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सुकून-ए-क़ल्ब

दिल का इतमीनान, दिल की शांति, आराम, सहायता, चैन और सुख

ख़िल्क़िय्या

प्राकृतिक, फ़ित्री

खिस्यानी बिल्ली खम्बा नोचे

जिसे क्रोध आ रहा हो वह अपनी खीझ या क्रोध दूसरों पर उतारता है, लाचारी में आदमी दूसरों पर क्रोध करता है, लज्जित व्यक्ति दूसरों पर अपनी लज्जा उतारता है, निर्बल की खीझ

सुरूर

मन-मस्तिष्क की शांति या सुकून प्रदान करने वाली अवस्था, ख़ुशी, आनंद, प्रसन्नता, मस्ती, तन्मयता

बे-हिजाबी

बेे-पर्दा होना, बेपर्दगी, घूँघट उठा देना, खुलेबंदों फिरना (स्त्री का)

शरीक-ए-हयात

ज़िंदगी का दोस्त या साथी, अर्थात: जीवनसंगिनी, पत्नी, भार्या, पति

मशवरत

आपस में सोच विचार एवं सलाह या राय का आदान-प्रदान करना, सलाह, मशवरा, परस्पर सुझाव

सितमगर

(प्रायः कविता में) प्रेमिका, माशूक़, महबूब

कोशिश

कोई काम करने के लिए विशेष रूप से किया जानेवाला प्रयत्न, मेहनत, दौड़ धूप, प्रयत्न, प्रयास, चेष्टा, उद्योग, श्रम, उद्यम, उपाय, परिश्रम

बे-नियाज़

जिसे किसी से कुछ लेने की इच्छा न हो निःस्पृह, स्वच्छंद, आज़ाद, बेपरवाह

दीद के क़ाबिल

देखने के लायक़, देखने योग्य

क़ाबिल-ए-दीद

देखने लायक़, अच्छा दिखने वाला

आठ बार नौ त्योहार

सुख-सुविधा और आराम का शौक़ या लगन ऐसा बढ़ा हुआ है कि युग और समय उसको अल्प व्यय नहीं करने देता

चमनिस्तान

ऐसा बाग़ जहाँ फूल ही फूल हों, ऐसी जगह जहाँ दूर तक फूल ही फूल और हरा भरा नज़र आए, वाटिका, चमन, बाग़

'औरत

जाया, भार्या, पत्नी, जोरू

ताग़ूत

शैतान, अत्यन्त निर्दय और अत्याचारी व्यक्ति

मन-भावन

मन को भाने या अच्छा लगने वाला

दादरा

संगीत में एक प्रकार का चलता गाना (पक्के या शास्त्रीय गानों से भिन्न), एक प्रकार का गान, एक ताल

मज़दूर

शारीरिक श्रम के द्वारा जीविका कमाने वाला कोई व्यक्ति, जैसे: इमारत बनाने, कल-कारख़ानों में काम करने वाला, श्रमिक, कर्मकार, भृतक, मजूर

ख़ैर-अंदेश

भलाई की बात सोचने वाला, वह शख़्स जो किसी की भलाई चाहे, शुभचिंतक

मुहावरे

यह भारतीय मुहावरों का एक शब्दकोश है, जो रेख्ता फ़ाउंडेशन की एक पहल है। इसमें सदियों से प्रचलित पारंपरिक कहावतों और मुहावरों का एक मूल्यवान संग्रह शामिल है, जो भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति, समाज और दैनिक जीवन को प्रतिबिंबित करता है। यह शब्दकोश आलोचकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा भाषा और साहित्य के प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और विश्वसनीय संदर्भ स्रोत के रूप में कार्य करता है।

प्रमुख मुहावरे

मुहावरों की सूची

संबंधित परिणाम

लड़ाई का घर हाँसी, रोग का घर खाँसी

लड़ाई का आरंभ हँसी-मज़ाक़ से होता है और बीमारी का खाँसी से

लड़ाई और आग का बढ़ाना क्या

लड़ाई और आग तेज़ करना मुश्किल नहीं है

लड़ाई का पीछा भारी होता है

लड़ाई की तीव्रता अंत में अधिक होती है, युद्ध का परिणाम बाद में दिखता है

लड़ाई में लड्डू पेड़े नहीं बटते

रुक : लड़ाई में लड्डू नहीं बटते

लड़ाके के चार कान

झगड़ा करने के लिए दूसरे की बात बहुत जल्दी सुनता है

लड़े सिपाही नाम सरदार का, काटे बाढ़ नाम तलवार का

कारिंदों की कार-गुज़ारी से रईस की नेक-नामी होती है

लड़ें न भिड़ें तरकश बाँधे फिरें

काम धाम कुछ नहीं करते शोर-शराबा मचाते हैं

लड़ें साँड बाड़ी का भुर्कस

बड़े लोगों में लड़ाई हो और ग़रीबों का नुक़्सान हो

लड़का जने बीवी और पट्टी बाँधें मियाँ

दुख भरे कोई और लाभ उठाए कोई, एक दुख उठाए दूसरा मज़ा उड़ाए

लड़का रोवे बालों को , नाई रोवे मुंडाई को

हर शख़्स अपना ही दुख रोता है, सब अपना अपना दुखड़ा बयान करते हैं

लड़कन के भगवा नहीं, बिलाई के गाती

दूसरों पर ख़र्च करता है अपनों को कुछ नहीं देता

लड़के जने बीवी और पट्टी बाँधें मियाँ

दुख भरे कोई और फ़ायदा कोई उठाए

लड़के को जब भेड़िया ले गया तब टट्टी बाँधी

मूर्ख व्यक्ति हानि हो जाने के बाद ही सावधानी बरतता है

लड़की की बेल और ककड़ी की बेल बराबर होती है

लरकी (लड़के के मुक़ाबले में) बहुत जल्द बढ़ती और जवान होती है, जिस तरह से ककड़ी की बैल जल्दी बढ़ कर फैल जाती है इसी तरह लड़कीयां देखते देखते बढ़ कर जवान होजाती हैं

