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सुकून-ए-क़ल्ब

दिल का इतमीनान, दिल की शांति, आराम, सहायता, चैन और सुख

ख़िल्क़िय्या

प्राकृतिक, फ़ित्री

खिस्यानी बिल्ली खम्बा नोचे

जिसे क्रोध आ रहा हो वह अपनी खीझ या क्रोध दूसरों पर उतारता है, लाचारी में आदमी दूसरों पर क्रोध करता है, लज्जित व्यक्ति दूसरों पर अपनी लज्जा उतारता है, निर्बल की खीझ

सुरूर

मन-मस्तिष्क की शांति या सुकून प्रदान करने वाली अवस्था, ख़ुशी, आनंद, प्रसन्नता, मस्ती, तन्मयता

बे-हिजाबी

बेे-पर्दा होना, बेपर्दगी, घूँघट उठा देना, खुलेबंदों फिरना (स्त्री का)

शरीक-ए-हयात

ज़िंदगी का दोस्त या साथी, अर्थात: जीवनसंगिनी, पत्नी, भार्या, पति

मशवरत

आपस में सोच विचार एवं सलाह या राय का आदान-प्रदान करना, सलाह, मशवरा, परस्पर सुझाव

सितमगर

(प्रायः कविता में) प्रेमिका, माशूक़, महबूब

कोशिश

कोई काम करने के लिए विशेष रूप से किया जानेवाला प्रयत्न, मेहनत, दौड़ धूप, प्रयत्न, प्रयास, चेष्टा, उद्योग, श्रम, उद्यम, उपाय, परिश्रम

बे-नियाज़

जिसे किसी से कुछ लेने की इच्छा न हो निःस्पृह, स्वच्छंद, आज़ाद, बेपरवाह

दीद के क़ाबिल

देखने के लायक़, देखने योग्य

क़ाबिल-ए-दीद

देखने लायक़, अच्छा दिखने वाला

आठ बार नौ त्योहार

सुख-सुविधा और आराम का शौक़ या लगन ऐसा बढ़ा हुआ है कि युग और समय उसको अल्प व्यय नहीं करने देता

चमनिस्तान

ऐसा बाग़ जहाँ फूल ही फूल हों, ऐसी जगह जहाँ दूर तक फूल ही फूल और हरा भरा नज़र आए, वाटिका, चमन, बाग़

'औरत

जाया, भार्या, पत्नी, जोरू

ताग़ूत

शैतान, अत्यन्त निर्दय और अत्याचारी व्यक्ति

मन-भावन

मन को भाने या अच्छा लगने वाला

दादरा

संगीत में एक प्रकार का चलता गाना (पक्के या शास्त्रीय गानों से भिन्न), एक प्रकार का गान, एक ताल

मज़दूर

शारीरिक श्रम के द्वारा जीविका कमाने वाला कोई व्यक्ति, जैसे: इमारत बनाने, कल-कारख़ानों में काम करने वाला, श्रमिक, कर्मकार, भृतक, मजूर

ख़ैर-अंदेश

भलाई की बात सोचने वाला, वह शख़्स जो किसी की भलाई चाहे, शुभचिंतक

मुहावरे

यह भारतीय मुहावरों का एक शब्दकोश है, जो रेख्ता फ़ाउंडेशन की एक पहल है। इसमें सदियों से प्रचलित पारंपरिक कहावतों और मुहावरों का एक मूल्यवान संग्रह शामिल है, जो भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति, समाज और दैनिक जीवन को प्रतिबिंबित करता है। यह शब्दकोश आलोचकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा भाषा और साहित्य के प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और विश्वसनीय संदर्भ स्रोत के रूप में कार्य करता है।

प्रमुख मुहावरे

मुहावरों की सूची

संबंधित परिणाम

तड़के का भूला साँझ को आए तो भूला नहीं कहलाता

रुक : सुबह का भोला शाम को आए, अगर कोई शख़्स थोड़ा सा भटक कर राह रास्त पर आजाए तो उसे गुमराह नहीं समझना चाहिए

तड़के उठ कर खाट से छोड़ छाड़ सब काम, माला कर हाथ में जप साईं का नाम

अली उल-सुबह उठ कर पहले इबादत या पूजा करनी चाहिए

तंगी गई फ़राख़ी आई

निर्धनता गई अमीरी आई, बुरे दिन गए अच्छे दिन आए, कठिनाईयों का समय बीत गया आराम के दिन आ गए

ताँबे का तार नहीं

(औरत की भाषा) बहुत ग़रीब है, उस औरत के संबंध में बोलते हैं जिस के पास ज़ेवर बिलकुल न हो

टाँग टाँग भर की लड़की और गज़ भर की ज़बान

ऐसी लड़की के बारे में कहते हैं जो ज़बान दराज़ हो

टाँग उठे ना, चढ़ा चाहे हाथी पर

अपने बल से बढ़ कर काम करने वाले के संबंध में कहते हैं

टाँग ऊलाल के मर गया

बे कसी की हालत में कोई ख़बर गेरा ना हुआ

ताँगे टुकड़े पर बाज़ार में डकार

दूसरों की सहायता और सहारे पर डींग मारना, दूसरों की सहायता पर अकड़ना

ताँत बाजी राग पाया

बातों से दिल का हाल ज्ञात हो जाता है, तरीक़े से मतलब पहचान लिया जाता है

ताकू ले भागू

गिरह बुर, जेब क़तरे, चोट्टे लेते ही चल देते हैं

टाल बजा कर माँगे भीक, उस का जूग रहा कब ठीक

घंटी बजा कर मांगने वाले साधुओं पर कटाक्ष है कि यह कैसी साधुता है जो घंटी बजाकर भीख मांगे, उसकी साधना तो व्यर्थ है

ताल बजा के माँगे भीक , उस का जोग रहा के ठीक

इन मंगतों पर तंज़ है जो घंटे बजा कर भीक मांगते हैं

टाल बता उस को न तू जिस से किया क़रार, चाहे होवे बैरी तेरा चाहे होवे यार

किसी के साथ वा'दा कर के उसे फिर धोखा नहीं देना चाहिए

टाल मटोल वक़्त का चोर

समय पर जवाब देने और हीले बहाने कर के समय टाल देने के बारे में कहते हैं

ताल न तल्य्या बो दो सिन्घाड़े भय्या

बिना साधन और सामान के काम

ताल से तलय्या गहरी , साँप से सँपोला जहरी

तालाब से झील गहिरी होती है और छोटा सांप बड़े सांप से ज़्यादा ज़हरीला होता है, जब छोटे बड़ों से ज़्यादा चालाक हूँ तो कहते हैं

ताल सूख पटपर भयो हंसा कहीं न जाय मरे पुरानी पीत को चुन-चुन कंकर खाय

मातृभूमि बहुत प्रिय होती है, चाहे आदमी को खाने को न मिले उसे छोड़कर जाना नहीं चाहता

ताल तो भोपाल ताल बाक़ी सब तलय्याँ हैं

किसी चीज़ की बहुत तारीफ़ करना हो तो कहते हैं

तालिब ज़र का बे ज़रूर जग में ख़्वार हक़ से दूर

लालची दुनिया में ज़लील होता है और हक़ से दूर होता है

ताली बिन कैसा ताला, जोरू बिन कैसा साला

अनुचित बात अच्छी नहीं होती

ताली दोनों हाथ से बजा करती है

मुहब्बत या दुश्मनी दोनों ही तरफ़ से होती है

ताली दोनों हाथों से बजती है

दो आदमियों में जब लड़ाई होती है तो उसमें किसी एक का अपराध नहीं होता दोनों दोषी होते हैं

ताली एक हाथ से नहीं बजती

मुहब्बत या लड़ाई झगड़ा एक तरफ़ से नहीं होता बल्कि दोनों तरफ़ से होता है

तालियाँ बजा ले बन्नो ब्याह होगा

छोटी लड़कियों को कहते हैं जब वह तालियाँ बजाती हैं

ताँबा देखे चेतना, मुख देखे ब्योहार

मानव रुपया पैसा देखे से होशियार हो जाता है और ख़रीदार का मुँह देख कर ब्योपार करता है अर्थात व्यक्ति के सामने पैसा रखने से व्यक्ति की सच्ची विश्वसनीयता का पता चलता है

ताँबे का तार छल्ला नहीं

अत्यधिक कंगाल, उस महिला के संबंध में बोलते हैं जिसके पास आभुषण बिलकुल न हो

तामे' हमेशा ज़लील अस्त

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) लालची हमेशा ज़लील होता है

ताना शाह दिवाना जिस की चिट्ठी न परवाना

उसके संबंध कहते हैं जो व्यर्थ झगड़ों में पड़ा रहे

ताक़ पर बैठा उल्लू भर भर माँगे चुल्लू

उस कमीने के प्रति कहते हैं जो अपने से बेहतर लोगों पर हुक्म चलाए

तार बाजा राग बूझा

रुक : तांत बाजी राग बोझा

ताश पर मूँज का बख़िया

अच्छे कपड़े की अंगिया पर मूँज की सिलाई बहुत भद्दी लगती है

टाट का लँगोटा नवाब से यारी

पहनते हैं टाट का लंगोट और दोस्ती करना चाहते हैं नवाब से, जब कोई छोटा हो कर भी बड़ों की बराबरी करना चाहे तब व्यंग में कहते हैं

