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सुकून-ए-क़ल्ब

दिल का इतमीनान, दिल की शांति, आराम, सहायता, चैन और सुख

ख़िल्क़िय्या

प्राकृतिक, फ़ित्री

खिस्यानी बिल्ली खम्बा नोचे

जिसे क्रोध आ रहा हो वह अपनी खीझ या क्रोध दूसरों पर उतारता है, लाचारी में आदमी दूसरों पर क्रोध करता है, लज्जित व्यक्ति दूसरों पर अपनी लज्जा उतारता है, निर्बल की खीझ

सुरूर

मन-मस्तिष्क की शांति या सुकून प्रदान करने वाली अवस्था, ख़ुशी, आनंद, प्रसन्नता, मस्ती, तन्मयता

बे-हिजाबी

बेे-पर्दा होना, बेपर्दगी, घूँघट उठा देना, खुलेबंदों फिरना (स्त्री का)

शरीक-ए-हयात

ज़िंदगी का दोस्त या साथी, अर्थात: जीवनसंगिनी, पत्नी, भार्या, पति

मशवरत

आपस में सोच विचार एवं सलाह या राय का आदान-प्रदान करना, सलाह, मशवरा, परस्पर सुझाव

सितमगर

(प्रायः कविता में) प्रेमिका, माशूक़, महबूब

कोशिश

कोई काम करने के लिए विशेष रूप से किया जानेवाला प्रयत्न, मेहनत, दौड़ धूप, प्रयत्न, प्रयास, चेष्टा, उद्योग, श्रम, उद्यम, उपाय, परिश्रम

बे-नियाज़

जिसे किसी से कुछ लेने की इच्छा न हो निःस्पृह, स्वच्छंद, आज़ाद, बेपरवाह

दीद के क़ाबिल

देखने के लायक़, देखने योग्य

क़ाबिल-ए-दीद

देखने लायक़, अच्छा दिखने वाला

आठ बार नौ त्योहार

सुख-सुविधा और आराम का शौक़ या लगन ऐसा बढ़ा हुआ है कि युग और समय उसको अल्प व्यय नहीं करने देता

चमनिस्तान

ऐसा बाग़ जहाँ फूल ही फूल हों, ऐसी जगह जहाँ दूर तक फूल ही फूल और हरा भरा नज़र आए, वाटिका, चमन, बाग़

'औरत

जाया, भार्या, पत्नी, जोरू

ताग़ूत

शैतान, अत्यन्त निर्दय और अत्याचारी व्यक्ति

मन-भावन

मन को भाने या अच्छा लगने वाला

दादरा

संगीत में एक प्रकार का चलता गाना (पक्के या शास्त्रीय गानों से भिन्न), एक प्रकार का गान, एक ताल

मज़दूर

शारीरिक श्रम के द्वारा जीविका कमाने वाला कोई व्यक्ति, जैसे: इमारत बनाने, कल-कारख़ानों में काम करने वाला, श्रमिक, कर्मकार, भृतक, मजूर

ख़ैर-अंदेश

भलाई की बात सोचने वाला, वह शख़्स जो किसी की भलाई चाहे, शुभचिंतक

मुहावरे

यह भारतीय मुहावरों का एक शब्दकोश है, जो रेख्ता फ़ाउंडेशन की एक पहल है। इसमें सदियों से प्रचलित पारंपरिक कहावतों और मुहावरों का एक मूल्यवान संग्रह शामिल है, जो भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति, समाज और दैनिक जीवन को प्रतिबिंबित करता है। यह शब्दकोश आलोचकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा भाषा और साहित्य के प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और विश्वसनीय संदर्भ स्रोत के रूप में कार्य करता है।

प्रमुख मुहावरे

मुहावरों की सूची

संबंधित परिणाम

पड़ न मरे लड़ मरे

अज्ञानी झगड़ालू के बारे में कहते हैं, निठल्लेपन से बेरोज़गारी बेहतर है

पड़ न मोए लड़ मोए

तंग आमद बजंग आमद

पड़ा लोटे , दूसरा कहे मुझे चोखी दे

एक शख़्स तो अभी नाआक़बत अंदेशी का बुरा नतीजा भगत रहा है और दूसरे साहबाईसी ही ये इस से भी बढ़ कर हमाक़त के लिए तैय्यार हैं

पड़े डुब्कियाँ खा रहे हैं

मुसीबतें झील रहे हैं

पड़े झूल रहे हैं

۔ यकसूई नहीं होती। उधर में लटक रहे हैं।

पढ़ पत्थर हुआ

न कुछ पढ़ा न कुछ सीखा जाहिल रहा

पढ़ पत्थर लिख रोड़ा भए , ईंटें बाँध कचहरी गए

वो बेवक़ूफ़ और जाहिल जो आलिमाना वज़ा रखे ये मिसल इस पर सादिक़ आती है

पढ़ा भला या मरा

सज्जन अज्ञानी का मर जाना अच्छा है

पढ़ा जिन चढ़ा

शिक्षित आदमी बहुत चतुर होता है

पढ़ा जिन है

हर बात समझता है

पढ़ा न लिखा नाम मोहम्मद फ़ाज़िल

मंद-बुद्धि के लिए कहा जाता है

पढ़े भी मरें , बिन पढ़े भी मरें , दाँता किलकिल क्यों करें

आख़िर सब को मौत है फिर मशक़्क़त क्यों करें या इस काम से रस्तगारी नहीं तो तदबीर ही किया

पढ़े घर की पढ़ी बिल्ली

शिक्षा का दूसरों पर प्रभाव पड़ता है, जहाँ एक पढ़ा होता है वहाँ दूसरा भी पढ़ जाता है

पढ़े के पास बैठिए दूना लाभ

ज्ञानी लोगों की महफ़िल में बहुत लाभ होता है

पढ़े न लिखे नाम बिद्या धर

जो जानता कुछ ना हो और जताता बहुत कुछ हो , कमइलम ताली करने वाले की निसबत कहते हैं , नीज़ ऐसा शख़्स जो अपने पेशे में तो मशहूर हो मगर इस काम का सलीक़ा इस में ना हो

पढ़े तो हैं पर गुणी नहीं

विद्या तो पढ़ी परंतु उसका मनन नहीं किया, अनुभवहीन पढ़े-लिखे

पढ़े तोता पढ़े मैना, कहीं पठान का पूत भी पढ़ा है

फ़ौजियों या उच्च कुल की संतानों के न पढ़ने पर व्यंग है

पढ़ें फ़ारसी बेचें तेल, ये देखो क़ुदरत का खेल

आशय ये है कि कमीना हो गया या अभागा है

पढ़ी फ़ारसी ओर बेचा तेल

मर्तबा या क़ाबिलीयत के मुताबिक़ काम ना करना

पढ़ी न क़ज़ा की

बे-नमाज़ी है, नमाज़ क़ज़ा होना अर्थात नमाज़ का समय पर अदा न होना

पड़ोस छोड़ पीत करे

पड़ोसियों को छोड़कर दूसरों को मित्र बनाना

पड़ोसन के घर मींह बरसेगा तो अपनी भी ओलती टपकेगी

ग़ैरों का बहुत लाभ पहुँचेता तो कुछ न कुछ थोड़ा बहुत हमको भी होगा

पड़ोसन के मेंह बरसेगा तो अपनी भी औलती टपकेंगी

ग़ैरों का बहुत फ़ायदा होगा तो कुछ ना कुछ थोड़ा बहुत हम को भी होगा

पए 'इल्म चूँ शमा' बायद गुदाख़्त कि बे 'इल्म नतवाँ ख़ुदा रा शनाख़्त

इलम हासिल करने के लिए बहुत कोशिश करनी चाहिए कीवनका जाहिल ख़ुदा की क़ुदरत को नहीं समझ सकता

पा लेने की मछली और दे लेने के काँटे

स्वयं का लाभ और दूसरे की हानि, स्वयं लेना हो तो सब से अच्छा भाग लिया जाये एवं दूसरे को देना हो तो सब से ख़राब भाग दिया जाये

पाँच बालाँ के तईं पचीस कंगी

ज़रा से काम के लिए बड़ा एहतिमाम

पाँच जूते और हुक़्क़े का पानी

अपमानित करने के लिए इस्तेमाल किया गया है

पाँच मामूँ का भांजा भूक भूक पुकारे

जो बावजूद हर तरह की तक़वियत के इज़हार लाचारी करे , जो शख़्स होते साते नाशुक्री करे , जिस के बहुत से लवाहक हूँ मगर कोई दस्तगीरी ना करे

पाँच महीने ब्याह को बीते पेट कहाँ से लाई

जब कोई स्पष्टत: ऐसा दा'वा करे जिस पर विश्वास न हो

पाँच मीर पचासे ठाकुर

पांच रुपय के लिए बड़े आदमी और पच्चास रुपय के लिए हाकिम से ना बिगाड़े

पाँच सात की लाठी एक जने का बोझ

थोड़ा थोड़ा बहुत हो जाता है

पाँच तुम्हारी निकली काँच

ये जुमला आम लड़के आपस में मज़ाक़ से कहते हैं

पाँचे आम पचासी इमली

थोड़ी अच्छी चीज़ बहुत मामूली चीज़ से बेहतर है

पाँचे मीत पचासे ठाकुर

मित्र, सरदार से पांच रुपये तक और हाकिम से पच्चास रुपये तक क्षमा करे, संबंधी या जानने वालों और रईस से किसी क़दर हानि भी पहुँचे तो भी शील न तोड़िए

पाँचों पंडे छटे नरायन

इस मौक़ा पर बोलते हैं जहां चंद बड़े मुदब्बिर मश्वरा कर रहे हूँ और छटा इन सब से बड़ा नेअमत ग़ैर मुतरक़्क़बा के तौर पर आ जाए. कहा जाता है कि महाभारत में पांचों पांडे (जुधिष्टर, भीम, अर्जुन, निकल, सहदेव) शरीक थे और उन्हें छुटे निरा यन (सिरी कृष्ण जी) की शमूलीयत से फ़तह हासिल हुई थी

पाँचों उंगलियाँ बराबर नहीं होतीं

मनुष्य भिन्न भिन्न स्वभाव के होते हैं, सब लोग एक से अर्थात अच्छे या बुरे नहीं होते