लड़की तेरा ब्याह कर दें, कहा मैं कैसे कहूँ

कुछ चीज़ों की दिल में तो इच्छा होती है परंतु ज़ुबान से नहीं कहा जा सकता

लड़कों का खेल , चिड़ियों का मरन

ना समझ के आगे जाँबाज़ी और जांनिसारी की कुछ क़दर नहीं

लड़कों का खेल चिड़ियों का मरन

नासमझ के आगे बहादुरी और वीरता की कोई मूल्य नहीं

लड़कों में लड़का, बूढ़ों में बूढ़ा

जैसा माहौल हो वैसा ख़ुद हो जाना चाहिए, हालात के मुताबिक़ रवैय्या इख़तियार करना चाहिए, हर किस्म के आदमीयों से घुल मिल जाने वाला

लड़ने मरने को तैयार

लड़ाई पर तत्पर, जान देने पर तत्पर, झगड़ालू

लड़नी रात करे बिछड़नी रात न करे

महबूब के साथ लड़ाई भी जुदाई से बेहतर है (लड़ाई झगड़े के मौक़ा पर प्रयुक्त)

लड़तों के पीछे, भागतों के आगे

बोदे और डरपोक आदमी की निसबत बोलते हैं

लंग ख़र , कोर ख़र , पीर मख़र

नगड़ा और अंधा कुछ ना कुछ काम दे सकते हैं मगर बूढ़ा कुछ नहीं दे सकता

लंगड़ी बटेर आसमान पर घोंसला

रुक : लंगड़ी कट्टू आसमान पर घोंसला

लंगड़ी घोड़ी, मसूर का दाना

इतनी लियाक़त नहीं जितना दिमाग़ है

लंगड़ी कट्टो आसमान पर घोंसला

अपनी साहीत और इस्तिताअत से बढ़ कर हौसला करने वाले की निसबत बोलते हैं, उतनी लियाक़त नहीं जितनी ख़ाहिश है, चूँकि लंगड़ी गिलहरी का निहायत बुलंदी पर घर बनाना अपनी ताक़त से बाहर काम है, इसी सबब से अपनी लियाक़त से बढ़ कर हौसला करनेवाली की निसबत बोलते हैं

लंगट पड़े अघाड़ के पाले

दोनों एक जैसे हैं, दोनों एक समान हैं, दोनों यकसाँ हैं, जैसे को तैसा

लंका में सब बड़े

लंका में जो है बावन गज़ का

लाए दाम बने काम

रुपये से हर काम हो जाता है

लाए गा दारा तो खाए गी दारी, न लाए गा दारा तो पड़े गी ख़्वारी

पति कमा कर लाएगा तो पत्नी खाएगी, पति न कमाएगा तो फ़ाक़े होंगे

लाइक़ अफ़सर न बाशद हर सिरे

हर व्यक्ति सरदारी के क़ाबिल नहीं है

लाँडी न मोरा , क्या लेगा न्योता चोरा

घर में कुछ भी नहीं, चोर सुसरा क्या ले जाएगा

लाओ कुआँ, मैं डूबूँ

जब कोई निर्लज्ज व्यक्ति को निर्लज्जता के काम पर टोके और कहे कि डूब मरो तो वह उत्तर देता है कि डूबने की व्यवस्था करो

लाभ बग़ैर हरके नहीं, लाभ बिना नहीं हरके

बड़े मतलबी हैं, बिना फ़ायदे के पूजा नहीं करते

लाचारी में बिचार नहीं

लाचार आदमी जो करे उस पर आलोचना नहीं हो सकती

लाचारी पर्बत से भारी

मजबूर होकर आदमी न जाने क्या-क्या करता है

लाद दे लदा दे हाकन वाला साथ दे

रुक : लाद दो लदा दो लादने वाला साथ दो

लाद दे लदवा दे और लादने वाला भी साथ दे

जो कुछ करना ज़रूरी है वो तुम ही करो, हम से कुछ ना हो सकेगा (हर किस्म का बोझ दूसरों पर डालने वाले के लिए मुस्तामल)

लाद दो लदा दो और लादने वाला भी साथ दो

जो कुछ करना ज़रूरी है वो तुम ही करो, हम से कुछ ना हो सकेगा (हर किस्म का बोझ दूसरों पर डालने वाले के लिए मुस्तामल)