टाट की अंगिया मूँज का बख़िया

भू बड़ काम करनेवाली औरत के लिए बोलते हैं, एनिमल बेजोड़, रुक: टाट में मूंज का बख़ीया

टाट की अंगिया मूँज की तनी, देख मेरे देवरा मैं कैसी बनी

जब कोई सब काम बेजा और बे ढंगे करे और इस पर इतराए भी इस वक़्त ये मिसल बोलते हैं

टाट में मूँज का बख़िया

जैसी चीज़ वैसा ही उसका सामान, पैवंद में पैवंद की जगह

टाट में ज़र-बफ़्त का पैवंद

बेमेल और बेजोड़ बात, किसी आलाए चीज़ में अदना चीज़ को नामुनासिब तौर पर शामिल करने के मौक़ा पर बोलते हैं

ताते दूध बिलार नाचे

यदि किसी वस्तु पर मनुष्य का हाथ न पहुँचे तो वो बहुत तिलमिलाता है

ता'वीज़-गंडे के भरोसे पर न रहना कुछ कमर का भी ज़ोर लगाना

काम मेहनत से होता है, ख़ुद भी प्रयास करना चाहिए, केवल भरोसे पर नहीं रहना चाहिए

तावला धुन्ना मूँझ की ताँत

आदमी जल्दी का कुछ का कुछ निकम्मा काम करने लगता है

तावला सो बावला

जल्दी का काम ख़राब होता है

टायर भला न लांगड़ा, रूख भला न झांगड़ा

लंगड़ी घोड़ी और कटीला पेड़ दोनों अच्छे नहीं होते

ताज़ी मार खाए तुर्की तराश पाए

योग्य तबाह होते हैं अयोग्य तरक़्क़ी करते हैं, योग्य व्यक्ति का महत्व नहीं अयोग्य का महत्व है

ताज़ी मारा तुर्की काँपा

एक की सजा दूसरे के लिए सीख होती है

ता'ज़ीम-ए-दफ़'-ए-माँदगी

ताज़ीम के लिए उठना बीमारी को दफ़ा करता है

तब का लीपा गया सराए अब का लीपा देखो आए

यानी पहले की कैफ़ीयत तो पुरानी होचुकी है हाल की हालत देखने के काबिल है

तब लग झूट न बोलीए जब लग पार बसाए

जहां तक होसके झूट नहीं बोलना चाहिए

तबाँचा मारे मुँह लाल रखते हैं

बनावट से गौरव प्रकट करते हैं; बहुत सख़्ती करते हैं

तबीले की बला बंदर के सर

हर बला और तहमत कमज़ोरों के सर थप जाती है

तदबीर से क़िस्मत की बुराई नहीं जाती , बिगड़ी हुई तक़दीर बनाई नहीं जाती

अगर क़िस्मत बरी हो तो इंसान लाख तदबीर करे कुछ नहीं होता

टहल करो माँ बाप की जो होएँ संपूरन आस, या टहल सो जो फिरें नरक उन्हों का बास

माँ बाप की सेवा करने वालों की सब उम्मीदें पूरी होती हैं जो उन की सेवा न करें वो नरक में जाते हैं

तैराक ही डूबता है

कर्मठ व्यक्ति ही सफल होता है, जो व्यक्ति कुछ काम ही नहीं करता उस के लिए सफलता और असफलता का प्रश्न ही क्या

तैरे गा सो डूबेगा

हुनरमंद ही ख़ता होती है

तजल्ली को तकरार नहीं

जो बात स्पष्ट है उस में कोई झगड़ा नहीं, प्रत्यक्ष के लिए प्रमाण की ज़रूरत नहीं

टका हो जिस के हाथ में वो बड़ा है ज़ात में

जिसके पास धन है वही जाति में भी श्रेष्ठ है अर्थात नीचे दर्जे का मनुष्य भी रूपये-पैसे के ज़ोर से ऊँचा बन जाता है या समझा जाता है

टका कराई और गंडा दवाई

दवा कराने के लिए तो वैद्य को एक टका दिया पर दवा केवल चार ही कौड़ी की मंगाई

टका रोटी अब ले चाहे तब

इस से ज़्यादा नहीं मिलेगा

तकब्बुर 'अज़ाज़ील रा ख़्वार कर्द बज़िन्दान ला'नत गिरफ़्तार कर्द

अभिमान ने शैतान को अपमानित किया और शाप की बेड़ियों में जकड़ लिया, घमंड बिल्कुल नहीं करना चाहिए

तकल्लुफ़ में है तकलीफ़ सरासर

तकल्लुफ़ में हमेशा तकलीफ़ होती है

तकल्लुफ़ में रेल चल दी

लखनऊ के दो शरीफ़ आदमी कहीं जा रहे थे एक ने कहा हज़रत सवार हो जुए दूसरे ने कहा क़िबला पहले आप पहले ने कहा नहीं क़िबला आप ग़रज़ देर तक इसी तरह होता रहा इतने में रेल चल दी

टके का सारा खेल है

पैसे से चाहे जो कर लो

टके के पान बनेनी खाए, कहो घर रहे कि जाए

बनियों पर ता'ना है, वे प्रायः कंजूस होते हैं, उनकी स्त्री अगर दो पैसे रोज़ की लौंग खा जाए तो काम कैसे चलेगा

टके की बुढ़िया नौ टके सर मुंडाई

थोड़े फ़ायदे के लिए बहुत ख़र्च पड़ने के अवसर पर बोलते हैं

टके की हाँडी गई , कुत्ते की ज़ात पहचानी गई

किसी क़दर नुक़्सान ज़रूर हुआ मगर तजुर्बा होगया या दूसरे का हाल मालूम होगया

टके की मुर्ग़ी, छे टके महसूल

मूल से अधिक आवश्यक वस्तुओं पर ख़र्च

टके की नहारी में टाट का टुकड़ा

अर्थात : सस्ती चीज़ में कुछ न कुछ हानि या दोष ज़रूर होता है

टके तीतर महंगा पाँच रूपे में सस्ता

निर्धनता में जो चीज़ महंगी मालूम होती है अमीरी में सस्ती लगती है

तख़्ती पर तख़्ती मियां जी की आई कमबख़ती

मकतब अर्थात प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले लड़के कहा करते हैं, पट्टी पर पट्टी रखे जाने को लड़के मास्टर के लिए हानिकारक समझते हैं

तलब-उल-कुल फ़ौत-उल-कुल

बहुत उलूम-ओ-फ़नून की तहसील का ये नतीजा होता है कि किसी में भी महारत नहीं होती

तले धरती ऊपर राम

नीचे धरती ऊपर ईश्वर, असहाय व्यक्ति का कहना, जिस का कोई सहारा न हो उस के लिए प्रयुक्त है

तले घेरा ऊपर सहरा

कोरी वैभव प्रकट करना

तले का दम तले रह गया और ऊपर का ऊपर

कोई बरी ख़बर सुनने के मौक़ा पर कहते हैं, हैरतज़दा रह गया, मबहूत रह गया

तले का पाट भारी है

(मजाज़न) बीवी ज़बरदस्त है

तले पड़ी का मोल क्या

स्त्रियाँ अपनी अवहेलना पर अपने पतियों को ऐसा कहती हैं

तले साँक ऊपर टाँग

नीचे धारदार बिरछी ऊपर टान यानी बहुत मुसीबत में

तले टाँग ऊपर माँग

ग़रीब दिखावटी, पैरों से नंगा ऊपर से भीख माँगता हुआ

तले तीस ऊपर बीस

(ओ) ता-ओ-बाला या दिरहम ब्रहम होने के मौक़ा पर कहते हैं

तलवार गिरी प्रजा फिरी

राज्य बिना राजनीति के नहीं होता, शासक की कायरता से प्रजा विद्रोही हो जाती है

तलवार का घाव भर जाता है ज़बान का नहीं भरता

कोई ऐसी बात कह दे जो मन पर असर कर जाए तो वह कभी नहीं भूलती

तलवार का खेत हरा नहीं होता

अत्याचार कभी हरा नहीं होता, रक्त बहाने का परिणाम बुरा होता है

तलवार का ज़ख़्म भर जाता है, बात का नहीं भरता

ना सज़ा बात दिल में खटकती रहती है और ज़ख़म ख़ुशक हो जाता है

तलवार के तले दम लेने दो

थोड़ी प्रतिक्षा करो, ज़रा इंतिज़ार करो, जो दम बचे ग़नीमत है

तलवार की आँच के सामने कोई बिरला ही ठेहरता है

तलवार के सामने कोई असाधारण व्यक्ति अर्थात बहादुर ही ठहरता है

तलवार मारे एक बार

एहसान मारे बार-बार

तलवार मारे एक बार एहसान मारे बार-बार

उपकार की लज्जा बहुत अधिक होती है, उपकार का बोझ आदमी पर सदैव रहता है, जिसने उपकार किया हो वह उसे याद दिलाता रहता है

तलवरिया वही भला जो रन में हाथ दिखाए, बैरी के टुकड़े करे और आप तुरत बच जाए

तलवरिया वो है जो लड़ाई में शत्रु का विनाश करे और स्वयं बच जाए

तलवों की सी कहूँ या जेब की सी

जहाँ घूसख़ोर असमंजस या दुविधा में हो तो कहते हैं, सच्ची बात कहूँ या घूस के कारण झूठ कहूँ

तमाचा मारे मुँह लाल रख्ते हैं

बनावटी शक्ल बनाना, जिन को नुक़्सान पहुँचाया गया हो वह कभी नहीं बोलते, उन लोगों के बारे में भी कहते हैं जो अपनी ग़रीबी ज़ाहिर नहीं होने देते

