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मंसूबा
योजना, साज़िश, षड्यंत्र, संकल्प, प्लान, स्कीम, इरादा, विचार, ठानना, बांधना, जोड़-तोड़, शतरंज की सातवें बाज़ी का नाम
तौहीन-ए-'अदालत
कोई ऐसा शब्द कह देना या ऐसा काम करना जिससे न्यायालय की अपमान पाई जाती हो, किसी न्यायालय का अपमान
चिलमन
एक प्रकार का पर्दा जो बाँस की तीलियों से बनाया जाता है; चिक, बाँस की फट्टियों आदि का पर्दा जो खिड़कियों, दरवाजों आदि के आगे लटकाया जाता है
"शायरी" टैग से संबंधित शब्द
"शायरी" से संबंधित उर्दू शब्द, परिभाषाओं, विवरणों, व्याख्याओं और वर्गीकरणों की सूची
कैफ़्या
साहित्य: कविता या गद्य का प्रकार जो रोमांटिक है और मानवीय भावनाओं और मनोदशाओं को व्यक्त करता है।
ज़मीन सुस्त होना
(शायरी) रदीफ़-ओ-क़ाफ़ीए और बहर का शगुफ़्ता ना होना, जिस की वजह से शेअर कहना दुश्वार हो
ज़मीन-ए-शे'र
ग़ज़ल या नज़म की रदीफ़, क़ाफ़िया और बहर का एक ख़ास पैमाना जिस में शेअर कहा जाये, कविता का एक पैमाना जिसको आधार बना कर कविता लिखी जाए
नज़्म-ए-आज़ाद
कविता का एक खुला रूप, आज़ाद नज़म, मुक्तछन्द, कविता का वह रूप जो किसी छन्दविशेष के अनुसार नहीं रची जाती न ही तुकान्त होती है, मुक्तछन्द की कविता सहज भाषण जैसी प्रतीत होती है
नज़्म-ए-मु'अर्रा
(शायरी) वो कलाम मौज़ूं जिस में क़ाफ़िया और रदीफ़ ना हो लेकिन बहर हो, नज़म की एक क़िस्म, नज़म आज़ाद, नज़म सफ़ैद, बे क़ाफ़िया नज़म, नज़म आरी (Blank Verse)
नज़्म-गो
ऐसा शाइर जो शाइरी की तमाम क़िस्मों में से केवल नज्म (ग़ज़ल-शैली के प्रतिकूल एक ही विषर पर की जानेवाली शाइरी) कहता हो
मख़ालिस
(शायरी) मुख़लिस की जमा, गुरेज़, कसीदे का वो हिस्सा जहां से शायर तशबीब से मदह की तरफ़ रुख़ करता है
मुरद्दफ़ा
(शायरी) रदीफ़ वाला (क़ाफ़िया) हर्फ़ रवी के क़बल हुरूफ़ मिद्दा में से कोई हर्फ़ जो बगै़र किसी वास्ते के हो नीज़ हर्फ़ क़ैद जो रवी के साथ आए
मर्सिया-गो
(शायरी) मर्सिया कहने वाला, एैसी कविता कहने वाला जिसमें किसी व्यक्ति की मृत्यु या शहादत या उसकी परेशानियों का उल्लेख हो
महदूद
घिरा हुआ, सीमाबद्ध, सीमित, परिमित, नियत, कतिपय, थोड़े, चंद, जिसकी सीमा बाँध दी गई हो, अलग किया हुआ, अंत किया हुआ, जिसकी ठीक से व्याख्या कर दी गई हो
मा'मूलियात
(मजाज़न) रोज़मर्रा की बातें या चीज़ें, आम सतह की बातें, शायरी या नस्र में ऐसे ख्याला तुक्का इज़हार करना जो अवाम के फ़हम-ओ-शऊर से मुताबिक़त रखते हूँ
सन'अत-ए-तसहीफ़
(शायरी) शेअर में ऐसे अलफ़ाज़ लाना कि नक़ात के रद्दोबदल से दूसरे लफ़्ज़ बिन जाएं और अगर मदह हो तो हजव हो जाये
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