लाड का मुँह टेढ़ा

जिस बच्चे के लाड़ उठाए जाते हैं वह अशिष्ट हो जाता है

लाड में आवे ककड़ी बल बल जावे कव्वा

रुक: जैसी रूह सीसे फ़रिश्ते

लाड बच्चा गाँडू

बहुत लाड से बच्चे ख़राब हो जाते हैं

लाडला बच्चा जुवारी

बहुत लाड से बच्चे ख़राब हो जाते हैं

लाडला पूत कटोरे मूत

चाव चोचले से पाले हुए बच्चे आवारा होते

लाडली लड़की छिनाल

लाड़ से बच्चे ख़राब हो जाते हैं, ज़्यादा प्यार-दुलार करने से बच्चे बिगड़ जाते हैं

लाग लगी हुई तब लाज कहाँ

किसी से प्रेम हो जाने पर लाज-शर्म अलग रखी रहती है

लाज की आँख जहाज़ से भारी

पहाड़ या जहाज़ अपनी जगह से चल सकता है मगर ग़ैरत मंद की आँख अपनी जगह से नहीं उठ सकती

लाख चूहे खा कर बिल्ली हज को चली

(तंज़न) सैकड़ों बुराईयां करने के बाद नेकी का इरादा या अदा किया

लाख दो लाख की पर्वा न करना

मामूली रुपये को ख़ातिर में न लाना

लाख हाथी लुट गया फिर भी सवा लाख टके का है

۔मिसल। देखो हाथी हज़ार लिट्टे। देखो लाखों

लाख जाए पर साख न जाए

दमड़ी चली जाये पर चमड़ी ना जाये, पैसा चला जाये मगर इज़्ज़त बरक़रार रहे, जान जाये आन ना जाये

लाख लखेरे के हाँ या लपाड़ी की ज़बान पर

मक़दूर से ज़्यादा माँगना, झूटी लिन तर इंयां, बेबुनियाद शेखी , किसी महाजन के गमाशते ने चठ्ठ्াी भेजी कि एक लाख रुपय भेज दो इस ने जवाब दिया, एक लाख वाले के पास है या गप्पी की ज़बान पर

लाख तदबीर एक तरफ़, एक तक़दीर एक तरफ़

भाग्य के आगे उपाय नहीं चलता

लाल बुझक्कड़ बूझियाँ और न बूझा कोए, कड़ी बड़ंगा तोड़ के ऊपर ही को लो

एक लड़का एक खंबा को दोनों हाथों से पकड़े हुए था, बाप ने चुने दिए तो उसने दोनों हाथ फैला कर ले लिए फिर हाथ न निकल सके, लाल बुझक्कड़ को बुलाया गया, उसने कहा कि छत उतार कर लड़के को ऊपर खींच लो

लाल बुझक्कड़ बूझियाँ और न बूझा कोए, पैर में चक्की बाँध के कोई हिरना कूदा हुए

रात को गाँव के पास से हाथी गुज़रा, उसके पाँव का निशान देख कर लोग बहुत हैरान हुए, लाल बुझक्कड़ ने यह फ़ैसला दिया कि कोई हिरन पाँव में चक्की बाँध के कूदा है

लाल गुडर में नहीं छुपता

अच्छी चीज़ छुपाने नहीं छुपती

लाल गूदड़ में नहीं छुपता

शराफ़त या पूर्णता आदि को निर्धनता नहीं छिपा सकती, ऊपरी ख़राबी या दोषों से अच्छाई नहीं छुपती ज़ाहिर हो कर रहती है, अच्छी चीज़ की ख़ूबी हर हाल में दिखती है

लाल ख़ान की चादर बड़ी होगी तो अपना बदन ढाँकेगी किसी को क्या

अमीर होगा तो ख़ुद उस को फ़ायदा होगा, जब कोई किसी अमीर की दौलत-ओ-स्रोत का ज़िक्र करे तो कहते हैं

लाल प्यारा तो उस का ख़्याल भी प्यारा

۔ मिसल। जो दिल को पसंद होताहै उस की हर बात पसंद आतीहे। अपनों के ऐब भी गवारा होजाते हैं

लाला का घोड़ा खाए बहुत चले थोड़ा

पेटू और काम न करने वाला, नर्म मिज़ाज व्यक्ति के नौकर बहुत खाते हैं और काम कम करते हैं

लाला के नौकर हैं भाँड के नौकर नहीं

आक़ा अथवा स्वामी के वचन की पुष्टि और आज्ञा का पालन प्राथमिक है

लाला का घोड़ा खाए बहुत , चले थोड़ा

पेटू और काम ना करने वाले की निसबत बोलते हैं, नरम मिज़ाज आदमी के नौकर खाते बहुत हैं और काम कम करते हैं

लालच बस परलोक नसाए

लालच इंसान को मार डालता है, लालच इंसान को नर्क में भेजता है

लालच बुरी बला है

लालच का परिणाम तबाही एवं बर्बादी है

लालच गला कटवा देता है

हिर्स और तुम्ह इंसान को मरवा देता है

लालच गुन बनास

लालच और तुम्ह ख़ूबीयों या औसाफ़ को बर्बाद करदेती है

लालच का पेट नहीं भरता

लालची आदमी की हवस कभी पूरी नहीं होती

लालच पशेमान है

बहुत लालच से आदमी को लज्जित होना पड़ता है

लालची को जहाँ तंग

लालची के लिए दुनिया में रहना मुश्किल हो जाता है

ला'नत का शुर्वा फट फट की रोटी

वो रिज़्क जो बेइज़्ज़ती से हासिल हो, वो रोटी जो सैंकड़ों बातें सुना कर और ताने महिने दे कर खिलाई जाये

