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पड़ी

चुपचाप पड़े या सोये रहने की अवस्था या भाव

पड़ी है

धुन है, चाहत है, चिंता है

पड़ी करना

किसा स्थान पर उतरना, ठरना, पड़ाव करना

पड़ी के गवाह

वह गवाह जो किसी विशेष भुमि-मुक़दमे की बाबत गवाही दें या नंबरदार, ज़ेलदार, खेवटदार होते हैं जो विवादाग्रस्त भुमि के क़रीब रहते हैं

पड़ी हुई आवाज़

۔ وہ آواز جو گلے سے صاف صاف نہ نکلے۔

गिरी-पड़ी

बे-हक़ीक़त, कम हैसियत, तुच्छ, नीच, ज़मीन पर गिरी और पड़ी हुई चीज़

मुँह-पड़ी

सभी लोगों में प्रसिद्ध एवं प्रख्यात, बहुत ही चर्चित एवं मशहूर

खड़ी-पड़ी

खड़े और बैठे, हर परिस्थिति में, हर दशा में, (लाक्षणिक) व्याकुल, परेशान, बेचैन

कान-पड़ी

سنی ہوئی ، علم میں آئی ہوئی ، جانی بوجھی ،(بات یا آواز) .

कीड़े-पड़ी

(तिरस्कार से) ख़राब, गंदी, असभ्य (औरत)

कूड़े-पड़ी

कूड़े पर पड़ी हुई, (लाक्षणिक) हीन, गई-गुज़री, कमतर

लोथ पड़ी होना

लाश ज़मीन पर गिरी हुई होना

अपनी पड़ी है

अपनी ही फ़िक्र और चिंता है, स्व चिंतन और स्वार्थी है

रात पड़ी है

बहुत रात बाक़ी है

'उम्र पड़ी है

बहुत जीवन बाक़ी है, बहुत समय पड़ा है, बहुत समय बाक़ी है

जान पड़ी होना

(किसी अमर की) फ़िक्र होना, ध्यान लगा रहना (में के साथ)

ज़रूरत पड़ी रहना

ज़रुरत अधूरी रहना

मारी पड़ी होना

बदनाम होना, रुसवा होना

रूह पड़ी होना

(किसी शख़्स, चीज़ या मुआमले की तरफ़) ख़्याल लगा होना, (किसी का) हरवक़त ध्यान आना

क़यामत पड़ी होना

कुहराम बरपा होना, नाला-ओ-फ़र्याद का शोर होना

अड़या पड़ी रहना

बेसहारा होना, खाने-पीने को कुछ न होना

ज़मीन पड़ी रखना

कृषि योग्य और खेती के लाभप्रद भुमि को उपयोग में न लाना, डाले और छोड़े रखना

कानों पड़ी बात

सुनी हुई बात, वो बात जो कभी सुनी हो और याद हो

मय्यत पड़ी होना

लाश पड़ी होना, कहीं लाश रखी होना, मुर्दे का ज़मीन पर पड़ा होना

आई गई पार पड़ी

जो बात हो चुकी अब उस का चर्चा करना बेकार है, जो हो चुका सो हो चुका उसकी चिंता व्यर्थ है

रोटी पड़ी मुँह में ज़ात पड़ी गुह में

रोओ पिया किसी तरह हाथ आ जाये कुछ पर्वा नहीं

चिकने घड़े पर बूँद पड़ी और फिसल पड़ी

रुक : चिकना घड़ा बोन पड़ी अलख

गाँव में पड़ी मरी , अपनी अपनी सब को पड़ी

मुसीबत के वक़्त कोई किसी की मदद नहीं करता, सब को अपनी अपनी पड़ी होती है

ज़ात पड़ी खोह में और रोटी पड़ी मुँह में

जो व्यक्ति रुपए के आगे शालीनता का मुल्य न जाने

क्या जल्दी पड़ी है

देर होने में कुछ नुक़्सान नहीं, इतनी उजलत की क्या ज़रूरत है

क़दमों से पड़ी रहना

मुतीअ रहना

जूती को ग़रज़ पड़ी

रुक : जूती को क्या ग़रज़ (है)