पाँचों उँगलियाँ घी में और सर कढ़ाई में

हर तरह चैन ही चैन है, उद्देश्य दिल की इच्छा के अनुसार प्राप्त है

पाँचों उँगलियाँ घी में नहीं तो सर कढ़ाई में

यदि काम दिल की इच्छानुसार किया तो इन'आम मिलेगा नहीं तो दंड मिलेगा

पाँचों उंगलियाँ पाँचों चराग़

कुशल, विशेषज्ञ, निपुण, चालाक, कारीगर, माहिर, उस्ताद, होशयार, हुनरमंद

पांडे गए दोनों दीन से , हल्वा मिला न माँडे

ज़्यादा फ़ायदे की हवस में इंसान गिरह से खो बैठता है

पाँसा पड़े अनाड़ी जीते

जोय में हार जीत पाँसा पड़ने पर है इस पर खेलने वाले की महारत या अनाड़ी पन का कोई असर नहीं पड़ता

पाँव अंदर एक पाँव बाहर

काम की ज़्यादती या ग़ायत इज़तिराब से बराबर दौड़ धूप

पाँव की च्यूँटी क्या ऊँचे से गिरेगी

साहिब मंसब तो बेतौक़ीर हो सकता है जो ख़ुद ज़लील हो वो क्या ज़लील होगा

पाँव में जूती न सर पर टोपी

किसी की निर्धनता और ग़रीबी या आतुरता और परेशानी अर्थात उद्विग्नता प्रकट करने के अवसर पर कहते हैं

पाँव से लगी सर में बुझी

(हसद और ग़ुस्से के मौक़ा पर) तन बदन में आग लग गई

पाबंद फँसे आज़ाद हँसे

एक आदमी पर मुसीबत पड़े तो दूसरा हँसता है, दूसरे की पीड़ा एवं दुख का एहसास नहीं होता

पाबंदी एक की भली

नौकरी एक मालिक की करनी चाहिए

पादे कोई पिटे भटियारी वाला

ख़ता किसी की हो सज़ा कोई पावे

पादो री चिड़ियो सावन आया

ख़ुश हो जाओ तुम्हारे मतलब का वक़्त आया

पागल के सर पे सींग नहीं होते

पागलों की कोई बाहर ही से पहचाने जाने की निशानी नहीं होती, वह तो अपनी हरकत और बातों से पहचाने जाते हैं

पाहुना प्यारा पर एक दो दिन

मेहमान एक दो दिन रहे तो अच्छा मालूम होता है अगर ज़्यादा दिन ठहर जाये तो बाइस तकलीफ़ होता है

पाजी तो पाजी वो बड़ा पजोड़ा है

वो निहायत कमीना आदमी है

पाल पाल मरे जी का काल

जिसे दुख भर के पाला वही जी का जंजाल बिन गया

पाल पाल तेरे जी का होगा काल

जिन्हें तू पाल-पोसकर बड़ा कर रहा है वही तेरे शत्रु बन जाएँगे

पाली डाँगरों की रख वाली

इस की समझ बोझ उतनी ही है, ये ही काम मिला है

पान और ईमान फेरे ही से अच्छा रहता है

पान और ईमान पलटते रहने से ही ठीक रहते हैं, यहाँ पलटने के दो अर्थ हैं- (1) लौटना= पलटना (2) लौट-पलट कर साफ़ करना

पान फूल दाई के सर

पुत्र उत्पन्न होने की खुशी में दाई से कहते हैं

पांडे जी पचताएँगे, वही चने की खाएँगे

ज़िद्दी को अपनी ज़िद से बाज़ आना पड़ेगा, झुक मार कर वही काम करना होगा

पांडे जी पचताओगे वही फिर चने की खाओगे

आख़िर झुक मार के यही करना पड़ेगा

पांडे जी तो पतयावें

अपने लिए आलम मायूसी में बोलते हैं

पानी बाधा नाव में घर में बाधा दाम, दोनों हाथ उलेचिये यही सुहाना काम

घर में रुपया रख छोड़ना नाव में पानी भर जाने के समान है जिस तरह नाव में से दोनों हाथों से पानी निकालने से ख़तरा जाता रहता है उसी तरह दोनों हाथों से दान करना अच्छा काम होता है

पानी बीच बतासा जैसे

बहुत नापायदार

पानी दें और जड़ काटें

ऊपर से प्रेम भीतर से शत्रुता

पानी का हगा मुँह पर आता है

बुरा कर्म छिपता नहीं है

पानी का हगा मुँह पर नहीं आता है

आसमान का थूका मुँह पर आता है, किए का फल मिलता है, दोष प्रकट हुए बिना नहीं रहता

पानी में मछ्ली नौ नौ टुकड़े हिस्सा

चीज़ अभी क़बज़े में नहीं आई इस के मुताल्लिक़ झगड़े शुरू हो गए

पानी में रह कर मगरमछ से बैर

रुक : दरिया में रहना और मगरमच्छ से बीर, आदमी जहां बरवक़्त रहता हो या काम करता हो-ओ-हाँ के बड़े लोगों या साथीयों या अफ़िसरों बिगाड़ रखना अच्छा नहीं

पानी पी कर ज़ात क्या पूछ्नी

एक काम या बात हो चिकने के बाद उस की तहक़ीक़ करनी बे फाएदा है

पानी पीवें छान के, जीव मारें जान के

जैनियों अर्थात जैन मत के मानने वालों के लिए कहा जाता है

पानी पिया मुँह पर आता है

बात छिपी नहीं रहती

पानी से पाने मिले , मिले कीच से कीच

जिन्स बजानिब जिन्स राग़िब होती है, जैसा ख़ुद होता है वेसों ही से मिलता है, शरीफ़ शरीफ़ से और कमीन कमीन से मेल जोल रखता है

पानी तो बहता भला खड़ा गंधेला होए

काम होता रहे तो अच्छा है

पाप छुपाए ना छुपे जैसे लह्सन की बास

जिस प्रकार लह्सन की गंध नहीं छुपती उसी प्रकार पाप नहीं छुपाया जा सकता

पाप डुबोवे धर्म तिरावे, धर्मी कधै न मुँह दुख पावे

पाप आदमी को तबाह एवं बर्बाद कर देता है जबकि पुण्य बचाता है और दुख-तकलीफ़ नहीं होने देता

पाप का घड़ा धार में डूबता है

अत्याचार आख़िर डुबो ही रखता है

पाप उभरे पर उभरे

पाप छिपा नहीं रहता, गुनाह या जुर्म के बारे मैं पता चल ही जाता है

पापी का माल अकारत जाता है

बुरी कमाई बुरे कामों में ही ख़र्च होती है

पापी का माल पराचत जाए, चोर पड़े या ठग ले जाए

गुनहगार का माल या तो क्षमा याचना में ख़र्च होता है या जुर्माना देने में या चोरी जाता है

पापी के मन में पाप ही बसे

पापी का ध्यान हर समय पाप की ओर ही रहता है

पापी की नाव मंजधार में डूबती है

पापी पहले सफल होता है परंतु अंत में नष्ट हो जाता है

पापी नाव को डबोता है

रुक : एक नहूसत और बदकिर्दारी सब को ज़लील करती है

पापी पाप का , भाई न बाप का

जिस को बदकारी की लत पड़ जाती है, वो रिश्ता का भी लिहाज़ नहीं करता, बदज़ात आदमी को शरारत से ग़रज़ है बाप भाई कोई भी हो

पापियों के मारने को पाप महाबली

पापी अपने बुरे कर्मों से ही मारा जाता है

पार गए मोर हो आए

मुसाफ़िर घर वापिस आकर बहुत क़िस्से सुनाता है, ' जहांदीदा बिसयार गवेद दरोग़ ' के मौके़ पर बोलते हैं

पार कहें सो वार है वार कहें सो पार, पकड़ किनारा बैठ रह यही वार और पार

इस पार को उस पार कहते हैं और उस पार को इस पार तो सबसे अच्छा यह है कि किनारा पकड़कर बैठ रहो और उसी को इस पार उस पार दोनों समझ लो

पार वाले कहें वार वाले अच्छे, वार वाले कहें पार वाले अच्छे

मनुष्य का स्वभाव है कि वह अपनी अपेक्षा दूसरों को सुखी और अपने को दुखी समझा करता है उसी पर कहा गया है

पारस नाथ से चक्की भली जो आटा देवे पीस, कोढ़ नर से मुर्ग़ी भली जो अंडे देवे बीस

जिस व्यक्ति से लोगों को लाभ पहुंचे वो अनुपकारी एवं कंजूस व्यक्ति से बहुत अच्छा है

पास का कुत्ता न दूर का भाई

दूर के भाई से पास का कुत्ता अच्छा क्योंकि वह काम आता है

पास कौड़ी न बाज़ार लेखा

ऐसा व्यक्ति जिसे किसी से कुछ देना-लेना न हो, बे-फ़िक्र आदमी

पास रहे जानिये या बाट चले

किसी की अच्छाई या बुराई उसी सूरत में मालूम होती है जब वो या तो पास रहे या सफ़र में शरीक हो

पासा पड़े अनाड़ी जीते

पाँसा पड़ने से अनाड़ी भी जीतता है

पासा पड़े सो दाँव और राजा करे सो न्याव

हाकिम के मुंह से जो निकले वही इंसाफ़ है

पासंग का चोर तीन जगह डंडाय, झुकता तौले रोकन दे पासंग दिखाय

झूठे बाँट रखने वाला दूकानदार तीन जगह से नुक़सान उठाता है अर्थात उसे अधिक तौलना पड़ता है रोकन देना पड़ता है और अपनी तराज़ू दिखानी पड़ती है कि वह ठीक है या नहीं

पात पात डाल डाल

किसी के तआक़ुब, मुक़ाबले या चालाकी के दावा करने के जवाब में (मुख़्तलिफ़ ज़मायर के साथ) मुस्तामल यानी तुम हम से सबक़त नहीं ले जा सकते, हम तुम से कम नहीं

पात तैरते हैं पत्थर डूबते हैं

छोटे लोग मज़े में रहते हैं, बड़े लोग तकलीफ़ उठाते हैं

पाव सेर चून चौ बारे रसोई

शेखी ख़ोरे की निसबत कहते हैं

पच फुल्ला रानी बनी है

पाँच फूलों में तलने वाली यानी बेहद नाज़ुक है, नज़ाकत पर बहुत नाज़ है

पच्छम का घोड़ा दकन का चीर

(चीर= कपड़ा, कपड़े की धजी) राजपूताना और काठियावाड़ के घोड़े मशहूर हैं और अगले ज़माने में दक्कन की तरफ़ से कपड़ा अच्छा आता था