ला'नत की रोटी , फट फट का शोरवा

रुक : लानत का शिरोह फट फट की रोटी

लारा लबेरी का यार, कभी न उतरा पार

आवश्यकता से अधिक सोच-विचार करने वाले का काम कभी पूरा नहीं होता

लारा-लेरी किया है

हीला बहाना किया है

लात का आदमी बातों से नहीं मानता، लातों के भूत बातों से नहीं मानते

उसके बारे में कहा जाता है कि जिसकी दुष्टता और अवज्ञा बिना सख़्ती के न जाए, दुष्ट आदमी जूते या मार से ही ठीक रहता है

लात मारी झोंपड़ी चूल्हे मियाँ सलाम

इधर-उधर मारा-मारा फिरनेवालों के मुताल्लिक़ कहते हैं, जिनका घरबार नहीं होता

लाठी हाथ की, भाई साथ का

लाठी वही अच्छी जो हाथ में हो और भाई वह अच्छा जो साथ दे

लाठी कपार से भेट नहीं , झूटों बाप बाप

मारपीट से अभी वास्ता नहीं पड़ा और बेकार हाय बाप चिल्लाना शुरू कर दिया, क़बल अज़क वावेला, नाहक़ की फ़र्याद

लाठी के हाथ, माल गुज़ारी बे-बाक़

लाठी के भय से काम जल्दी होते हैं

लाठी लिये पाँव पर ख़ाक

मुसाफ़िर के मुताल्लिक़ कहते हैं, मुसाफ़िर की निशानी है

लाठी टूटे, न बासन फूटे

इस तरह काम निकालना जिस में किसी का नुक़्सान ना हो, काम भी हो जाये और किसी का नुक़्सान ना हो

लातों का आदमी बातों से न मानेगा

रुक : लातों के भूत बातों से नहीं मानते जो ज़्यादा मुस्तामल है

लातों का देव बातों से नहीं मानता

नीच समझाने से नहीं मानता अर्थात बिना पिटे सही रास्ते पर नहीं आता

लातों के भूत बातों से नहीं मनते

जूती ख़ौरा ज़बानी समझाने से नहीं समझता, बद आदमी पट्टे बगै़र नहीं मानता, शरीर या सरकश मार पीट ही दरुस्त होता है

लातों के भूत बातों से नहीं सीधे होते

रुक : लातों के भूत बातों से नहीं मानते जो ज़्यादा मुस्तामल और फ़सीह है

लब पर शेख़ बग़ल में ईंटें

दिल में कुछ ज़बान पर कुछ

लबेरी कपड़े , फटा हुआ टाट , जनम न देखा बोरिया सपने में आई खाट

कोई निहायत मुफ़लिसी की हालत में महलों के ख़ाब देखे तो कहते हैं

लक्ष्मी बग़ैर आदर कौन करे

जिस के पास दौलत ना हो उस की कोई इज़्ज़त नहीं करता

लक्ष्मी बिन आदर कौन करे

जिसके पास दौलत न हो उसका कोई सम्मान नहीं करता

लछमी से भेंट ना, दलिद्दर से बैर

वह बड़ा भाग्यहीन आदमी है, बदक़िस्मत आदमी है, बहुत ग़रीब है

लड्डू कहे से मुँह मीठा नहीं होता

बातों ही बातों से काम नहीं होता है कुछ ख़र्च करना पड़ता है

लड्डू कहे से मुँह नहीं मीठा होता

ख़ाली खोखली बातों या केवल चापलूसी से काम नहीं बनता, कुछ ख़र्च करना भी पड़ता है, बिना दिए-लिए काम नहीं चलता

लड्डू लड़े चूरा झड़े

दो के लड़ने से तीसरे को फ़ायदा पहुँचता है, अमीर आदमियों के झगड़ों में लोगों को फ़ायदा होता है

लड्डू न तोड़ो , चूरा झाड़ खाओ

असल पूंजी को ख़र्च ना करो नफ़ा खाओ

लग गई जब, लाज कहाँ

जब आँख लड़ जाती है तो श्रम लिहाज़ कम रहता है

लग गई जूती उड़ गई खे, फल पान सी हो गई देह

बेशरम आदमी के मुताल्लिक़ कहते हैं कि जूतीयां लगने से शर्मिंदा होने की बजाय ढिटाई से कहता है कि इस से मिट्टी झड़ गई और जिस्म हल्का हो गया

लग गई जूती उड़ गई खे, फूल पान सी हो गई देह

बेशरम आदमी के मुताल्लिक़ कहते हैं कि जूतीयां लगने से शर्मिंदा होने की बजाय ढिटाई से कहता है कि इस से मिट्टी झड़ गई और जिस्म हल्का हो गया

लग गया तो तीर नहीं तो तुक्का

चाहे काम हो या न हो, लेकिन हिम्मत बनी रहनी चाहिए, इंसान को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए

लगा सो भगा

जो काम आरंभ हुआ फिर वो इंतिहा को पहुँचा

लगा तो तीर नहीं तो तुक्का

आदमी को हर काम करने में हिम्मत बाँधनी चाहिए चाहे हो चाहे न हो

लगे आग तो बुझे जल से, जल में लगे तो बुझे कहो कैसे

जब मदद करने वाला ख़ुद मुसीबत में गिरफ़्तार हो तो कौन मदद करे

लगे आग तो बूझे जल से, जल में लगे तो बूझे कहो कैसे

जब मदद करने वाला ख़ुद मुसीबत में गिरफ़्तार हो तो कौन मदद करे

लगे दम मिटे ग़म

चरसियों आदि की उक्ति है कि चरस पीने से चिंता दूर हो जाती है

लगे रगड़ा मिटे झगड़ा

भंग पीने वाले कहते हैं कि भंग घोंट कर पीने के बाद कोई झगड़ा बाक़ी नहीं रहता

लगे तो तीर वर्ना तुक्का

रुक : लगा तो तीर नहीं तो तुक्का

लगी में और लगती है

जहाँ एक बार चोट लगी हो दोबारा लगती है, मुसीबत पर मुसीबत आती है

लगी तो रोज़ी, नहीं तो रोज़ा

मिल गया तो खा लिया वर्ना उपवास रख लिया अर्थात मिला तो खा लिया नहीं तो व्रत समझो, अत्यधिक निर्धनता की ओर इशारा

लहद में तीन दिन भारी

रुक : क़ब्र में तीन दिन भारी, क़ब्र में तीन दिन तक हिसाब किताब होता रहता है

लजाऊ मरे ढिटाऊ जिये गंगा जल चमार पिये

ग़ैरत मंद मरते हैं और बेग़ैरत अपना काम बनाते हैं कमीनों के हिस्से में आजकल मुरातिब हैं, उलटा ज़माना है

लजाऊ मरे ढिटाऊ जिये गंगा जल चमारों पिये

ग़ैरत मंद मरते हैं और बेग़ैरत अपना काम बनाते हैं कमीनों के हिस्से में आजकल मुरातिब हैं, उलटा ज़माना है

लज्जाधर बहुरिया सराय में डेरा

शर्मीली अर्थात लाज वाली स्त्री सराय में बसेरा, असंभव बात

लकड़ी के बल बंदरिया नाचे

हर एक शख़्स हिमायत के बल पर कूदता है , डर के मारे सब कुछ करना पड़ता है

लकड़ी क्या जले क्या उजाला हो

एक व्यक्ति किसी की कहाँ तक मदद कर सकता है, अकेला व्यक्ति किस-किस का सहानुभूतिशील बने

लकड़ी लिये पैर ख़ाक

आवारागर्द, हाथ में लक्कड़ी पैरों पर ख़ाक पड़ी हुई हालत से फिरना

लकड़ी मारे पानी जुदा नहीं होता

उस अवसर पर उपयोग किया जाता है जब कोई व्यक्ति दो प्रियजनों के बीच फूट डालने का प्रयास करता है और सफल नहीं होता है

लकड़ी पर फ़क़ीर

लकड़ी लेकर ही वह फ़क़ीर बन गया है

लख चोरी कख चोरी

चोरी चाहे थोड़ी हो या ज़्यादा बहरहाल है तो चोरी

लख लुटे कोयलों पर मोहर

(रुक : अशर्फ़ियां लटें और कोयलों पर महर ज़्यादा मुस्तामल है), बेमहल की किफ़ायत शिआरी

लल्लू का बाप जग्धर

इमका-ढिमका, ऐरा-ग़ैरा, पिता और पुत्र दोनों सामान्य

लम्बे घूँघट वाली से डरिये

किसी ऐसे व्यक्ति का कहना जो स्त्रियों का सम्मान नहीं करता

लंका में जो छोटा सो बावन गज़ का

लंका में जो राक्षस सबसे छोटे हैं उनकी भी ऊँचाई बावन गज़ से कम नहीं है बड़ों का कुछ कहना ही नहीं है, ऐसे स्थान पर प्रयुक्त जहाँ क्या छोटे क्या बड़े सब दुष्ट

लपटें की लपटें चली आ रही हैं

ख़ुशबू की लहरें लगातार आ रही हैं

लश्कर बे मीर , तकिया बे फ़क़ीर , फ़क़ीर बे पीर , तर्कश बे तीर

लश्कर का कोई सरदार, तकीए का कोई फ़क़ीर, फ़क़ीर का कोई गुरु और तीर दान में कोई तीर ना हो तो वो बेकार है

लश्कर की अगाड़ी, आँधी की पछाड़ी

लश्कर का अगला हिस्सा और आँधी का आख़िरी ज़बरदस्त एवं ख़तरनाक होते हैं

लश्कर में ऊँट बदनाम

ऐसे आदमी के बारे में बोलते हैं जो किसी दोष में प्रसिद्ध हो, अनावश्यक बदनामी

लटे की जोए सर गाँव की सरहज

ग़रीब की चीज़ पर हर व्यक्ति क़बज़ा करने की कोशिश करता है, ग़रीब की चीज़ पर सब लोग हक़ जताने लगते हैं

