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आड़

ओट, पर्दा, वो चीज़ जिसके पीछे छुप रहें, रुकावट, बाधा,विघ्न, पीछे, बचने या छुपने के लिए.

अज़्मान

'अज़्म

प्रतिबद्धता, साहस, संकल्प, ठानना

तज्दीद

नवीनीकरण, रिन्यू, फिर से आरम्भ करना, नए सिरे से कोई काम करना नया करना

ए'तिमाद

किसी चीज़ पर पीठ टेकना, सहारा लेना, सहारा, भरोसा, विश्वास, यक़ीन

समा'अत

श्रवण, सुनना, श्रवण-शक्ति, सुनवाई, अदालती कारर्वाई, सुनने की शक्ति, सुनने की क्रिया या भाव

मंसूबा

योजना, साज़िश, षड्यंत्र, संकल्प, प्लान, स्कीम, इरादा, विचार, ठानना, बांधना, जोड़-तोड़, शतरंज की सातवें बाज़ी का नाम

'अदावत

दुश्मनी, वैर, शत्रुता, द्वेष

दिल-आज़ारी

सताना, कष्ट देना, कोई ऐसी बात कहना या करना जिससे किसी का दिल दुखे

तौहीन-ए-'अदालत

कोई ऐसा शब्द कह देना या ऐसा काम करना जिससे न्यायालय की अपमान पाई जाती हो, किसी न्यायालय का अपमान

रंजिश

मनोमालिन्य, मनमुटाव, वैमनस्य, किसी की ओर से मन में बैठा हुआ रंज

चिलमन

एक प्रकार का पर्दा जो बाँस की तीलियों से बनाया जाता है; चिक, बाँस की फट्टियों आदि का पर्दा जो खिड़कियों, दरवाजों आदि के आगे लटकाया जाता है

आज

वर्तमान दिन; आज का बीतता हुआ दिन, आज, आज का दिन, उपस्थित, वर्तमान समय, मौजूदा लम्हा, मौजूदा दिन, मौजूदा ज़माना, रोज़ जो गुज़र रहा है

सक़ाफ़त

संस्कृति, सभ्यता, शिष्टाचार

दिफ़ा'

रक्षा, बचाव, हिफ़ाज़त, प्रतिरक्षा

उल्फ़त

प्रेम, स्नेह, मोहब्बत, चाहत

ए'तिबार

भरोसा, विश्वास, साख, एतिबार, साख, धाक

रक़ीब

रक्षक, संरक्षक, देख-रेख करने वाला

ज़ीस्त

जीवन, ज़िंदगी

रश्क

ईर्ष्या, जलन, कुढ़न, डाह

शब

रात, रात्रि, रैन

फ़िराक़

वियोग, जुदाई, विरह, बिछोह, बिछड़ना

तग़ाफ़ुल

जान-बूझ कर की जाने वाली उपेक्षा या लापरवाही

आफ़्ताब

सूरज, सूर्य, रवि

"शायरी" टैग से संबंधित शब्द

"शायरी" से संबंधित उर्दू शब्द, परिभाषाओं, विवरणों, व्याख्याओं और वर्गीकरणों की सूची

आज़ाद-नज़्म

मुक्त छंद, उर्दूशायरी की वह विधा जिसमें रदीफ़ काफ़िये की पाबंदी न हो

कुंडलिया

छ : चरणों का एक मात्रिक छंद, जिसके पहले दो चरण दोहे के और अन्तिम चार रोले के होते हैं

कैफ़्या

साहित्य: कविता या गद्य का प्रकार जो रोमांटिक है और मानवीय भावनाओं और मनोदशाओं को व्यक्त करता है।

ज़ू-बहरैन

एक कविता जिसे दो या अधिक छंदों में पढ़ा जा सके

ज़मीन सुस्त होना

(शायरी) रदीफ़-ओ-क़ाफ़ीए और बहर का शगुफ़्ता ना होना, जिस की वजह से शेअर कहना दुश्वार हो

ज़मीन-ए-मुर्दा

(शायरी) पामाल रदीफ़-ओ-फ़ाकेह, कमज़ोर ख़्याल-ए-शेअरी

ज़मीन-ए-शे'र

ग़ज़ल या नज़म की रदीफ़, क़ाफ़िया और बहर का एक ख़ास पैमाना जिस में शेअर कहा जाये, कविता का एक पैमाना जिसको आधार बना कर कविता लिखी जाए

नज़्म-ए-आज़ाद

कविता का एक खुला रूप, आज़ाद नज़म, मुक्तछन्द, कविता का वह रूप जो किसी छन्दविशेष के अनुसार नहीं रची जाती न ही तुकान्त होती है, मुक्तछन्द की कविता सहज भाषण जैसी प्रतीत होती है

नज़्म-ए-मु'अर्रा

(शायरी) वो कलाम मौज़ूं जिस में क़ाफ़िया और रदीफ़ ना हो लेकिन बहर हो, नज़म की एक क़िस्म, नज़म आज़ाद, नज़म सफ़ैद, बे क़ाफ़िया नज़म, नज़म आरी (Blank Verse)

नज़्म-गो

ऐसा शाइर जो शाइरी की तमाम क़िस्मों में से केवल नज्म (ग़ज़ल-शैली के प्रतिकूल एक ही विषर पर की जानेवाली शाइरी) कहता हो

नज़्म-निगारी

कविता लिखना, कविता पाठ करन

नैन-झरोका

किवता: आँखों का झरोका (आँख को झरोके से उपमा दी जाती है)