पच्छिम जाओ या दक्खिन वही करम के लच्छन

नसीब हर जगह साथ है , रोज़गार या नौकरी की तलाश में मारा मारा फिरना फ़ुज़ूल है जो क़िस्मत में है मिल रहेगा

पच्छिम जाओ या दक्खिन वही करम के लक्खन

नसीब हर जगह साथ है , रोज़गार या नौकरी की तलाश में मारा मारा फिरना फ़ुज़ूल है जो क़िस्मत में है मिल रहेगा

पछुवा चले खेती पके

पश्चिम की वायु खेती के लिए लाभदायक होती है

पग बिन कटे न पंथ

बिना परिश्रम के कोई काम नहीं हो सकता, करने से ही काम होता है, बिना चले रास्ता पूरा नहीं होता

पगड़ी भीतर रख

इज़्ज़त बचा, सम्मान बचा

पगड़ी दोनों हाथों से थामी जाती है

इज़्ज़त बचाने के लिए पूरी कोशिश करनी पड़ती है

पगड़ी का चोर बाँधा जावे और ककड़ी का चोर मारा जावे

ना इंसाफ़ी के फ़ैसले पर कहते हैं जब बड़ी ख़ता की मामूली सज़ा और छोटी ख़ता की सख़्त सज़ा किसी को दी जाये

पगड़ी की 'इज़्ज़त ख़ुदा के हाथ है

इज़्ज़त ईश्वर ही रखे तो रहे, आबरू सच में भगवान के हाथ में है

पगड़ी में फूल रखा गया

बदनाम हो गया, ऐब लग गया

पहाड़ के आगे राई

किसी बड़ी चीज़ के तुलना में बहुत छोटी चीज़

पहाड़ के अठगन सिलोट

पहाड़ के सतून पत्थर होते हैं

पहला खाया डंड बराबर

आदमी पिछला खाया याद नहीं रखता, एहसानफ़रामोशी के मौक़ा पर बोलते हैं नीज़ अगर क़र्ज़ हो तो इस की अदायगी एक तरह का जुर्माना महसूस होता है

पहले आप पीछे बाप

हर एक को अपना ख़्याल ज़्यादा होता है, पहले अपने फ़ायदे की बात की जाती है

पहले अपना टैंठ तो देखो पीछे दूसरे की फुल्ली निघारना

पहले अपना ऐब तो देखो फिर दूसरे में ऐब निकालो, अपना बड़ा ऐब तो देखा नहीं जाता दूसरे के छोटे से ऐब पर अंगुश्तनुमाई की जाती है

पहले अपनी ही दाढ़ी की आग बुझाई जाती है

पहले अपना ही काम देखा जाता है

पहले बो, पहले काट

जो पहले काम करे वो लाभ में रहता है

पहले चूमे गाल काटा

किसी आदमी को पहले-पहल जब कोई काम सौंपा जाए और वह उसे चौपट कर दे तो कहते हैं

पहले गढ़य्या के पानी से अपना मुँह तो धो आओ

तुम इस क़ाबिल नहीं हो, पहले क़ाबिलीयत तो पैदा कर लो, इस लायक़ तो हो जाओ

पहले घर के तो पीछे बाहर के

अपनों से बचे तो दूसरे को दिया जाए

पहले घर में फिर मस्जिद में

पहले घर देखो फिर बाहर

पहले घर तब बाहर

रुक : पहले घर में तो पीछे मस्जिद में

पहले ही लुक़्मे में बाल आया

प्रारंभ ही में अपशगुन हो जाए तो परिणाम कैसे अच्छा हो

पहले लिख पीछे दे भूल पड़े तो काग़ज़ से ले

लेन देन में लिख लेने से भूल चूक नहीं होती, ज़बानी याददाश्त में ग़लती हो जाया करती है

पहले लुक़्मे में बाल आया

शुरुआत ही ख़राब हुई

पहले मारे सो मीरी

जो पहले लाभ उठाए वही अच्छा रहता है, मुक़ाबले में जो पहले चोट करे वही जीतता है

पहले पाँसे तीन काने

रुक: बिसमिल्लाह ही ग़लत

पहले पहरे सब कोई जागे दूसरे पहरे भोगी, तीसरे पहरे चोर जागे चौथे पहरे जोगी

रात को पहले पहर में हर कोई जागता है दूसरे पहर में स्त्री वाला अर्थात विवाहित तीसरे में चूर और चौथे में ईश्वर को याद करने वाला

पहले पीवे जोगी, बीच में पीवे भोगी, पीछे पीवे रोगी

खाने खाने में जोगी पहले पानी पीता है तंदरुस्त और ख़ुश ख़ौर दरमयान में, और बीमार बाद में

पहले सोच बिचार , फिर कीजिये कार

सोच समझ कर काम में हाथ डालना चाहिए

पहले तोलो फिर मुँह से बोलो

बात करने से पहले सोच लेना चाहिए

पहले तो नाक काट ली फिर ताश को रूमाल से पोछ्ने लगे

पहले तो ज़लील किया फिर इज़्ज़त करने लगे

पहले तो थी मैं औनी पौनी , अब हुई सौ से दूनी

जब किसी की नाक़द्री के बाद क़दर हो तो ये कहते हैं

पहले तुम पीछे और

रुक: पहले घर तब बाहर

पहली बिसमिल्लाह ग़लत

शुरू ही से किसी काम के बिगड़ने के बारे में बोलते हैं, काम शुरू होते ही ख़राब होगया

पहली बोहनी अल्लाह मियाँ की आस

यदि पहली बिक्री अच्छे व्यक्ति के पास हो तो सारा दिन लाभ देता है

पहने जग भाता और खाए मन भाता

लिबास ऐसा पहने जिसे देख कर लोग तारीफ़ करें और खाना अपनी पसंद का खाए

पैंठ अभी लगी नहीं गठ कतरे आ मौजूद हुए

ख़ुदग़रज़ लोग वक़्त आने से पहले अपने हलवे मांड की फ़िक्र में लग गए

पैदा हआ ना-पैद के लिए

जो पैदा हुआ उसे अवश्य मरना है

पैदल और सवार का क्या साथ

अमीर और ग़रीब का क्या मुक़ाबला

पैग़म्बर अपने घर के सिवा कहीं बे क़द्र नहीं होता

साहिब कमाल की मुख़ालिफ़त सब से ज़्यादा घर वाले ही करते हैं

पैजामा सीते हैं तो पहले पेशाब की राह रख लेते हैं

हर काम में आक़िबत अंदेशी ज़रूर चाहिए

पैख़ाना में लोटा न रखवाऊँ

रुक : पाख़ाने में लौटा ना रखवाओं

पैसा आवे पैसा जावे , लोग नफ़ा' में रोटी खावें

रुपया पैसा खाने पीने की चीज़ नहीं लेकिन खाना पीना उन से मुहय्या होता है

पैसा बचाना पैसा कमाने के बराबर है

संभाल के ख़र्च करना कमाई की सीढ़ी है

पैसा गाँठ का और बेटा पेट का

अपनी संपत्ति और अपना बेटा समय पर काम आते हैं

पैसा गाँठ का, जोरू साथ की

पैसा और पत्नी जो अपने पास हो अपने होते हैं

पैसा हाथ का मैल है

दान-पुण्य में ख़र्च करना चाहिए, भिखारी कहा करते हैं

पैसा होता तो ब्याह ही न करते

बहुत मुफ़लिसी में कोई पैसा मान तो मज़ा हा कहते हैं

पैसा कभी नहीं टिकता

भाग्य एक-सा नहीं रहता, लक्ष्मी स्थिर नहीं रहती

पैसा न कौड़ी बाज़ार को दौड़ी

अपनी हैसियत और औक़ात से बढ़ कर काम करना

पैसा नहीं पास, चले नवाब के साथ

निर्धन हो कर धनवानों का साथ अपनाना

पैसा पास का घोड़ी रान की

रुपया और घोड़ी जो अपने क़ब्जे़ में हों, अपने समझे जाने चाहिए

पैसे पर धर के बोटियाँ उड़ाऊँ तब भी वो आह न करे

सख़्त से सख़्त सज़ा देने में भी तरस ना आए

पैसे सूँ दरबार बंदना

रिश्वत लेना, रिश्वत देना

पैठ अभी लगी नहीं , गठ कतरे आ पहूँचे

मुआमला अभी तै नहीं हुआ और ख़ुद मतलबीए आ मौजूद हुए

पकड़ लंड गिर्धारी , लुटिया रही न थारी

इस शख़्स से जिस से कोई हमदर्दी ना हो ऐसे महल पर कहते हैं जब वो किसी सख़्त ख़सारे में पड़ गया हो

पकाए सो खाए नहीं खाए कोई और

जो मेहनत करे उसे न मिले दूसरे मजा उड़ाएँ

पखाल का लादना डाक चलाना एक सा

दोनों ही कामों में बोझ लेकर और जल्दी चलना पड़ता है

पक्का आम टपकने का डर

बूढ़े व्यक्ति के किए हमेशा मौत का ख़तरा बना रहता है

पक्का पान खाँसी न ज़ुकाम

यह कहावत परिहास के रूप में उस समय पर कहते हैं जब कोई बड़ी आयु की महिला के साथ संबंध बनाए या अधिक आयु की प्रेमिका से प्रेम करे, इसलिए कि उस में प्रतिद्वंदिता की आशंका कम होती है

पक्के आम के टपकने का डर रहता है

बूढ़े आदमी की मौत का हर समय ख़तरा, बड़ी उम्र के आदमी की जीवन का भरोसा नहीं

पक्के पान के दिन टिकेंगे

बूढ़े आदमी की ज़िंदगी चंद दिन की होती है

पक्की बेरी के बेर खाने वाले हैं

बगै़र मेहनत-ओ-मशक़्क़त के गुज़र करने वाले के निसबत बोलते हैं

पक्की बेरी तले के बैठने वाले

इस शख़्स की निसबत कहते हैं जो बे मेहनत-ओ-मशक़्क़त अपना पेट पालने का आदी हो गया हो