तमाम की सूइयाँ निकाले वो कोई नहीं, जो आँखों की निकाले वो सब कोई

जब बहुत सा काम तो एक शख़्स करले और मेहनत-ओ-तकलीफ़ उठाए और ज़रा सा काम कर लेने या हाथ बटाने से नाम दूसरे का होजाए तो बोलते हैं

तमाम रात मिम्याई एक ही बच्चा ब्याई

मेहनत बहुत की और फ़ायदा कम उठाया

तन गुदड़ी , मन तागा , कोई कुछ ही लिखे मन लागा

दिल बदन को ठीक रखता है बगै़र दल के बदन कुछ नहीं फ़क़ीरों का क़ौल है

तन कंगाल तो मन कंगाल

भूक में कुछ अच्छा नहीं लगता, पेट भरा हो तो सब बातें भली मालूम होती हैं

तन कसरत में मन 'औरत में

व्यायाम करने वालों को कामुक विचारों से बचना चाहिए

तन पर चीज़ न घर माँ नाज , दूसरे का रूपा गाज

इस शख़्स के मुताल्लिक़ कहते हैं जो अपनी हैसियत से बढ़ कर काम करना चाहे

तन पर कपड़ा न बदन पर लत्ता फिर बात करूँ अलबत्ता

(ओ) शान में मरी जा रही हैं, हैं तो कुछ भी नहीं मगर शान दिखाती हैं, ऊण्, फटेहालों पे ये अंदाज़ (जब कोई हैसियत से ज़्यादा बढ़ चढ़ कर नुमाइश करती या बातें बनाती है तो औरतें कहती हैं

तन पर नहीं लत्ता , मिस्सी मले अलबत्ता

(ओ) रुक : तन पर कपड़ा ना बदन पर लता फिर बात करूं अलबत्ता

तन पर नहीं लत्ता पान खाऊँ अलबत्ता

(ओ) रुक : तन पर कपड़ा ना बदन पर लता फिर बात करूं अलबत्ता

तन पेट कहाँ रख आवें

खाने पीने का ख़र्च ज़रूरी है, कोई मुफ़्त ख़िदमत ले तो कहते हैं

तन सीतल हो सीत सूँ, मन सीतल हो मीत सूँ

दूध बदन को हरा-भरा करता है और दोस्त दिल को

तन सुखी तो मन सुखी

बदन को आराम हो यानी सेहत अच्छी हो और खाना अच्छा मिले तो इंसान को कोई तकलीफ़ नहीं होती , पेट की फ़िक्र ना हो तो अक़ल भी ठिकाने रहती है

तन ताज़ा क़लंदर राजा

पेट भरा हो तो क़लंदर भी राजा है, जब पेट भरा होता है तो फ़क़ीर भी अपने को राजा समझता है वर्ना भूख आदमी को दरिद्र बना देती है

तन तकिया मन बिस्राम , जहाँ पड़ रहे वहाँ आराम

क़ाने आदमी के लिए हर जगह आराम है

तन बदन में जान नहीं नाम ज़ोर-आवर ख़ान

ताक़त होनी चाहीए नाम का क्या फ़ायदा, लियाक़त से ज़्यादा शेखी बघारने के मौक़ा पर बोलते हैं

तंगी के साथ फ़राख़ी और फ़राख़ी के साथ तंगी लगी हुई है

अमीरी और ग़रीबी का साथ है, दुख के साथ ख़ुशी एवं ख़शी के साथ दुख लगा हुआ है

तन्नूर बाज़ी अल्लाह राज़ी

होटल का खाना खाए बिना और कोई चारा ही नहीं

तन्नूर से बचने के लिये भाड़ में गिर पड़े

थोड़ी मुसीबत से बचने के लिए बड़ी मुसीबत में पड़ना

टंटा मत कर जब तल्क बिन टंटे होए काम, टंटा बिस की बेल है या का मत ले नाम

जब तक हो सके किसी काम में झगड़ा नहीं करना चाहिए झगड़े में हानि होती है

तपे जेठ तो बरखा हो भर पेट

यदि जेठ अर्थात जून में ख़ूब गर्मी पड़े तो वर्षा बहुत होती है

टपके का डर है

जब किसी के मन में कोई ऐसा ख़ास डर समा जाए कि जिस के कारण वह कोई काम न कर सके तब कहते हैं

तक़ाज़े का हुक़्क़ा भी नहीं पिया जाता

जिस बात में झगड़ा हो वो नहीं करनी चाहिए, क़र्ज़ नहीं लेना चाहिए

तक़दीर का खोटा क्यों न उठावे टोटा

दुर्भाग्यशाली सदैव हानि उठता है

तक़दीर के आगे तदबीर नहीं चलती

क़िस्मत ख़राब हो तो उसका कोई ईलाज नहीं

तक़दीर के लिखे को तदबीर क्या करे

भाग्य के मुक़ाबिले में कुछ नहीं हो सकता, भाग्य को उपाय से बदला नहीं जा सकता

तक़दीर से ज़ोर नहीं चलता

जो भाग्य का लिकया है हो कर रहेगा, तदबीर से कुछ नहीं होता

तक़दीर सीधी है तो सब कुछ

अगर भाग्य अच्छे हैं तो जो चाहोगे वह हो जाएगा

तराज़ू से खड़े होकर न तोलो बरकत जाती रहती है

(ओ) खड़ा होकर तौलना अच्छा नहीं समझा जाता

तरसती ने दिया , बिलककी ने खाया , जीब चली स्वाद न पाया

एक बदबख़्त दूसरे पर एहसान करे तो कोई फ़ायदा नहीं होता

तरकश के तीर हैं

मूल वंश विकृत रस्म, प्रथा एवं स्वभाव आदि में एक जैसे हैं, सब एक जैसे हैं, एक वंश के हैं

तर्कश में दो तीर नहीं, ख़ान बहादुर आते हैं

कस बल अर्थात शक्ति नाम को नहीं बड़े बड़े पहलवानों से लड़ने की डींग हाँक रहे हैं, ज़रा सी बात पर अपने आप को बड़ा समझ बैठे हैं

तर्कश में दो तीर नहीं, शर्मा शर्मी लड़ते हैं

सफलता की आशा न होने पर भी अपनी शर्म रखने के लिए कोई काम करना

तरवर अच्छा छाँवला और रूह सुहाना साँवला

वृक्ष छायादार अच्छा और रूप साँवला

तस्बीह फेरूँ सत्तर को घेरूँ

मानकर रूप से मक्कारी एवं अय्यारी का उपाय करना

तश्त-अज़-बाम-उफ़्तादा

(लफ़ज़ा्अ) तश्त कोठे पर से गिर पड़ा , (कनाएन) बहुत बदनामी और रुसवाई हुई

ततड़ी ने दिया जनम जली ने खाया, न जीब जली न स्वाद आया

एक अभागे ने दूसरे अभागे की मदद की तो कुछ लाभ न हुआ

टटीरी से आसमान नहीं थमता

मशहूर है कि टटीरी अपने पंजे आसमान की तरफ़ कर के सोती है ताकि आसमान गिरे तो उसे संभाल ले इसलिए उस व्यक्ती के संबंध में बोलते हैं जो अपने साहस, हिम्मत और शक्ति से ज़्यादा किसी काम के करने तैयार हो या उसका दावा करे

तत्ता कौर न निगलने का न उगलने का

उस अवसर पर कहते हैं जब कुछ बन न आए

टट्टर खोलो निखट्टू आए

निकम्मे आदमी की हुकूमत हो तो कहते हैं, शेख़ी बहुत और हक़ीक़त कुछ नहीं, मूर्ख और निखट्टू हाकिम होते, सर खोल कर पीटने को तैयार रहो अब ज़ुल्म ही होगा, फ़ुज़ूलखर्च की निसबत कहते हैं

टट्टू को कोड़ा, ताज़ी को इशारा

अक़लमंद इशारे पर काम करता है, बेवक़ूफ़ को मार कर समझाना पड़ता है

तौबा बड़ी सिपर है गुनहगार के लिये

प्रायश्चित्त एवं तौबा करने से गुनहगार सज़ा से बच जाता है, उसके लिए प्रायश्चित्त एवं तौबा बड़ी ढाल है

तौबा का दरवाज़ा खुला है

पश्चाताप हर समय स्वीकार हो सकती है, अभी भी समय है पश्चाताप कर लो

तौबा कर बंदे इस गंदे रोज़गार से

उस बुरे धंधे को छोड़ दे जिस के लिए पाप करना पड़ता है, किसी बुरे काम से रोकने के लिए कहते हैं

तवा चढ़ा और जी बढ़ा

रोटी पकती देखकर भूखे को संतुष्टी हो जाती है

तवा चढ़ा बेठी मिस रानी घर में नाज अगन न पानी

है तो ग़रीब मगर दिखावे को अमीराना काम करती है

तवा न तग़ारी काहे की भटियारी

पास कुछ न हो और दिखावा बहुत हो तो यह कहावत कहते हैं

तवा न तग़ारी मुफ़्त की भटियारी

बे सर-ओ-सामानी में लाफ-ओ-ग़ज़ाफ उड़ाना और बड़े बड़े दावे करना, पास कुछ ना हो और ज़ाहिरदारी बहुत करना

