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खिस्यानी बिल्ली खम्बा नोचे
जिसे क्रोध आ रहा हो वह अपनी खीझ या क्रोध दूसरों पर उतारता है, लाचारी में आदमी दूसरों पर क्रोध करता है, लज्जित व्यक्ति दूसरों पर अपनी लज्जा उतारता है, निर्बल की खीझ
कोशिश
कोई काम करने के लिए विशेष रूप से किया जानेवाला प्रयत्न, मेहनत, दौड़ धूप, प्रयत्न, प्रयास, चेष्टा, उद्योग, श्रम, उद्यम, उपाय, परिश्रम
आठ बार नौ त्योहार
सुख-सुविधा और आराम का शौक़ या लगन ऐसा बढ़ा हुआ है कि युग और समय उसको अल्प व्यय नहीं करने देता
चमनिस्तान
ऐसा बाग़ जहाँ फूल ही फूल हों, ऐसी जगह जहाँ दूर तक फूल ही फूल और हरा भरा नज़र आए, वाटिका, चमन, बाग़
दादरा
संगीत में एक प्रकार का चलता गाना (पक्के या शास्त्रीय गानों से भिन्न), एक प्रकार का गान, एक ताल
मुहावरे
यह भारतीय मुहावरों का एक शब्दकोश है, जो रेख्ता फ़ाउंडेशन की एक पहल है। इसमें सदियों से प्रचलित पारंपरिक कहावतों और मुहावरों का एक मूल्यवान संग्रह शामिल है, जो भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति, समाज और दैनिक जीवन को प्रतिबिंबित करता है। यह शब्दकोश आलोचकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा भाषा और साहित्य के प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और विश्वसनीय संदर्भ स्रोत के रूप में कार्य करता है।
प्रमुख मुहावरे
असील घोड़े को चाबुक की ज़रूरत नहीं
अर्थ
जिस तरह अच्छे घोड़े को मारने की ज़रूरत नहीं पड़ती, इसी तरह अच्छे लड़के को पढ़ने के लिए अच्छे आदमी को काम के लिए डाँट-डपट करने की ज़रूरत नहीं पड़ती
अनोखे गाँव ऊँट आया तो लोगों ने कहा परमेसुर आया
अर्थ
अज्ञानी हर अनोखी वस्तु से बहुत प्रभावित होते हैं
मुहावरों की सूची
संबंधित परिणाम
ओढ़ ली लोई तो क्या करेगा कोई
जब निर्लज्जता अपना ली तो फिर किस का डर
ओढ़ी चादर हुई बराबर, मैं भी शाह की ख़ाला हूँ
थोड़ी सी जमा-पूँजी और सामर्थ्य पर घमंड, थोड़ी आर्थिक सामर्थ्य पर इतराना
ओढ़नी चादर हुई बराबर, मैं भी शाह की ख़ाला हूँ
बहुत शेख़ी मारने वाले के लिए कहते हैं
ओढ़नी की बनास लगी
औरत का ग़ुलाम है
ओछा बर्तन उबलता है
कम भरा हुआ बर्तन छलकता है, नीच को बड़ी जल्दी हर बात का घमंड हो जाता है
ओछे के बैल गिरे
ऐसी घटना जिसकी ओर किसी का ध्यान नहीं जाता
ओछे के घर खाना, जनम जनम का ता'ना
ओछे आदमी के घर कभी खाने नहीं जाना चाहिए क्यूँकि वह बात-बात में उसकी याद दिलाएगा अर्थात जताता रहेगा
ओछे के घर तीतर बाहर बाँधूँ कि भीतर
रुक : उत्तर के घर तीतर बाहर बांधों कि भीतर
ओछे के साथ एहसान करना ऐसा जैसा बालू में मूतना
ओछे के साथ एहसान करना बिल्कुल व्यर्थ होता है क्योंकि वह उसका बदला चुकाना नहीं जानता
ओछे की पीत बालू की भीत
तुच्छ आदमी का प्यार और रेत की दीवार बराबर होता है, न उसमें स्थिरता न उसमें पायदारी
ओछे की प्रीत , कटारी का मरना , बालू की भीत अटारी का चढ़ना
कमज़र्फ़ की दोस्ती में सरासर नुक़्सान
ओछे ने कटोरा पानी पाया पी पी पेट फुलाया
कमज़र्फ़ को जब कोई नेअमत मिलती है तो वो ख़ुदनुमाई के लिए इस को जा बेजा इस्तिमाल करके अज़ाब में पड़ जाता है
ओछे संग बैठ के सगरों की पत जाए
पस्त या कमज़र्फ़ वग़ैरा की सोहबत इख़तियार करने से पूरे घराने की बदनामी होती है
ओछे संग न बैठिए ओछा बुरी बला, पल माँ हो घी खिचड़ी पल माँ बिसैर ढाल
कमज़र्फ़ और छिछोरे से दोस्ती नहीं करनी चाहिए कभी तो घुल मिल रहे और कभी ज़हरीले साँप का काम करे
ओछे से ख़ुदा काम न डाले
ओछे या कमीने का आभारी न होना पड़े, भगवान ओछे या कमीने से बचाए
ओछी पूँजी ख़सम को खाए
थोड़ी पूँजी से व्यापार करने से असल भी जाता रहता है या कम पूँजी से व्यापार करने पर हमेशा हानि होती है
ओझ भरे न रोग झड़े
न अधिक खाओ न बीमार हो
ओझ फिरे न रोग झड़े
न पूरा पेट भरे न रोग दूर हो, न मन की इच्छाएँ कभी पूरी हों और न चित्त को शांति मिले
ओझड़ी भुजका गई सास कहे बहू खा गई
नाहक़ का इल्ज़ाम सर थोप दिया गया
ओखल सर दिया तो धमकों से क्या डर
जब ख़ुद को ख़तरे में डाल दिया फिर नताइज की क्या फ़िक्र, जब दानिस्ता ख़तरा मूल लिया तो पेश आने वाले मसाइब की क्या पर्वा ('दिया' और 'डर' की जगह इस मफ़हूम के दीगर अलफ़ाज़ भी मुस्तामल हैं)
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