पक्की फली नहीं फोड़ता

कुछ काम नहीं करता है, बहुत सुस्त है

पकवाई देना और कच्ची खाना

उजरत देने के बावजूद काम ख़राब होना

पल भर की आस नहीं कही कल की बात

कल तक भगवान जाने क्या होता है, इतनी देर में हुकूमत बिगड़ जाती है

पल का भरोसा नहीं

आने वाले लम्हा की ख़बर नहीं

पलास के तीन पात

रुक: ढाक के तीन पात

पंच कहें बिल्ली तो बिल्ली ही सही

चार आदमी जो कुछ कहें वही ठीक है, सब की यही राय है तो यही सही

पंच मिल ख़ुदा मिल

रुक : पंच मिल ख़ुदा ख़ुदा मिल पंच

पंच मिल ख़ुदा, ख़ुदा मिल पंच

पंचों में ईश्वर का वास होता है और ईश्वर में पंचों का

पंचों का जूता और मेरा सर

पंचों का फ़ैसला मंज़ूर है

पंचों का कहना सर आँखों पर मगर परनाला यहीं रहेगा

जब कोई आदमी ऊपर से तो यह कहता जाए कि आप जो कहेंगे वही करेंगे परंतु करे अपने मन की तो कहते हैं

पंचों मिल मर गए गोया गई बरात

सब के साथ में मुसीबत भी राहत है, आम प्रकार की मुसीबत भी एक प्रकार का उतसव है

पंडित पोथी बाँच्ते मुल्ला पढ़े क़ुरआन लोग दिखावो लाख करो ना मिलिए भगवान

पोथियाँ या क़ुरआन पढ़ने या धर्म की बातों के दिखावे से भगवान नहीं मिलता

पंडित की जो ज़बान पर है वही पोथी में

पण्डित सोच समझ कर कहता है

पंडित मश'अलची की उलटी रीत, एक दिखावे चांदनी एक अंधेरे-बीच

पंडित दूसरों को उनके भाग्य की स्थिति बताते हैं मगर अपनी मुसीबत की स्थिति नहीं जानते, मशालची दूसरों को उजाला दिखाता है और ख़ुद अंधेरे में रहता है

पंडियाइन की मीठी मीठी बतियाँ

पण्डित की बीवी को मीठी मीठी बातें करने की आदत होती है कीवनका उसे लोगों से बहुत कुछ लेना पड़ता है

पनीर के साथ ख़ुश्का खाओ

अपना काम करो और ख़ुश रहो, अपने काम से काम रखो, अपने रास्ते पर जाओ

पर आधीन सपने सुख नाहीं

ग़ैर के पाबंद को ख़ाब में भी राहत नज़र नहीं आती , दूसरे का मातहत आराम की नींद नहीं सविता, मातहत हमेशा तकलीफ़ में रहता है

पर आधीन सपने सुख नहीं

ग़ैर के पाबंद को ख़ाब में भी राहत नज़र नहीं आती , दूसरे का मातहत आराम की नींद नहीं सविता, मातहत हमेशा तकलीफ़ में रहता है

पर घर नाचें तीन जने, काइस्थ, बैद, दलाल

ये तीनों दूसरे की सेवा से लाभ उठाते हैं

पर कट गए दुम झड़ गई फिरते हैं लंडूरे

बिलकुल बेसहारा हो जाने के मौक़े पर कहते हैं

पर के धन पर चोर रोवे

चोर मुफ़्त का माल चाहता है

पर के मूई सासू , आज क्यों आए आँसू

गुज़री बातों का गिला शिकवा करने या मुसीबत गुज़र जाने क बाद रंज करने के मौक़ा पर बोलते हैं

पर को कुँवाँ खोदे और आप ही डूब मरे

पराए व्यक्ति की बुराई चाहने में अपनी ही हानि होती है

पर लग जाएँ और उड़ कर पहुँच जाऊँ

कहीं जाने की बहुत ज़्यादा ख़ाहिश हो तो कहते हैं

पर लग जाएँ और उड़ कर पहुँचूँ

कहीं जाने की बहुत ज़्यादा ख़ाहिश हो तो कहते हैं

पर नारी पैनी छुरी कोई मत लाओ संग, दसों सीस रावन के ढाए गए इस नारी के संग

पराई स्त्री के साथ कोई संबंध नहीं रखना चाहिए, रावण ने दस सर इसी कारण गंवाए

पर उपकारी धार्म धारी

दूसरों का फ़ायदा करना बड़ी अच्छी बात है

पराए भरोसे खेला जुआ, आज न मुआ कल मुआ

जो दूसरे के भरोसे पर काम करता है वह हानि उठाता है

पराए धन को चोर रोए

दूसरे के माल का लालच करने या इस से हसद करने के मौक़ा पर बोलते हैं

पराए धन पर झींगुर नाचे

दूसरे के धन पर ऐंठना

पराए गंडों के भरोसे पर न रहना

कार्य तो पुरुषार्थ से ही सिद्ध होता है गंडे या ता'वीज़ से नहीं

पराए माल पर दीदे लाल

दूसरे की चीज़ पर ग़ुरूर करने के मौक़ा पर बोलते हैं, दूसरे की वस्तु पर घमंड करने के अवसर पर बोलते हैं

पराए माल पर झींगर नाचे

दूसरों की चीज़ हाथ लग जाने पर ख़ुश होने के अवसर पर कहते हैं

पराए माल पर लाल हसन

रुक : पराए माल पर या हुसैन

पराए माल पर या हुसैन

दूसरे की चीज़ पर बखान करने और इतराने के मौक़ा पर बोलते हैं

पराए ता'ज़िये पर या हुसैन

दूसरे के काम को अपने से संबंधित करने या उस पर गर्व करने के अवसर पर बोलते हैं

पराई आँखें काम नहीं आतीं

दूसरे के सहारे काम सही नहीं होता, पाराया व्यक्ति अपने काम नहीं आता, पाराया अपना नहीं बनता

पराई आस चूल्हे पास

दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए

पराई भूसी चिकने हाथ

अपने हाथों में भरी हुई ग्रीस को दूसरे की भूसी से साफ करना, जब कोई व्यक्ति दूसरे के पैसे से अपने मुश्किल काम को पूरा करता है और अकड़ता है तो देखने वाले व्यंग्य से कहते हैं

पराई गाँड़ में लकड़ी गई भुस में गई

पराया दर्द मालूम नहीं होता

पराई जेब से अपनी जेब में धरना मुश्किल है

पराया माल हज़्म करना आसान नहीं

पराई नौकरी करना साँप खिलाना बराबर है

नौकरी ख़राब काम है, नौकरी ख़तरनाक काम है

पराई फुल्ली पर हँसते हैं अपना ठेंट नहीं निहारते

अपने अवगुण की उपेक्षा कर के दूसरों के अवगुणों का बखान करना

पराई सार कौन धुवाँ करता है

कोई भी दूसरे की मदद नहीं करता

पराई सराए में कौन धुआँ करता है

दूसरे के घर जाकर चूल्हा सुलगाना ठीक नहीं, अपना निजी काम अपने घर ही करना चाहिए

पराई थैली का मुँह सुकड़ा

(अर्थात) दूसरा आदमी दिल खोलकर नहीं देता

पराई तोंद का घूँसा

दूसरे की मुसीबत असर नहीं करती, दूसरे की तकलीफ़ महसूस नहीं होती

पराया सर पनसेरी बराबर

दूसरे के दुख एवं तकलीफ़ की परवाह नहीं होती

पराया बिगारी बड़ा धर्म धारी

ग़ैर का मददगार बड़ा ईमानदार होता है

पराया चख और अपना ढक

अपनी चीज़ सेंत कर रखने और दूसरे की चीज़ उपयोग करने के औसर पर बोलते हैं, अपना माल न खाकर दूसरे का उड़ाना चाहिए, स्वार्थी की उक्ति

पराया धेंगड़ा और अपना पूत

आदमी अपनी संतान या चीज़ को बहुत महत्व देता है और दूसरे की संतान या चीज़ को महत्वहीन समझता है, अपनी हर वस्तु प्यारी होती है दूसरे की हीन, अपने बच्चे को कम आयु वाला और दूसरे के उसी आयु के बच्चे को जवान समझते हैं, अपना लड़का तो लड़का है और पराया उठाईगीरा

पराया दिल परदेस बराबर

उसका हाल पता नहीं रहता

पराया घर थूक का डर अपना घर हग भर

अपनी चीज़ को आदमी जिस प्रकार चाहे प्रयोग करे कोई कुछ कहने वाला नहीं होता लेकिन दूसरे की चीज़ को छूने में भी सावधानी करनी पड़ती है, अपने घर में चाहे जो करो, पर दूसरे के घर में संभल कर रहना चाहिए

पराया खाइये गा बजा और अपना खाइये टट्टी लगा

दूसरों का माल हँसी-ख़ुशी खाना चाहिए मगर अपना छुपा कर ताकि कोई और न सम्मलित हो जाए

पराया माल लूटिए और बंदे का दिल दरियाव

दानी का मशहूर हो कर लोगों के माल ठगने के मौक़ा पर बोलते हैं

पराया माल पश्म का बाल

दूसरे के वस्तु का कोई महत्व नहीं होता

पराया सर दीवार की जगह

जब दूसरे की तकलीफ़ या हानि की बिल्कुल भी परवाह न हो तो बोलते हैं

पराया सर लाल देख अपना सर फोड़ डालें

पराए सौभाग्य पर ईर्ष्या करना

पराया सर पन्सेरा

मुराद : दूसरे की जान और जिस्म की कोई क़दर-ओ-क़ीमत या पर्वा नहीं

पराया सर क़ुरआन बराबर

दूसरे के सर की झूठी क़सम नहीं खानी चाहिये

पराया सेर पंसेरी बराबर

थोड़ा भी ग़नीमत है

परख साठा सौ पाठा स्त्री बीसी सौ खीसी

मर्द साठ साल का भी जवान होता है, औरत बीस साल की ही बूढ़ी हो जाती है

पर्बत को राई करे, राई को पर्बत मान

ईश्वर छोटे को बड़ा और बड़े को छोटा करने पर सक्षम है, ईश्वर में बड़ी क्षमता एवं शक्ति है

पर्दा पेश दावर बद तर अज़ गुनाह

अल्लाह से कोई बात छिपी नहीं रहती, इस लिए कोई गुना करना और इस से छुपाना गुनाह से बदतर गुनाह है

पर्दे की बीवी, चटाई का लहंगा

जब कोई निर्धन एवं ग़रीब स्त्री बहुत पर्दा करे तो व्यंगात्मक तौर पर कहते हैं

प्रदेस कलेस नरेशन को

प्रदेस में राजा को भी तकलीफ़ होती है

परदेसी बलम तेरी आस नहीं, बासी फूलों में बास नहीं

परदेसी से प्रेम करना व्यर्थ है क्यूँकि वह न जाने कब छोड़ कर चलता बने

परदेसी की पीत को सब का जी ललचाय, दो ही बातों का खोट है रहे न संग ले जाय

परदेसी के प्रेम में दो बातों का खोट अथवा नुक़्सान है कि न तो वो रहता है न साथ ले जाता है