तवे की रोटी क्या छोटी क्या मोटी

एक घराने अथवा एक कुल के व्यक्ति सब एक ही नज़र से देखे जाते हैं

तवेले की बला बंदर के सर

ग़लती किसी की और मारा कोई जाए, परेशानी किसी और की और सर पड़ी किसी दूसरे के

तवीले ही में लुत्याव

आपस ही में जो तुम पैज़ार, अपने ही गिरोह में फूट

तवीले में लुत्याहज

रुक : तवीले में लुतयाओ, आपस की फूट और झगड़ा फ़साद

टेढ़े तवे की रोटी को घुन नहीं लगना

(मजाज़न) बड़ा मुश्किल काम, शरीर पर कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता

टेढ़ी खीर न खाते बने, न छोड़ते बने

अर्थात: महत्वपूर्ण कार्य जिसे पूरा करना कठिन हो और छोड़ने में बुराई

टेंट आँख में मुँह खुरदीला, कहे पिया मोरा छैल छबीला

अपनी वस्तु चाहे कितनी भी बुरी हो अच्छी मालूम होती है

तेग़-ए-कज-रा-नियाम-कज-बाशद

टेढ़ी तलवार के लिए नयाम भी टेढ़ी होती है, (मुराद) जैसा आदमी ख़ुद होवे वैसे इस के दूत होते हैं

तेल डाल कम्बली का साझा

ज़रा सा काम कर के सारी चीज़ के दावेदार (कम्बल बुनि कर उस को चमक देने के लिए तेल लगाते हैं)

तेल देखो तेल की धार देखो

अभी क्या है आगे चल कर देखो क्या होता है, जल्दी न करो, संयम से काम लो, परिणाम की प्रतीक्षा करो

तेल देखो, तेल की धार देखो

प्रत्येक कार्य बहुत देख भाल के करना चाहिए

तेल जले घी, घी जले तेल

उन दो लोगों के प्रति कहा जाता है जो एक-दूसरे का काम कर दें

तेल की जलेबी मुवा दूर से दिखाए

धोखा देता है, प्रतिज्ञा कर के पूरा नहीं करता, आशा तो बहुत देना पर करना कुछ नहीं

तेल न मिठाई चूल्हे धरी कढ़ाई

जब कोई व्यक्ति साधन के बिना कोई काम करना चाहता है तो व्यंग में ऐसा कहते हैं

तेल तली न ऊपर पली

न नीचे बर्तन में तेल न ऊपर पली

तेल तिलों ही से निकलता है

हर वस्तु का ख़र्च उस की आय में से निकाला जाता है, जनता पर जो ख़र्च होता है उसी से प्राप्त किया जाता है

तेली का बैल मरे कुम्हारी सती होए

किसी के साथ बेफ़ाइदा हमदर्दी क मौक़ा पर मुस्तमिल

तेली का काम तंबोली करे चूल्हे में आग लगे

अपना काम छोड़ कर दूसरे का काम करने वाले की हानि होती है

तेली का तेल भगत भैया जी की

ख़र्च किसी का मेहनत किसी की और आनंद किसी ने उठाया

तेली का तेल गिरा हीना हुआ, बनिये का नोन गिरा दूना हुआ

तेल गिरा तो ज़मीन सोख़ गई और नोन गिरा तो उसके साथ मिट्टी मिल गई जिससे वज़न बढ़ गया, किसी को अपनी हानि से ही लाभ होता है

तेली का तेल जले मश'अलची मुफ़्त कुढ़े

एक को ख़र्च करते देख दूसरा परेशान हो, ख़र्च किसी का हो कुढे कोई

तेली के बैल को घर ही कोस पचास

ग़रीब अपने ही घर में एक यात्री की तरह थक जाता है

तेली के तीनों मरें, ऊपर से टूटे लठ

किसी का नुक़्सान हो हमें किया

तेली ख़सम किया और रूखा ही खाया

मतलब के लिए बुरा काम किया फिर भी वो हासिल ना हुआ , ख़िलाफ़-ए-वज़ा या आदात कोई काम किया इस प्रभी मक़सद पूरा ना हुआ, मालदार की नौकरी और फ़ाक़ों मरे

तेली की जोरू हो कर क्या पानी से नहाए

ऐसे अमीर के रफ़ीक़ हो कर भी हाथ ह रंगीं तो कब रंगींगे

तेरा हाथ और मेरा मुँह

तुम कमाओ और मुझे खिलाओ, स्वार्थी के लिए कहा जाता है

तेरा हुआ जो मेरा था, बराए ख़ुदा टुक देखने तो दे

सास उस बहू से कहती है जो पति को लेकर अलग हो जाए

तेरा पानी मैं भरूँ मेरा भरे कहार

झूठा बड़प्पन दिखाना, आत्मप्रशंसा करने वाले पर व्यंग करने के लिए ऐसा कहते हैं

तेरे बैंगन मेरी छाछ

उस के संबंध में कहते हैं जो ख़ुद थोड़ा दे और दूसरे से अधिक माँगे

तेरे दया धरम नहीं मन में, मुखड़ा क्या देखे दरपन में

जिस के दिल में दया करुणा और तरस नहीं वो मनुष्य नहीं, शीशे में मनुष्य की छवि देख कर स्वयं को मनुष्य मत समझो

तेरे ही तले गंगा बहती है

(व्यंगनात्मक) सारा संसार तुम्हारे अधीन है, तू ही तो बड़ा शक्ति वाला या मालदार है

तेरे मेरे सदक़े में उसकी जोरू पेट से

चरित्रहीन महिला के संबंध में कहते हैं, बदचलन औरत के मुताल्लिक़ कहते हैं

तेरे पाँवों तले गंगा बहती है

तमाम रोय ज़मीन तुम्हारे तसर्रुफ़ में है

तेरी आवाज़ मक्के और मदीने

तेरी प्रसिद्धि दूर दूर हो

तेरी बात गुड़ से मीठी

तेरी बात बहुत पसंद है

तेरी गोद में बैठूँ और तेरी दाढ़ी नोचूँ

यह कहावत धृष्ट एवं कृतघ्न आदमी से संबंधित कहते हैं, जिस से लाभ उठाए उसे ही अपमानित करे

तेरी करनी तेरे आगे मेरी करनी मेरे आगे

जिस के साथ अच्छाई हो अगर वह बुराई करे तो उस के संबंध में कहते हैं

तेरी क़ुदरत के क़ुर्बान

हे ईश्वर! तेरी अद्भुत लीला की बलिहारी

तेतरा बेटा राज रजाए, तेतरी बेटी भीक मँगाए

हिंदूओं के ख़्याल के मुताबिक़ तीसरा बेटा मसऊद और तीसरी बेटी मनहूस होती है

ठाड़ा मारे और रोने न दे

बलपूर्वक अपनी मनमानी करता है

ठाकुर पत्थर माला लक्कड़ गंगा जमुना पानी, जब लग मन में साँच न आए चारों बेद कहानी

जब तक कि मनुष्य का दिल ईमान न लाए तब तक धार्मिक बातें क़िस्सा कहानी होती हैं एवं दीन धर्म की बाह्य निशानियों से कुछ नहीं होता

ठाली बैठे उत पुत सूझे

बेकारी में आदमी को इधर उधर की बातें सूझती हैं, बेकारी बरी है

थाली गिरी झंकार हुई , क्या ख़बर भरी थी या ख़ाली

ख़ाह हक़ीक़त कुछ भी हो मगर बदनामी हो जाये तो उसे कौन रोक सकता है

थाली गिरी झंकार सब ने सुनी

जब कभी कहीं कोई लड़ाई, झगड़ा या कोई विशेष घटना होती है तो उस का पता चल जाता है

थाली पर से भूका नहीं उठा जाता

(हिंदू) खाना सामने हो तो आदमी बगै़र भर पेट खाए नहीं उठता

थाली फेंको तो सर ही पर गिरे

रुक : थाली फेंको तो सर पर उछले

थाली फूटी तो फूटी झंकार तो सुनी

तक़सान हुआ तो हुआ मगर मतब तो हासिल होगया (जब कोई बेग़ैरत आदमी पर्दा फ़ाश हुए हर ख़ुश हो तो कहते हैं

थाली सर ही सर जाए

रुक : थाली फेंको तो सर पर उछले

ठाली से बेगार भली

बेकार रहने से मुफ़्त काम करना बेहतर है कि बेकारी में तरह तरह के भ्रम पैदा होते हैं

थान के टुकड़े

रुक : " एक आवे के बर्तन "

थारा माल सो म्हारा माल, म्हारा माल सो हें हें

रुक : तुम्हारा माल सौ हमारा माल हमारा माल सौ हैं हैं

थारा माल सो म्हारा माल, म्हारा माल सो ईं

रुक : तुम्हारा माल सौ हमारा माल हमारा माल सौ हैं हैं

ठाटर खोल निखट्टू आया

अकर्मण्य पति के लिए उसकी स्त्री का कहना

ठग न देखे देखे क़साई, शेर न देखे देखे बिलाई

यदि तुम ने ठग नहीं देखा तो क़साई को देख लो और यदि शेर नहीं देखा तो बिल्ली को देख लो

ठग ठग की भाका जाने

अपने जैसे का हाल हर एक जानता है

ठगाई से ठाकुर बनता है

अर्थात: बदमाशी और बेईमानी से रुपया जमा होता है

थैली के चट्टे बट्टे

रुक : " एक आवे के बर्तन "