लटे मारे शाह- मदार

कमज़ोर को हर आदमी सताता है

लटे-पटे दिन काटिए रहिए घाम सो, वाके तले न बैठिए जा पेड़ पात न हो

तकलीफ़ में दिन काटना और गर्मी में सोए रहना बेहतर है लेकिन ऐसे पेड़ के नीचे जिस पर पत्ते न हूँ बिलकुल सोना नहीं चाहिए ऐसा पेड़ सूखा हुआ और खोखला होता है और उसके टूटने का डर होता है

लट्टू सलारू जमा' हो रहे हैं

सभी संगत वाले अपमानित, अविश्वसनीय हैं

लौंडी बन कमाए और बीवी बन खाए

कठिन परिश्रम करके ही शांति प्राप्त होती है

लौंडी डाइन से बुरी , गो हरम बन जाए

लौंडी अगर बीवी बिन जाये तो डायन से बुरी साबित होती है , कमीने को रुतबा मिल जाये तो बहुत तंग करता है

लौंडी हो कर कमाना बीवी बन कर खाना

मेहनत से शर्म न करने वाला अमीराना ज़िंदगी बसर करता है

लौंडी की ख़ोशामद से सुसराल में पास

कारिंदों के ख़ुश रखने से आक़ा भी राज़ी होता है

लौंडी की ज़ात क्या, रंडी का साथ क्या, भेड़ की लात क्या, 'ओरत की बात क्या

लौंडी की ज़ात कोई नहीं होती और रंडी की रिफ़ाक़त फ़ुज़ूल है, भीड़ की लात का कोई असर नहीं होता और औरत की बात का वज़न नहीं होता

लौंडी को लाैंडी कहा रो दी , बीवी को लौंडी कहा हँस दी

ऐबदार का ऐब जताया जाये तो वो बुरा मानता है, बेऐब को ऐब लगाया जाये तो वो हंस कर टाल देता है, शरीफ़ और रज़ील में ज़र्फ़ का फ़र्क़ होता है

लौंडी ने दार पाया, पेटों को तेल लगाया

ज़रा मौक़ा मिला और माल उड़ा लिया

लौंडी ने सीखा सलाम , न देखी सुब्ह न देखी शाम

तहज़ीब के लिए सलीक़ा-ओ-तमीज़ दरकार है

लज़ीज़ बूद हिकायत दराज़ तर गुफ़्तम

(फ़ारसी भाषा प्रसिद्ध कवि उर्फ़ी के क़सीदे की एक पंक्ति उर्दू में कहावत के रूप में प्रयुक्त) दिलचस्प बात को बढ़ा कर कहना अनुचित नहीं, बात मनोरंजक हो तो लम्बी हो जाती है

ले दे आटा कठौती में

स्वार्थी व्यक्ति को हर समय अपने मतलब से काम होता है

ले के दिया कमा के खाया ऐसी तैसी जगत में आया

जो ले के दे और कमा के खाए इस का दुनिया में आना फ़ुज़ूल है, बदमाश और नादहिंद लोगों के मुताल्लिक़ कहते हैं

ले लकड़ी चल गदड़ी

(ओ) मामूली तैय्यारी की और किसी जगह चली गई, मामूली तैय्यारी की और किसी जगह रवाना हुआ

ले पड़ोसन झोंपड़ा नित उठ करती राड़ आधा बगड़ बुहारती सारा बगड़ बुहार

(अविर) लड़ाका और झगड़ालू हमसाए से अलग होते वक़्त कहती हैं कि तो हमेशा तकरार फ़साद करता था अब तो ही रह ए पड़ोसन झोंपड़ी सँभाल, तो रोज़ झगड़ती थी अब आधी के बजाय सारी सँभाल

ले पड़ोसन झोंपड़ा नित उठ करती राड़ आधा बगड़ बुहारती सारा बगड़ बुहार

(अविर) लड़ाका और झगड़ालू हमसाए से अलग होते वक़्त कहती हैं कि तो हमेशा तकरार फ़साद करता था अब तो ही रह ए पड़ोसन झोंपड़ी सँभाल, तो रोज़ झगड़ती थी अब आधी के बजाय सारी सँभाल

ले पालक, घर घालक

मुतबन्ना से वफ़ा नहीं, ले पालक घर की तबाही का सबब बनता है, कमअस्ल से वफ़ा नहीं

लेंडी दिमाग़ को चढ़ जाना

अभिमानी और घमंडी होजाना

लेखा जौ जौ बख़्शिश सौ सौ

रुक : हिसाब जो जो बख़शिश सौ सौ, मुआमले में कोड़ी कोड़ी का हिसाब होना, चाहिए

लेना देना कुछ नहीं और गठरी वाले हूत

ऐसे मौक़ा पर कहते हैं जब कोई बेअमल और नाकारा शख़्स सिर्फ़ दावे और शेखी के ज़रीये लोगों को मरऊब करना चाहता है, नाहक़ किसी का वक़्त ख़राब करता है