तले पड़ी का मोल क्या

जो वस्तु अपने अधिकार में होती है उस का कोई मूल्य नहीं होता

जैसी पड़ी वैसी सही

हर तरह की मुसबीयत बुरद शत कर ली , जो गुज़रे बर्दाश्त करे

गले पड़ी बजाए सिद्ध

जब सर पर आ जाए तो करना ही पड़ता है, कष्ट आए तो झेलनी ही पड़ता है

नहाई धोई फिसल पड़ी

तैय्यार हो कर रह जाने के मौके़ पर कहते हैं

कूएँ में भंग पड़ी

मदहोश होना, सब नशे में धुत हो गए, सब बेवक़ूफ़ होगए

कूए में भंग पड़ी

सब मस्त और मूर्ख हैं

मारी-मारी पड़ी फिरना

धक्के खाती फिरना, ठोकरें खाती फिरना, सरगरदां होना

राजा नल पियो बिपता पड़ी भूनी मछली जल में पड़ी

अपने काम बिगड़ जाने के वक़्त कहते हैं, बुरे दिन आएं तो हर नाम में नुकसान होता है कहते हैं कि जब राजा नल बनबास में थे तो उन की रानी ने एक दिन मछली भूओनी चूँकि उस को राख लग गई थी दरिया पर जा कर धोने लगी तो मछली ज़िंदा हो कर तैरने लगी

राजा नल पर बिपता पड़ी, भूनी मछली जल में पड़ी

बुरे दिन आएँ तो हर नाम में हानि होती है

चादर-ए-ग़फ़लत पड़ी होना

बिलकुल लापरवाह होना, एकदम असूचित होना, कुछ मालूम न होना

आस पास बरसे दिल्ली पड़ी तरसे

جس سے دوسروں کو فائدہ ہو اور اپنے محروم رہیں، اس کی نسبت بولتے ہیں

कान पड़ी काम आती है

सुनी सुनाई बात कभी न कभी काम आ ही जाती है, सुनी हुई अच्छी बात किसी वक़्त याद आ सकती है

भूईं पड़ी साह की दव्वानी

अमीर आदमी जो चाहे दावा करे सब बजा है

बात कान में पड़ी रहना

मामले का ध्यान में रहना, बात याद रहना

कान पड़ी सदा न आना

रुक : कान पड़ी आवाज़ ना आना

भूनी मछ्ली जल में पड़ी

का बना बनाया बिगड़ गया

गिरी पड़ी के यार मुकंदा

लावारिस चीज़ को जो चाहे ले लेना है, जिस चीज़ का कोई मालिक ना हूए कोई भी ले लेता है

नमाज़ें बख़्शवाते उल्टे रोज़े गले पड़ी

रुक : नमाज़ छुड़ाने गए थे अलख

देनी पड़ी बुनाई और घटा बतावे सूत

जब बुनवाई देने का समय आता है तो कहता है कि सूत घट गया, देने के समय मनुष्य बहुत बहाने बनाता है

पेट में पड़ी बूँद नाम रखा महमूद

काम के प्रारंभ ही पर उस की प्रशंसा करना, काम हुआ नहीं ख़ुशी पहले ही मनाना आरंभ कर दिया

मेरी जूती को ग़रज़ पड़ी है

रुक : मेरी जूती से जो फ़सीह है

गरजी तो डरी पड़ी तो सही

मुसीबत की दहश्त, मुसीबत बर्दाश्त करने से सख़्त तर होती है, जब तक कोई मुसीबत ना आए इस का डर होता है, जब आ जाये तो इंसान बर्दाश्त कर लेता है

गरजी तो डोली पड़ी तो सही

मुसीबत की दहश्त, मुसीबत बर्दाश्त करने से सख़्त तर होती है, जब तक कोई मुसीबत ना आए इस का डर होता है, जब आ जाये तो इंसान बर्दाश्त कर लेता है

अड़ी दड़ी क़ाज़ी के सर पड़ी

मुसीबत किस की किस को उठाना पड़ा

कान पड़ी आवाज़ सुनी न जाना

बहुत शोर-ओ-गुल मचना, हंगामा बपा होना, हुल्लड़ बाज़ी में ना सन सकता

कान पड़ी बात सुनाई न देना

बहुत शोर-ओ-गुल मचना, हंगामा बपा होना, हुल्लड़ बाज़ी में ना सन सकता

रोज़े छुड़ाने गए नमाज़ गले पड़ी

जब एक आफ़त से बचने की तदबीर या फ़िक्र में एक दूसरी आफ़त सर पड़ जाये तो बोलते हैं

कड़की तो डरी पड़ी तो सहनी

جب تک مصبیت پڑتی نہیں اس کے خیال سے آدمی بہت ڈرتا ہے اور جب پڑ جاتی ہے تو سہتا ہے.

हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में पड़ी-बोली के अर्थदेखिए

पड़ी-बोली

pa.Dii-boliiپڑی بولی

वज़्न : 1222

मूल शब्द: पड़ी

English meaning of pa.Dii-bolii

Noun, Feminine

  • some of the Urdu dialects of northern India

پڑی بولی کے اردو معانی

  • Roman
  • Urdu

اسم، مؤنث

  • شمالی ہند کی بعض بولیوں کا لہجے کی وجہ سے نام (کھڑی بولی کے بالمقابل، پڑی

Urdu meaning of pa.Dii-bolii

  • Roman
  • Urdu

  • shumaalii hind kii baaaz boliyo.n ka lahje kii vajah se naam (kha.Dii bolii ke bilmuqaabil, pa.Dii

पड़ी-बोली के अंत्यानुप्रास शब्द

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पड़ी

चुपचाप पड़े या सोये रहने की अवस्था या भाव

पड़ी है

धुन है, चाहत है, चिंता है

पड़ी करना

किसा स्थान पर उतरना, ठरना, पड़ाव करना

पड़ी के गवाह

वह गवाह जो किसी विशेष भुमि-मुक़दमे की बाबत गवाही दें या नंबरदार, ज़ेलदार, खेवटदार होते हैं जो विवादाग्रस्त भुमि के क़रीब रहते हैं

पड़ी हुई आवाज़

۔ وہ آواز جو گلے سے صاف صاف نہ نکلے۔

गिरी-पड़ी

बे-हक़ीक़त, कम हैसियत, तुच्छ, नीच, ज़मीन पर गिरी और पड़ी हुई चीज़

मुँह-पड़ी

सभी लोगों में प्रसिद्ध एवं प्रख्यात, बहुत ही चर्चित एवं मशहूर

खड़ी-पड़ी

खड़े और बैठे, हर परिस्थिति में, हर दशा में, (लाक्षणिक) व्याकुल, परेशान, बेचैन

कान-पड़ी

سنی ہوئی ، علم میں آئی ہوئی ، جانی بوجھی ،(بات یا آواز) .

कीड़े-पड़ी

(तिरस्कार से) ख़राब, गंदी, असभ्य (औरत)

कूड़े-पड़ी

कूड़े पर पड़ी हुई, (लाक्षणिक) हीन, गई-गुज़री, कमतर

लोथ पड़ी होना

लाश ज़मीन पर गिरी हुई होना

अपनी पड़ी है

अपनी ही फ़िक्र और चिंता है, स्व चिंतन और स्वार्थी है

रात पड़ी है

बहुत रात बाक़ी है

'उम्र पड़ी है

बहुत जीवन बाक़ी है, बहुत समय पड़ा है, बहुत समय बाक़ी है

जान पड़ी होना

(किसी अमर की) फ़िक्र होना, ध्यान लगा रहना (में के साथ)

ज़रूरत पड़ी रहना

ज़रुरत अधूरी रहना

मारी पड़ी होना

बदनाम होना, रुसवा होना

रूह पड़ी होना

(किसी शख़्स, चीज़ या मुआमले की तरफ़) ख़्याल लगा होना, (किसी का) हरवक़त ध्यान आना

क़यामत पड़ी होना

कुहराम बरपा होना, नाला-ओ-फ़र्याद का शोर होना

अड़या पड़ी रहना

बेसहारा होना, खाने-पीने को कुछ न होना

ज़मीन पड़ी रखना

कृषि योग्य और खेती के लाभप्रद भुमि को उपयोग में न लाना, डाले और छोड़े रखना

कानों पड़ी बात

सुनी हुई बात, वो बात जो कभी सुनी हो और याद हो

मय्यत पड़ी होना

लाश पड़ी होना, कहीं लाश रखी होना, मुर्दे का ज़मीन पर पड़ा होना

आई गई पार पड़ी

जो बात हो चुकी अब उस का चर्चा करना बेकार है, जो हो चुका सो हो चुका उसकी चिंता व्यर्थ है

रोटी पड़ी मुँह में ज़ात पड़ी गुह में

रोओ पिया किसी तरह हाथ आ जाये कुछ पर्वा नहीं

चिकने घड़े पर बूँद पड़ी और फिसल पड़ी

रुक : चिकना घड़ा बोन पड़ी अलख

गाँव में पड़ी मरी , अपनी अपनी सब को पड़ी

मुसीबत के वक़्त कोई किसी की मदद नहीं करता, सब को अपनी अपनी पड़ी होती है

ज़ात पड़ी खोह में और रोटी पड़ी मुँह में

जो व्यक्ति रुपए के आगे शालीनता का मुल्य न जाने

क्या जल्दी पड़ी है

देर होने में कुछ नुक़्सान नहीं, इतनी उजलत की क्या ज़रूरत है

क़दमों से पड़ी रहना

मुतीअ रहना

जूती को ग़रज़ पड़ी

रुक : जूती को क्या ग़रज़ (है)