परहेज़ बड़ी दवा है

बीमारी में परहेज़ करना दवा के बराबर है

परहेज़ भी आधा 'इलाज है

परहेज़ निस्फ़ बीमारी को कम करता है

परहेज़ सब से अच्छा नुस्ख़ा है

रुक : परहेज़ बड़ी दवा है

परिचय बिन प्रतीत नहीं

जाँच-परख के बिना विश्वास नहीं करना चाहिए

परजा है जड़ राज की राजा है ज्यूँ रूख, रूख सूख कर गर पड़े जब जड़ जाए सूख

आशय ये है कि राजा को परजा का बहुत ख़्याल रखना चाहिये

प्रजा मरन राजा हाँसे

ऐसे अवसर पर बोलते हैं जब प्रजा तो मेहनत करे और राजा भोग-विलास

पर्कल घोड़ा बसोले थाढ़

पालतू घोड़ा थान को भागता है, (मुराद) इंसान अपनी आदत के मुवाफ़िक़ काम करता है

परसों मोई सासू आज क्यों आए आँसू

रुक : पर को मोय सासू आज क्यों आए आँसू

परवर के कूचे में 'आशिक़ की हजामत होती है

प्रेम में प्रेमी का बहुत हानि होता है

परवर के कूचे में शाह-ओ-गदा बराबर हैं

इशक़ में अमीर-ओ-ग़रीब का कोई फ़र्क़ नहीं रहता

परवर में शाह-ओ-गदा बराबर

अमीर ग़रीब पर या ग़रीब अमीर पर आशिक़ होजाता है तो कोई दर्जे का फ़र्क़ नहीं रहता

परवर या करे अमीर , या करे फ़क़ीर

दोनों बेफ़िकर य होते हैं इस लिए वही इशक़ करसकते हैं

पसू का सताना निरा पाप कमाना

पशु को तकलीफ़ देना बहुत पाप है

पटेल की दौड़ छांपे तलक

मामूली आदमी की रसाई दूर तक नहीं होती

पठान का पूत, घड़ी में औलिया घड़ी में भूत

चिड़चिड़े व्यक्ति की दोस्ती का विश्वास नहीं, कभी कृपालु होता है कभी शत्रु

पठान लड़ाई मारें , बहने डाढ़ी फटकारें

पराए काम पर शेखी बघारने के मौक़ा पर मुस्तामल

पठानों ने गाँव मारा, जुलाहों की चढ़ बनी

क्योंकि उन्हें नौकरी मिल जाएगी, कुंबापरस्ती के प्रति भी कहते हैं

पठानों ने गाँव मारा , जुलाहों की चढ़ बनी

फ़ातिहों के पास उमूमन शुरू में कमीने लोग ही आते हैं मोअज़्ज़िज़ीन दूर ही रहते हैं

पत्ता भी बे-हुक्म-ए-ख़ुदा नहीं हिलता

कोई काम बगै़र ईश्रर की मर्ज़ी के नहीं होता

पत्तल फाड़ी और चल दिए

मतलब निकाला और चल दिए मतलबी के बारे में कहते हैं

पत्थर अपनी ही जगह भारी होता है

इंसान की वक़ात अपनी जगह या मुक़ाम पर ही होती है

पत्थर का जवाब पत्थर

सख़्त बात का जवाब सख़्त होता है

पत्थर के कीड़े को भी ख़ुदा देता है

अल्लाह ताला हर शख़्स को रिज़्क बहम पहुंचाता है, रिज़्क से कोई महरूम नहीं रहता

पत्थर को असर क्या हो

सख़्त दिल संग दिल और कमअक़्ल पर किसी फहिमा शि और तालीम का असर नहीं होता

पत्थर को जोंक नहीं लगती

कंजूस व्यक्ति से कुछ मिलने की आशा नहीं हो सकती अर्थात कंजूस उदारता नहीं दिखा सकता

पत्थर मारे मौत नहीं

बहुत ही कठोर जान, निर्लज्ज और बेशर्म के संबंधित बोलते हैं

पत्थर में जोंक नहीं लगती

hard hearts never melt, refers to someone who is impervious to advice or appeal

पत्थर में लेस नहीं धँसती

बेरहम पर किसी बात (नरम गुफ़्तगु) का असर नहीं होता

पत्थर मोम नहीं होता

निर्दयी को दया नहीं आती

पत्थर नहीं पिघलते

संगदिल को रहम नहीं आता

पत्थर पर क्या असर

बेवक़ूफ़ पर शिक्षा या प्रशिक्षण का कोई असर नहीं होता

पत्थर पिघलते नहीं देखा

संगदिल को रहम आते नहीं देखा

पत्थर पूजे हर मिले तो मैं पूजूँ पहाड़

अगर पत्थर पूजने से मार्फ़त ख़ुदा हासिल होती है तो में पहाड़ पूजने को तैय्यार हूँ (मुराद) पत्थर पूजने से हरगिज़ मार्फ़त हासिल नहीं होती

पत्थर से चक्की भली पीस खाए संसार

बेफ़ैज़ बड़े आदमी से वो ग़रीब ही अच्छा है जिस से ख़लक़-उल-ल्लाह को नफ़ा हो

पतुरिया का डेरा जैसे ठगों का घेरा

रंडी का मकान और ठगों का स्थान समान है

पतुरिया रूठी ध्रम बचा

अगर बेसवा नाराज़ हो जाए तो मनुष्य का धर्म बच जाता है

पवन का पूत , पताल का राजा

हर काम में दख़ल दर माक़ूल देने वाला, हर मजमा में दाख़िल होने वाला, बाद हवाई आदमी

पेड़ बोए बबूल के तो आम कहाँ से खाए

बुरे कर्म का परिणाम बुरा होता है, बुरे काम का नतीजा बुरा

पेड़ चढ़े यूँ दिखाई देता है

अगर तुम मेरी जगह हो तो भी ऐसा ही करो

पेड़ गिनना या आम खाना

अपनी ग़रज़ से मतलब रखो चाहे कहीं से हो

पेड़ गिनने से मतलब है या आम खाने से

अपने काम से काम रखना चाहिए, व्यर्थ की बातों में उलझना नहीं चाहिए

पेड़ फल से ही पहचाना जाता है

इंसान की बातों से मालूम हो जाता है कि शरीफ़ है कि कमीना

पेड़ू की आँच फिर सात पाँच

अभिलाषा की जोश में कुछ होश बाक़ी नहीं रहता

पेलते पेलते इंसान कोल्हू का बैल बन जाता है

अगर आदमी हरवक़त काम ही करता रहे तो इस की हालत अच्छी नहीं रहती

पेशा हबीबुल्लाह जो न करे ला'नतुल्लाह

ईश्वर काम करने वालों से प्रसन्न और न करने वालों से अप्रसन्न रहता है

पेशाब से चराग़ जलता है

सिक्का बैठा हुआ है, रो'ब जमा हुआ है, धाक बैठी हुई है

पेट भर और पीठ लाद

खाओ और मेहनत करो, पेट भरा हो तभी मेहनत हो सकती है

पेट भरा क्या जाने भूके की क़द्र

मालदार आदमी किसी ग़रीब की तकलीफ़ को महसूस नहीं करता

पेट भरे के गुण

बे-परवाही की बात, शेख़ी एवं डींग से परिपूर्ण बातें

पेट भरे की बातें

अमीर व्यक्ति का दृष्टिकोण, अमीरी की बातें, गर्व की बातें, ग़ुरूर की बातें

पेट भरे की खोटी चाल

धनवान लोगों की 'आदतें बिगड़ जाती हैं

पेट भी ख़ाली, गोद भी ख़ाली

निर्धन और निःसंतान, न खाने को है न बाल बच्चा ही है, न बच्चा पेट में है न गोद में है

पेट बुरी बला है

۔ मक़ूला। भूक बरी चीज़ है। करें किया पेट बरी बला है जो ना किराए थोड़ा है औलाद से बढ़ कर तो कोई चीज़ अज़ीज़ नहीं इस तक को तो बीच डाला

पेट चले मन भक्तों को

दस्त लग रहे हैं और दाल खाने का मन हो रहा है

पेट है या 'अम्र 'अय्यार की ज़ंबील

(जिस के पेट में इल्ला बिल्ला उतरती चली जाये और कभी खाने से मुंह ना मोड़े ऐसे आदमी के पेट को ख़्वाजा ख़िज़र की ज़ंबील कहते हैं, हज़रत ख़िज़र अलैहि अस्सलाम के बारे में मशहूर है कि इन के पास एक ज़ंबील थी जिस में हर चीज़ समा जाती थी बाअज़ दफ़ा उम्र अय्यार की ज़ंबील भी कहते हैं

पेट है या बे-ईमान की क़ब्र

बहुत बड़े पेट वाले को मज़ाक़ में कहते हैं

पेट है या चमड़े की पखाल

बहुत ज़्यादा खाने पीने वाले की निसबत कहते हैं

पेट है या ख़्वाजा ख़िज़र की ज़ंबील

(जिस के पेट में इल्ला बिल्ला उतरती चली जाये और कभी खाने से मुंह ना मोड़े ऐसे आदमी के पेट को ख़्वाजा ख़िज़र की ज़ंबील कहते हैं, हज़रत ख़िज़र अलैहि अस्सलाम के बारे में मशहूर है कि इन के पास एक ज़ंबील थी जिस में हर चीज़ समा जाती थी बाअज़ दफ़ा उम्र अय्यार की ज़ंबील भी कहते हैं

पेट है या कुठार

बहुत खाने वाले के लिए इस कहावत का प्रयोग करते हैं

पेट जो चाहे सो कराए

पेट के लिए न जाने क्या-क्या करना पड़ता है

पेट का जला गाँव जलाए

भूका आदमी आपे से बाहर हो जाता है

पेट का खाया कोई नहीं देखता, तन का पहना सब देखते हैं

कपड़ों पर सब की नज़र होती है, ज़ाहिर को सब देखते हैं बातिन को कोई नहीं जानता, ऐसे मौक़ा पर बोलते हैं जब ज़ाहिरदारी बरतना ज़रूरी हो जाये या किसी भी मुआमले में बाअज़ बातों का इज़हार एक ज़रूरत हो