लेना देना साढे़ बाईस

फ़ैसला कर लेने के अवसर पर कहते हैं

लेना एक न देने दो

किसी से कोई संबंध नहीं, स्वतंत्र हैं

लेना न देना बातों का जम'-ख़र्च

केवल बातें ही बातें हैं व्यावहारिक रूप से कुछ भी नहीं है

लेना न देना काढ़े फिरे हसीना

बेकार में हस्तक्षेप करने के अवसर पर कहते हैं

लेना न देना कारे न मसअले

कुछ हासिल ना हुसूल

लेना न देना, गाड़ी भरे चना

कुछ ख़रीदते हैं नहीं फिर भी कहते हैं एक गाड़ी चना तोल दो, व्यर्थ की बात करना

लेना न एक, देने दो

इस मु'आमले में हानि ही हानि है

लेने आएं आग और बन बैठें बावर्चन

किसी बहाने से अपना क़दम जमाना

लेने को मछली देने के काँटे

रुक : लेने को मछली देने को कांटा

लेने को मछली देने को काँटा

क़र्ज़ा लेते समय बहुत नर्मी करना, देते समय अकड़ना

लेने में न देने में

नफ़ा में न नुक़्सान में, बुरे में न भले में

लेने में नहीं देने में नहीं

रुक : लेने में ना देने में

लेने-देने के मुँह में ख़ाक मोहब्बत बड़ी चीज़ है

जब कोई कुछ माँगे तो कंजूस कहते हैं

लेता भूले न देता भूले

नक़द बिक्री की तारीफ़ में कहते हैं

लेता मरे कि देता

जो अपना क़र्ज़ नहीं चुकाना चाहता उसका कथन कि देखें मुझसे कौन लेता है और देता है तो कौन

लिहाज़ की आँख जहाज़ से भारी

संकोच के कारण से जब कोई किसी से कुछ कह न पाए अथवा किसी वस्तु के लिए इंकार कर पाए

लीक का पैसा तो हाथ की लकीरें हैं

राहदारी का महसूल तो देना ही पड़ेगा , नेग देना ही पड़ता है

लीक लीक गाड़ी चले और लीक चले सपूत, लीक छोड़ तीन ही चलें कवी, सिंघ, सपूत

नालायक़ औलाद बाप दादा की राह पर नहीं चलती, गाड़ी लीक पर चलती है और बेवक़ूफ लड़का पुराने रस्म-ओ-रिवाज पर चलता है, शायर, शेर और नालायक़ बेटा पुराने रास्ते पर नहीं चलते बल्कि नया रास्ता निकालते हैं

लीक लीक गाड़ी चले और लीक चले सपूत, लीक छोड़ तीन ही चलें सागर, सिंघ, कपूत

नालायक़ औलाद बाप दादा की राह पर नहीं चलती, गाड़ी लीक पर चलती है और बेवक़ूफ लड़का पुराने रस्म-ओ-रिवाज पर चलता है, शायर, शेर और नालायक़ बेटा पुराने रास्ते पर नहीं चलते बल्कि नया रास्ता निकालते हैं

लीपा लीपा फिर देखा तो हाथ ही काले

मेहनत की और कुछ फल ना पाया

लीपूँ ओटा मरे मोटा

हे ओटा देव! कोई मोटा अर्थात धनी आदमी मरे तो मैं तुम्हें पूजा चढ़ाऊँगा किसी महापात्र ब्राह्मण का कहना

लिख लोढ़ा पढ़ पत्थर

कनाबत ख़त्म करना , नोट कर लेना , रजिस्टर में दर्ज करना , ज़ुमरे में शामिल करना

लिखा हुआ नहीं मिटता

भाग्य में लिखी नहीं टलती

लिखा कभी नहीं मिटता

तक़दीर का लिखा पूरा होकर रहता है

लिखे ईसा, पढ़े मूसा

बुरी हस्तलिपि वाला है, स्वयं अपना लिखा नहीं पढ़ सकता

लिखे मसाहत न मिटे बादशाहत

इस्तिहकाम सलतनत के लिए मुलक की पैमा यश कराना और महिकमा-ए-बंद-ओ-बस्त क़ायम करना बहुत ज़रूरी है

लिखे न पढ़े दूध मारे कढ़े

गुण कीच नहीं मगर मौज-मस्ती करता है

लिखे न पढ़े नाम मोहम्मद फ़ाज़िल

उस व्यक्ति के संबंध में बोलते हैं जो अनपढ़ हो मगर चाल-ढाल विद्वानों जैसी बनाए रखी हो, जो पढ़ा-लिखा न हो लेकिन अपनी श्रेष्ठता का दावा करे

लिखना आवे न पढ़ना आवे , मोहम्मद फ़ाज़िल नाम बतावे

ऐसे शख़्स के मुताल्लिक़ कहते हैं जो आलिमाना वज़ा रखे और पढ़ा लिखा ना हो

लिखना आवे नहीं, मिटावें दोनों हाथ

काम करते नहीं बिगाड़ते हैं अथवा काम करना नहीं जानते बिगाड़ना जानते हैं

लिखना पढ़ना करे वही गाड़ी घोड़ा चढ़े वही

जो लिखता पढ़ता है वही अमीर बनता है, वही इज़्ज़त पाता है

लिखनम के आगे बक्तम नहीं चलती

तहरीर के आगे तक़रीर नहीं चलते, तहरीर ही मोतबर होती है

लिखतम के आगे बकतम नहीं चलती

लिखित के आगे ज़बानी बात या प्रमाण की कोई अहमियत नहीं होती

लोहा जाने , लोहार जाने , धौंकने वाली की बला जाने

असल मुआमला जिस से मुताल्लिक़ हो वही जानता है दरमयानी या अजनबी आदमी किया जाने, ग़ैर मुताल्लिक़ आदमी के मुताल्लिक़ कहा जाता है जो फ़रीक़ैन से अलग हो, ये जुमला वहां सादिक़ आता है जहां कोई शख़्स दूसरों को लड़वा कर या किसी को ज़क पहुंचा कर अपनी ला ताल्लुक़ी का अज़हर करे