तले पड़ी का मोल क्या

जो वस्तु अपने अधिकार में होती है उस का कोई मूल्य नहीं होता

जैसी पड़ी वैसी सही

हर तरह की मुसबीयत बुरद शत कर ली , जो गुज़रे बर्दाश्त करे

गले पड़ी बजाए सिद्ध

जब सर पर आ जाए तो करना ही पड़ता है, कष्ट आए तो झेलनी ही पड़ता है

नहाई धोई फिसल पड़ी

तैय्यार हो कर रह जाने के मौके़ पर कहते हैं

कूएँ में भंग पड़ी

मदहोश होना, सब नशे में धुत हो गए, सब बेवक़ूफ़ होगए

कूए में भंग पड़ी

सब मस्त और मूर्ख हैं

मारी-मारी पड़ी फिरना

धक्के खाती फिरना, ठोकरें खाती फिरना, सरगरदां होना

राजा नल पियो बिपता पड़ी भूनी मछली जल में पड़ी

अपने काम बिगड़ जाने के वक़्त कहते हैं, बुरे दिन आएं तो हर नाम में नुकसान होता है कहते हैं कि जब राजा नल बनबास में थे तो उन की रानी ने एक दिन मछली भूओनी चूँकि उस को राख लग गई थी दरिया पर जा कर धोने लगी तो मछली ज़िंदा हो कर तैरने लगी

राजा नल पर बिपता पड़ी, भूनी मछली जल में पड़ी

बुरे दिन आएँ तो हर नाम में हानि होती है

चादर-ए-ग़फ़लत पड़ी होना

बिलकुल लापरवाह होना, एकदम असूचित होना, कुछ मालूम न होना

आस पास बरसे दिल्ली पड़ी तरसे

جس سے دوسروں کو فائدہ ہو اور اپنے محروم رہیں، اس کی نسبت بولتے ہیں

कान पड़ी काम आती है

सुनी सुनाई बात कभी न कभी काम आ ही जाती है, सुनी हुई अच्छी बात किसी वक़्त याद आ सकती है

भूईं पड़ी साह की दव्वानी

अमीर आदमी जो चाहे दावा करे सब बजा है

बात कान में पड़ी रहना

मामले का ध्यान में रहना, बात याद रहना

कान पड़ी सदा न आना

रुक : कान पड़ी आवाज़ ना आना

भूनी मछ्ली जल में पड़ी

का बना बनाया बिगड़ गया

गिरी पड़ी के यार मुकंदा

लावारिस चीज़ को जो चाहे ले लेना है, जिस चीज़ का कोई मालिक ना हूए कोई भी ले लेता है

नमाज़ें बख़्शवाते उल्टे रोज़े गले पड़ी

रुक : नमाज़ छुड़ाने गए थे अलख

देनी पड़ी बुनाई और घटा बतावे सूत

जब बुनवाई देने का समय आता है तो कहता है कि सूत घट गया, देने के समय मनुष्य बहुत बहाने बनाता है

पेट में पड़ी बूँद नाम रखा महमूद

काम के प्रारंभ ही पर उस की प्रशंसा करना, काम हुआ नहीं ख़ुशी पहले ही मनाना आरंभ कर दिया

मेरी जूती को ग़रज़ पड़ी है

रुक : मेरी जूती से जो फ़सीह है

गरजी तो डरी पड़ी तो सही

मुसीबत की दहश्त, मुसीबत बर्दाश्त करने से सख़्त तर होती है, जब तक कोई मुसीबत ना आए इस का डर होता है, जब आ जाये तो इंसान बर्दाश्त कर लेता है

गरजी तो डोली पड़ी तो सही

मुसीबत की दहश्त, मुसीबत बर्दाश्त करने से सख़्त तर होती है, जब तक कोई मुसीबत ना आए इस का डर होता है, जब आ जाये तो इंसान बर्दाश्त कर लेता है

अड़ी दड़ी क़ाज़ी के सर पड़ी

मुसीबत किस की किस को उठाना पड़ा

कान पड़ी आवाज़ सुनी न जाना

बहुत शोर-ओ-गुल मचना, हंगामा बपा होना, हुल्लड़ बाज़ी में ना सन सकता

कान पड़ी बात सुनाई न देना

बहुत शोर-ओ-गुल मचना, हंगामा बपा होना, हुल्लड़ बाज़ी में ना सन सकता

रोज़े छुड़ाने गए नमाज़ गले पड़ी

जब एक आफ़त से बचने की तदबीर या फ़िक्र में एक दूसरी आफ़त सर पड़ जाये तो बोलते हैं

कड़की तो डरी पड़ी तो सहनी

جب تک مصبیت پڑتی نہیں اس کے خیال سے آدمی بہت ڈرتا ہے اور جب پڑ جاتی ہے تو سہتا ہے.

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