पेट के आगे ना है

भरे पेट वाला आदमी खाने से इंकार कर देता है

पेट के बिगाड़ से सारे बिगाड़ हैं

सारी बीमारियाँ पेट की ख़राबी से होती हैं

पेट के गुण कौन जाने

दिल का हाल किसी को पता नहीं

पेट के वास्ते परदेस जाते हैं

पेट के लिए घर छोड़ कर बाहर जाना पड़ता है

पेट खाए और आँख लजाए , ज़बान लड़खड़ाए

आदमी जिस का दिया खाता हो या जिस का मुहताज हो इस के सामने श्रम से कोई ऐसी बात नहीं कह सकता जो उसे नागवार गुज़रे

पेट को रोटी न तन पर तार

रुक : पेट को टिकिया नहीं सोने को खटीया नहीं

पेट को टिकिया नहीं , सोने को खटिया नहीं

रुक : पेट को टुकड़ा ना तन को चीथड़ा

पेट को टुकड़ा न तन को चीथड़ा

इंतिहाई इफ़लास और तंगदस्ती के मौक़ा पर बोलते हैं

पेट में घुसे तो भेद मिले

किसी के मन की बात जानना बहुत कठिन है, किसी के मन की बात उसके घनिष्ठ संपर्क में आने से ही जानी जा सकती है अर्थात जब किसी से बहुत दोस्ती हो जाए तब भेद पता चलता है

पेट में पड़ा चारा तो कूदने लगा बेचारा

मालदार हो कर दोन की लेना, दौलतमंदी की वजह से पिछली हालत को भूल जाना

पेट में पड़े तो 'इबादत सूझे

पेट भरा हो तो प्रमात्मा का ध्यान आता है भूके से पूजा नहीं होती

पेट में पड़ी बूँद नाम रखा महमूद

काम कठिनता से प्रारंभ हुआ और ख़ुशी अभी से आरंभ कर दी अर्थात काम समाप्त नहीं हुआ ख़ुशी आरंभ हो गई

पेट में पड़ी जब दूर की सूझी , भूक लगी तंदूर की सूझी

बेफ़िकरी अजब शैय है यानी बेफ़िकरी में बड़े बड़े ख़्यालात पैदा होते हैं

पेट में पाँव हैं

खाना मिलने पर ही आदमी काम कर सकता है

पेट नहीं मानता

۔भूक की बर्दाश्त नहीं होती। (फ़िक़रा) ये कहना कि पेट नहीं मानता मजबूरी से चोरी करना पड़ती है बेहूदा बात है

पेट पड़ें रोटियाँ तो सभी गलाँ मोटियाँ

जब आदमी दौलतमंद हो जाये तो इस में बहुत सी बातें आजाती हैं, मआशी बेफ़िकरी में ख़ूब बातें सूझती हैं

पेट पालना कुत्ता भी जानता है

बहुत स्वार्थी व्यक्ति के लिए इस कहावत का प्रयोग करते हैं जो दूसरों को खिलाना नहीं जानता

पेट पापी है

भूक की वजह से इंसान बहुत गुनाह करता है

पेट पिटारी मुँह सुपारी

जिस लड़के का पेट बड़ा हो या जो व्यक्ति बहुत खाता हो उस के लिए इस कहावत का प्रयोग करते हैं

पेट सब रखते हैं

भौतिक आवश्यकताएँ सब की होती हैं, सब को भूख लगती है, खाने के लिए सब को ख़ूराक चाहिए

पेट से फ़ाक़ा , तबी'अत ख़ुश बे अंदाज़ा

बे परवाह आदमी की निसबत कहते हैं खाने को नहीं मगर हरवक़त ख़ुश है

पेट तो सब के साथ लगा हुआ है

हर एक को खाने की ज़रूरत पड़ती है

पेट-मेट काम समेट

पहले काम ख़त्म कर फिर खाने को मांग

पेटू मरे पेट को, नामी मरे नाम को

खाने का लालची खाने पर जान देता है और बहादुर अपनी प्रसिद्धि के लिए जान देता है

फाटक टूटा गढ़ लूटा

फाटक टूटने से कुछ रोक नहीं रहती क़िले पर विजय प्राप्त हो जाता है और फाटक क़िले का द्वार है

फावड़ा न कुदाल बड़ा खेत हमारा

बे सामानी में बड़ी मशीख़त या दावा, शेखी के मौक़ा पर बोलते हैं

फाव्ड़े के नाम गुल सफ़ा नहीं जान्ता

۔ मिसल। गुल सफ़ा। मिट्टी साफ़ करने वाला।) अलिफ़ के नाम बे नहीं जानता। जाहिल है। को दिन है (नोट) एक शख़्स धोके में एक चालाक जाहिल फ़क़ीर का चेला होगया। बारह बरस तक शाह साहिब ने कोई तालीम नहीं दी। एक रोज़ चेले ने फावड़े की तरफ़ इशारा कर के पूछा शाह साहिब इस का क्या नाम है

फल खाए वो जो हल जोते

जो मेहनत करे वो फ़ायदा उठाए

फल खाना आसान नहीं है

लाभ आसानी से प्राप्त नहीं होता

फल्सा टूटा, गाँव लूटा

असावधानी या असहमति में हानि होती है

फर न फरी बग़ीचे का नाँव

प्ले कुछ ना होना और शीख़यां मारना

फट पड़े वाे सोना जिस से टूटें कान

ऐसी कोई चीज़ या बात जिसका बुरा या हानिकारक परिणाम निकले, उसके ऊपरी और ज़ाहरी लाभ छोड़ दिया जाना चाहिए, फट पड़े वो सोना जिस से टूटे कान

फटे में पाँव दफ़्तर में नाँव

दख़ल दर माक़ूलात (शेखी जताने के लिए)

फटे न फूटे जी जान न छूटे

किसी प्रकार इस वस्तु अथवा बात से छुटकारा नहीं होता

फेरों की गुनागार है

जो (औरत) कमउमरी में बेवा होगई हो इस के लिए कहते यहं

फिर बे घोड़े यहीं से

जल्द या समय से पहले वा'दे से फिर जाना, बात पलट देना

फिर भी मोची के मोची रहे

अपमानित के अपमानित ही रहे, कंगाल के कंगाल ही रहे, मूर्ख ही रहे

फिर चिकने घड़े की तरह वैसे के वैसे

बेशरम, बद लिहाज़ की निसबत बोलते हैं

फिर कौन जिए किस का राज

ज़िंदगी का कोई एतबार नहीं काम फ़ौरन करना चाहीए ये काम अभी करना चाहिए फिर का क्या भरोसा क्या हो

फिर कौन मरे कौन जिए

ज़िंदगी का कोई एतबार नहीं काम फ़ौरन करना चाहीए ये काम अभी करना चाहिए फिर का क्या भरोसा क्या हो

फिर मुड़ली बेल तले

फिर जोखिम में पड़े

फिर पचताए क्या बने जब चिड़ियाँ चुग गईं खेत

वक़्त निकल जाये तो अफ़सोस बेसूद है

फिर पचताए क्या हुवत जब चिड़ियाँ चुग गईं खेत

वक़्त निकल जाये तो अफ़सोस बेसूद है

फिट वा का जीना जो तके पराई आस

जो दूसरों के सहारे पर रहे उसके जीवन पर ला'नत है

फुल्ली लगी न पापड़ी पटाक से बहू आ पड़ी

बिना भाग दौड़ किए काम हो जाना

फुप्पी भतीजे एक ज़ात, माँ बेटे दो ज़ात

इस बात की तरफ़ इशारा है कि फोपी और (भतीजी / भतीजे) यानी भाई की औलाद में जो क़ुरबत होती है सिलसिला-ए-नसब के क़ानून के मुताबिक़ माँ (बेटी / बेटे) में वो रिश्ता नहीं होता

फुप्पी भतीजी एक ज़ात, माँ बेटी दो ज़ात

इस बात की तरफ़ इशारा है कि फोपी और (भतीजी / भतीजे) यानी भाई की औलाद में जो क़ुरबत होती है सिलसिला-ए-नसब के क़ानून के मुताबिक़ माँ (बेटी / बेटे) में वो रिश्ता नहीं होता

फूई फूई तालाब भर जाता है

थोड़ा थोड़ा बहुत हो जाता है

फूईं फूईं तालाब भरता है

रुक : फूई फूई तालाब भरता है

फूइयाँ-फूइयाँ तालाब भर जाता है

थोड़ा-थोड़ा बहुत हो जाता है, फूई-फूई तालाब भर जाता है

फूँक मशाल उठा चौपाला

तैय्यार हो, जल्दी कर (डोली उठाने वालों से येह मिसल ली गई है

फूँके के न फाँके के, टाँग उठा के तापे के

दूसरों की मेहनत अर्थात परिश्रम पर भोग-विलास करता है

फूँस का तापना है

बेबुनियाद काम है, चंद रोज़ा ख़ुशी है, बेफ़ाइदा उम्मीद करना

फूहड़ चाले नौ घर हाले

फूहड़ घर से निकले तो लोग घबराते हैं क्यूँ कि वो हर जगह मूर्खता की बात करती है

फूहड़ चले तो घर हिले

रुक : फूहड़ चाले नौ घर हाले

फूहड़ दर्ज़ी , लम्बा डोरा

फूहड़ इंसान हमेशा काम ख़राब करता है

फूहड़ का माल हँस हँस खाओ

मूर्ख का माल खाएँ कुछ धन्यवाद और एहसान मानने की आवश्यकता नहीं

फूहड़ करे सिंगार माँग ईंटों से फोड़े

मूर्ख स्त्री के पास समय पड़ने पर कोई चीज़ नहीं निकलती इसलिये उसे अनुचित चीज़ें प्रयोग करनी पड़ती हैं

फूहड़ के घर खिड़की लगी सब कुत्तों को चिन्ता पड़ी, बाँडा कुत्ता पाँचे सौन लगी तो है पर देगा कौन

फूहड़ महिला बड़ी लापरवाही से काम करती है और अपनी हानि कर लेती है

फूहड़ के घर उगी चंबेरी, गोबर माँड उसी पर गेरी

फूहड़ महिला की मूर्खता प्रकट करने के लिए कहते हैं

फूहड़ की छाड़ू सुघड़ का लीपा दोनों छुपते नहीं

बद सलीक़ा और ख़ुशसलीक़ा का काम ख़ुद बोल उठता है

फूहड़ सीने बैठे तब सूई तोड़े

निर्बुद्धि हमेशा भौंडे ढंग से काम करता है अर्थात सीने बैठता है तो सुई तोड़ देता है

