ाँ 'आशिक़ बदानंद

(फ़ारसी मिसल उर्दू में मुस्तामल) आशिकों की रम्ज़ें आशिक़ ही जानता है, हमपेशा और मज़हब ही बात को ख़ूओब समझते हैं

रुमूज़-ए-'इल्म 'आलिम जाने , हाथी की बोली महाबत पहचाने

इल्म के राज़ आलिम ही जान सकता है और हाथी की बोली इसका महाबत ही जान सकता है मतलब ये कि जो जिस का काम हो वो बेहतर इस काम का जानने वाला होता है

रूई और आग का क्या साथ

कमज़ोर-ओ-नातवां का क़ो्वत वाले से किया मुक़ाबला

रूई कानों में दे रखी है

कुछ सुनता ही नहीं करता, जब कोई व्यक्ति सुनी अन-सुनी करे तो कहते हैं

रूई के धोके में कहीं कपास न निगल जाना

आसानी के धोखे में कहीं मुश्किल में न पड़ जाना, हर काम सोच-समझ कर करना चाहिए, प्रकट से धोखा नहीं खाना चाहिए

रूबा बाज़ी है

धूर्तता और धोखा है

रूख बिना ना नगरी सोहे बिन बरगन ना कड़ियाँ, पूत बिना ना माता सोहे लख सोने में जड़ियाँ

शहर बिना पेड़ों और कड़ियाँ बिना शहतीरों के अच्छी नहीं प्रतीत होतीं और ना माँ बिना बेटे के भली लगती है चाहे आभूषणों से लदी हो

रूखा होकर बोला

दुःशीलता, निर्दयता के साथ बोला

रूखा खाना धरती सोना, नांह सुहेला फक्कड़ होना

फ़क़ीर होना आसान नहीं रूखा खाना और ज़मीन पर सोना पड़ता है

रूखा सो भूका

जो अच्छी नैतिकता के साथ व्यवहार नहीं करता है वह भूखा रहता है, रूखी रोटी खाने वाले का पेट नहीं भरता

रूखी-सूखी खा के ठंडा पानी पी

हर हाल में ईश्वर का कृतज्ञ रहना चाहिए, हर आकार में प्रसन्न रहना चाहिए, हर हाल में अल्लाह का शुक्र अदा कर, हर हाल में ख़ुश रहना चाहिए

रूप न सिंगार खत्रानी की साध

न रूप है न बनाव-श्रंगार है और खतरानी का भेस बनाती है

रूप निरूप जाए नहीं बोली, हलुका गरू जाए नहीं तोली

ईश्वर की प्रशंसा है कि वह रूपवान है या निरूप है कहा नहीं जा सकता और हल्का या भारी है तोला नहीं जा सकता

रूप रोवें भाग खावें

सुख-सुविधा एवं भोग-विलास प्राप्त होने का संबंध रूप से नहीं भाग्य से है

रूपया आनी जानी शय है

धन एक जगह नहीं टिकता

रूपया गज़ का कपड़ा पहनना और अशरफ़ी तोला का खाना खाना

बहुत महँगे कपड़े पहनना और बहुत महँगा खाना खाना, कपड़ों और खाने पर बहुत सारा पैसा ख़र्च करना

रुपया हाथ का मैल है

रुपय पैसे की कोई हक़ीक़त नहीं, वो आने जाने वाली चीज़ है

रूपया तो शैख़, नहीं तो जुलाहा

ज़र है तो नर है वर्ना ख़र है

रूपया टूटा और भेली फूटी फिर नहीं रहती

भुनाया हुआ रुपया जलद ख़र्च हो जाता है और गड़ की भेली का जब इस्तिमाल शुरू हो जाये तो जल्द खाई जाती है

रूपये का काम रूपये से चलता है

कारोबार रुपये से होता है, दौलत के बिना काम नहीं चलता

रूपये की खीर है

रुपया है तो खीर खाओ

रूपये को रूपया कमाता है

रुपये से रुपया आता है, रुपये से ही रोज़गार होता है

रूपे का नशा होता है

धन आपको लापरवाह और अभिमानी बनाता है

रूपे का सोना दस रूपे की घड़ावन

अस्ल मूल्य से अधिक लागत

रूपे वाले की हमेशा पूछ है

अमीर आदमी की हमेशा इज़्ज़त होती है

रूठे बाबा दाढ़ी हाथ

दुखी व्यक्ति को कठोरता से मनाना या रूठे के साथ कठोरता से पेश आना

रूठे को मनाए नहीं , फटे को सिलाए नहीं तो काम कैसे चले

रूओठे को मनाना और फटे को सुलाना चाहीए वर्ना दुनिया में गुज़ारा नहीं

रूठे को मनाइए फटे को सिलाइए

सुलह-ओ-आतिशी ख़ूओब है, सुलह ही रखना मुनासिब है

रूठेगा तो एक रोटी अगली खाएगा

रूओठे गा तो किसी का क्या नुक़सान है

रूठेगा तो एक रोटी ज़्यादा खाएगा

रूओठे गा तो किसी का क्या नुक़सान है

रुवाँ न धुवाँ बीवी मारे जुँवाँ

बेकार या निखट्टू है, कुछ नहीं करता धर्ता

रुवाँ न धुवाँ बीवी मारे जुवाँ

बेकार या निखट्टू है, कुछ नहीं करता धर्ता

संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .

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