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सुकून-ए-क़ल्ब

दिल का इतमीनान, दिल की शांति, आराम, सहायता, चैन और सुख

ख़िल्क़िय्या

प्राकृतिक, फ़ित्री

खिस्यानी बिल्ली खम्बा नोचे

जिसे क्रोध आ रहा हो वह अपनी खीझ या क्रोध दूसरों पर उतारता है, लाचारी में आदमी दूसरों पर क्रोध करता है, लज्जित व्यक्ति दूसरों पर अपनी लज्जा उतारता है, निर्बल की खीझ

सुरूर

मन-मस्तिष्क की शांति या सुकून प्रदान करने वाली अवस्था, ख़ुशी, आनंद, प्रसन्नता, मस्ती, तन्मयता

बे-हिजाबी

बेे-पर्दा होना, बेपर्दगी, घूँघट उठा देना, खुलेबंदों फिरना (स्त्री का)

शरीक-ए-हयात

ज़िंदगी का दोस्त या साथी, अर्थात: जीवनसंगिनी, पत्नी, भार्या, पति

मशवरत

आपस में सोच विचार एवं सलाह या राय का आदान-प्रदान करना, सलाह, मशवरा, परस्पर सुझाव

सितमगर

(प्रायः कविता में) प्रेमिका, माशूक़, महबूब

कोशिश

कोई काम करने के लिए विशेष रूप से किया जानेवाला प्रयत्न, मेहनत, दौड़ धूप, प्रयत्न, प्रयास, चेष्टा, उद्योग, श्रम, उद्यम, उपाय, परिश्रम

बे-नियाज़

जिसे किसी से कुछ लेने की इच्छा न हो निःस्पृह, स्वच्छंद, आज़ाद, बेपरवाह

दीद के क़ाबिल

देखने के लायक़, देखने योग्य

क़ाबिल-ए-दीद

देखने लायक़, अच्छा दिखने वाला

आठ बार नौ त्योहार

सुख-सुविधा और आराम का शौक़ या लगन ऐसा बढ़ा हुआ है कि युग और समय उसको अल्प व्यय नहीं करने देता

चमनिस्तान

ऐसा बाग़ जहाँ फूल ही फूल हों, ऐसी जगह जहाँ दूर तक फूल ही फूल और हरा भरा नज़र आए, वाटिका, चमन, बाग़

'औरत

जाया, भार्या, पत्नी, जोरू

ताग़ूत

शैतान, अत्यन्त निर्दय और अत्याचारी व्यक्ति

मन-भावन

मन को भाने या अच्छा लगने वाला

दादरा

संगीत में एक प्रकार का चलता गाना (पक्के या शास्त्रीय गानों से भिन्न), एक प्रकार का गान, एक ताल

मज़दूर

शारीरिक श्रम के द्वारा जीविका कमाने वाला कोई व्यक्ति, जैसे: इमारत बनाने, कल-कारख़ानों में काम करने वाला, श्रमिक, कर्मकार, भृतक, मजूर

ख़ैर-अंदेश

भलाई की बात सोचने वाला, वह शख़्स जो किसी की भलाई चाहे, शुभचिंतक

मुहावरे

यह भारतीय मुहावरों का एक शब्दकोश है, जो रेख्ता फ़ाउंडेशन की एक पहल है। इसमें सदियों से प्रचलित पारंपरिक कहावतों और मुहावरों का एक मूल्यवान संग्रह शामिल है, जो भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति, समाज और दैनिक जीवन को प्रतिबिंबित करता है। यह शब्दकोश आलोचकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा भाषा और साहित्य के प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और विश्वसनीय संदर्भ स्रोत के रूप में कार्य करता है।

प्रमुख मुहावरे

मुहावरों की सूची

संबंधित परिणाम

इंचा-खिंचा वो फिरे, जो पराए बीच में पड़े

जो ज़िम्मेदार बने या दूसरों के झगड़े में पड़े उस को परेशानी उठानी पड़ती है

इधर दाल उधर चावल , बीज में खुट

बच्चों का रोज़मर्रा : खेल में किसी रफ़ीक़ से इज़हार नाराज़ी के मौक़ा पर मुस्तामल.