थैली में रूपया और मुँह में गुड़

पास में रुपया हो और ज़बान मीठी हो तो इन दो ही से मनुष्य सुखी रहता है

ठैर ठैर के चलिए जब हो दूर पड़ाव, डूब जात अंधियाव में दौड़ चलंती नाव

काम सावधानी से धीरे-धीरे करना चाहिए, जल्दबाज़ी से हानि होती है

थका शिकारी फ़ाख़्ता मारे

मजबूरी की हालत में जो काम भी हो जाए, उसे लाभ समझना चाहिए

थका ऊँट सराय को देखता है

जब इंसान काम करते करते थक जाता है तो आराम चाहता है, जो परेशान और मजबूर हो वो सहारा ढूँढता है

थके बैल गौन भई भारी, अब क्या लादोगे ब्योपारी

मुसीबत सर पर आ पड़ी अब क्या करोगे

ठंडा लोहा गर्म लोहे को काटता है

शांत व्यक्ति क्रोधी व्यक्ति पर भारी पड़ता है, शांत स्वभाव का व्यक्ति तेज़ स्वभाव के व्यक्ति पर प्रबल होता है

ठंडे लोहे भी कहीं पिटने से ढीले पड़े हैं

इस्लाह बचपने में होनी चाहीए उम्र ज़्यादा हो जाये तो कुछ नहीं होसकता

थप्पड़ के थप्पड़ मैल जमा है

जिस्म पर मेल की तहें जमी हैं, बड़ा कशेफ़् आदमी है

ठेंगे थाम लबेदे हज़ार

यदि तू आपस के परिहास को सहन नहीं करेगा तो लोग तुझे बहुत तंग करेंगे

ठेका ले उस काम का जो तुझ से होवे ठीक

जिस काम को आदमी अच्छी तरह कर सकता है उस का ठेका या ज़िम्मा लेना चाहिए

ठेके का काम फीका

जो काम ठेका दे कर कराया जाए वो अच्छा नहीं होता

थेथ्ली रकाबी फुलफुला भात, लो पंचों हाथों हाथ

खिलाने-पिलाने में जब कोई कंजूसी करे तब उसके प्रति भी व्यंग्य में कहते हैं

ठीक नहीं ठेके का काम, ठेका दे कर मत खो दाम

ठेके का काम अच्छा नहीं बनता, रुपया बर्बाद करना होता है

ठीकरे का सुख ख़र्ची का दुख

रंडियाँ उस समय कहती हैं जब उन्हें ख़र्ची थोड़ी या समय पर न मिले

ठीकरे में दिया साथ खाने लगा

किसी को थोड़ा सहारा देने पर जब वह गले पड़ जाए तब कहते हैं

थोड़ मोल की कामिली करे बड़ों का काम, मह्मूदी और बाफ़्ता सब की रक्खे मान

थोड़ी क़ीमत की चीज़ भी वैसा ही काम देती है जैसी अधिक क़ीमत

थोड़ा आप को बहुत ग़ैर को

उस के मुताल्लिक़ कहते हैं जो अपनों को कम दे और दूसरों को ज़्यादा

थोड़ा करें ग़ाज़ी मियाँ , बहुत करें दफ़ाली

तारीफ़ करने वाले बेबुनियाद शौहरत देते हैं, ख़ुशामदी बढ़ चढ़ कर बातें बनाते और झूटी तारीफ़ें करते हैं, पैरों से बढ़ कर मुरीद चालाक होते हैं

थोड़ा खाना जवानी की मौत

जवान आदमी के लिए कम खाना हानिकारक है

थोड़ा खाना सुखी रहना

लालच करना अच्छा नहीं होता, संतुष्टि और परिपूर्णता ग्रहण करना चाहिए, थोड़ा खाने से आदमी स्वस्थ रहता है

थोड़े धन में खल इतराय

थोड़ा सा धन मिल जाने पर तुच्छ एवं कम सहनशीलता वाला व्यक्ति इतराने लगता है

थोड़े पानी में उभरे फिरते हैं

थोड़ी सी बात पर इतराते हैं, मनोबल और साहस में कम हैं

थोड़ी आस मदार की बहुत आस गुलगुलों की

उस समय कहते हैं जब देखने में तो कोई काम पुण्य के लिए किया जाए परंतु अंदर से उस में अति भोग की भावना होती हो

थोड़ी पूँजी खसमों खाए

थोड़े रुपये से व्यपार नहीं पनप सकता

थोड़ी सी 'अक़्ल मोल लीजिए तो बेहतर है

बहुत अहमक़ हो, ज़रा सूज समझ कर

ठोंगें मार किया सर गंजा, कहे मेरे है हाथ न पंजा

जब कोई अपनी हरकत से किसी को हानि पहुँचाए और यह कह कर अपने को निर्दोष भी साबित करे कि मैं यह काम कर ही नहीं सकता तब कहते हैं

ठोकर लगी पहाड़ की, घर की तोड़ें सील

शक्तिशाली से बस नहीं चलता, कमज़ोर को तंग करते हैं

थोता चना बाजे घना

नाहक़ शेखी बघारता है

थोथा चना बाजे घना

तुच्छ, नीच या अक्षम व्यक्ति बहुत डींग मारता है

थोथे पछोड़ें उड़ उड़ जाएं

रुक : थोथे पिछोड़ना

थुत्कारा हुआ और जातक मुवा

मसान की बीमारी हो जाए तो फिर बच्चा नहीं बचता

ठूँठ चतेरा मन में झींके

ऐसे मौक़ा पर बोलते हैं जब कोई क़ाबिल आदमी काम ख़राब होते देखे मगर दख़ल ना दे

थूक में पकोड़े नहीं तले जाते

मुफ़्त काम नहीं हो सकता

थूक में सत्तू नहीं सनते

जहाँ अधिक पैसे की आवश्यक्ता है वहाँ कम में काम नहीं चल सकता

थूक से सत्तू नहीं सन्ते

बे ख़र्च कैसे काम ऊपर ही ऊपर नहीं बनता

टीड़ी से आसमान नहीं थमना

ऐसे मौक़े पर बोलते हैं जब कोई व्यक्ति अपनी हिम्मत और ताक़त से ज़्यादा काम करने पर तैयार हो

तीज पड़े खेत में बीज

सावन की तीसरी तारीख़ को फ़सल की बोवाई प्रारम्भ हो जाती है

तीन बुलाए तेरह आए दे दाल में पानी

जब तीन अतिथियों के बदले तेरह आ जाते हैं तो निर्धन आदमी पकी हुई दाल या सालन में पानी झोंक देते हैं ताकि बढ़ोतरी हो जाए

तीन दिन का छोकरा हमें सिखाता है

जब कोई कमउमर मश्वरा दे तो उम्र रसीदा कहते हैं

तीन दिन का छोकरा हमें सिखावत बात

जब कोई कमउमर मश्वरा दे तो उम्र रसीदा कहते हैं

तीन दिन क़ब्र में भी भारी होते हैं

हर काम के आरंभ में कठिनाई होती है

तीन दिये तेरह पाए, कैसे लोभ ब्याज का जाए

सूद ख़ोरों पर व्यंग है कि तीन दे के तेरह वसूल करते हैं

तीन गुनाह ख़ुदा भी बख़्शता है

अब ऐसी गलती नहीं होगी, तीन गुनाह ईश्वर भी बख़्शता है, उनके आगे हाथ जोड़ूँगी तौबा करूँगी

तीन हैं साह किसान के, जांड, जाल और कैर

दुर्भिक्ष पड़ने पर झांद, जाल और कैर इन तीन चीज़ों से किसान अपना पेट पालते हैं

तीन का टट्टू तेरह का ज़ीन

किसी कम क़ीमत वस्तु की सजावट पर अधिक ख़र्च करने के अवसर पर कहते हैं

तीन लोक से मथुरा न्यारी

जब कोई अनोखी बात करे तो कहते हैं

तीन में न तेरह में, नौ में न बाईस में

मूल्यहीन, कोई हैसियत नहीं, कोई महत्व नहीं

तीन नरी, तेरह सुत्ली की गिरह

रुक : तीन में नहतेरा में ना सुतली की गिरह में

तीन पाव भीतर तो देवता और पीतर

आदमी सेर हो तो ईश्वर और बुज़ुर्ग याद आते हैं

तीन पेड़ बकाइन के और मियाँ चले बाग़ में

रुक : तीन पेड़ बकाएं के मियां बाग़बान

तीन पेड़ बकाइन के मियाँ बाग़बान

जब कोई थोड़ी चीज़ पर बहुत इतराए और डींग मारे, तो कहते हैं

तीन टाँग की घोड़ी नौ मन की लादनी

शक्ति से अधिक काम लेने के समय पर कहते हैं, किसी अयोग्य को कोई बड़ा काम सौंप देना

तीन टाँग मियाँ बकायन तले

रुक : तीन पेड़ बकाईन के मियां बाग़ में

तीन तरी में तेरा गज़

तीन बकरियों की खाल तेरह गज़ में फैलाई जा सकती है, थोड़ी चीज़ से बहुत सा काम लिया जा सकता है