फूकने के न फाँकने के , टाँग उठा के तापने के

ख़ुदग़रज़ की निसबत बोलते हैं

फूल आए हैं तो फल भी आएगा

तसल्ली के लिए कहते हैं कि सफलता के लक्षण पैदा हो गए हैं

फूल अपने ही बाग़ में ख़ुब खिलता है

प्रसन्नता और प्रसन्न हृदय अपने ही समलैंगिकों से ख़ूब है

फूल बाग़ ही में ख़ूब खिलता है

रुक : फूल अपने ही बाग़ अलख

फूल झड़े तो फल लगे

पहला पड़ाव तय हो तो दूसरा पड़ाव आए, उद्देश्य अथवा लक्ष क्रमश: प्राप्त होता है

फूल की बैरन धूप और घी का बैरी कूप

धूप से फूल मुरझा जाते हैं और कुप्पे में डालने से घी ख़राब हो जाता है

फूल की डाल नीचे को झुके

शरीफ़ एवं सभ्य व्यक्ति घमंड नहीं करता

फूल न पान , कहने को हाँ

निरी बातों से काम नहीं चलता ख़र्च भी करना चाहिए

फूल न पान देबी हाँ हाँ

निरी बातों से काम नहीं चलता, कुछ ख़र्च भी करना चाहिए

फूल न सही , राँझी सही

बहुत नुक़्सान गवारा ना किया ख़ैर थोड़ा सा गवारा कर लिया

फूल नहीं पंखुड़ी बहुत नहीं थोड़ी

बहुत ना मिले तो थोड़ा ही काफ़ी है या आला ना हो तो अदना पर इकतिफ़ा किया जा सकता है

फूल नहीं पंखुड़ी सही

बहुत ना मिले तो थोड़ा ही काफ़ी है या आला ना हो तो अदना पर इकतिफ़ा किया जा सकता है

फूल टहनी ही में अच्छा लगता है

हर वस्तु अपने वास्तविक स्थान में ही ठीक प्रतीत होती है अर्थात हर वस्तु अपने स्थान पर ही शोभा देती है

फूल टहनी ही में ठीक रहता है

हर चीज़ अपनी असली जगह में ही ठीक मालूम होती है

फूल वही जो महेसर चढ़े

किसी चीज़ की मेराज ये कि वो पसंद ख़ातिर ख़ास-ओ-आम हो , चीज़ वही अच्छी जो काम आए, चीज़ वही अच्छी जिसे अच्छे लोग पसंद करें

फूल वही जो महेशर चढ़े

किसी चीज़ की मेराज ये कि वो पसंद ख़ातिर ख़ास-ओ-आम हो , चीज़ वही अच्छी जो काम आए, चीज़ वही अच्छी जिसे अच्छे लोग पसंद करें

फूले फूले फिरत हैं आज हमारो बियाह, तुलसी गए बजाए के देव काठ में पाह

गो शादी बहुत ख़ुशी होती है, इंसान मुसीबतों में फंस जाता है

फूली फूली गोने को ठसक निकल गई रोने को

ब्याह और गौने की बड़ी ख़ुशी थी बाक़ी उम्र बड़ी रोयगी ब्याह के बाद मुसीबतों का ज़माना शुरू होता है

फूलों की मारी गिर पड़ी , लठों की मारी उठ बैठी

जब कोई बड़ी तकलीफ़ उठाए और वावेला मचाए तो ये मिसल कहा करते हैं

फूल-फूल करके चंगेर भर्ती है

मिसाल। थोड़ा थोड़ा करके बहुत होजाता है

फूफी मिस लेना, भतीजे मिस देना

एक रिश्ते से लेना दूसरे से देना, व्यवहार चुका देना

फूटा तो फूटा झोजरा क्यों किया

ज़्यादा नुक़्सान की शिकायत के वक़्त बोलते हैं

फूटे न टूटे झोझरे करने से क्या फ़ाइदा

ज़्यादा नुक़्सान की शिकायत के वक़्त बोलते हैं

फूटी हाँडी आवाज़ से ही पहचानी जाती है

नुक़्स आसानी से मालूम हो जाता है

फूटी सही आँजी न सही

उस कंजूस व्यक्ति के संबंध में कहते हैं जो हानि से बचने के लिए ख़र्च न करे

फुवार से खेत नहीं भरते

थोड़ी पूंजी से बड़ा काम नहीं होता

फुय्यों फुय्यों तालाब भर जाता है

थोड़ा थोड़ा करके बहुत हो जाता है, पैसा पैसा जमा करके आदमी मालदार बिन जाता है

पिए दूध और खाए माल

उस व्यक्ति के संबंध में बोलते हैं जो भोग-विलास में जीवन व्यतीत करे, उस शख़्स की निस्बत बोलते हैं जो ऐश-ओ-इशरत में ज़िंदगी बसर करे

पिछ्ला खाया डंड बराबर

पुराने क़र्ज़ की अदायगी ऐसी महसूस होती है गोया तावान या जुर्माना अदा कररहे हैं

पिछ्ली टिकिया खाई, पिछ्ली 'अक़्ल आई

महिलाओं का मानना है कि पिछली टिकिया अर्थात पिछली रोटी खाने से 'अक़्ल अर्थात बुद्धि देर में आती है

पिद्दी से पदम शाह बन गया

ग़रीब से अमीर हो गया

पिद्दी वाली बात जिस टहनी पर बैठूँ वही झुके

कमीना अपने आप को बड़े मरतबे वाला समझता है

पी के पातन सर धरो धरो चरन पे सीस, बासा हो बैकुंठ में फिर तो बिसवा बीस

स्त्री बेटी को सदुपदेश देती है कि पति का कहा करना इस से स्वर्ग मिलेगा

पी प्याला मार भाला

सोच-विचार कुछ न करो बस मारने में जुट जाओ या बस जाओ और अपना काम सिद्ध करो

पीच पी हज़ार ने'मत पाई

जो खाने को मिल गया ईश्वरीय देन समझ कर ईश्वर का धन्यवाद किया जाए

पीछे कुछ और मुँह पर मुमानी

मुंह पर तारीफ़ और ग़ीबत में बुराई

पीपल काटे पाल बिनासे भगवा भेस सतावे, काया गढ़ी में दया न ब्यापे जड़ा मूल से जावे

जो व्यक्ति पीपल काटे मकान गिराए नेक आदमीयों को सताए लोगों पर रहम न खाए उसका हर तरह सत्यानास होता है

पीर आप दर-माँदा हैं, शफ़ा'अत किस की करें

जिसकी सहायता चाहते हैं वह स्वयं ही विपत्ति में पड़ा है

पीर जी की सगाई मीर जी के यहाँ

जो जैसा है उसका व्यवहार वैसे व्यक्ति के साथ ही होना

पीर की पीरी से काम पीर के फ़े'लों से क्या काम

۔मक़ूला। (ओ)बुज़ुर्ग की बुजु़र्गी से मतलब है इस के अफ़आल की तहक़ीक़ात फ़ुज़ूल है

पीर को न फ़क़ीर को पहले काने चोर को

जब कोई कम हैसियत शख़्स अपने आप को औरों पर मुक़द्दम समझे तो उस वक़्त कहते हैं

पीर मियाँ बकरी मुरीद मियाँ बाँगा, आ गई बकरी चर गई बाँगा

पीर मियाँ तो बकरी हैं और उनका चेला है कपास का खेत, बकरी आई और कपास चर गई अर्थात गुरु चेलों की ही कमाई खाते हैं

पीर न शहीद नकटे का छापा

जब कोई कम हैसियत शख़्स अपने को मुक़द्दम समझे तो कहते हैं

पीरी-ओ-सद-'ऐब

बढ़्ढ़्াापा आदमी में सैकड़ों ऐब पैदा कर देता है, फ़ारसी मिसरा : 'पीरी वसिद ऐब जेनी गुफ़्ता अंद' का इबतिदाई हिस्सा

पीस लूँ तो पीटूँ

रोज़ी की फ़िक्र मर्दे के मातम से मुक़द्दम है, तलाश-ए-मुआश सब कामों से मुक़द्दम है

पीस मूई पका मूई आए लौठे खा गए

मेहनत मशक़्क़त करने वाला महरूम रहा दूसरों ने फ़ायदा उठाया

पीस पास मिनहाज मरे , करामत मोहम्मद झंडे को

जब मेहनत कोई करे और ख़ुशक़िसमती से बला मेहनत दूसरा इस का सिला पाए तो ऐसे मौक़ा पर बोलते हैं

पीसा पीसा चपनी भर उठाया

बहुत मेहनत के बाद थोड़ा हासिल होना (सुस्त वक़्क़ा हल की निसबत बोलते हैं

पीत की रीत निराली

मोहब्बत का अंदाज़ ही और है, मोहब्बत का रास्ता ही अलग है

पीत न जाने जात कुजात

प्रेम करने से पहले मनुष्य ज़ात देखकर प्रेम नहीं करता है, उसके लिए तो उसका प्रेमी ज़ात-पात और धर्म से बढ़कर होता है, प्यार के जुनून में जाति और कुलीनता आदि मायने नहीं रखते

पीत तो ऐसी कीजिये जैसे रूई कपास, जीते जी तो संग रहे मुए पे होवे साथ

प्रेम ऐसा होना चाहिये जैसे रुई जीते जी पहनी जाती है और मरने पर कफ़न बनाया जाता है

पीत तो ऐसी कीजिये जूँ हिन्दू की जोय, जीते जी तो संग रहे मरे पे सती होय

प्रेम तो ऐसी होनी चाहिये जैसे हिंदू की पत्नी कि जीते जी साथ रहती है और मरने पर सती होती है

पीटा करो लकीर काला निकल गया

मौक़ा निकल जाने के बाद तदबीर सूचना फे़अले अबस है

पीतम बसें पहाड़ पर और हम जमुना के तीर, अब कि मिलना कठिन है कि पाँव पड़ी ज़ंजीर

प्रीतम पहाड़ पर रहता है और हम जमुना के किनारे अब मिलना मुश्किल है क्यूँकि रखवाली होती है अर्थात यहाँ से निकलना कठिन है