लोहा करे अपनी बड़ाई, हम भी हैं महा देव के भाई

योग्यता साधारण दावा बहुत बड़ा

लोहा लोहे से कटता है

(रुक) लोहा लोहे को काटता है जिस की ये मजहूल सूरत है

लोहा ठंडा गर्म लोहे को काटता है

रुक : ठंडा लोहा गर्म अलख, मुस्तक़िल मिज़ाज आदमी तेज़ तबा आदमी पर ग़ालिब आ जाता है

लोहार की कूँची, कभी आग में कभी पानी में

सब से एक जैसा व्यवहार, कभी कष्ट होती है कभी राहत

लोहे के चने 'इल्म का सीखना

ज्ञान सीखना बड़ी मेहनत का काम है

लोहे की मंडी में मार ही मार

बुरों के बुरे ही काम, अत्याचारियों की बैठक में कष्ट एवं पीड़ा ही का चर्चा

लोहे को लोहा काटता है

किसी ज़ेर करने के लिए इसी जैसा आदमी चाहिए, ताक़तवर को ताक़तवर मारता है

लोमड़ी के शिकार को जाइए तो शेर का सामान कीजिए

छोटे से काम के लिए बहुत इंतिज़ाम करना चाहिए, अदना काम में भी बड़ा इंतिज़ाम चाहिए

लुगाई रहे तो आप से नहीं जाए बाप से

अगर औरत बुरे आचरण की हो जाए तो किसी से रुक नहीं सकती

लुंग के ज़ेर लुंग के बाला, न ग़म-ए-दुज़्द न ग़म-ए-काला

जो आदमी लंगोट से भी महरूम हो उस को चोर का क्या ख़ौफ़, नंगे भूके बेनवा आदमी को चोर चक्कार का क्या डर

लुंग के ज़ेर लुंग के बाला, नै ग़म-ए-दुज़्द नै ग़म-ए-काला

जो आदमी लंगोट से भी महरूम हो उस को चोर का क्या ख़ौफ़, नंगे भूके बेनवा आदमी को चोर चक्कार का क्या डर

लुक़मा रा हिकमत आमोख़्तन

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) उलटा काम करना, मुतज़ाद सूरत इख़तियार करना, लुकमान को हिक्मत सिखाना, अक़लमंद को तदबीर बतलाना , लगू काम करना , बेवक़ूफ़ बनना

लुटा बनिया पिटा ठाकुर मुँह दबा के पड़े रहते हैं

साहूकार का लुट जाने के बाद और ज़मींदार का मार खाने के बाद ज़ोर कम हो जाता है

लुटा हाथी बिटौरे बराबर

धनवान व्यक्ति लुटने एवं बर्बाद होने के पश्चात भी बहुत कुछ सहारा रखता है

लुटाया माल बिगाना बंदी का दिल दरिया

दूसरों का माल निर्ममता से ख़र्च करने के अवसर पर कहा जाता है

लुटे को मारे शाह मदार

दुखिया को भगवान और भी दुख देता है

लुटे को मारें शाह मदार

कमज़ोर को हर शख़्स दबाता, सताता या मारता है

लुटे पिटे दिन काटिये

कष्ट के दिन जिस प्रकार से हो सकें काटने चाहियें

लुटिया डूबी ऐ हरदास घोड़ी दाना खाए न घास

काम बिलकुल बिगड़ गया अब इस के सुधरने की कोई उम्मीद नहीं

लुटिया डूबी रहे हरदास घोड़ी दाना खाए न घास

काम बिलकुल बिगड़ गया अब इस के सुधरने की कोई उम्मीद नहीं

लुतरी कान कुतरी

उस औरत के मुताल्लिक़ कहते हैं, जो इधर की बात उधर लगाए कि वह इस क़ाबिल है कि उसके कान काट दिए जाएँ

लूर न ऊर चला मियाँ जगदीश पूर

कोई व्यक्ति अपनी योग्यता से बढ़ कर काम करे तो कहते हैं

लूट बिनोलों की घाव गधय्या का

नफ़ा थोड़ा नुक़्सान बहुत

लूट का मूसल भी बहुत

मुफ़्त का जो मिले सो अच्छा

लूट के मूसल भी भले

मुफ़्त का मिला हुआ ग़नीमत है, मुफ़्त की छोटी चीज़ भी अच्छी है

लूट के तर फल भी भले

मुफ़्त का माल बुरा भी अच्छा होता है, मुफ़्त की अदना चीज़ भी अच्छी है

लूट लाए कूट खाए

मुफ़्त का माल प्राप्त किया और मज़े उड़ाए, माल-ए-मुफ़्त दिल-ए-बेरहम

लूट में चर्ख़ा भी ग़नीमत है

मुफ़्त की मामूली चीज़ भी अच्छी लगती है

लूट में लूट का कलोट

ग़ारतगरी के माल को लौटना हिर्स-ओ-हवस की आख़िरी हद है, लूट के माल को लौटना छिछोरापन है

संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .

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