तीन थान चौथा मैदान

स्थान की कमी होने पर भी इस कहावत का प्रयोग होता है

तीन थान चौथी जान उनका अल्लाह निगहबान

अपनी असहाय अवस्था प्रकट करने के लिए कहा जाता है

तीन तिताला चोथे का मुँह काला

तीन साथियों का अपशकुन जानना बेतुकी बात है

तीर चूँ तर शवद कमाँ गर्दद

बहादुर आदमी मुसीबत से नहीं घबराता

तीर न कमान काहे के पठान

वहाँ कहते हैं जहाँ कोई पुरखों से संबंधित शेख़ी बघारे मगर ख़ुद कुछ न करे

तीर न कमान मियाँ का अल्लाह निगहबान

डींग हाँकने एवं शेख़ी बघारने वाले के प्रति भी कहते हैं

तीर न कमान, मेरे चचा ख़ूब लड़े

स्वयं अपनी प्रशंसा करने पर व्यंग है

तीस का चाँद नहीं भाना

हर जगह घूमनेवाला व्यक्ति या देर से आने वाले को महत्व नहीं दिया जाता

तीसी के खेत में जुलाहा बिठलाए

जोलाहों की बेवक़ूफ़ी ज़ाहिर करने को कहते हैं कि अलसी के खेत की चौकीदारी करा रहे हैं

तीस-मार-ख़ान बने फिरते हैं

झूठी शेख़ी हाँकने वाले के संबंध में भी कहते हैं

तीसरा आँखों में ठीकरा

ऐसे अवसर पर बोलते हैं जब दो के अलावा किसी तीसरे व्यक्ति की उपस्थिति और मौजूदगी पसंद न हो, दो से ज़्यादा आदमी नागवार होते हैं

तीसरा मुझ को मार लेगा

बुज़दिली और कमज़ोरी ज़ाहिर करने के मौक़ा पर बोलते हैं

तीसरे फ़ाक़े मुर्दार भी हलाल

तीसरे फ़ाक़े में जब जीवन वैध हो जाता है तो मृत और वर्जित भी वैध हो जाता है, गंभीर संकट में दूसरों की संपत्ति का कुछ ध्यान नहीं रहता मजबूरी में सही और ग़लत नहीं देखा जाता

तीतर के मुँह लक्ष्मी

तीतर के बोलने को अच्छा शगुन माना जाता है, भाग्य आज़माने के अवसर पर भी ٖइसका इस्तेमाल होता है

टिकिया रोटी अब ले कि तब ले

यही है जो दे सकते हैं, इस से अधिक नहीं मिलेगा

टिकली सेंदूर गेल तो खाने में भी बजर परब

(हिंदू) औरत बेवा होजाए तो उसे अच्छा खाना नहीं मिलता

तिल ओट पहाड़ ओट

जो चीज़ आँख के सामने नहीं वो यदि पास भी है तो भी दूर है

तिल रहे तो तेल निकले

मूल वस्तु होनी चाहिये

तिल-भर लहू पहाड़-बराबर मोहब्बत

(अवामी भाष) बेगाने को दोस्त से ज़्यादा दर्द होता है (उस समय बोलती हैं जब अपना दूर का सगा-संबंधी दोस्त से ज़्यादा काम आए)

तिलों में से तेल निकलता है

(लाक्षणिक) किसी चीज़ का ख़र्च उसी चीज़ की आमदनी से पूरा होता है

तिनके की चटाई नौ बीघा फैलाई

इतना वाअदा करना जो ना होसके

तिनके की ओठ पहाड़

रुक : तिल ओट पहाड़

तिनके ओझल पहाड़

रुक : तिल ओट पहाड़

तिरन की मछली जल ही में भली

हर चीज़ अपने मौक़ा पर अच्छी मालूम होती है,हर शख़्स का अपनी ही क़ौम में गुज़ारा होता है

तिरेगा सो डूबेगा

हुनरमंद बेख़ता पाते हैं

त्रेता के बीजों को पहुँच गए

बहुत गिरे, बहुत पतन हुआ, त्रेता के युग में पहुँच गए अर्थात बहुत विश्वासपात्र और सच्चे बन गए

तिरया तुझ में तीन गुन अवगुन हैं लख चार, मंगल गावे सल रचे और कोकन उपचें लाल

स्त्रियों में तीन खूबियां और लाखों अवगुन हैं, खूबियां ये हैं कि गाती हैं, पति के साथ सती होती हैं और बेटे जनती हैं

तिरया तुझ से जो कहे मोल न तू वो मान, तिरया मत पर जो चलें वो नर हैं निर्ज्ञान

स्त्री के कहने पर नहीं चलना चाहिए जो उन के कहने पर चले वो मूर्ख है

तिरया तू है सोभा घर की, जो हो लाज रखावा नर की

जो स्त्री अपने पति का सम्मान एवं गौरव स्थापित रखे वो घर की शोभा है

तिश्ना रा मी नुमायद अंदर ख़्वाब, हमा 'आलम ब-चश्म चश्म-ए-आब

लफ़ज़न प्यासे को ख़ाब में सारी दुनिया चश्मा-ए-आब नज़र आती है आदमी को जोशे मर्ग़ूब होती है वो ही हर दम पेशे नज़र रहती है

तित्तर बित्तर हो गए सगर डोम के काम, नमर गए जज्मान जब गाँठ गिरह के दाम

डोम लोगों की युक्ति है कि जब दाम ख़त्म हो जाएँ तो सब काम ख़राब हो जाते हैं

तो आप दूसरे बग़ल चाप

ख़ुद ही नहीं आए बल्कि साथ में एक तफ़ीली भी लाए

तो चोरी और उस पर सर ज़ोरी

तसव्वुर करने के बाद ढाई, ग़लती करने के बाद शर्मसारी के बदले दो बद्दू जवाब मुंह ज़ोरी

तो करेला दूसरे नीम चढ़ा

पहले ही से बुरा था इस में बुराई के मज़ीद अस्बाब पैदा हो गए

तो को न मो को ले चूल्हे में झोंको

जब कोई चीज़ अपने या किसी और के काम की न रहे तो बोलते हैं, चीज़ को ऐसा बर्बाद करना जो किसी काम की न रहे

तो था ही दीवाना उस पर आई बहार

आवारा के लिए आवारगी के मज़ीद सामान भी मुहय्या हो गए, शौक़ीन के लिए हसब मर्ज़ी मारकात-ओ-अस्बाब फ़राहम होगए, ख़राबी में और ख़राबी पड़ी

तोड़ डाल तागा, तू किस भड़वे के मुँह लागा

बुरे स्वभाव अथवा बुरे व्यक्ति से बचने का सदुपदेश कि अलग होने में देरी न कर

तोड़ने आए चारा , खेत पर इजारा

अगर कोई शख़्स बददियानती करे और अपने हक़ से ज़्यादा कोई चीज़ ले तो कहते हैं , एक तो पराई चीज़ लें दूसरे हुमा हिमी करें

तोला भर की आरसी नानी बोले फ़ारसी

थोड़ा सा सुलूक करके बहुत एहसान जताना

तोला भर की तीन चपाती , कहे जिमाने चालो हाथी

पास कुछ ना होने और शेखी बढ़ कर मारने के मौक़ा पर कहते हैं

तोला के पेट में घूँगची

बड़े लोग छोटों से फ़ायदा उथाते हैं

टोलन में घर टोल भला, सब बाजन में ढोल भला

सब मुहल्लों में घर का मुहल्ला ही अच्छा अर्थात जहाँ अपना घर है वह मुहल्ला और सब बाजों में ढोल अच्छा

तोरी बनत बनत बन जाई, तू हरि से लगा रहो भाई

तू भगवान का भजन करता रह, धीरे-धीरे तेरा काम बनेगा अर्थात तुझे मुक्ति मिलेगी

टोटा कर दे मुँह को काला , टोटे वाला जगत का माला

घाटा बहुत बदनाम करता है और आदमी पर एक की नज़र में ज़लील हो जाता है

तोता पढ़े मैना पढ़े , कहीं आदमी के बच्चे भी पढ़ते हें

ये व्यंग्य करते हुए उन योग्य बच्चों के बारे में कहा जाना है जो पढ़ने-लिखने से जी चुराते हैं और अपना पूरा मन नहीं लगाते आशय यह है कि जब पक्षी पढ़ सकते हैं तो मनुष्य के लिए पढ़ना क्या कठिन है

टोटे मारा बानिया भर जोगी का भेस, हाँडे बिच्छा माँगता फिरे देस बिदेस

बनिए को जब व्यापार में घाटा होता है तो वह लोगों का रुपया देने के डर से साधु बन जाता है

टोटे से हो घर का टीपा, टोटा गया तो खुला नसीबा

घाटा घर का सत्यानास कर देता है, घाटा न पड़े तो ख़ानदान का भाग्य खुल जाए

टोटकों से गाजें नहीं टलती हैं

उच्च लक्ष्यों और महान उद्देश्य को महान योजनाओं और गंभीर रणनीति द्वारा प्राप्त किया जाता है, सरल उपाय महान चीजों को पूरा नहीं करते हैं

त्रिया चरित्र न जाने कोय, ख़सम मार के सती होय

स्त्री के धोखे और मक्कारी को कोई नहीं समझ सकता, पति की हत्या करके ख़ुद भी सती हो जाती है

त्रिया पुरुख बिन है दुखी जैसे अन्न बिन देह, जले बले है जेवड़ा जों खेती बिन मेंह

बिना पति के स्त्री इस तरह दुख एवं पीड़ा में रहती है जैसे शरीर बिना अनाज के और इस तरह जलती है जैसे खेती बिना बारिश के

तुझ को और न मुझ को ठोड़

तुझे दूसरा नहीं मिलता, मुझे दूसरी जगह नहीं मिलती मजबूरन यकजा होने के मौक़ा पर बोलते हैं