इधर काटे उधर पलट जाए

सताए और मकर जाए

इधर की न उधर की, ये बला किधर की

जिस निकृष्ट वस्तु का कहीं ठिकाना न हो उसके प्रति भी कहते हैं

इधर कुंवाँ उधर खाई

हर तरह नुक़्सान, दो विपत्तियों के बीच में, कुछ करते नहीं बनती, दोनों तरफ़ मुसीबत

इधर न उधर ये बला किधर

किसी लायक़ नहीं, उस को कोई नहीं पूछता, बेकार आदमी है

इधर क़िब्ला उधर क़ब्र बी ख़तीजा सोवे किधर

यूं भी मुश्किल वों भी मुश्किल, कोई बात करते नहीं बनती, मुआमले के दोनों पहलू अहम हैं वर किसी एक को इख़तियार या तर्क करना ख़िलाफ़ मुसालहत है

ईंचा खींचा वो फिरे जो पराए बीच में पड़े

जो दूसरों की बातों में हस्तक्षेप करे उसे मारा मारा फिरना पड़ता है, दूसरों की बातों में हस्तक्षेप करने वाले को परेशानी उठानी पड़ती है

ईंट का घर मिट्टी हो गया

सारा प्रयास बेकार हो गया, किया-कराया सब मिट्टी में मिल गया

ईंट का घर मिट्टी का दर

बे-जोड़ बात या काम, बेढंगा या भोंडा काम

ईंट का घर मिट्टी का कर देना

बेकार के ख़र्च में सारा धन तबाह कर देना, सब कया कराया मिट्टी में मिला देना

ईंट की लेनी पत्थर की देनी

जो ईंट मारेगा उसे पत्थर खाना पड़ेगा, जो किसी पर कड़ाई करेगा उसे अधिक कठोरता झेलना होगा

ईरान चोरी न पीरान दग़ा बाज़ी

(अपनी बराअत ज़ाहिर करने के लिए) हमें किसी बात का डर नहीं, ना हम किसी के लेने में ना देने में

ईतर के घर तीतर

उस मौक़े पर कहा जाता है जब किसी नीचे दर्जे के व्यक्ति को उसकी हैसियत से अधिक कोई चीज़ मिल जाए और वह इस पर इतराए

ईतर के घर तीतर बाहर बाँधूँ कि भीतर

sarcastic remark used for upstarts on a showy display of wealth

इजारा उजाड़ा

ज़मींदार की ज़मीन जोत पर लेने से किसान बर्बाद हो जाता है

इक्का वकील गधा पटना शहर में सधा

पटना में इक्का, वकील और गधा इन तीनों की अधिकता है

इक्के चढ़ के जहाँ जाय, पैसे दे के धक्के खाय

इक्के की सवारी की निंदा कि पैसे ख़र्च कर के परेशानी उठानी पड़ती है

इम्ली की जड़ से निकला पतंग

बुद्धि के विरुद्ध या आशा के विरुद्ध किसी काम के हो जाने के स्थान पर प्रयुक्त

इन बे-चारों ने हींग कहाँ पाई

इस काम की योग्यता नहीं रखते, उनमें इतनी बुद्धिमानी नहीं है, उनमें इतनी बुद्धि कहाँ कि यह काम करते

इन तिलों में तेल नहीं

यहाँ यह उद्देश्य प्राप्त नहीं होगा अर्थात यहाँ से कुछ पाने की आशा न रखो

इंद्र राजा गरजा, म्हारा जिया लरजा

बादल गरजे और गल्ले का व्यापारी घबराया कि वर्षा होने से ख़रीदकर रखे हुए गल्ले को मनमाने भाव नहीं बेच सकेगा

इंसान फ़ानी है

मानव का जीवन अस्थिर है

इंसान ही तो हे

मनुष्य से भूल-चूक हो जाना स्वाभाविक है

इंसान ख़ता का पुतला है

मनुष्य विस्मृति से मुक्त नहीं, मनुष्य का स्वभाव त्रुटिपूर्ण है (जब किसी व्यक्ति से उसकी गरिमा के विरूध्द कोई बात हो तो उसकी क्षमायाचना में प्रयुक्त)