पीठ पीछे बादशाह को भी बुरा कहते हैं

अनुपस्थिति में किसी की कोई परवाह नहीं करता

पीठ पीछे डोम राजा

बड़ों की अनुपस्थिति में छोटों की बन आती है

पीठ पीछे कुछ भी हो

मेरे पीछे कुछ भी होता रहे

पिसनहारी के पूत को चना लाभ

ग़रीब की संतान को जो खाने के लिए मिले संतोष योग्य है

पिसनहारी माँ भली

अमीर बाप से ग़रीब माँ अच्छी होती है

पिटारी में बंद रखने के क़ाबिल हैं

(तंज़न) नादिर, अजीब, अजीब-ओ-ग़रीब

पिया मेरा अंधा किस के लिये करूँ सिंगार

जब कोई कद्रदान ना हो तो क्यों मेहनत करूं (आम तौर पर औरत अपने नाक़द्र शनाश ख़ावंद की निसबत बोला करती हैं)

पोद्ने की ज़ाम्नी ही क^या

अदना की बात का क्या एतबार है

पोपले से हड्डी नहीं चबती

कमज़ोर से कठिन काम नहीं होसकता

पोस्ती की आँच ऊपर ही ऊपर नहीं जाती

अफ़ीम का धुआँ नहीं जाता कमरे में ही भरा रहता है मतलब यह कि दुखिया की आह व्यर्थ नहीं जाती

पोस्ती की आह ऊपरी नहीं जाती

रुक : पोस्ती की आंच अलख

प्रात: काल करो अश्नाना, रोग दोख तुम को नहीं आना

सुबह सवेरे नहाओ तो कभी बीमार नहीं होगे

प्रदेस पराया माँ न माँ का जाया

ग़ैर जगह या दूसरे मुलक में अजनबी लोग होते हैं कोई सगा रिश्तेदार माँ या भाई नहीं होते

प्रदेसी का जी आधा होता है

प्रदेस में मनुष्य का हौसला नहीं रहता

प्रदेसी की पीत फूँस का तापना

अजनबी की मुहब्बत का एतबार नहीं

प्रजा नहीं तो राजा कहाँ

जनता नहीं तो हाकिम भी नहीं

प्रीत डगर जब पग रखा होनी होय सो हो, नेह नगर की रीत है तन मन दीनो खो

जब प्रेम हो जाए तो फिर कठिनता से घबराना नहीं चाहिये

प्रीत न जाने जात कुजात नींद न जाने टूटी खाट, भूक न जाने बासी भात प्यास न जाने धोबी घाट

प्रेम करते समय कोई ये नहीं सोचता कि उस का प्रेमी किस जाति या वर्ण का है, जिस तरह नींद हर जगह और हर हालत में आ जाती है और भूख में मनुष्य को बासी रोटी भी अच्छी मालूम होती है और प्यास लगी हो तो मनुष्य ये नहीं देखता कि पानी शुद्ध है या अशुद्ध

प्रीत न टूटे अन-मिले उत्तम मन की लाग, सौ जुग पानी में रहे चकमक तजे न आग

सच्चा प्रेम अनुपस्थिति में नहीं जाती जिस तरह चक़माक़ पानी में रहने से आग नहीं खोता

प्रीतम हर से नेह कर जैसे खेत किसान, घाटे दे और डंड भरे फेर खेत से ध्यान

ईश्वर से प्रेम इस तरह होनी चाहिये जिस तरह किसान को अपने खेत से होती है गरचे हानि उठाता है परंतु उसे छोड़ता नहीं

प्रीतम प्रीतम सब कहें प्रीतम जाने न कोय, एक बार जो प्रीतम मिले सदा आनंद फिर होय

यदि एक बार सच्चा प्रेम हो जाए तो मनुष्य सब कुछ भूल जाता है मतलब ये है कि प्रेम बहुत कठिन है

पुड़िया में आता है

अर्ज़ां शैय जो महंगी हो जावे इस मौक़ा पर बोलते हैं मसलन जो घटड़ी में आती हो वो लिफाफों में मिलने लगे जैसे गंदुम नख़ूद वग़ैरा

पुहार से खेत नहीं भरते

थोड़ी पूंजी से बड़ा काम नहीं होता

पुल बाँधल जाए, बहू कजरी खेले

बहू खेले और सास बेचारी काम करे

पुन करते पाप होता

नीयत नेकी की हो और बुराई होजाए

पुराना ठीकरा और क़ल'ई की भड़क

उस बूढ़ी महिला के प्रति कहते हैं जो जवानों का प्रारूप अपनाए

पुराने चावल खिल के पकते हैं

(शाब्दिक) पुराने चावलों की ख़ूबी, (लाक्षणिक) बूढ़े लोगों के अनुभनी होने की समर्थन में बोलते हैं

पुराने चावलों में मज़ा होता है

तजरबाकार की राय अच्छी होती है

पुराने ठेकरे पर नई क़ल'ई

वहाँ कहते हैं जहाँ कोई बूढ़ा पुरूष या बूढ़ी महिला युवाओं का तरीक़ा अपनाए या बनाव-श्रिंगार करे

पुरानी देगची पर क़ल'ई की भड़क

उस बूढ़ी महिला के प्रति कहते हैं जो जवानों का प्रारूप अपनाए

पुरानों को झड़की, नयों का प्यार

ऐसा करना ठीक नहीं, बूढ़ों का सम्मान करना चाहिए

पुरुख की माया, बिरिछ की छाया

इंसान की शौहरत और दौलत दरख़्त के साय की तरह आरिज़ी होती है

पुरुख सा पखेरू कोई नहीं

मनुष्य जैसा विलक्षण जीव कोई नहीं

पूछ ले रो कर, आड़ा दे हँस कर

ग़द्दार दोस्त के संंबंध में कहते हैं

पूछें जब बोलिये , बुलाएँ जब जाईये

जब तक कोई पूछे नहीं तब तक बात बतानी नहीं चाईए, और जब तक कोई बुलाए नहीं इस के घर नहीं जाना चाहिए

पूछी ज़मीन की तो कही आसमान की

रुक : पूछो ज़मीन की अलख

पूछो दिन की बताए रात की

पूछो दिन की बताए रात की

पूछते पूछते दिल्ली पहुँच जाते हैं

जुस्तजू से मक़सद हासिल होता है

पूछते पूछते ख़ुदा का घर मिल जाता है

कोशिश और प्रयत्न से कठिन से कठिन काम बन जाता है

पूज ले देवता , छोड़ दे भूत

फ़ुज़ूल बातें छोड़ दे ख़ुदा की तरफ़ ध्यान कर

पूले पूले आँच है

हराईक को अपनी चीज़ की मुहब्बत होती है

पूरा ताैल चाहे महंगा बेच

दुकानदार को तूल में कम चीज़ कभी नहीं देनी चाहिए महंगा बेचना इस से अच्छा है

पूरब जाओ या पच्छम वुही करम के लच्छन

कहीं रहो जो क़िस्मत में है वही मिलता है

पूरब या पच्छम घर सब से उत्तम

अपना वतन सब से अच्छा है कहीं भी हो

पूर्बी रेंक पहाड़ी गधा

अपनी वेशभूषा के विपरीत काम करना

पूरी लगी न पापड़ी , भदाख बहू आ पड़ी

बे मशक़्क़त और बे ख़र्च मुद्दा हासिल होगया और काम बिन गया

पूरी लप्सी घर में खाए, झूटी देवी से आस लगाए

लोग पूड़ी-लपसी स्वयं खाते हैं और देवी से अपनी मनोकामनाओं के पूरा होने की झूठी आशा रखते हैं

पूरी पड़े तो सपूत कहलावें

यदि बेटा माँ-बाप की सेवा भली-भाँति करे तो सपूत कहलाने के योग्य होता है

पूरी से पूरी पड़े तो सब ही पूरी खाएँ

कोई आदमी हमेशा पूरी खा कर नहीं रह सकता अर्थात हमेशा मौज-मज़ा नहीं किया जा सकता

पूस कोने घूस

पूस में आदमी सर्दी से बचने के लिए कोने में जा कर बैठता है

पूस कोने गूस

पूस के महीने में सर्दी बहुत पड़ती है इस लिए लोग कोनों में गर्म होने के लिए घुसते हैं यानी बाहर कम निकलते हैं

पूत भए सियाने , दुख भए पुराने

बेटे जवान हूँ तो सब तकलीफें जाती रहती हैं कीवनका वो कमाने के काबिल होजाते पैं

पूत बिगाने चूमिए मुँह रालों भरिये

पराई औलाद पर मेहनत करनी रायगां जाती है

पूत फ़क़ीरनी का चाल चले अहदियों की

कोई ग़रीब जो अमीराना हुलिया इख़्तियार करे

पूत कपूत हो तो हो पर माँ कुमाता कभी नहीं हो सकती

बेटा माँ के साथ बुरा व्यवहार करे तो करे लेकिन माँ बेटे के साथ बुरा व्यवहार कभी नहीं कर सकती

पूत कपूत पंगोड़ों में ही पहचाने जाते हैं

बच्चे में शुरू से अच्छे या बुरे होने के आसार पाए जाते हैं

पूत करे भटार के आगे आए

बेटे के कामों की सज़ा पिता को भुगतनी पड़ती है

पूत के पाँव पालने में पहचाने जाते हैं

(किसी की) अच्छाई या बुराई का पता संकेतों से ही लग जाता है, सौभाग्य या दुर्भाग्य का पता बचपन में या प्रारम्भिक अवस्था में ही कर्मों और क्रियाओं के माध्यम से चल जाता है

पूत की ज़ात को सो जोखों

सारे ख़तरे मर्दों ही के लिए हैं

पूत माँगने गईं भटार लेती आईं

जो औरतें फ़क़ीरों के पास बेटा मांगने जाती हैं, वो उमूमन बदकारी में मुलव्वस हो जाती हैं

पूत मीठ भतार मीठ किरिया केह कर खाऊँ

पति और पुत्र दोनों प्यारे हैं, सौगंध किसकी खाऊँ, अति असमंजस में हूँ, समझ में नहीं आता क्या किया जाए

पूत ना भटार पीछो ही टाएँ टाएँ

ना बेटा ना ख़ावंद मुफ़्त का रोना, इस के मुताल्लिक़ कहा जाता है कि जो इस के साथ हमदर्दी करे जिस से इस का कोई ताल्लुक़ नहीं

पूत राज , मोहताज राज

(घर में) बेटे की अमलदारी में मुहताजी होती है, बेटों की कमाई पर बेटों का मुहताज होना पड़ता है

पूत सपूत तो क्यूँ संचे

यदि बेटा अच्छा है तो उसके लिए रुपया जमा करने की आवश्यक्ता नहीं और यदि बुरा है तो भी आवश्यक्ता नहीं

पूत-पूत कटोरे मूत

लाड़-प्यार से पाले हुए बच्चे बिगड़ जाते हैं

संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .

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