तुझ को पराई क्या पड़ी अपनी नबेड़ तू

अपना काम छोड़कर व्यर्थ दूसरे के झगड़े में नहीं पड़ना चाहिए

तुझ पड़े जो हादिसा दिल में मत घबरा जब साईं की हो दया काम तुरत बन जा

अगर मुसीबत पड़े तो घबराना नहीं चाहिए ईश्वर की कृपा हो तो सब काम बन जाएंगे

तुझ सा काफ़िर मुझ सा मुसलमान

(व्यंगात्मक) तेरा जैसा है दीन मेरा जैसा दीनदार

तुझ से ख़ुदा ही समझे

लाचारी की अभिव्यक्ति, भगवान ने तुम्हें सज़ा देगा

तुझ से फिरे तो वो ख़ुदा से फिरे

कुसुम या अह्द के मौक़ा पर बोलते हैं यानी तेरे ख़िलाफ़ करूं तो गोया अपने ख़ुदा के ख़िलाफ़ करूं

तुझे और की क्या पड़ी, अपनी सँभाल

तू दूसरों के काम में अड़चन क्यूँ डालता है अपने काम से काम रख

तुझे गहरी गोर में तोपूँ

(ओ) कोसना, तो मर जाये

टुक जिया अमर हुए

क़लील ज़िंदगी का भी शुक्राना है

टुकड़े दे दे बछड़ा पाला, सींग ले कर मारन आया

कपूत संतान, कृतघ्न अर्थात उपकार को भूल जाने वाला व्यक्ति जो नेकी के बदले बदी करे

टुकड़े खाए दिन बहलाए, कपड़े फटे घर को आए

स निखटों की निसबत कहते हैं जो परदेस जा कर हाथ ख़ाली लौटे

टुकड़े माँग खाना, पूँजी गाँठ बाँधना

कहा जाता है कि बड़े लालची के बारे में

तुख़्म तासीर सोहबत असर

फ़ित्यावर सोहबत का असर ज़रूर होता है

टुक-टुक कर के मन भर खावे, तनक बेगमाँ नाम बतावे

किसी व्यक्ति में जब नाम के अनुसार गुण न हों तब भी कहते हैं

तुलसी आह ग़रीब की हरि से सही न जाय, मरी खाल की फूँक से लोहा भसम हो जाय

ईश्वर ग़रीब की आह को सहन नहीं कर सकता, मरी हुई खाल अर्थात धौंकनी की हवा लोहे को जला देती है

तुलसी ऐसे मित्र के कोट फाँद के जाए, आवत ही तो हंस मिले और चलत रहे मुरझाए

ऐसे मित्र के यहाँ तो दीवार लांघकर अर्थात सब तरह के कष्ट उठाकर जाना चाहिए जो आते ही हँसकर मिले और चलते समय दुख प्रकट करे

तुलसी जग में आय के अवगुन तज दे चार, चोरी जारी जामिनी और पराई नार

संसार में चार काम नहीं करने चाहिएँ, चोरी, अवैध संबंध, ज़मानत देना और दूसरे की पत्नी को ताकना

तुल्सी का पत्ता कौन छोटा कौन बड़ा

वहां कहते हैं जहां सब आला दर्जे के आदमी हूँ

तुम बड़ा नन्हा कातती हो

तुम बड़ी कंजूस हो, बहुत बारीकी करती हो

तुम भी कहोगी कि मुझे कोई जोरू करे

उस व्यक्ति के संबंधित कहते हैं जो अपने को बहुत बुद्धिमान समझे और जिसे अपनी बुद्धिमत्ता का घमंड हो

तुम डाल-डाल तो हम पात-पात

तुम्हारी चालों से हम ख़ूब वाक़िफ़ हैं, हम तुम्हें ख़ूब समझते हैं और तुम से कुछ ज़्यादा ही होशयार हैं

तुम गूदड़ों के ला'ल हो

बावजूद नादारी सब को अज़ीज़ हो

तुम ही बड़े बाप के बेटे सही

तुम ही बड़े दर्जे के हो

तुम जानो और तुम्हारा काम जाने

अच्छाई बुराई के तुम ज़िम्मेदार हो, नतीजे की ज़िम्मेदारी तुम पर है इस से हमें कोई सरोकार नहीं

तुम किस खेत की मूली हो

तुम्हारा क्या सामर्थ्य है, तुम्हारी वास्तविक्ता क्या है

तुम को हम से अनेक हैं हम को तुम सा एक, रवी को कंवल अनेक हैं कंवल को रवी एक

वफ़ादार पत्नी अपने पति से कहती है कि तुम्हारे लिए तो मेरे जैसी बहुत सी स्त्रियाँ हैं मगर मेरे लिए तुम एक ही हो जैसे सूरज के लिए कंवल बहुत हैं मगर कंवल के लिए सूरज एक ही है

तुम क्या क़ाज़ी हो

तुम को इस मुआमले से किया, तुम इस में दख़ल ना दो

तुम क्यों फाटे में पाँव देते हो

तुम क्यों दूसरे के झगड़े में दख़ल देते हो

तुम राज में ख़ुश , हम बाज में आनंद

हर शख़्स अपने हाल में ख़ुश है . तुम अपनी जगह ख़ुश हम अपनी जगह सुस्त हैं (बेनियाज़ी के इज़हार के मौक़ा पर बोलते हैं

तुम थूकते हो हम थूकते भी नहीं

हम को तुम से भी अधिक घृणा है, जब किसी व्यक्ति को किसी वस्तु अथवा किसी अन्य व्यक्ति से संबंधित अधिक घृणा दर्शाना हो तो कहते हैं

तुम तो 'अक़्ल के पीछे लठ लिये फिरते हो

कोई बेवक़ूफ़ी या नुक़्सान का काम करे तो कहते हैं

तुम तो जब माँ के पेट से भी नहीं निकले होगे

इस मौक़ा पर बोलते हैं जब ये जतलाना मंज़ूर हो कि ये बहुत पुरानी बात है, तुम्हारे पैदा होने से पहले की बात है

तुम तो कुछ जानते ही नहीं, औंधे मुँह दूध पीते हो

तुम तो अभी बाल-आयु में हो, बहुत भोले बनते हो, बच्चों जैसी बातें करते हो

तुम तो मुझे छेड़ोगे

यदि कोई व्यक्ति किसी से बोलने या किसी को छेड़ने के लिए तैयार नहीं तो भी उस के मन में बोलने या छेड़ने की इच्छा जाग्रत करना

तुम्हारे फ़रिश्तों को भी ख़बर नहीं

तुम्हें कुछ पता नहीं है, तुम्हें मालूम ही नहीं हुआ है

तुम्हारे ही दो-तोड़ नज़र आते हैं

तुम्ही में तो ये शक्ति या बल प्रतीत होता है

तुम्हारे कहने की बात है

ये बात तुम को मुनासिब नहीं , तुम ख़्याल ना करो , ख़िलाफ़ दानाई है

तुम्हारे मरे देस ख़ाक , हमारे मरे देस पाक

फ़िरोतनी और आजिज़ी ज़ाहिर करने को कहते हैं

तुम्हारे मरे देस पाक , हमारे मरे देस ख़ाक

शेखी भगारने के मौक़ा पर कहते हैं

तुम्हारे मुँह का उगाल हमारे पेट का आधार

ग़रीब का अमीर से कहना कि हम तो आपकी जूठन खाकर ही रहते हैं, अत्यंत विनम्रता दिखाना

तुम्हारे मुँह का उगाल, हमारे पेट का अधार

तुम्हारी थोड़ी सी इमदाद हमारे लिए बहुत है

तुम्हारे मुँह में घी शक्कर

तुम्हारा कहा पूरा हो, यथेच्छ अर्थात मंशा के मुताबिक़ बात या जवाब सुनने के मौक़े' पर कहते हैं

तुम्हारे नोते कभी अघाते हैं

तुम्हारा वाअदा कभी पूरा नहीं होता

तुम्हारे नोते कभी नहीं खाते

तुम्हारा वाअदा कभी पूरा नहीं होता

तुम्हारी बात थल की न बेड़े की

तुम्हारी बात न सूखी ज़मीन की न पानी की अर्थात बेहूदा है

तुम्हारी बात उठाई जाए न धरी जाए

तुम्हारी बात समझ में नहीं आती, तुम कोई उपयोगी बात नहीं करते

तुम्हारी बराबरी वो करे जो टाँग उठा कर मूते

जो अपनी प्रशंसा स्वयं करे उससे व्यंग अथवा परिहास्य में कहते हैं कि तुम्हारा मुक़ाबला कुत्ता ही कर सकता है

तुम्हारी एड़ी में क्या लगा है

यदि किसी व्यक्ति के मुँह से ऐसी बात निकल जाए जिससे किसी बच्चे को नज़र लग जाने का अनुमान हो, तो महिलाएँ उस व्यक्ति से कहती हैं ('एड़ी देखना' बुरी नज़र से बचने का शुभ चिन्ह माना जाता है)

तुम्हारी गोद में बैठूँ और दाढ़ी नोचूँ

जिस से फ़ायदा उठाएं उसी की जड़ें खोदीं (ऐसे मौक़ा पर बोलते हैं जब कोई शख़्स किसी से फ़ायदे उठिए या मुहब्बत जताए और इसी के नुक़्सान के दरपे रहे)