इंसान क्या पखेरू है

बहुत ज़्यादा यात्रा करने वाला है, बड़ा जहाँ गर्द है, दूर दूर आता जाता है या फिरता है

इंसान में क्या रखा है

मर जाने पर उसे कोई नहीं पूछता

इंशा अल्लाह त'आला बिल्ली का मुँह काला

किसी काम का संकल्प स्पष्ट करते समय नेक शगुन के तौर पर कहते हैं

इस हाथ दे उस हाथ ले

जैसी करनी वैसी भरनी, मानव जो करता है तुरंत उसका वैसा ही परिणाम पाता है

इस हाथ दो उस हाथ लो

जैसी करनी वैसी भरनी, मानव जो करता है तुरंत उसका वैसा ही परिणाम पाता है

इस का दुख दिखावे मुख

इसके चेहरे से इसकी पीड़ा प्रकट होती है

इस काँधे चढ़ उस काँधे उतर

हम को किसी बात में बहाना नहीं, ख़ातिरदारी और रियायत हर तरह स्वीकार है

इस कान सुनना उस कान निकाल देना

बात को टाल जाना, आना-कानी करना, ध्यान न देना

इस कान सुनना उस कान उड़ा देना

बात को टाल जाना, आना-कानी करना, ध्यान न देना

इस कान सुनना उस कान उड़ाना

बात को टाल जाना, आना-कानी करना, ध्यान न देना

इस कान सुनी उस कान उड़ा दी

बात सुनी और पालन नहीं किया, किसी की बात पर ध्यान न देना, टाल मटोल करना

इस से क्या हासिल कि शाह जहाँ की दाढ़ी बड़ी थी या 'आलम-गीर की

अत्यधिक वाद विवाद व्यर्थ होता है, अनावश्यक चर्चा से क्या लाभ

इसे छिपाओ उसे दिखाओ

इस मौक़ा पर कहते हैं जब दो शख्सों के दरमयान मुशाबहत बदरजा कमाल हो, मतलब ये कि गोया दोनों एक हैं

इसे छिपाओ उसे निकालो

इस मौक़ा पर कहते हैं जब दो शख्सों के दरमयान मुशाबहत बदरजा कमाल हो, मतलब ये कि गोया दोनों एक हैं

इसी दिन को पाला था

अपने छोटे या बड़े बच्चों के आशा के विपरीत काम करने पर इस्तेमाल किया जाता है, समानार्थी: ऐसा करने के लिए, इस प्रकार के काम के लिए

इस्लाह ही अस्ल तौबा है

यदि कोई व्यक्ति अपने आचरण या चरित्र में सुधार कर ले, इसका मतलब यह है कि वह अपने किए पर लज्जित है

इतना झूट बोलो जितना आटे में नमक

बोलना ही पड़े, तो झूठ उतना ही बोले जितना खप सके

इतना खाए जितना आटे में नमक

हर काम संतुलित तौर पर करना चाहिए

इतना खाए जितना कि पेट पचाए

अधिक लाभ न ले, ग़बन हो कर भी तो इतना कि छुप सके

इतना नफ़ा' खाओ जितना आटे में नोन

अधिक मुनाफ़ा' खाना या अधिक लाभ लेना ठीक नहीं

इतना पक्का कि बासी थक्का

हर काम ज़रूरत के मुताबिक़ होना चाहिए (बात बढ़ते बढ़ते ज़रूरत से ज़्यादा होजाने के मौक़ा मुस्तामल

इतने की बुढ़िया नहीं जितने का लहंगा फट गया

थोड़े फ़ायदे की उम्मीद में बहुत नुक़्सान उठाना पड़ा, असल से नुक़्सान बढ़ गया

इतनी तो राई होगी जितनी राइते में पड़े

गुज़र-बसर या निबाह के लिए सामान मौजूद है, इतना ही है जितनी आवश्यक्ता है, इतना साधन तो है कि हमारा काम चल जाए

इत्तिफ़ाक़ बड़ी चीज़ है

एकता बड़ी चीज़ है, उससे सब काम बनते हैं

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