पय्याँ

पांव, पैर का बहु., (प्रायः कविता में उपयोगित)

प्रथम

(क़दीम शायरी में) ज़मीन, दुनिया, दुनिया जहान , अहल दुनिया

पित

जिस्म पर गर्मी या एलर्जी के सबब पड़ जाने वाले सुर्ख़ चुकते

फ़र्शी-नशिस्त

(शायरी) शेअर-ओ-सुख़न की मुख़्तसर महफ़िल जो फ़र्श पर मुनाक़िद की जाये

मु'आमला-बंद

 

मख़ालिस

(शायरी) मुख़लिस की जमा, गुरेज़, कसीदे का वो हिस्सा जहां से शायर तशबीब से मदह की तरफ़ रुख़ करता है

मजमू'आ मुरत्तब करना

(अदब) शायरी का दीवान या कुल्लियात जमा करके तर्तीब देना ताकि छापा जा सके

मंज़ूमात

नज्मों का संग्रह, वह संग्रह जिसमें ग़ज़लें’ न हों, केवल नज्में हों

मतला' होना

(शायरी) मतला नज़म हो जाना, मतला मौज़ूं होना, शायर के ज़हन में मतला आजाना

मतला'-ए-नौ

(शायरी) नया मतला, ताज़ा मतला

मतला'-ए-सानी

ग़ज़ल का दूसरा आरंभिक शेर

मददे

(शायरी) मदद कीजीए, पुश्तपनाही करें, दस्त गेरी करें

मध्वा

(शायरी) शराब (गीतों में मुस्तामल

मफ़ा'अला

(उरूज़) शायरी की बहर का एक वज़न

मुरद्दफ़ा

(शायरी) रदीफ़ वाला (क़ाफ़िया) हर्फ़ रवी के क़बल हुरूफ़ मिद्दा में से कोई हर्फ़ जो बगै़र किसी वास्ते के हो नीज़ हर्फ़ क़ैद जो रवी के साथ आए

मर्सिया-गो

(शायरी) मर्सिया कहने वाला, एैसी कविता कहने वाला जिसमें किसी व्यक्ति की मृत्यु या शहादत या उसकी परेशानियों का उल्लेख हो

महदूद

घिरा हुआ, सीमाबद्ध, सीमित, परिमित, नियत, कतिपय, थोड़े, चंद, जिसकी सीमा बाँध दी गई हो, अलग किया हुआ, अंत किया हुआ, जिसकी ठीक से व्याख्या कर दी गई हो

मा'मूलियात

(मजाज़न) रोज़मर्रा की बातें या चीज़ें, आम सतह की बातें, शायरी या नस्र में ऐसे ख्याला तुक्का इज़हार करना जो अवाम के फ़हम-ओ-शऊर से मुताबिक़त रखते हूँ

मा'शूक-ए-मजाज़ी

(शाइरी) वह माशूक़ जो मानवजाति से सम्बन्ध रखता हो, आदमी, महबूब

मिस्रा'-ए-अव्वल

कविता की पहली पंक्ति

मिस्रा'-ए-तरह

वह चरण जिसे आधार बनाकर कोई कविता लिखी जाती हो

मिस्रा'-ए-पेचीदा

(शायरी) वो मिसरा जो लफ़्ज़ी या माअनवी तौर पर उलझा हुआ या दकी़क़ हो

मिस्रा'-ए-बरजस्ता

कविता में लिखी वो पंक्ति जो बिना किसी संघर्ष और विचार के हासिल हो

मिस्रा'-ए-मौज़ूँ

(शायरी) मिसरा जो बहरके मुताबिक़ हो, वो मिसरा जो मुक़र्ररा वज़न के मुताबिक़ हो

मिस्रा'-क़द

(शायरी) क़द का रूपक मिस्रे से करते हैं

मिस्रा'-तर

(शायरी) शगुफ़्ता और उम्दा मिसरा, बामज़ा मिसरा

रि'आयत-ए-लफ़्ज़ी

 

वा'ज़िया

(शायरी) कसीदे की एक क़िस्म जिस में नसीहत आमेज़ मज़ामीन बांधे जाते हैं

शरीत

(शेअर) कसीदे के आख़िर में ममदूह के लिए शायरी की दुआ जो शर्त-ओ-जज़ा पर मुश्तमिल हो

सन'अत-ए-ईहाम

अनेकार्थता पैदा करने की कला, दोहरे प्रवेशक का उपयोग

सन्'अत-ए-तक्रार

(शायरी) मिसरा या शेअर में एक लफ़्ज़ को मुक़र्रर इस्तिमाल करना

सन'अत-ए-तज़ाद

वह शब्दालंकार जिसमें दो या कई परस्पर विरोधी चीजें लायी जायें

सन'अत-ए-तर्सी'

(शायरी) एक शेअर के दोनों मिसरों के अलफ़ाज़ बिलतर्तीब एक दूसरे के हम क़ाफ़िया लाना

सन'अत-ए-तसहीफ़

(शायरी) शेअर में ऐसे अलफ़ाज़ लाना कि नक़ात के रद्दोबदल से दूसरे लफ़्ज़ बिन जाएं और अगर मदह हो तो हजव हो जाये

सन्'अत-ए-मुबालग़ा

(शायरी) किसी अमर को शिद्दत-ओ-ज़ोफ़ में इस हद तक पहुंचा देना कि इस हद तक इस का पहुंचना मुहाल या बईद हो

समा'ईल

(शायरी) इस्माईल

हासिल-ए-ग़ज़ल

वो शेर जो पूरी ग़ज़ल में सब से अच्छा हो

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