तुम्हारी जूती और तुम्हारा ही सर

तुम्हारा माल ही तुम पर ख़र्च हो रहा है

तुम्हारी ये राह हमारी वो राह

तुम्हारा हमारा कोई ताल्लुक़ नहीं, कोई पर्वा नहीं

तुनतुनी

तारों के एक साज़ का नाम, इकतारा

तुरई और कद्दू ला'नत ब-हर दो

जहाँ कोई चीज़ अच्छी न हो वहाँ कहते हैं

तुरत भलाई वो नर पावे जो धन दाता नाम लुटावे

जो ईश्वर के नाम पर ख़र्च करता है उसे तुरंत यश मिलता है

तुरत दाम महा पुन

साफ़ जवाब दे देना लगी लिपटी न रखना

तुरत दान महा कल्यान

किसी को कुछ देना हो तो तुरंत देकर छुट्टी पानी चाहिए

तुरत फ़तेह हो उस के ताईं, जिस का हामी होवे साईं

जिस का ईश्वर सहायक हो उसे तुरंत कामयाबी मिलती है

तुरत मजूरी जो फड़कावे, वह का कार तुरत हो जावे

जो मज़दूरी तुरंत अदा कर दे उस का काम जल्द होता है

तुरत फुरत हों सगरे काम, जब होवें मुट्ठी में दाम

गाँठ में पैसा हो तो हर काम जल्दी बन जाता है

तुरत-फुरत हो वो भी कार मदद करे जिस की सरकार

जिस काम में ईश्वर की सहायता हो वह जल्द हो जाता है

तुर्क हू हुए तो भी ना

तुर्क अर्थात मुसलमान भी हुए तब भी नाहीं करती है अर्थात तब भी अभीष्ट सिद्ध नहीं हुए

तुर्की के हाथ पड़ा ताज़ी के कान हुए

रुक : तुर्की पट्टे ताज़ी काँपे

तुर्की पिटे ताज़ी काँपे

एक को दंड मिलने से सब डर जाते हैं

तू आन का तो मैं बान का , तू सूई तो मैं तागा , तू मिर्ज़ा तो मैं ख़ान का

यानी में हर हालत में तुझ से बढ़ चढ़ ही के रहूँगा

तू भी रानी, मैं भी रानी , कौन भरे पन घट पर पानी

जब सब के सब किसी काम से जी चुराईं या इस काम को अपने मरतबे से गिरा हुआ ख़्याल करें तो इस मौक़ा पर ख़ुसूसन औरतें बोलती हैं

तू चाह मेरी जाई को, मैं चाहूँ तेरे खाट के पाए को

तुम हमारे साथ अच्छा व्यवहार करोगे तो हम भी तुम्हारे साथ उतना ही अच्छा व्यवहार करेंगे

तू छूई कि मैं मूई

(व्यंग्य के रूप में) महिलाएँ किसी के कृत्रिम नाज़ुक स्वभाव को व्यक्त करने के अवसर पर कहती हैं

तू डाल डाल तो मैं पात पात

रुक: तुम डाल डाल तो में पात पात

तू देवरानी मैं जिठानी , तेरे आग न मेरे पानी

(ओ) दोनों मुफ़लिस और कंगाल हैं

तू गधी कुम्हार की तुझे राम से क्या काम

अपनी हैसियत को देखो, अपने जामे में रहो, जैसी हैसियत है ऐसे ही बात करो

तू कहे सो सच है बूढ़ी तू कहे सो सच

जब कोई गप मारे तो हँसी में इस कहावत का प्रयोग होता है

तू कर अपना काम तबलिया भूसन दे

दूसरे लोग कुछ भी कहें अपने काम को नहीं रोकना चाहिए

तू खोल मेरा मक्ना में घर सँभालूँ अपना

(ओ) जब नई दुल्हन घर के कामों में दख़ल देने लगे तो सास कहती है

तू क्यों जलता है

तू क्यों हसद करता है या बुरा मानता है

तू मेरा बाला खिला, मैं तेरी खिचड़ी खाउं

अहमक़ कर दम दे कर राज़ी कर लेते हैं

तू मेरा लड़का खिला, मैं तेरी खिचड़ी पकाऊँ

तू मेरा काम कर मैं तेरा काम करूँ

तू मेरे बाले को चाहे तो मैं तेरे बूढ़े को चाहूँ

अगर तुम मेरा भला करोगे तो में तुम्हारा भला करूँगा

तू मुझ को तो मैं तुझ को

तू मेरा साथ देगा तो मैं तेरा साथ दूँगा, तू मुझ से प्रेम करेगा तो मैं तुझ से प्रेम करूँगी

तू ने की राम-जनी, मैं ने किया राम-जना

स्त्री का अपने दुश्चरित्र पति से ग़ुस्से में कहना कि तुम ने अगर स्त्री रख ली तो मैं ने भी आदमी रख लिया है

तू तेली का बैल तुझे क्या सेर, लगा रह घानी से

जो व्यक्ति हर समय काम में लगा रहे उसे व्यंग के रूप में कहते हैं

तूलुत्तजारिब ज़ियादत-उल-'अक़्ल

ज़्यादा तजुर्बा से अक़ल बढ़ती है

टूम बइयर की पत बढ़ावे, टूम तझे धनवंत कहावे

स्त्री का सम्मान गहने से होता है और आदमी गहने की वजह से धनवान कहलाता है

टूम बिना बैर है , ऐसी बिन पानी के खेती जैसी

बगै़र गहने के औरत ऐसी जैसी खेती बला पानी

टूम कपड़े जिस घर पावें, ऐक छोड़ दस बैर आवें

अमीर आदमी चाहे तो जितनी शादियाँ मर्ज़ी से कर ले

तूर तेल तापना, जाड़ माँस हो आपना

अगर रवी तेल और इंधन हो तो जाड़ा बड़े आराम से गुज़र जाता है

टूटा बासन कसेरे के सर

निकम्मी चीज़ मालिक को फ़ौरन दे दी जाती है

टूटा तेली कमर में अधेली

﴿तीलियों की ग़ुर्बत पर तंज़ के तौर पर> मुराद : बहुत ग़रीब है, पास कुछ भी नहीं है

टूटी का क्या जोड़ना गाँठ पड़े और न रहे

जहां एक दफ़ा शुक्र रणजी हो जाये, फिर पहली सी दोस्ती नहीं होती

टूटी की क्या बूटी

बहुत इलाज करने के बाद भी जब कोई अच्छा नहीं होता तब कहते हैं

टूटी बाँह गल जंद्रे

जब बाँह टूट जाती है उसको पट्टी बाँध कर गले में लटका लेते हैं। उस पट्टी को जिसमें बाँह डालते हैं, ''गल जंद्रा'' कहते हैं)

टूटी है तो किसी से जुड़ी नहीं और जुड़ी है तो कोई तोड़ सकता नहीं

बीमार आदमी को सांत्वना देने के लिए कहते हैं

टूटी कमान में दोनों को डर होता है

तीर चलाने वाला जानता है कि निशाना नहीं लगेगा और दुश्मन तीर से डरता है, अदना दुश्मन का भी ख़ौफ़ ख़्वाही नज्जो एही होता है

तूती की आवाज़ नक़्क़ार ख़ाने में काैन सुनता है

बड़ों के सामने छोटों या अदना आदमीयों की कोई समाअत नहीं, शोर-ओ-शग़ब, हंगामे के मजमे में किसी कमज़ोर या तन्हा आदमी की बात पर कोई कान नहीं धर्ता

तूती की आवाज़ नक़्क़ार ख़ाने में कोई नहीं सुनता

बहुत शोर-ओ-गुल में कमज़ोर आवाज़ को कोई नहीं सुन सकता, बड़े आदमीयों की राय के सामने छोटे आदमी की राय पर कोई तवज्जा नहीं देता है , बहुत से आदमीयों के आगे एक आदमी की नहीं चलती

तूती की आवाज़ नक़्क़ार-ख़ाने में कौन सुनता है

बहुत हंगामे या चीख़-पुकार में कमज़ोर आवाज़ को कोई नहीं सुन सकता

टूटी की बूटी बता दो हकीम-जी

जब ला-इलाज अर्थात गंभीर बीमारी या बिगड़े हुए काम का उपाय पूछा जाए तो उस समय कहते हैं

टूटी की बूटी नहीं

मौत का इलाज नहीं है

टूटी फूटी मूँगरी कुम्हार के बर्तनों को काफ़ी है

ऐसे मौक़ा पर बालते हैं जब ये कहना मक़सूद हो कि इतने काम के वास्ते ये भी काफ़ी है या ज़बरदस्त बावस्फ़ नातवानी भी ग़रीब आज़ादी कर सकता है

तूती रा बा ज़ाग़े दर क़फ़स करदंद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) तूती और को्वे को एक जगह बंद कर दिया है , (कनाएन) ख़ूबसूरत की बदसूरत से शादी कर दी है

तूती रा बा ज़ाग़े हम क़फ़स करदंद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) तूती और को्वे को एक जगह बंद कर दिया है , (कनाएन) ख़ूबसूरत की बदसूरत से शादी कर दी है

टूटी टाँग पाँव न हाथ, कहे चलूँ घोड़ों के साथ

यह कहावत उस मूर्ख के संबंध में कहते हैं जो ऐसे काम में हाथ डाले जो बड़े बड़ों से न हो सके

तूतियाँ हाथ पसारती हैं

शीरीं ज़बानी और ख़ुशकलामी की तारीफ़ में बोलते हैं

संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .

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